Antra Rehabilitation Center

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All round development of children with Special Need

12/04/2022

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SPEECH SOUNDS.

Special kids with Special NEED.

12/04/2022

ऑटिज्म
ऑटिज़्म (Autism) को मेडिकल भाषा में ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसॉर्डर (autism spectrum disorder) कहते हैं। यह एक विकास संबंधी गड़बड़ी है जिससे पीड़ित व्यक्ति को बातचीत करने में, पढ़ने-लिखने में और समाज में मेलजोल बनाने में परेशानियां आती हैं। ऑटिज़्म एक ऐसी स्थिति है जिससे पीड़ित व्यक्ति का दिमाग अन्य लोगों के दिमाग की तुलना में अलग तरीके से काम करता है। वहीं, ऑटिज़्म से पीड़ित लोग भी एक-दूसरे से अलग होते हैं। यानि कि आटिज्‍म के अलग-अलग मरीजों को अलग-अलग लक्षण महसूस हो सकते हैं। हालांकि इस बीमारी के बारे में अभी तक बहुत ज्‍यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है और न ही वर्तमान में इसका कोई कम्‍प्‍लीट इलाज है। वैसे तो इस बीमारी से पीड़ित लोग नौकरी करने, परिवार और दोस्तों के साथ मेल-मिलाप करने में सक्षम होते हैं, लेकिन कई बार उन्हें इसके लिए दूसरों की मदद लेनी पड़ती है। जहां कुछ ऑटिस्टिक लोगों को पढ़ने-लिखने में परेशानी होती है तो वहीं ऑटिज्‍म के कुछ मरीज या तो पढ़ने लिखने में बहुत तेज होते हैं या सामान्‍य होते हैं। परिवार, टीचर्स या दोस्‍तों के सहयोग से ये लोग नई स्किल्स सीखने में भी सक्षम होते हैं और बिना किसी सहारे के काम कर पाते हैं। कुछ स्टडीज़ में ऐसा देखा गया है कि डायग्नोसिस और विशेष शिक्षक की जल्द मदद से ऑटिस्टिक लोगों को सामाजिक व्यवहार और नयी स्किल्स सीखने में मदद मिलती है जिससे, वे अपना जीवन बेहतर तरीके से जी पाते हैं।

08/04/2022
02/04/2022

#वर्ल्डऑटिज्मडे

हां मैं अलग हूं इन लोगों से अलग हूं इनकी सोचो से अलग हूं इनकी बातों से अलग हूं इनके रहने खाने पीने से अलग हो हां मैं अलग हूं जहां मैं जाता हूं वहां मुझे लोग नहीं समझते मेरी जरूरतों को नहीं समझते मेरी बातों को नहीं समझते मैं कहना चाहता हूं मैं मांगना चाहता हूं पर वो लोग नहीं समझते हां मेरा मांगने का अंदाज़ अलग है मैं बोलने में असमर्थ हूं पर अपनी बातों को चिल्ला कर रोकर इशारा देकर समझाता हूं हां मैं अलग हूं मैं अपने में हूं और खुश हूं हां मैं अलग हूं।
मैं दुखी नहीं हूं मैं खुश हूं अपनी दुनिया में अपने लोगों में हां मैं अलग हूं। चाहे लोग कुछ भी कहें मेरे बारे में पर मेरे माता-पिता मेरे अपने हैं मेरा ख्याल रखते हैं मेरी जरूरतों को जानते हैं मुझे समझते हैं मेरी बातों को मेरे बोलने के तरीके को मेरा रोना चिल्लाना चीजों को फेंकना वह सब सह लेते हैं हां मैं अलग हूं पर मैं खुश हूं।

02/04/2022

One More Achievement
Thanks Mrs. Sunaina for sharing your experience and showing love to our dedication. We are delighted to know that Radhika is doing great. We have noted your advice, feel free to express yourself in future as well.
It really means a lot to us.



31/03/2022



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ऑटिज़्म में लाइफस्टाइल
ऐसे बच्चे जो ऑटिज़्म से पीड़ित हैं उनके लिए ये लाइफस्टाइल से जुड़े बदलाव मददगार साबित हो सकते हैं: बच्चे की रोज़मर्रा की ज़िंदगी में मदद ऐसे करें :
1. बच्‍चों के साथ कम्‍युनिकेशन को आसान बनाएं

