कड़वी सच्चाई
श्रीजी माधव केशव tv
श्रीमद भागवत ,श्री राम कथा
दो रंगी रिश्ते अपनों की दुनिया मे से किसी को अपना नही बनना देते!
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बड़ी मुश्किल से अपने मिलते हैं,क्षणिक स्वार्थ में अपनों को न खो!
जय श्री राधे
श्रीमद्भागवत कथा एवं श्रीराम कथा के लिए संपर्क करें
9058921352
07/06/2023
#व्यासपीठ_पर_बेठने_के_अधिकारी_कौन_है ??
क्या आप ये जानते है???
#विरक्तो_वैष्णवो_विप्रो_वेदशास्त्र_विशुद्धिकृत्।
#दृष्टान्तकुशलो_धीरो_वक्ता_कार्योSतिनिःस्पृहः॥
#अनेकधर्मविभ्रान्ताः_स्त्रैणाःपाखण्डवादिनः।
#शुकशास्त्रकथोच्चारे_त्याज्यास्ते_यदि_पण्डिताः॥
_( #श्रीपद्मपुराणे उत्तरखण्डे श्रीमद्भागवत माहात्म्ये #श्रवणविधिकथनं नाम षष्ठोSध्यायः॥)_
#प्रथमलक्षण - वक्ता #विरक्त हो। (संसार से अथवा मन से)
#द्वितीयलक्षण - #वैष्णव हो। (वाह्य दृष्टि से अथवा आतंरिक दृष्टि से)
#तृतीयलक्षण - #विप्र हो। (अत्रि संहिता १४० देखे)
#चतुर्थलक्षण - #वेदशास्त्रों_का_विशुद्ध_ज्ञाता हो।
#पञ्चमलक्षण - दृष्टांत (शास्त्रीय) देने में कुशल हो (अर्थात् ग्रन्थ की कथा में छिपे रहस्य को समझाने हेतु दिए गए छोटे दृष्टांत जिनसे प्रसंगान्तर प्रतीत न हो उनको सरल, सहज, सुगम बनाकर ऐसे समझाए जिससे खेत में कार्यरत कृषक अथवा पढ़े-लिखे लोगों को भी समझ में आ जाए।)
#षष्ठंलक्षण - धीर हो अर्थात् #धैर्यवान हो।
#सप्तमलक्षण - #अतिनिःस्पृही हो। (अर्थात् लोभी-लालची न हो, कथा की दक्षिणा तय न करे, मन धन में न हो, व्यास-गद्दी को भीख का कटोरा किसी भी प्रकार से न बनाये न ही व्यक्तिगत जीवन में लोभ की प्रवृत्ति हो, अर्थात् त्यागी हो)
#अष्टमलक्षण - अनेक धर्मों में जिसका चित्त भ्रमित न हो! (अर्थात् स्वयं जीवन के परम-चरम लक्ष्य उस अखंड सत्य सत्ता परमात्मा को एक पल भी न भूले)
्षण - स्त्रीलोलुप न हो तथा 'पुरुष' ही हो।
्षण - #पाखंडी न हो अर्थात् 'उच्चारण' तथा 'आचरण'में यथासंभव भेद न हो।
हमारे शास्त्र ही हैं, जो हमें बताते हैं कि पवित्रतम #व्यासपीठ का सच्चा अधिकारी कौन अथवा कैसा होना चाहिये।
अगर किसी साधक में उपर्युक्त प्रमुख १० लक्षणों में से एक भी लक्षण कम है तो उसे #व्यासपीठ पर बैठकर इसकी मर्यादा को खण्डित नहीं करना चाहिये।
यदि शास्त्रानुसार कोई साधक उपर्युक्त गुणों से युक्त होकर #व्यासपीठ को ग्रहण करता है तो उसके द्वारा किये हुए उपदेश ही धर्म सहमत होता है अौर उसका प्रभाव श्रोताओं पर नि:संदेह होता है।
!!ज्ञानं भारः क्रिया विना!!
