14/05/2026
हमारे माँ-बाप भी सरकारी स्कूलों में पढ़-लिखकर ही अपनी जिंदगी में आगे बढ़े थे। उन्हीं सरकारी स्कूलों और कॉलेजों से निकलकर लाखों लोगों ने सरकारी नौकरियाँ हासिल कीं, देश की सेवा की और समाज में बदलाव लाया। उस समय न किसी कोचिंग फैक्ट्री की जरूरत थी, न शिक्षा के नाम पर चल रही दलाल नगरी की। असली क्रांति सरकारी शिक्षा व्यवस्था से आई थी, जहाँ मेहनत, समान अवसर और ज्ञान को महत्व दिया जाता था। आज शिक्षा को व्यापार बनाकर कुछ लोग युवाओं के सपनों का सौदा कर रहे हैं। हमें फिर से सरकारी स्कूलों और कॉलेजों को मजबूत बनाना होगा।
कुछ लोग आज जाने - अनजाने में इन शिक्षा माफियाओं के समर्थन में नारे लगा रहे हैं... अरे झोपड़ी वालो बेशर्मो कुछ तो शर्म करो!