03/01/2026
देश की प्रथम शिक्षिका एवं नारी शिक्षा की ज्योति, माता सावित्रीबाई फुले के जन्मदिवस पर कोटि-कोटि नमन एवं हार्दिक शुभकामनाएँ।
माता सावित्रीबाई फुले न केवल भारत की पहली महिला शिक्षिका थीं, बल्कि वे नारी सशक्तिकरण और सामाजिक क्रांति की सशक्त प्रतीक भी थीं। ऐसे समय में जब महिलाओं को शिक्षा से वंचित रखा जाता था, सावित्रीबाई फुले ने साहस के साथ ज्ञान का दीप जलाया और समाज की रूढ़ियों को तोड़ने का ऐतिहासिक कार्य किया।
सावित्रीबाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 को महाराष्ट्र के नायगांव में हुआ था। उन्होंने अपने पति महात्मा ज्योतिराव फुले के साथ मिलकर महिलाओं, दलितों और वंचित वर्गों के लिए शिक्षा के द्वार खोले। वर्ष 1848 में पुणे में उन्होंने देश का पहला बालिका विद्यालय स्थापित कर नारी शिक्षा की नींव रखी।
महिला शिक्षा के साथ-साथ उन्होंने सामाजिक गुलामी, जातिगत भेदभाव, बाल विवाह और छुआछूत जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ आजीवन संघर्ष किया। वे मानती थीं कि शिक्षा ही समाज परिवर्तन का सबसे सशक्त माध्यम है।
सावित्रीबाई फुले एक संवेदनशील कवयित्री भी थीं। उनकी रचनाएँ जैसे ‘काव्य फुले’ और ‘बावन काशी सुबोध रत्नाकर’ समाज को जागरूक करने का माध्यम बनीं। उन्होंने अपने लेखन और कर्म दोनों से महिलाओं को आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता का मार्ग दिखाया।
आज सावित्रीबाई फुले की जयंती हमें यह संकल्प लेने की प्रेरणा देती है कि हम शिक्षा को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाएँ और समानता, न्याय व सम्मान पर आधारित समाज का निर्माण करें।
माता सावित्रीबाई फुले अमर रहें।
नारी शिक्षा और सामाजिक न्याय की यह मशाल सदैव प्रज्ज्वलित रहे।
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