आचरण के बिना ज्ञान केवल भार होता है
इन लक्षणों के विरुद्ध व्यक्ति से यदि आप व्यास पीठ से
कोई भी कथा सुनेंगे वह आपके जीवन को व्यथा से पूर्ण कर देगी।
लक्षण विरुद्ध जब कोई व्यक्ति व्यास पीठ पर वैठता है
तव वह व्यासपीठ नही होती वह एक नाट्य मंच मात्र है
जिस मंच से नट नर्तकी सूत्रधार आदि कला का प्रदर्शन कर
मिथ्या वाह वाही लूटते है.....✍
एक जंगल में शेर शेरनी रहते थे। एक दिन वे अपने बच्चों को अकेला छोड़कर शिकार के लिये दूर तक गये।
जब देर तक नही लौटे तो बच्चे भूख से छटपटाने लगे।
उसी समय एक बकरी आई। उसे शेर के बच्चों पर दया आ गई। बकरी ने शेर के बच्चों को दूध पिलाया। बच्चे खेलनेकूदने मस्ती करने लगे।
तभी शेर शेरनी आ गये। बकरी को देख लाल पीले होकर शेर हमला करता,उससे पहले बच्चों ने कहा इसने हमें दूध पिलाकर बड़ा उपकार किया है नही तो हम मर जाते।
अब शेर खुश हुआ और कृतज्ञता के भाव से बोला हम तुम्हारा उपकार कभी नही भूलेंगे। जाओ आजादी के साथ जंगल मे घूमो फिरो मौज करो।
अब बकरी जंगल में निर्भयता के साथ रहने लगी यहाँ तक कि शेर के पीठ पर बैठकर भी कभी कभी पेड़ों के पत्ते खाती थी।
यह दृश्य चील ने देखा तो हैरानी से बकरी से पूछा। बकरी से पूरी घटना सुनकर उसे पता चला कि उपकार का कितना महत्व है।
चील ने सोचा कि एक प्रयोग मैं भी करती हूँ।
चूहों के छोटे छोटे बच्चे दलदल मे फंसे थे निकलने का प्रयास करते पर कोशिश बेकार।
चील ने उनको पकड़ पकड़कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया.
बच्चे भीगे थे,सर्दी से कांप रहे थे तब चील ने अपने पंखों में छुपाया, बच्चों को बेहद राहत मिली.
काफी समय बाद चील उड़कर जाने लगी तो हैरान हो उठी वह उड़ ही ना सकी। चूहों के बच्चों ने उसके पंख कुतर डाले थे।
आहतहृदय चील ने यह घटना बकरी को सुनाई और पूछा,'तुमने भी उपकार किया और मैंने भी फिर यह फल अलग-अलग क्यों?'
बकरी हंसी फिर गंभीरता से कहा....
उपकार करो,
तो शेरों पर करो
चूहों पर नही।
क्योंकि कायर कभी उपकार को याद नही रखते और बहादुर कभी उपकार नही भूलते...!!!
अगर आप सुपात्र की पहचान नहीं कर सकते तो दान या उपकार ना करना ही ज्यादा श्रेयष्कर है।
बड़ेबूढ़े कह गए हैं कि स्नेह,विश्वास,दान,उपकार,समर्थन या प्रचार करने से पहले यह सदैव सुनिश्चित कर लो कि दान या उपकार को पानेवाला व्यक्ति सुपात्र है या कुपात्र अन्यथा अगर आप भूल से किसी कुपात्र को दान या समर्थन देकर पुष्ट बनाने का अपराध करते हैं तो ना सिर्फ आप भविष्य में छले जाते हैं बल्कि उस समर्थन की सहायता से प्राप्त शक्ति द्वारा किए गए उसके सभी पापकर्मों के सहभागी भी बनते हैं।
(बहुत ही गहरी बात है,समझें तो ठीक,नहीं तो समय बड़ा बलवान है वह स्वयं ही समझा देगा)
ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय 🚩
07/06/2023
गहराई से सोचो !
आपकी ज़िंदगी का कोच कौन है ??
