19/07/2025
सरकारी स्कूल भूथन कलां में एसएमसी का विलय कर पुनर्गठन करने का विरोध
जिला शिक्षा अधिकारी को प्रिंसिपल के मार्फत भेजा ज्ञापन
फतेहाबाद।
सरकारी स्कूल भूथन कलां में विद्यार्थियों के अभिभावकों, ग्रामीणों व बुद्धिजीवियों की एक आम सभा का आयोजन किया गया जिसमें हरियाणा सरकार के नए फरमान का विरोध में सर्वसम्मिति से प्रस्ताव पारित किया गया। इसके तहत वर्तमान स्कूल प्रबंधन समितियां को भंग कर कर और तीनों प्रबंधन समितियां का विलय करके एक ही प्रबंधन समिति बनाने की बात कही गई है। ग्रामीणों की उपस्थिति में जिला शिक्षा अधिकारी के नाम विरोध प्रस्ताव को स्कूल प्रिंसिपल नरेश रंगा को दिया गया।
शिक्षा समिति के प्रधान कृष्ण ज्याणी ने कहा कि वर्तमान में सरकारी स्कूल भूथन कलां में दो प्राइमरी स्कूल और एक सीनियर सेकेंडरी स्कूल हैं और तीनों स्कूलों की अलग-अलग स्कूल प्रबंधन समितियां हैं। वर्तमान में कार्यरत तीनों एसएमसी समितियां राज्य सरकार एवं शिक्षा विभाग द्वारा लगभग दो महीने पूर्व गठित की गई थी। शिक्षा समिति के सह सचिव ओमप्रकाश बिडलान ने कहा कि एसएमसी को बिना किसी ठोस कारण के भंग कर पुन: गठन करने के प्रस्ताव का हरियाणा भर के अभिभावकों और अध्यापकों में रोष है। वर्तमान एसएमसी विधिवत रूप से दो वर्षों के लिए गठित की गई थीं, जिनका कार्यकाल अभी समाप्त नहीं हुआ है। इस प्रकार समय से पूर्व उन्हें भंग करना असंवैधानिक है। प्राथमिक, मिडल तथा सीनियर सेकेंडरी स्तर पर छात्रों की संख्या अधिक है। बच्चों की संख्या के अनुपात में समस्याएं भी अधिक हैं, जिन्हें केवल शक्तियों के विकेन्द्रीयकरण द्वारा ही हल किया जा सकता है। जबकि एक एसएमसी बनाना शक्तियों का केन्द्रीय करण करना हैं। प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों की समस्याएं भिन्न प्रकार की होती हैं, जिन्हें एक ही एसएमसी से प्रभावी ढंग से नहीं निपटाया जा सकता। सरकार द्वारा स्कूल के सौंदर्यीकरण, मरम्मत, स्टेशनरी, बिजली बिल, टीएलएम आदि के लिए प्रति विद्यार्थी मात्र 500 से भी कम की राशि प्रति वर्ष प्रति एसएमसी दी जाती है। एसएमसी के विलय से यह राशि दो-तीन की जगह एक ही एसएमसी को मिलने के कारण और घट जाएगी, जिससे स्कूल संचालन में बाधाएँ उत्पन्न होंगी। ऐसी स्थिति में विद्यालय की छवि खराब होगी, नामांकन घटेगा और कम छात्र संख्या का हवाला देकर विद्यालय बंद किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह नीति शिक्षा की जिम्मेदारी से सरकार के पीछे हटने को दर्शाती है। विभाग के पूर्व बयानों और पत्रों से यह स्पष्ट होता है कि एसएमसी के विलय के बाद अगला कदम विद्यालयों का आपस में विलय करना है। यह कदम शिक्षा के विकास के बजाय व्यय में कटौती और जिम्मेदारी समुदाय व अभिभावकों पर डालने की नीति का हिस्सा है, जिससे सबसे अधिक नुकसान विद्यार्थियों-अभिभावकों को होगा। इससे शिक्षकों की पद संख्या में कटौती होंगी, कार्यभार में वृद्धि होगी और गैर-शैक्षणिक कार्यों में वृद्धि होगी, इन सभी का खामियाजा अंतत: बच्चों को ही भुगतना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि उनके विद्यालय में पूर्ववत गठित समिति ही कार्य करती रहेगी। एसएमसी के प्रधान ओम प्रकाश कुलडिया ने कहा कि हरियाणा सरकार के इस तुगलकी फरमान के विरोध में फतेहाबाद जिले के अन्य गांव में भी सरकारी स्कूलों की समितियां के प्रधान व सदस्यों से बातचीत की जा रही है। अगले हफ्ते योजना बनाकर बड़ी संख्या में सरकारी स्कूलों में पढऩे वाले बच्चों के अभिभावक और एसएमसी समितियां इक_े होकर फतेहाबाद के डीसी और जिला शिक्षा अधिकारी से मुलाकात करेंगे और नई प्रबंधन समितियां बनाने के आदेश का पुरजोर विरोध करेंगे। क्योंकि यह फरमान किसी भी सूरत में विद्यार्थियों सरकारी स्कूलों के हित में नहीं है। इसलिए इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। इस अवसर पर एसएमसी कमेटी से रिंकू देवी प्रधान, शैलेंद्र, रमेश, ममता उप प्रधान, कर्मवीर, कविता व नौजवान सभा से पवन भूथन भी उपस्थित रहे।