Zindgi na milegi Dobara

Zindgi na milegi Dobara

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Jiyo ji Bhar ke Ye Zindgi Na Milegi Dobara.....

30/03/2021

जिन परिवारों की लडकी भगा ली जाती है उनका दर्द ब्लात्कार या हत्या से भी बडा होता है, यह मैने अपनी आंखों से देखा है ।
हमारे एक अजीज है निहायत शरीफ । शराफत की बदोलत वे अब तक बेइंतहा नुकसान उठाते आए है । उनकी एक बिटिया है नाजों पली गुडिया सी । पढाया-लिखाया, बीएड करवाया । सबने बोला शादी कर दो, साल बाद आर रिटायर होने वाले हो । हाँ-हाँ-हूँ-हूँ में दिन गुजर गए । कौचिंग के लिए बेटी को शहर भेजा तो वहां किसी शिकारी के हत्थे चढ गई । और इसके बाद उस शिकारी लडके के मामा ने फोन पर रिश्ता जोडने के लिए पूछ तो लडकी के बाप ने मना कर दिया । बात आई-गई हो गई । एक दिन लडकी फूर्र हो गई । पता चला कोर्ट मैरिज कर लिया ।

बात तो अति सामन्य है । लेकिन सभी के परिवारों में जाकर देखो, एक न भूलने वाला दर्द समा जाता है ... बेबसी इतनी कि बलात्कार के खिलाफ तो माँ बाप कोर्ट में भी जा सकते है लेकिन इस मामले में माँ बाप क्या करें जब कोर्ट ने ही शादी करवाई हो ? बिना माता-पिता की सहमति से कोर्ट में शादी, शायद इसका सामाजिक अध्ययन किसी ने भी नहीं किया कि यह भी बलात्कार जितना बडा ही अपराध है या उससे भी बडा ?

खैर इसके बाद वो दोस्त इसकी रिपोर्ट लिखाने थाने गए .. थानेदार ने सहानुभूति दिखाते हुए कहा- लडकी १८ साल हो गई तो समझ लो ये बेटी नहीं बंम है । यह कभी भी फट सकता है और आपके परिवार का विनाश कर सकता है । कानून ही ऐसा बना दिया गया है कि पुलिस तो क्या जज भी कुछ नहीं कर सकता । पहले तो कोर्ट मैरिज से महीने भर पहले नोटिस देना पडता था जिससे व्यक्ति महीने भर के अन्दर मामला संभाल सकता था लेकिन अब तो साथ रहने के लिए शादी करवाने की भी जरुरत नहीं है, बस इतना सा लिख कर देने की जरुरत है कि मैं अमुक के साथ रहना चाहती हूँ कोई मुझे तंग न करे(लिव इन रिलेशनशिप) । अब ऐसे कांड होने लगे (और कोर्ट भी मददगार होने लगा) तो सोचो कौन बेटी बचाएगा और कौन बेटी पढाएगा ?

अपनी मर्जी क्या होती है ? अपनी पसंद का लडका चुनना या फिर अपनी पसंद का की जाति बरादरी का लडका चुनना या अपनी पसंद की शक्ल सूरत का लडका चुनना । हाँ ठीक है, इस पर किसी को ऐतराज नहीं हो सकता और संकीर्णताएं टूटनी भी चाहिए । लेकिन क्या अपनी पसंद का बेरोजगार चुनने, अपने पसंद के नशेडी को चुनने की आजादी भी दी जा सकती है ?

जिस मा-बाप ने लडकी को इतने सालों तक पाला-पोसा, क्या उन्हें इतना भी हक नहीं कि कोर्ट में शादी से पहले उन्हें बुलाया जाए और उनकी बात भी सुनी जाए ? हो सकता है मा-बाप भी गलत हो लेकिन उन्हें बुलाना तो चाहिए । यदि माता-पिता की आपत्ति गैर जरुरी है तो खारिज कर शादी की अनुमति दे दो, इसमें हर्ज ही क्या है ?

