28/12/2025
उत्तर प्रदेश के स्कूलों में अखबार पढ़ना अनिवार्य: एक सराहनीय पहल
उत्तर प्रदेश सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक कदम उठाया है। राज्य के सभी सरकारी बेसिक और माध्यमिक स्कूलों में अब छात्रों के लिए रोजाना अखबार पढ़ना अनिवार्य कर दिया गया है। यह फैसला बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करने, स्क्रीन टाइम कम करने और सामान्य ज्ञान बढ़ाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है।
सरकार का आदेश और उद्देश्य
23 दिसंबर 2025 को बेसिक और माध्यमिक शिक्षा के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा द्वारा जारी आदेश के अनुसार, सभी सरकारी स्कूलों में हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं के प्रतिष्ठित अखबार उपलब्ध कराए जाएंगे। सुबह की प्रार्थना सभा में कम से कम 10 मिनट का समय अखबार पढ़ने के लिए निर्धारित किया गया है। इस दौरान छात्र बारी-बारी से संपादकीय, राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरें, खेल और सकारात्मक समाचार पढ़कर सुनाएंगे।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य:
- बच्चों में पढ़ने की संस्कृति को मजबूत करना।
- मोबाइल फोन और सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग (स्क्रीन टाइम) को कम करना।
- शब्दकोश बढ़ाना, भाषा कौशल सुधारना, तार्किक सोच और आलोचनात्मक विश्लेषण विकसित करना।
- फेक न्यूज से बचाव की समझ पैदा करना।
- प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मदद करना।
कैसे लागू होगा यह नियम?
- **अखबार उपलब्धता**: स्कूल लाइब्रेरी में हिंदी और अंग्रेजी अखबार रखे जाएंगे, सरकारी खर्च पर।
- **दैनिक गतिविधियां**: प्रार्थना सभा में खबरें पढ़ना, शिक्षकों के मार्गदर्शन में चर्चा।
- **शब्दों का खेल**: रोजाना अखबार से 5 कठिन शब्द चुनकर "आज का शब्द" के रूप में नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित करना।
- **अतिरिक्त गतिविधियां**:
- कक्षा 6 से 8 के छात्रों के लिए विज्ञान, पर्यावरण और खेल की खबरों की कटिंग से स्क्रैपबुक बनाना।
- कक्षा 9 से 12 के लिए संपादकीय पर ग्रुप डिस्कशन और लेखन।
- साप्ताहिक क्रॉसवर्ड, सुडोकू और क्विज प्रतियोगिताएं।
- स्कूल मैगजीन या अखबार प्रकाशित करना।
- जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) इसकी निगरानी करेंगे।
यह आदेश नवंबर में शुरू की गई पढ़ाई अभियान का विस्तार है, जिसमें पाठ्यक्रमेतर किताबें पढ़ना अनिवार्य किया गया था और "नो बुके, ओनली बुक" कैंपेन लॉन्च हुई।
# # # # इस पहल के फायदे
आज के डिजिटल युग में बच्चे ज्यादातर समय मोबाइल पर बिताते हैं, जिससे पढ़ने की आदत कम हो रही है। फिजिकल अखबार पढ़ने से एकाग्रता बढ़ेगी, धैर्य आएगा और वास्तविक दुनिया से जुड़ाव मजबूत होगा। ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों के लिए यह विशेष रूप से लाभकारी होगा, जहां डिजिटल पहुंच सीमित है। इससे न केवल भाषा और ज्ञान बढ़ेगा, बल्कि बच्चे जिम्मेदार नागरिक बनेंगे जो फेक न्यूज को पहचान सकें।
# # # # निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश सरकार की यह पहल शिक्षा को व्यावहारिक और समसामयिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। अगर सही ढंग से लागू हुई तो यह लाखों बच्चों के भविष्य को रोशन कर सकती है। उम्मीद है कि अन्य राज्य भी इससे प्रेरणा लेंगे। आखिर, एक सूचित और जागरूक पीढ़ी ही मजबूत राष्ट्र की नींव होती है!