#जीवन_मे_सच्चे_गुरु_की_आवश्यकता
#अनीता_अल्वारेज,
अमेरिका की एक पेशेवर तैराक हैं जो वर्ल्ड चैंपियनशिप के दौरान परफॉर्म करने के लिए स्विमिंग पूल में जैसे ही छलांग लगाई , वो छलांग लगाते ही पानी के अंदर बेहोश हो गई ,
जहाँ पूरी भीड़ सिर्फ़ जीत और हार के बारे में सोच रही थी वहीं उसकी कोच एंड्रिया ने जब देखा कि अनीता एक नियत समय से ज़्यादा देर तक पानी के अंदर है ,
एंड्रिया पल भर के लिए सब कुछ भूल गई कि वर्ल्ड चैंपियनशिप प्रतियोगिता चल रही है , एक पल भी व्यर्थ ना करते हुए एंड्रिया चलती प्रतियोगिता के बीच में ही स्विमिंग पूल में छलांग लगा दी ,
वहाँ मौजूद हज़ारों लोग कुछ समझ पाते तब तक एंड्रिया पानी के अंदर अनीता के पास थी ,
एंड्रिया ने देखा कि अनीता स्विमिंग पूल में पानी के अंदर बेहोश पड़ी है ,
ऐसी हालत में ना हाथ पैर चला सकती ना मदद माँग सकती ,
एंड्रिया ने अनीता को जैसे बाहर निकाला मौजूद हज़ारों लोग सन्न रह गए , एंड्रिया ने अनीता को तो बचा लिया ,
लेकिन हम सबकी ज़िंदगी में बहुत बड़ा सवाल छोड़ गई !
इस दुनियाँ में ना जाने कितने लोग हम सबकी ज़िंदगी से जुड़े हैं कितनों से रोज़ मिलते भी होंगे ,
जो इंसान हर किसी से अपने मन की बात नहीं कह पाता कि असल ज़िंदगी में वह भी कहीं डूब रहा है , वह भी किसी तकलीफ़ से गुज़र रहा है , वह भी किसी बात को लेक़र ज़िंदगी से परेशान हो रहा है , लेकिन बता नहीं पा रहा है
जब इंसान किसी को अपने मन की व्यथा , अपनी परेशानी नहीं बता पाता तो मानसिक तनाव इतना बढ़ जाता है कि वह ख़ुद को पूरी दुनियाँ से अलग़ कर लेता है , सबकी नज़रों से दूर एकांत में ख़ुद को चारदीवारी में क़ैद कर लेता है ,
ये वक़्त ऐसा होता है कि तब इंसान डूब रहा होता है , उसका मोह ख़त्म हो चुका होता है , ना किसी से बात चीत ना किसी से मिलना जुलना ,
ये स्थिति इंसान के लिए सबसे ख़तरनाक होती है ,
जब इंसान अपने डूबने के दौर से गुज़र रहा होता है , तब बाक़ी सब दर्शकों की भाँति अपनी ज़िंदगी में व्यस्त होते हैं किसी को ख़्याल ना होता कि एक इंसान किसी बड़ी परेशानी में है ,
अगर इंसान कुछ दिन के लिए ग़ायब हो जाए तो पहले तो लोगों को ख़्याल नहीं आएगा , अगर कुछ को आ भी जाए तो लोग यही सोचेंगे , पहले कितनी बात होती थी अब वो बदल गया है या फिर उसे घमंड हो गया है या अब तो बड़ा आदमी बन गया है इसलिए बात नहीं करता , जब वो बात नहीं करता तो हम कियूँ करें !
या फिर ये सोच लेते हैं कि अब दिखाई ना देता तो वो अपनी ज़िंदगी में मस्त है इसलिए नहीं दिखाई देता ,
अनीता पेशेवर तैराक होते हुए डूब सकती है तो कोई भी अपनी ज़िंदगी में बुरे दौर से गुज़र सकता है , ये समझना ज़रूरी है
लेकिन उन लोगों से हट कर कोई एक इंसान ऐसा भी होगा जो आपकी मनोस्थिति तुरंत भाँप लेगा , उसे बिना कुछ बताये सब पता चल जाएगा , आपकी ज़िंदगी के हर पहलू पर हमेशा नज़र रखेगा , थोड़ा सा भी परेशान हुए वो आपकी परेशानी आकर पूछने लगेगा ,
आपके बेहवियर को पहचान लेगा , आपको हौसला देगा आपको सकारात्मक बनायेगा और एंड्रिया की तरह कोच बन कर आपकी ज़िंदगी को बचा लेगा ,
हम सबको ऐसे कोच की ज़रूरत पड़ती है…
ऐसा कोच कोई भी हो सकता है , आपका भाई , बहन , माँ , पापा ,शिक्षक या सच्चा गुरु
आपका कोई दोस्त , आपका कोई हितैषी , आपका कोई रिश्तेदार , कोई भी , जो बिना बताये आपके भावों को पढ़ ले और तुरंत एक्शन ले।
गहराई से सोचो आपकी ज़िंदगी का कोच कौन है ??