तालाक के वक्त कोर्ट सो नुक्ताचीनी करता है और दोनों की सहमति होने के बावजूद छः माह सोचने का वक्त दिया जाता है लेकिन शादी में ? शादी के समय तो यह भी नहीं पूछा जाता कि कि वो रोटी कहां से खिलाएगा ? और यदि कल को तालाक के लिए आते है तो यह लडकी कहां जाएगी ? फिर से बाप के पास जिसे ठुकराकर उसने शादी की थी ? आप माता-पिता को बुलाइए, उनसे पूछिए कि आपको शादी से आपत्ति क्यों है ? आम तौर पर होता है है कि लडका चपडासी भी नहीं लगा होता लेकिन खुद को इंजिनियर बताकर लडकी को झांसा देकर फांस लेता है । बहुत बार तो ऐसा भी होता है कि लडके किसी अपराधिक गिरोह के सदस्य होते है । Copy paste from mohan Kaushik

09/03/2021

*मान लीजिये*
आप पसीने से तर बतर हैं, बहुत प्यासे हैं, गला सूख रहा है पर कहीं भी पानी नहीं मिल रहा है। ऐसे में आप एक वृक्ष की छाया में थकान मिटाने के लिए खड़े होते हैं।
तभी सामने की एक इमारत की पहली मंजिल की खिड़की खुलती है और आपकी नजर उस व्यक्ति से मिलती है। आपकी स्थिति देखकर वह व्यक्ति हाथ के इशारे से आपको पानी के लिए पूछता है।
आपकी उस व्यक्ति के बारे में कैसी राय होगी ?
(यह आपकी पहली राय है।)
आदमी नीचे आने का इशारा करता है और खिड़की बंद कर देता है। नीचे का दरवाजा 15 मिनट बाद भी नहीं खुलता।
अब उस व्यक्ति के बारे में आपकी क्या राय है ?
(यह आपकी दूसरी राय है।)
16 मिनट बाद दरवाजा खुलता है और आदमी कहता है:
मुझे देरी के लिए खेद है लेकिन आपकी हालत देखकर मैंने आपको पानी के बजाय नींबू पानी देना सबसे अच्छा समझा, इसलिए थोड़ा समय लग गया।
अब उस व्यक्ति के बारे में आपकी राय बदल गई होगी ?
याद रखें कि आपको अभी तक कोई पानी या शर्बत नहीं मिला है।
(उस व्यक्ति के बारे में यह आपकी तीसरी राय है, ध्यान में रखें।)
अब जैसे ही आप शर्बत को अपनी जीभ पर लगाते हैं, आपको पता चलता है कि इसमें चीनी नहीं है।
अब आप उस व्यक्ति के बारे में कैसा महसूस करते हैं ?
(चौथी राय आकार ले लेती है।)
आपके चेहरे को खट्टेपन से भरा हुआ देखकर, व्यक्ति धीरे से ग्लूकोज़ पाउडर का एक पाऊच निकालता है और कहता है: आप अपने स्वाद के अनुसार जितना चाहें उतना डाल लें।
अब उसी व्यक्ति के बारे में आपकी राय फिर बदल गई होगी ?
एक सामान्य स्थिति में अगर हमारी राय इतनी खोखली है और लगातार बदलती जा रही है तो क्या हम किसी के भी बारे में राय देने के लायक हैं ?
वास्तव में, दुनिया देखकर इतना समझ आया कि अगर कोई व्यक्ति आपकी अपेक्षाओं के अनुरूप व्यवहार करता है तो वह अच्छा है, अन्यथा वह बुरा है।
(साभार)

17/06/2020

जब कोई चीज मुफ्त मिल रही हो, तो समझ लेना कि आपको इसकी कोई बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी।
नोबेल विजेता डेसमंड टुटू ने एक बार कहा था कि ‘जब मिशनरी अफ्रीका आए, तो उनके पास बाईबल थी, और हमारे पास जमीन। उनहोंने कहा 'हम आपके लिए प्रार्थना करने आये हैं।’ हमने आखें बंद कर लीं,,, जब खोलीं तो हमारे हाथ में बाईबल थी, और उनके पास हमारी जमीन।’
इसी तरह जब सोशल नैटवर्क साइट्स आईं, तो उनके पास फेसबुक और व्हाट्सएप थे, और हमारे पास आजादी और निजता थी।
उन्होंनें कहा 'ये मुफ्त है।’ हमने आखें बंद कर लीं, और जब खोलीं तो हमारे पास फेसबुक और व्हाट्सएप थे, और उनके पास हमारी आजादी और निजी जानकारियां।
जब भी कोई चीज मुफ्त होती है, तो उसकी कीमत हमें हमारी आजादी दे कर चुकानी पड़ती है।
“ज्ञान से शब्द समझ आते हैं, और अनुभव से अर्थ”

