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06/05/2026

बंगाल चुनाव के रिजल्ट के बाद जो वीडियो और बयान आ रहे हैं सो आ ही रहे हैं..
लेकिन, बंगाल चुनाव ने अब ये बात पूरी तरह स्थापित कर दी है कि.... भारत के किसी भी कोने में मुसरिम निर्णायक स्थिति में नहीं है और भारत के हर प्रान्त में अभी तक हिन्दू ही निर्णायक हैं.

इसका मतलब ये हुआ कि... आजादी से लेकर आजतक जो हव्वा फैलाया गया था कि बिना मुसरिम सपोर्ट के कोई पार्टी जीत ही नहीं सकती है..
वो महज एक अफवाह थी जिसका सच्चाई से कुछ लेना देना नहीं था.

हालाँकि, ये स्थापित सत्य है कि मुसरिम समुदाय भाजपा को वोट नहीं करती है फिर भी इस बार बंगाल चुनाव में उत्तर 24 परगना और दक्षिण परगना के मुर्शिदाबाद और मालदा जैसे एरिया में जहाँ मुसरिम आबादी 50 से 75% तक है वहाँ भी भाजपा 14 सीटें निकाल लाई जिसमें से मुर्शिदाबाद जिले से 8 और मालदा जिले से 6 आए.

ध्यान रहे कि... मुर्शिदाबाद जिले में कटेशर आबादी 65-70% है जबकि मालदा जिले में कटेशर आबादी 50-55% है.

इसीलिए, पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा को उन इलाकों से एक भी सीट नहीं मिल पाई थी जबकि इस बार 14 सीटें मिली.

अब ये चमत्कार कैसे हुआ... वो राज है और सार्वजनिक पटल पर बताने लायक नहीं है.
लेकिन, वो रिजल्ट ही क्या जिसमें ऐसे चमत्कार न हों.

खैर, अभी बंगाल, असम और पुडुचेरी जैसे भारत के मुसरिम बहुल इलाके में भाजपा के कुल 324 विधायक जीते हैं..
जिसमें से बंगाल में 206, असम में 100 और पुडुचेरी में 18 विधायकों में जीत हासिल की है..

परंतु, ये जानकर आपको खुशी की सीमा नहीं रहेगी कि इन 324 विधायकों में से एक भी मुसरिम नहीं है.

और, सिर्फ इतना ही क्यों.... आज भारत में भाजपा के कुल 336 MP और 1,600 MLA में से एक भी मुसरिम नहीं है.

मैं नहीं जानता कि ये आंकड़े आपको कैसी फीलिंग देते हैं लेकिन मेरे लिए तो ये शिवाजी महाराज के हिंदवी स्वराज की फीलिंग है..

क्योंकि, जिस तरह शिवाजी महाराज ने अपनी वीरता और बेहतर रणनीति से मुगलों की सल्तनत को सिर्फ आगरे तक समेट कर रख दिया था...

उसी तरह... मोदी और शाह की ये जोड़ी ने देश से वामपंथी सरकार का तो पूर्णतया सफाया ही कर दिया तथा मुसरिम परस्त पार्टी खान्ग्रेस को सिर्फ कर्नाटक, केरल और तेलंगाना तक सीमित करके रख दिया है.

और, सबसे बड़ी बात कि... मोदी और शाह की इस जोड़ी ने मुसरिमों को उनकी औकात दिखा दी है कि भारतीय राजनीति में तुम्हारी वैल्यू शून्य है और तुम हमारे हिंदुस्तान के भाग्यविधाता नहीं बन सकते हो..

मानो कि, उन्हें कह रहे हों कि भले ही पचासों पार्टियाँ तुम्हारी दाढ़ी सहलाती हो...
लेकिन, हमारे लिए तुम कुछ नहीं हो.

हम न तो तुमको टिकट देंगे, न तुमसे वोट लेंगे फिर भी जीत कर दिखाएंगे.

और, ये ट्रेंड आने वाले समय में देश की राजनीति को पूरी तरह बदल कर रख देगा..
क्योंकि, अब ये बात सिर्फ भाजपा या खान्ग्रेस ही नहीं बल्कि अन्य सभी पार्टियाँ समझ रही है कि आज तक वे किस मिथक में जी रही थी और एक स्थापित गलतफहमी की वजह से मुसरिमों को जरूरत से ज्यादा भाव दे रही थी.

