Kavi Dharmesh Avichal

Kavi Dharmesh Avichal

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06/11/2025

*********दोहे***********
नेता लेता बन गये,भरे विदेशी बैंक।
ऊंची से ऊंची रही, लूट पाट की रैंक।।
गरीब होता जा रहा, ज्यादा और गरीब।
राजनीति ने तय किया, निर्धन निपट नसीब।।
सत्ता कोई भी रही,हावी रहे दलाल।
जनता के मन में रहा,भारी यही मलाल।।
बदल -बदल जनता थकी, सरकारों का रूप।
नियत एक सी ही रही,मिटी न दुख की धूप।।
राजनीति में आ गए, पत्रकार कवि संत।
लेकिन भ्रष्टाचार का, हुआ न अब तक अंत।।
क्या मिट पायेगा कभी, जड़ से भ्रष्टाचार।
लोकतंत्र बीमार है,होगा कब उपचार।।
थाना अरु तहसील में,हावी रिश्वतखोर।
अविचल कब मिट पाइगा, भ्रष्ट तंत्र का जोर।।

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