03/05/2020

प्रसन्नता

यदि तुम अप्रसन्न हो तो तुम्हारे पास अप्रसन्न होने का कारण है; यदि तुम प्रसन्न हो तो तुम बस प्रसन्न हो--इसके लिए कोई कारण नहीं है। तुम्हारा मन कारण ढूंढ़ने का प्रयास करता है क्योंकि यह अकारण में विश्वास नहीं कर पाता क्योंकि यह अकारण को नियंत्रित नहीं कर सकता--अकारण के साथ मन नपुसंक हो जाता है। इसी कारण मन यह या वह कारण ढूंढ़ता चला जाता है। लेकिन मैं तुम्हें कहना चाहता हूं कि जब कभी तुम प्रसन्न हो, तुम बिना किसी कारण के प्रसन्न हो, जब कभी तुम अप्रसन्न हो, अप्रसन्न होने का तुम्हारे पास कोई कारण होगा--क्योंकि प्रसन्नता ऐसी चीज है जिससे तुम बने हो। यह तुम्हारी चेतना है, यह तुम्हारी आत्यंतिक वास्तविकता है।

आनंद तुम्हारा आत्यंतिक मर्म है। वृक्षों को देखो, पक्षियों को देखो, बादलों को देखो, तारों को देखो...और यदि तुम्हारे पास आंखें हैं तो तुम यह देख पाने में सक्षम होओगे कि सारा अस्तित्व आनंद से भरा है। हर चीज बस प्रसन्न है। वृक्ष प्रसन्न हैं बिना किसी कारण के; वे प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति बनने वाले नहीं हैं और वे अमीर नहीं होने वाले हैं और उनके पास कभी बैंक बेलेंस नहीं होगा। फूलों को देखो--बिना किसी कारण के। बस यह अविश्वसनीय है कि फूल कितने प्रसन्न हैं। सारा अस्तित्व आनंद से बना है।

√ज़िन्दगी ना मिलेगी दोबारा ™

14/03/2020

कोरोना वायरस का केंद्र पश्चिम दिशा में खिसक रहा है. चीन कह रहा है कि हम सबसे बुरा दौर देख चुके हैं! किंतु अब यूरोप दुनिया में कोरोना का एपिसेंटर बन चुका है. वुहान से वेनिस तक की यात्रा पूरी कर ली गई है! इटली में हज़ार मृत्युओं के बाद कम्प्लीट लॉकडाउन की स्थिति है और लोगों ने ख़ुद को अपने-अपने घरों में क़ैद कर लिया है. अमेरिका ने 50 मौतों के बाद नेशनल इमरजेंसी घोषित कर दी है. भारत में अभी खाता खुला ही है, किंतु जैसे-जैसे संख्या बढ़ेगी, सामूहिक सम्भ्रम और वाइड स्प्रेड पैनिक का दृश्य निर्मित होगा.

कोरोना के बारे में तमाम मालूमात हासिल करने के बाद दुनिया के लोग इस निष्कर्ष पर पहुंच रहे हैं कि अगर हम स्वयं को सबसे अलग कर लेंगे और घरों में क़ैद हो जाएंगे तो हम संक्रमण से सुरक्षित रहेंगे. तकनीकी रूप से यह तर्क ठीक मालूम होता है, किंतु अगर आधुनिक मनुष्य की समस्याएं इतनी ही सरल होतीं तो बात क्या थी. युवल नोआ हरारी का कहना है कि अगर आप फिर से पाषाण युग में जाने को तैयार हैं तो स्वयं को बंद कर लीजिए. किंतु आधुनिक वैश्वीकृत मनुष्य को तो घर से निकलना ही होगा.

इटली में उन्होंने चौदह दिनों का क्वारेन्ताइन तय कर लिया है. कि चौदह दिन हम घर से नहीं निकलेंगे. वहां सड़कों पर भुतहा सन्नाटा व्याप्त हो गया है. इससे सरकार यह मान सकती है कि संक्रमितों की संख्या अब एक बिंदु पर आकर फ्रीज़ हो जाना चाहिए. पहले आपात स्थिति से निबटें. चौदह दिन के निर्वासन के बाद शेष की समस्या सुनी जाएगी.

अगर भारत भी इस डगर पर चला तो यह निश्चय है कि सेवा क्षेत्र में "वर्क फ्रॉम होम" की कार्य संस्कृति सुदृढ़ होने जा रही है. पहले ही इसका व्यवहार असंगठित रूप से किया जा रहा था. लैपटॉप और इंटरनेट से घर बैठे काम करने वाला एम्प्लायी ड्राइव करके दफ़्तर जाने और ख़ुद को वायरस के लिए एक्सपोज़ करने की तैयारी नहीं ही दिखाएगा. मरण तो रोज़ कुआ खोदकर पानी पीने वाले दिहाड़ी मज़दूर का है.

