17/07/2025
अवध इंटरनेशनल एकेडमी में हुआ भव्य विद्यारंभ संस्कार :
नन्हें कदमों ने रखा शिक्षा के पावन पथ पर पहला कदम
अवध इंटरनेशनल एकेडमी में उस पावन दृश्य की अनुभूति हुई जब परंपरा, संस्कार और शिक्षा का संगम एक साथ देखने को मिला। विद्यालय के प्रांगण में आयोजित "विद्यारंभ संस्कार" ने यह साबित कर दिया कि जब शिक्षा की शुरुआत संस्कारों से होती है, तो उसका प्रभाव जीवनभर बना रहता है। यह आयोजन विशेष रूप से नर्सरी कक्षा में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों के लिए आयोजित किया गया था, जिनके लिए यह क्षण एक नई यात्रा की शुरुआत के रूप में रहा।
इस आयोजन का उद्देश्य केवल शैक्षिक सत्र की शुरुआत करना नहीं था, बल्कि भारतीय परंपरा के अनुसार बालकों के मन में ज्ञान के प्रति श्रद्धा, अनुशासन और जिज्ञासा की भावना का बीजारोपण करना भी था। ‘विद्यारंभ’ शब्द का अर्थ ही है – ‘विद्या का आरंभ’। यह वह संस्कार है जो एक बालक को शिष्य बनाता है और उसे गुरु के सान्निध्य में सीखने के लिए प्रेरित करता है।
कार्यक्रम की शुरुआत माँ सरस्वती की वंदना और दीप प्रज्वलन से हुई। विद्यालय की प्रधानाचार्या एवं शिक्षकगण की उपस्थिति ने वातावरण को और भी गरिमामयी बना दिया। मंत्रोच्चारण के साथ जब दीप जलाए गए, तो पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा।
इसके बाद नन्हें छात्रों को पारंपरिक विधियों से तिलक लगाकर, अक्षत (चावल), रोली, हल्दी और पुष्प से सजाया गया। पाटी और कलम उन्हें सौंपी गई, और शुद्ध भाव से 'माँ ' तथा ‘ॐ’ लिखवाया गया। इस प्रक्रिया को देखकर वहाँ उपस्थित सभी लोगों की आँखें नम हो गईं। यह एक ऐसा क्षण था जहाँ परंपरा और भावनाएँ एक साथ बह रही थीं।
विद्यालय की प्रधानाचार्या डॉ. ज्योति दुल्हानी जी ने अपने प्रेरणादायक भाषण में कहा, शिक्षा की शुरुआत केवल पाठ्यक्रम से नहीं होती, वह होती है सम्मान से, संस्कार से, गुरु के प्रति श्रद्धा से। आज के इस युग में जब शिक्षा केवल प्रतिस्पर्धा का माध्यम बनती जा रही है, ऐसे में विद्या की शुरुआत को संस्कार से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। यह आयोजन केवल बच्चों के लिए नहीं, बल्कि हम सभी के लिए एक स्मरण है कि शिक्षा का मूल उद्देश्य व्यक्तित्व का निर्माण और संस्कृति का संवहन है।”
बच्चों के चेहरों पर मुस्कान और आंखों में जिज्ञासा इस बात का प्रमाण थी कि वे इस समारोह का महत्व समझ रहे थे। अक्षर लेखन की सभी सामग्री के साथ-साथ बच्चों को चॉकलेट दी गई ।
इस आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि आधुनिक शिक्षा व्यवस्था में भी भारतीय परंपराओं को जीवित रखा जा सकता है। अवध इंटरनेशनल एकेडमी ने यह एक मिसाल कायम की है कि जब विद्यालय शिक्षा को संस्कृति से जोड़ते हैं, तो बच्चे केवल अच्छे विद्यार्थी ही नहीं, बल्कि अच्छे इंसान भी बनते हैं।ऐसे आयोजनों से यह स्पष्ट होता है कि यह विद्यालय अपने छात्रों को केवल परीक्षा के लिए नहीं, जीवन के लिए तैयार कर रहा है।”
इस भव्य आयोजन के साथ ही एक नवीन शैक्षणिक सत्र का शुभारंभ हुआ। बच्चों के साथ-साथ अभिभावकों और शिक्षकों के मन में भी नई ऊर्जा और उत्साह का संचार हुआ। यह ‘विद्यारंभ’ केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि एक विचार था – जो शिक्षा को एक संस्कार बनाता है।