31/03/2022
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ऑटिज़्म में लाइफस्टाइल
ऐसे बच्चे जो ऑटिज़्म से पीड़ित हैं उनके लिए ये लाइफस्टाइल से जुड़े बदलाव मददगार साबित हो सकते हैं: बच्चे की रोज़मर्रा की ज़िंदगी में मदद ऐसे करें :
1. बच्चों के साथ कम्युनिकेशन को आसान बनाएं
बच्चों के साथ धीरे-धीरे और साफ आवाज़ में बात करें ऐसे शब्दों का प्रयोग करें जो समझने में आसान हो बच्चे से बातचीत करते समय बार-बार बच्चे का नाम दोहराएं। ताकि बच्चा यह समझ सके कि आप उसी से बात कर रहे हैं। बच्चे को आपकी बात समझने और फिर उसका जवाब देने के लिए पर्याप्त समय लेने दें बातचीत के दौरान हाथों से इशारे करें और तस्वीरों की मदद भी ले सकते हैं
आप किसी स्पीच थेरेपिस्ट की सहायता भी ले सकते हैं
2. खाना सिखाएं ऑटिज़्म वाले बच्चें अक्सर खाने-पीने से आनाकानी करते हैं और किसी विशेष रंग या प्रकार का ही भोजन खाते हैं। वे बहुत अधिक या बहुत कम मात्रा में भी खा सकते हैं। वहीं, उन्हें खाना खाते समय भोजन अटकने या खांसी की समस्याएं भी हो सकती हैं। ऐसे मामलों में अभिभावकों को अपने बच्चे के खाने-पीने से जुड़ी आदतें एक डायरी में लिख कर रखनी चाहिए। ताकि, वे बच्चे की समस्याओं को समझ सकें और उससे बचने के उपाय अपना सकें। इसी तरह बच्चे को अगर खाने में दिक्कत हो तो अपने डॉक्टर से बात करें।
3. जब बच्चे को सोने में परेशानी हो तो: पेरेंट्स किसी डायरी में बच्चे के सोने-जागने से जुड़ी आदतों के नोट्स बनाएं और समस्या को समझें
बच्चे का कमरा शांत और अंधेरे से भरा हो।
बच्चे के सोने और जागने का समय निश्चित करें।
ज़रूरत हो तो बच्चे को ईयरप्लग्स पहनने दें।
4. भावनाओं पर काबू रखना सिखाएं कुछ बच्चों में भावनाओं को कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है और वे अक्सर रो पड़ते हैं। ऐसे बच्चों की मदद करने के लिए माता-पिता ये करें:
हर बार डायरी में उन बातों या घटनाओं के बारे में लिखें जिसके बाद बच्चे ने रोना शुरू किया हो
बच्चे के कमरे से भड़कीली बत्तियां और बल्ब हटा दें।
बच्चे को मधुर और सूकूनभरा संगीत सुनने दें।
बच्चे की दिनचर्या में किसी प्रकार के बदलाव करने से पहले उन्हें इसकी जानकारी दें।
5.साफ-सफाई का महत्व सिखाएं माता-पिता अपने बच्चों को साफ-सुथरा रहने का महत्व ज़रूर समझाएं। बच्चे को उनकी साफ-सफाई रखना सिखाएं और इसके लिए दिन में समय निश्चित करें ।
6. सहज रहने में करें मदद कुछ बच्चे बहुत भावुक और सवेंदनशील होते हैं। ऐसे बच्चे भीड़, शोर और तेज़ रोशनी से घबरा जाते हैं । ऐसे बच्चों के पेरेंट्स को ऐसी स्थितियों से बचने के लिए इन बातों का ध्यान रखना चाहिए:
अगर बच्चे को शोर से दिक्कत है तो उसे शोर कम करने वाले हेडफोन या इयरप्लग्स का इस्तेमाल करने दें।
बच्चे से बातचीत करते समय उन्हें आपकी बात समझने के लिए समय दें। अगर, बच्चे फिर भी समझ ना पाएं तो माता-पिता दोबारा तेज़ आवाज़ में बोलें।
अगर, बच्चा नयी जगह में सहज नहीं है तो अभिभावक उन्हें उन जगहों पर तब ले जाएं, जब वहां बहुत भीड़ ना हो या शांति हो। फिर, धीरे-धीरे वहां, बच्चे के रहने का समय बढ़ाते जाएं। जिससे, वे सहज हो जाएं।
बच्चे की भावनाओं को संभालने के लिए उनके लिए शांत माहौल का निर्माण करें।