कोरोना पर वैश्विक चिंता के केंद्र में केवल लोक-स्वास्थ्य ही नहीं है. धड़कते दिल से दुनिया अर्थव्यवस्था पर नज़र जमाए है और उसे धीरे धीरे ध्वस्त होते देख रही है. पहले ही ग्लोबल इकोनॉमी बहुत अच्छी हालत में नहीं थी. 2020 को सुधार का साल होना था, किंतु यह 2008 के बाद सबसे बड़ी चुनौती की तरह सामने आया है. कौन जाने, यह भूमण्डलीकरण के तीस साल के इतिहास का सबसे बड़ा संकट सिद्ध हो.

जब लोग ख़ुद को हफ्ता-पखवाड़े के लिए घर में क़ैद करने की तैयारी करेंगे तो वो "सीज-मेंटेलिटी" में सरक जाएंगे. पुराने वक़्तों में जब शहर की घेराबंदी होती थी तो अवाम चौमासे की रसद लेकर क़िले में चली जाती थी. मौजूदा दौर में यह सरकार के लिए बड़ा सिरदर्द बनने जा रहा है. लोग तालाबंदी करेंगे तो जमाख़ोरी को बढ़ावा मिलेगा. जितना मैं भारत देश को समझता हूँ, जमाख़ोरी और कालाबाज़ारी पहले ही शुरू हो चुकी होगी. ज़रूरत की चीज़ों के दाम तेज़ी से बढ़ेंगे. बाज़ार में अप्रत्याशित मांग का सामना फ़र्ज़ी क़िल्लत से होगा. वॉर प्राफ़िटीयरिंग की तर्ज़ पर आपदा से मुनाफ़ा कमाने वाली ताक़तें सक्रिय हो चुकी होंगी. क्या सरकार इसके प्रति सजग है?

अनेक मित्रों ने चिंता जताई है कि कोरोना पर इतना हाहाकार क्यूँ? वो कह रहे हैं कि जिस देश में दंगों, सड़क हादसों, बुख़ार से लाखों लोग मर जाते हैं, उसमें विदेशी विषाणु पर हायतौबा क्यूँ मचाई जा रही है. पता नहीं वो महामारी शब्द का अर्थ समझते हैं या नहीं. कोई भी आपदा अपने स्वरूप में बाहरी संकट प्रस्तुत करती है, जबकि महामारियां एक जटिल, अंदरूनी, साभ्यतिक मसला हैं और संक्रमण की प्रविधि आणविक विस्फोट से कम नहीं होती.

मनुष्य का मनोविज्ञान यह है कि नगर में हादसा हो तो वह अपने परिजनों की कुशलक्षेम के लिए अकुलाता है. वो सकुशल घर लौट आएं तो निश्चिंत हो जाता है. फिर वह भले ही कितनी चिंता औरों के लिए जताता रहे, उसका दायरा मैं और मेरा परिवार तक सीमित रहता है. संक्रामक महामारियां इस निश्चिंतता में सेंध लगाती हैं. यह चार दिन चलकर रुकने वाला दंगा या बलवा नहीं है, यह नित्यप्रति अपने प्राणों की रक्षा करने की चुनौती है.

इससे पहले आख़िरी बार कब एक वैश्विक महामारी ने दुनिया को अपनी गिरफ़्त में लिया था? बीसवीं सदी के आरम्भ का स्पैनिश फ़्लू? इक्कीसवी सदी का स्वाइन फ़्लू? यक़ीन मानिए, नॉवल-कोरोनावायरस इनसे आगे की चीज़ है. आज ही विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा, यह विषाणु ऊष्ण मौसम में भी पनप सकता है. तिस पर किसी ने अंदेशा जताया, तब तो हो ना हो यह एक मैन्युफ़ैक्चर्ड वायरस है, इसका कार्य-व्यवहार सर्वथा नया और अप्रत्याशित है. तो क्या चीन के पीले दैत्य ने दुनिया को एक घोर संकट में धकेल दिया है?

यह तो समय ही बताएगा. किंतु तब तक सतर्कता की लाठी थामकर ही सबने इस डगर पर चलना है!

