24/08/2026
Education tech
हौसले अगर बुलंद हों और आंखों में कुछ कर गुजरने का विधिक सपना हो, तो समाज की रूढ़िवादिता और विपरीत परिस्थितियां भी रास्ता छोड़ देती हैं। आज हम आपको रूबरू कराने जा रहे हैं सुहागनगरी की एक ऐसी ही विधिक प्रहरी और समाजसेविका की संघर्षगाथा से, जिसने घूंघट और चूड़ी कारखाने की चहारदीवारी से निकलकर न सिर्फ अपनी तकदीर बदली, बल्कि आज सैकड़ों गरीब बच्चों और लाचार महिलाओं के लिए 'उम्मीद की नई किरण' बन चुकी हैं।
🛑 भरतपुर से फिरोजाबाद: बाल विवाह और अशिक्षा के बीच संघर्ष की शुरुआत
इस प्रेरणादायक सफर की शुरुआत 15 जुलाई 1990 को राजस्थान के भरतपुर में एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्म के साथ हुई थी। उन्होंने अपनी कक्षा 8वीं तक की शुरुआती शिक्षा भरतपुर में ही प्राप्त की, लेकिन इसके बाद बेहद कम उम्र में ही उनका विवाह फिरोजाबाद में कर दिया गया।
शादी के बाद जब वह फिरोजाबाद आईं, तो स्थितियां बेहद चुनौतीपूर्ण थीं। ससुराल में न तो कोई शिक्षित था और न ही कोई अपने बुनियादी विधिक व नागरिक अधिकारों से परिचित था। लेकिन उनके सपने बहुत बड़े थे।
🏭 चूड़ी कारखाने में मजदूरी से लेकर कॉलेज तक का सफर
ससुराल के माहौल में अपने सपनों को जिंदा रखने के लिए उन्होंने सबसे पहले चूड़ी जुड़ाई और मजदूरी का काम शुरू किया, ताकि थोड़ी आमदनी हो सके।
3 वर्षों का कड़ा संघर्ष: उन्होंने लगातार तीन वर्षों तक चूड़ी के काम में हाड़-तोड़ संघर्ष किया और अपनी आगे की पढ़ाई जारी रखने के लिए एक-एक पैसा एकत्रित किया।
तानों के बीच स्कूल में नौकरी: जब उन्होंने पढ़ने और बाहर निकलने की इच्छा जताई, तो उन्हें परिवार के विरोध और समाज के तानों का सामना करना पड़ा। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने एक स्कूल में छोटी सी नौकरी ज्वाइन की और वहीं नौकरी के साथ-साथ अपनी पढ़ाई जारी रखते हुए 10वीं और फिर 12वीं की परीक्षा शानदार अंकों से उत्तीर्ण की।
📚 जब खुद संभलीं, तो दूसरों की बैसाखी बनीं; झुग्गियों में जलाई शिक्षा की अलख
अपनी पढ़ाई पूरी करने के साथ-साथ उन्होंने एक विधिक सामाजिक दायित्व निभाया। उनके आसपास जो गरीब बच्चे शिक्षा का 'अ' भी नहीं जानते थे, उन्होंने उनके परिजनों को जागरूक किया।
5 बच्चों से 40 बच्चों तक का सफर: शुरुआत उन्होंने सिर्फ 5 गरीब बच्चों को पढ़ाने से की थी, जो धीरे-धीरे एक कारवां बन गया और आज वह 30 से 40 बच्चों को निशुल्क शिक्षा देने का पुनीत कार्य कर रही हैं।
एक गरीब लड़की को बनाया आत्मनिर्भर: पड़ोस की ही एक अत्यंत निर्धन लड़की को उन्होंने खुद पढ़ाया, उसका 8वीं, 10वीं और 12वीं में एडमिशन कराया। आज उनके सहयोग से वह लड़की पैरों पर खड़ी होकर एक प्राइवेट हॉस्पिटल में मरीजों की देखभाल (नर्सिंग/विधिक मेडिकल स्टाफ) कर रही है। इसी तरह उन्होंने कई अन्य बेटियों को भी आत्मनिर्भर बनाया। इस दौरान उन्होंने अपनी बीएससी (B.Sc) की डिग्री भी पूरी की।
⚖️ NGO से लेकर PLV (पैरा लीगल वालंटियर) बनने तक का विधिक सफर
अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने समाज हित में कार्य करने के लिए कई एनजीओ (NGO) के साथ मिलकर काम किया। उनके इसी विधिक जज्बे और सामाजिक सरोकार को देखते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा उनका चयन PLV (पैरा लीगल वालंटियर) के रूप में किया गया।
आज वह एक अधिकृत विधिक प्रहरी (PLV) के रूप में गांव-गांव जाकर विधिक साक्षरता शिविर लगाती हैं, ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाती हैं और एक कुशल मध्यस्थ (Mediator) के रूप में टूटते हुए कई परिवारों को आपसी विधिक समझौते से बचाकर दोबारा बसाने का ऐतिहासिक कार्य कर रही हैं।
Firozabad Firozabad City Sapna Foundation Ministry of Education Ayush Patel Abhishek Sharma Abhishek Sharma