13/01/2026
🕉️ महामृत्युंजय मंत्र के 33 अक्षर एवं 33 देवता 🕉️
ॐ त्र्यंबकम् मंत्र के 33 अक्षर,
महर्षि वशिष्ठ के अनुसार 33 देवताओं के घोतक हैं।
इन तैंतीस देवताओं में —
🔸 8 वसु
🔸 11 रुद्र
🔸 12 आदित्य
🔸 1 प्रजापति
🔸 1 षट्कार
इन सभी 33 देवताओं की सम्पूर्ण शक्तियाँ
महामृत्युंजय मंत्र में निहित होती हैं।
इसलिए महामृत्युंजय मंत्र का श्रद्धापूर्वक पाठ करने वाला प्राणी —
✨ दीर्घायु प्राप्त करता है
✨ नीरोग, ऐश्वर्ययुक्त व धनवान बनता है
✨ जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सुखी एवं समृद्धिशाली होता है
भगवान शिव की अमृतमयी कृपा उस पर निरंतर बरसती रहती है।
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*🔱 मंत्र के अक्षर एवं उनके अधिष्ठान देवता 🔱*
• त्रि – ध्रुववसु प्राण का घोतक है, जो सिर में स्थित है।
• यम् – अध्वरवसु प्राण का घोतक है, जो मुख में स्थित है।
• ब – सोम वसु शक्ति का घोतक है, जो दक्षिण कर्ण में स्थित है।
• कम् – जल वसु देवता का घोतक है, जो वाम कर्ण में स्थित है।
• य – वायु वसु का घोतक है, जो दक्षिण बाहु में स्थित है।
• जा – अग्नि वसु का घोतक है, जो वाम बाहु में स्थित है।
• म – प्रत्युवष वसु शक्ति का घोतक है, जो दक्षिण बाहु के मध्य में स्थित है।
• हे – प्रयास वसु, मणिबंध में स्थित है।
*🔸 रुद्र तत्त्व 🔸*
• सु – वीरभद्र रुद्र प्राण का बोधक है, दक्षिण हस्त की अंगुली के मूल में स्थित है।
• ग – शुम्भ रुद्र का घोतक है, दक्षिण हस्त अंगुली के अग्रभाग में स्थित है।
• न्धिम् – गिरीश रुद्र शक्ति का मूल घोतक है, बाएँ हाथ के मूल में स्थित है।
• पु – अजैकपात रुद्र शक्ति का घोतक है, वाम हस्त के मध्य में स्थित है।
• ष्टि – अहर्बुध्यत रुद्र का घोतक है, वाम हस्त मणिबंध में स्थित है।
• व – पिनाकी रुद्र प्राण का घोतक है, बाएँ हाथ की अंगुली के मूल में स्थित है।
• र्ध – भवानीश्वर रुद्र का घोतक है, वाम हस्त अंगुली के अग्रभाग में स्थित है।
• नम् – कपाली रुद्र का घोतक है, उरु मूल में स्थित है।
• उ – दिक्पति रुद्र का घोतक है, दक्षिण जानु में स्थित है।
• र्वा – स्थाणु रुद्र का घोतक है, दक्षिण गुल्फ में स्थित है।
• रु – भर्ग रुद्र का घोतक है, दक्षिण पादांगुली मूल में स्थित है।
*🔸 आदित्य तत्त्व 🔸*
• क – धाता आदित्य का घोतक है, दक्षिण पादांगुलियों के अग्रभाग में स्थित है।
• मि – अर्यमा आदित्य का घोतक है, वाम उरु मूल में स्थित है।
• व – मित्र आदित्य का घोतक है, वाम जानु में स्थित है।
• ब – वरुण आदित्य का बोधक है, वाम गुल्फ में स्थित है।
• न्धा – अंशु आदित्य का घोतक है, वाम पादांगुली मूल में स्थित है।
• नात् – भग आदित्य का बोधक है, वाम पादांगुलियों के अग्रभाग में स्थित है।
• मृ – विवस्वान (सूर्य) का घोतक है, दक्ष पार्श्व में स्थित है।
• र्त्यो – दण्ड आदित्य का बोधक है, वाम पार्श्व में स्थित है।
• मु – पूषा आदित्य का बोधक है, पृष्ठ भाग में स्थित है।
• क्षी – पर्जन्य आदित्य का घोतक है, नाभि स्थल में स्थित है।
• य – त्वष्टा आदित्य का बोधक है, गुह्य भाग में स्थित है।
• मां – विष्णु आदित्य का घोतक है, यह शक्ति स्वरूप दोनों भुजाओं में स्थित है।
*🔸 प्रजापति व षट्कार 🔸*
• मृ – प्रजापति का घोतक है, जो कंठ भाग में स्थित है।
• तात् – अमित षट्कार का घोतक है, जो हृदय प्रदेश में स्थित है।
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*🌺 निष्कर्ष 🌺*
उपरोक्त वर्णित स्थानों पर ये वसु, रुद्र, आदित्य एवं देवता
अपनी सम्पूर्ण शक्तियों सहित विराजमान रहते हैं।
जो प्राणी श्रद्धा एवं भक्ति के साथ
महामृत्युंजय मंत्र का पाठ करता है,
उसके शरीर के अंग-अंग की दिव्य रक्षा होती है।
*🕉️ ॐ नमः शिवाय 🕉️*
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