28/08/2019

....क्या तुम जिंदा हो ?
अगर यही जिंदगी है तो मौत क्या होगा
और तुम क्या खाक जिंदा हो!
तुम्हारी जिंदगी क्या है?

एक धोखा है। नाममात्र को जिंदा हो। खा लिया, पी लिया,उठ लिए, सो लिए, चल लिए, काम कर लियाः सांस आयी,सांस गयी; सत्तर साल यूं गुजर गए जैसे नदी में पानी बह जाए;और फिर एक दिन मिट्टी में गिर गए। तुम्हारी जिंदगी क्या है! इस जिंदगी को अभी शाश्वत का कुछ भी तो पता नहीं। यह जिंदगी तो खिलौनों में उलझी है। इस खिलौनों में उलझी जिंदगी को जिंदगी नहीं कह सकते।

दुनिया जिसे कहते हैं, बच्चे का खिलौना है,
मिल जाए तो मिट्टी है, खो जाए तो सोना है.
अच्छा—सा कोई मौसम, तन्हा—सा कोई आलम,
हर वक्त का रोना तो बेकार का रोना है!
बरसात का बादल तो दीवाना है क्या जाने,
किस राह से बचना है, किस छत को भिगोना है.
ये वक्त जो तेरा है ये वक्त जो मेरा है,
हर गाम पे पहरा है, फिर भी इसे खोना है.
गम हो कि खुशी दोनों कुछ दूर के साथी हैं,
फिर रस्ता ही रस्ता है, हंसना है न रोना है.
आवारा मिजाजी ने फैला दिया आंगन यों,
आकाश की चादर है, धरती का बिछौना है.
दुनिया जिसे कहते हैं, बच्चे का खिलौना है,
मिल जाए तो मिट्टी है, खो जाए तो सोना है.

इस दुनिया का अद्भुत नियम है—मिल जाए तो मिट्टी है, खो जाए तो सोना है! जो तुम्हें मिल जाता है, वही मिट्टी हो जाता है। तुम्हारा हाथ सोने को लगा कि वह भी मिट्टी हो जाता है! तुम इतने मुर्दा हो कि तुम्हारे हाथ में जिंदगी आते—आते मौत हो जाती है। तुमने जो भी पा लिया, सब बेकार हो गया है। हां, आकांक्षा भटकती है दूर—दूर। जो नहीं मिलता है......दूर के ढोल सुहावने मालूम पड़ते हैं......और उसके लिए तुम दौड़ते रहते, दौड़ते रहते—दौड़ते—दौड़ते गिरते हो एक दिन, मिट जाते हो एक दिन। दूसरों को गिरते देखते हो मगर तुम्हें यह खयाल नहीं आता कि मुझे भी गिरना है। दूर जो है वह सोना मालूम पड़ता है। जो नहीं मिला, सोना मालूम पड़ता है; हाथ लगते ही मिट्टी हो जाता है।
इसे तुम जिंदगी कहोगे?!
अगर यही जिंदगी है तो फिर मौत क्या होगी? मौत और क्या हो सकती है? जिंदगी तो वह है जहां शाश्वत का अनुभव हो; जहां परमात्मा भीतर विराजमान हो; जहां उसका दीया जले—बिन बाती बिन तेल! जो जलता है तो है, लेकिन फिर बुझता नहीं। जहां आनंद की अहर्निश वर्षा हो! जहां अमृत झरे! जब तक तुम ऐसे शाश्वतता से परिचित न हो जाओ, जिसकी कोई मृत्यु नहीं है।।

27/08/2019
Photos 17/12/2013
17/12/2013

तुझे ही फुरसत ना थी किसी अफ़साने को पढ़ने की..; मै तो बिकता रहा तेरे शहर में किताबों की तरह..!!!!!!

Photos 09/10/2013

ţµ hɨ ¥€ ʍµjhЌ๏ βąţą ď€
ȼhąhµɲ ʍąɨɲ ¥ą ɲąą
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09/10/2013

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2. IMEI Number – * #06 #
3. Enter Service Menu On Newer Phones – * #0* #
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7. Enable Test Mode for Service – * #* #197328640 #* #*
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11. FTA Software Version – * #* #1111 #* #*
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15. System Dump Mode – * #9900 #(data by facebook/cnaonweb
16. HSDPA/HSUPA Control Menu – * #301279 #
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19. Format Your Device To Factory State(will delete everything on your phone) – *2767*3855 #(data by facebook/cnaonweb
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