08/12/2025
एक जंगल में एक संगीतकार एक ढोलक बजाता था। , जब ढोलक बजाता था तो वहां एक बकरी का बच्चा आ जाता था। तो संगीतकार ने पूछा कि तुम रोज आते हो जब मैं ढोलक बजाता हु तो तुम चले आते हो । क्या तुम्हे मेरा सुर ताल अच्छा लगता है। बकरी ने कहा मुझे सुर तला का पता नहीं पर जो ढोलक आप बजा रहे हो उसमें जो चमड़ा है ओ मेरी मां के बदन का है। जब उसमें थाप पड़ती है तब मैं आ के खड़ा हो जाता हु।
तो मैं सुनाता हूं कि जिंदगी मां के बिना कैसा होता है
कल जब उठाकर कम पर जा रहा था तब अचानक लगा कि कोई रोक लगा मुझे। 2
,,,,, और कहेगा खड़े खड़े दूध मत पी हजम नहीं होगा।
दो घड़ी सांस ले
अरे 😱 इतनी ठंड कोट भूल गया ,,अरे इसे भी साथ ले ले।
मन में सोचा मां रसोई से बोली होगी ,,, जिनके हाथों में सना आता होगा।
पलट के देख तो क्या मालूम था वह सन्नाटा होगा।2
अरे अब तो हवाएं ही बात करती है मुझसे ।( जब कोई नहीं होता तो हवा से बात होता हैं)
लगता है जब मैं किसी कम से कोई कहेगा दही शक्कर खा ले बेटाअच्छा सगुन होता है।
कोई कहेगा गुड खा ले बेटा अच्छा शगुन होता है।
पर मन इसी बात के लिए रोता है । सब कुछ है मां सब कुछ। जिस आजादी के लिए मैं तुमसे सारी उमर लड़ता था। सारी आजादी मेरे पास है। (बचपन में मां कहती है न ये मत कर ओ मत कर ये मत खा ओ मत पी उसके साथ मत बैठ) ओ सारी आजादी मेरे पास है। फिर भी ना जाने दिल की हर धड़कन उदास है।
कहता था न मैं तुझसे की जो जी में आएगा ओ करूंगा
ओर आज मैं ओ सब कुछ करता हु,,, जो मेरे ही में आता है।
बात ये नहीं है कि मुझे कोई रोकने वाला नहीं है ।बात है तो इतनी सी की सुबह देर से उठू ना तो कोई टोकने वाला भी है।
रात को देर से लौटू तो कौन टोकेगा भला। दोस्तों के साथ घूमने पे उलहाने कौन देगा । मेरे ओ झूठे बहने कौन देगा ।
कौन कहेगा कि इस उम्र में क्यों परेशान करता है,,, हाय राम ये लड़का क्यों नहीं सुधरता है।
पैसे कहा खर्च हो जाते है तेरे क्यों नहीं बताता है सारा सारा दिन मुझे सताता है। रात को देर से आता है। खाना गर्म करने को जागती रहूं। खिलने को तेरे पीछे भागती रहूं । बहती रहूं आंसू तेरे लिए।कुछ सोचा है मेरे लिए। खैर मेरा तो क्या होना है और क्या हुआ है। तू खुश रह लेना यही दुआ है। आज तमाम खुशियां ही खुशियां । ग़म ये नहीं है कि ये खुशियां बांटने वाला होता । पर कोई तो होता जो गलतियों पे डांटने वाला होता।
तू होती न तो हाथ फेरती माते पे हल्के सी बम लगाती।आवाजें दे दे के सुबह उठाती। दिवाली पे टीका लगाके रूपय देती। और कहती बड़ों के पैर छुना आशीर्वाद मिलेगा।2
अगला नया कपड़ा अगली दिवाली पे मिलेगा। बहन को सताया तो तू चाहते मारती।
बीमार पड़ता तो रो रो के नजरे उतरती।
परीक्षा से आते ही खाना खिलाती।
पापा के डट का डर दिखाती।
इसे नौकरी मिला जाय तरक्की करे दुआओं में हाथ उठाती।
और तरक्की के लिए घर छोड़ देगा।
ये सुन के दरवाजे के पीछे चुपके चुपके आंसू बहती
सब कुछ है मां सब कुछ आज तरक्की की हर रेखा तेरे बेटे को छू के जाती है।
पर मां हमे तेरी बहुत याद आती हैं।