इसीलिए, यदि आने वाले निकट भविष्य भारतीय राजनीति की धुरी सेक्युलरिज्म, प्रो मुसरिम आदि से बदल कर प्रो हिन्दू और कट्टर हिन्दू टाइप का हो जाये तो किसी को कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए.

बंगाल जीत के बाद विपक्षी खेमे में बेचैनी की वजह भी यही है और हमारे लिए खुशी की वजह भी यही है.

हालाँकि, अगले साल यूपी, पंजाब आदि में चुनाव हैं जिसमें से पंजाब थोड़ा मुश्किल लग रहा है.

लेकिन, यदि पंजाब में भी इसी बंगाल की ही तरह रिजल्ट आ जाए तो भी मैं ज्यादा चमत्कृत नहीं होऊँगा.

खैर, जो भी हो.... जब-जब भारतीय राजनीति का इतिहास लिखा जाएगा तब-तब भारतीय राजनीति की दशा और दिशा बदलने वाले मोदी और शाह की इस जोड़ी को हमेशा याद रखा जाएगा.

जिन्होंने, बिल्कुल जामवंत की तरह हिन्दू समुदाय को उसके भूल चुके ताकत की याद दिलवा दी कि वोट के लिए तुम्हे कटेशरों के सामने नतमस्तक होने की कोई जरूरत नहीं है..
क्योंकि, आज भी भारत के भाग्य-विधाता हिन्दू समूदाय ही हैं न कि कोई कटेशर-फटेशर..!

जय महाकाल...!!! 🤪🤩😍🥰

02/05/2026

1 कितने हिन्दू भाइयों को ही क्या मुसलमानो को भी ये न पता होगा की पैगम्बर सिकंदर के 500 साल बाद पैदा हुए था।
भारत को छोड़ पूरे संसार में रमजान को”रामदान”कहते है,आप गूगल पर भी देख सकते हैं 2 भारत में अपनी नक़ल छुपाने को इन्होने इसे “रमजान” कर दिया | इस्लाम के पवित्र महीना रमजान संस्कृत शब्द”रामज्ञान”का अपभ्रंस है । और मक्का में विश्वप्रसिद्ध शिव लिंग भी था और अभी भी है और ये मुस्लिम हज के समय इस शिवलिंग को ही सज़दा करते हैं।
3 मुहम्मद के चाचा एक हिन्दू थे और अरब में भी आर्य संस्कृति का प्रभाव बहुत था। मुहम्मद के चाचा ने एक पुस्तक भी लिखी थी”शायर उल
ओकुल “जिसमें हिन्दू संस्कृति की भूरी भूरी प्रसंसा थी बाद में मुहम्मद के बदमाशों ने उन्हें मार दिया था |
4-“मुसलमानो का “नमाज”भी संस्कृत के नमत शब्द से बना है जिसका अर्थ है झुकना |
5- मुसलमानो की दिन में ५ बार नमाज हमारे वेदों के”पञ्च महा यज्ञ”की ही नक़ल है |
6-मुसलामानों का त्यौहार “शब्बेरात”शिवरात्री का ही अपभ्रंस है |
7-*नमाज के पहले ५ अंगों को धुलना वेदों के”शरीर शुद्ध्यर्थं पंचांग न्यासः”का ही नियम है |
8-ईद उल फितर भी हिन्दुओं के पित्री पक्ष
की नक़ल है और ईद उल फ़ित्र में मुसलमान अपने
पुरखों को ही याद करते हैं |
9-नक़ल यहीं बंद नहीं हुई : गर्भा बना काबा, पुराण
बना कुराण, संगे अश्वेत बना संगे अस्वाद, हमारा मलमास बना सफ़र मास, रवि से उनका रबी महिना, उनका ग्यारहवी शरीफ हमारे एकादशी की ही नक़ल है| गृह से ही उनका गाह शब्द बना ईदगाह , दरगाह*********** बस नक़ल करने वाले बंदर निकले और सब गड़बड़ हो गया!!

28/03/2026
27/03/2026

जय श्री राम 🩷❤️💖💞💝
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