बच्‍चों के साथ धीरे-धीरे और साफ आवाज़ में बात करें
ऐसे शब्‍दों का प्रयोग करें जो समझने में आसान हो
बच्चे से बातचीत करते समय बार-बार बच्चे का नाम दोहराएं। ताकि बच्चा यह समझ सके कि आप उसी से बात कर रहे हैं।
बच्चे को आपकी बात समझने और फिर उसका जवाब देने के लिए पर्याप्त समय लेने दें
बातचीत के दौरान हाथों से इशारे करें और तस्वीरों की मदद भी ले सकते हैं
आप किसी स्पीच थेरेपिस्ट की सहायता भी ले सकते हैं
2. खाना सिखाएं ऑटिज़्म वाले बच्चें अक्सर खाने-पीने से आनाकानी करते हैं और किसी विशेष रंग या प्रकार का ही भोजन खाते हैं। वे बहुत अधिक या बहुत कम मात्रा में भी खा सकते हैं। वहीं, उन्हें खाना खाते समय भोजन अटकने या खांसी की समस्याएं भी हो सकती हैं। ऐसे मामलों में अभिभावकों को अपने बच्चे के खाने-पीने से जुड़ी आदतें एक डायरी में लिख कर रखनी चाहिए। ताकि, वे बच्चे की समस्याओं को समझ सकें और उससे बचने के उपाय अपना सकें। इसी तरह बच्चे को अगर खाने में दिक्कत हो तो अपने डॉक्टर से बात करें।
3. जब बच्चे को सोने में परेशानी हो तो: पेरेंट्स किसी डायरी में बच्चे के सोने-जागने से जुड़ी आदतों के नोट्स बनाएं और समस्या को समझें
बच्चे का कमरा शांत और अंधेरे से भरा हो।
बच्चे के सोने और जागने का समय निश्चित करें।
ज़रूरत हो तो बच्चे को ईयरप्लग्स पहनने दें।
4. भावनाओं पर काबू रखना सिखाएं कुछ बच्चों में भावनाओं को कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है और वे अक्सर रो पड़ते हैं। ऐसे बच्चों की मदद करने के लिए माता-पिता ये करें:
हर बार डायरी में उन बातों या घटनाओं के बारे में लिखें जिसके बाद बच्चे ने रोना शुरू किया हो
बच्चे के कमरे से भड़कीली बत्तियां और बल्ब हटा दें।
बच्चे को मधुर और सूकूनभरा संगीत सुनने दें।
बच्चे की दिनचर्या में किसी प्रकार के बदलाव करने से पहले उन्हें इसकी जानकारी दें।
5.साफ-सफाई का महत्व सिखाएं माता-पिता अपने बच्चों को साफ-सुथरा रहने का महत्व ज़रूर समझाएं। बच्चे को उनकी साफ-सफाई रखना सिखाएं और इसके लिए दिन में समय निश्चित करें ।
6. सहज रहने में करें मदद कुछ बच्चे बहुत भावुक और सवेंदनशील होते हैं। ऐसे बच्चे भीड़, शोर और तेज़ रोशनी से घबरा जाते हैं । ऐसे बच्चों के पेरेंट्स को ऐसी स्थितियों से बचने के लिए इन बातों का ध्यान रखना चाहिए:
अगर बच्चे को शोर से दिक्कत है तो उसे शोर कम करने वाले हेडफोन या इयरप्लग्स का इस्तेमाल करने दें।
बच्चे से बातचीत करते समय उन्हें आपकी बात समझने के लिए समय दें। अगर, बच्चे फिर भी समझ ना पाएं तो माता-पिता दोबारा तेज़ आवाज़ में बोलें।
अगर, बच्चा नयी जगह में सहज नहीं है तो अभिभावक उन्हें उन जगहों पर तब ले जाएं, जब वहां बहुत भीड़ ना हो या शांति हो। फिर, धीरे-धीरे वहां, बच्चे के रहने का समय बढ़ाते जाएं। जिससे, वे सहज हो जाएं।
बच्चे की भावनाओं को संभालने के लिए उनके लिए शांत माहौल का निर्माण करें।

Photos from Antra Rehabilitation Center's post 18/12/2021

Fatehabad

07/12/2021

Wish you many many happy returns of the day 🎂🎂 happy birthday to you our little star 😍😍stay happy always 😊😘


04/12/2021



03/12/2021

विश्व दिव्यांग दिवस पर उपायुक्त प्रदीप कुमार ने दिव्यांग बच्चों को दिया आशीर्वाद
फतेहाबाद, 3 दिसंबर।
विश्व दिव्यांग दिवस के उपलक्ष्य में उपायुक्त प्रदीप कुमार ने जनजागृति कार्यक्रम के तहत अंतरा पुनर्वास केन्द्र के बच्चों के साथ उपायुक्त कार्यालय में बातचीत की और उन्हें आशीर्वाद दिया। इस मौके पर दिव्यांग बच्चों ने उपायुक्त को बुक्का व फूल भेंट कर विश्व दिव्यांग दिवस की शुभकामनाएं दी। उपायुक्त प्रदीप कुमार ने बच्चों द्वारा बनाई गई पेंटिग का अवलोकन कर उन्हें सम्मानित किया।
उपायुक्त प्रदीप कुमार ने बच्चों के कुशलक्षेम व परिवारजनों के बारे में विस्तारपूवक जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा दिव्यांगजनों के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं को लागू किया है। योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर इनका ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाए। उपायुक्त ने बच्चों से कहा कि जिला प्रशासन उनकी समस्याओं व जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ देने के लिए हमेशा तत्पर रहेगा। उपायुक्त ने संबंधित विभाग के अधिकारियों को भी निर्देश दिए कि वे दिव्यांगजनों के लिए चलाई गई विभिन्न योजनाओं का लाभ देने में देरी ना करें। इस मौके पर नगराधीश अंकिता वर्मा सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद रही। बच्चों ने उपायुक्त का प्यार जताने व आशीर्वाद जताने पर आभार व्यक्त किया।

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