Florence School and College of Nursing

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11/07/2025

सेक्रेट किचन टिप्स!

25/03/2025

96 साल की उम्र में 100 मीटर दौड़ में 3 गोल्ड मेडल जीतने वाली भगवानी देवी, एक जीवित मिसाल हैं कि उम्र केवल एक आंकड़ा है, और असली ताकत हमारे भीतर की इच्छा और मेहनत में होती है। भगवानी देवी ने न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया को यह संदेश दिया कि अगर इंसान में जुनून और साहस हो, तो कोई भी रुकावट उसे उसकी मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकती।

भगवानी देवी का जीवन एक प्रेरणा की कहानी है, जो हमें यह सिखाती है कि कोई भी उम्र किसी लक्ष्य को पाने में बाधा नहीं डाल सकती। उन्होंने 96 साल की उम्र में जब 100 मीटर दौड़ में तीन गोल्ड मेडल जीते, तो यह सिर्फ एक खेल की उपलब्धि नहीं थी, बल्कि यह उस अविश्वसनीय साहस और आत्मविश्वास की प्रतीक थी, जो उन्होंने जीवनभर अपने अंदर संजोकर रखा।

भगवानी देवी का जन्म 1927 में हुआ था और उन्होंने अपने जीवन के अधिकांश हिस्से में कड़ी मेहनत और संघर्ष किया। बचपन में वह शारीरिक रूप से सक्रिय नहीं थीं, लेकिन जैसे-जैसे उन्होंने बड़े होने के साथ खुद को शारीरिक रूप से मजबूत बनाना शुरू किया, उनकी मेहनत रंग लाने लगी। वर्षों तक वह ग्रामीण जीवन जी रही थीं, जहां शारीरिक श्रम की आवश्यकता तो थी, लेकिन प्रतिस्पर्धात्मक खेलों से उनका कोई सीधा संबंध नहीं था। हालांकि, उनका दिल हमेशा से कुछ विशेष करने की इच्छा से भरा हुआ था।

उनकी इस अनोखी यात्रा की शुरुआत उस समय हुई जब वह 91 साल की उम्र में एक खेल प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए प्रेरित हुईं। वहां उन्होंने अपनी पहली दौड़ में भाग लिया और यह उनकी जीवन का टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ। धीरे-धीरे उन्होंने दौड़ने की प्रैक्टिस शुरू की और 96 साल की उम्र में जब उन्होंने 100 मीटर दौड़ में गोल्ड मेडल जीते, तो यह न केवल उनके लिए बल्कि समूचे देश के लिए गर्व की बात बन गई।

भगवानी देवी के लिए यह सिर्फ एक व्यक्तिगत जीत नहीं थी, बल्कि यह लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया। उनके इस अविश्वसनीय साहस ने यह साबित किया कि जीवन के किसी भी पड़ाव पर हम अपनी सीमाओं को पार कर सकते हैं। उनका यह कृत्य हमें यह सिखाता है कि अगर हम अपने भीतर की ऊर्जा और इच्छाशक्ति का सही दिशा में उपयोग करें, तो किसी भी उम्र में हम अपनी शारीरिक और मानसिक सीमाओं को चुनौती दे सकते हैं।

भगवानी देवी की इस सफलता के बाद, यह आवश्यक हो जाता है कि उनकी इस प्रेरणादायक यात्रा को हर किसी तक पहुँचाया जाए। उनकी तरह हम सभी को यह समझना चाहिए कि उम्र कोई मायने नहीं रखती, और जीवन में हर दिन कुछ नया करने की संभावना होती है। उनकी इस संघर्षपूर्ण और साहसी यात्रा को पहचान और सम्मान मिलना चाहिए, क्योंकि यह न केवल शारीरिक रूप से बल्कि मानसिक रूप से भी हमारी सीमाओं को चुनौती देने की प्रेरणा देती है।

भगवानी देवी का योगदान न केवल खेल जगत में बल्कि समाज में भी गहरी छाप छोड़ता है। वह साबित करती हैं कि अगर आप किसी चीज़ को पाने का दृढ़ निश्चय करते हैं, तो आप किसी भी उम्र में उसे हासिल कर सकते हैं।

25/03/2025
03/03/2025

खुशी पैसे पर नहीं,
परिस्थितियों पर निर्भर करती हैं
एक बच्चा गुब्बारा खरीद कर खुश था,
दूसरा उसे बेचकर
तीसरा उसे फोड़ कर…!!

09/10/2024

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