साभार
ll सर्वे भवंतु सुखिन:
#कृष्णा
16/03/2023
I have reached 600 followers! Thank you for your continued support. I could not have done it without each of you. 🙏🤗🎉
काफी बरसों पहले पढ़ा था..!
पोथी पढ़ पढ़ जग मुआ पंडित भया न कोय।
ढाई अक्षर प्रेम के, पढ़े सो पंडित होय॥
अब पता लगा है कि, ढाई अक्षर है क्या..?
तब से मन शांत हो गया..!!
ढाई अक्षर के ब्रह्मा और, ढाई अक्षर की सृष्टि..!
ढाई अक्षर के विष्णु और, ढाई अक्षर की लक्ष्मी..!!
ढाई अक्षर की दुर्गा और, ढाई अक्षर की शक्ति..!!
ढाई अक्षर की श्रद्धा और, ढाई अक्षर की भक्ति..!
ढाई अक्षर का त्याग और, ढाई अक्षर का ध्यान..!!
ढाई अक्षर की इच्छा और, ढाई अक्षर की तुष्टि..!
ढाई अक्षर का धर्म और, ढाई अक्षर का कर्म..!!
ढाई अक्षर का भाग्य और, ढाई अक्षर की व्यथा..!
ढाई अक्षर का ग्रन्थ और, ढाई अक्षर का सन्त..!!
ढाई अक्षर का शब्द और, ढाई अक्षर का अर्थ..!
ढाई अक्षर का सत्य और, ढाई अक्षर की मिथ्या..!!
ढाई अक्षर की श्रुति और, ढाई अक्षर की ध्वनि..!
ढाई अक्षर की अग्नि और, ढाई अक्षर का कुण्ड..!!
ढाई अक्षर का मन्त्र और, ढाई अक्षर का यन्त्र..!
ढाई अक्षर की श्वांस और, ढाई अक्षर के प्राण..!!
ढाई अक्षर का जन्म और, ढाई अक्षर की मृत्यु..!
ढाई अक्षर की अस्थि और, ढाई अक्षर की अर्थी..!!
ढाई अक्षर का प्यार और, ढाई अक्षर का युद्ध..!
ढाई अक्षर का मित्र और, ढाई अक्षर का शत्रु..!!
ढाई अक्षर का प्रेम और, ढाई अक्षर की घृणा..!
जन्म से लेकर मृत्यु तक हम, बंधे हैं ढाई अक्षर में..!!
हैं ढाई अक्षर ही वक़्त में और, ढाई अक्षर ही अन्त में..!
समझ न पाया कोई भी, है रहस्य क्या ढाई अक्षर में..!!
*महापुरुषों की गूढ़ रहस्यों से भरी भाषा को शत-शत नमन.*🙏🏻🙏🏻
*बुढापे की लाठी-"बहु"*
लोगों से अक्सर सुनते आये हैं कि बेटा बुढ़ापे की लाठी होता है।इसलिये लोग अपने जीवन मे एक "बेटा" की कामना ज़रूर रखते हैं ताकि बुढ़ापा अच्छे से कटे।
ये बात सच भी है *क्योंकि बेटा ही घर में बहु लाता है।* बहु के आ जाने के बाद एक बेटा अपनी लगभग सारी जिम्मेदारी अपनी पत्नी के कंधे पर डाल देता है।
और *फिर बहु बन जाती है अपने बूढ़े सास-ससुर की बुढ़ापे की लाठी।*
जी हाँ मेरा तो यही मनाना है वो बहु ही होती है जिसके सहारे बूढ़े सास-ससुर अपना जीवन अच्छे से व्यतीत करते हैं।
*एक बहु को अपने सास-ससुर की पूरी दिनचर्या मालूम होती है*।कौन कब और कैसी चाय पीते है, क्या खाना बनाना है, शाम में नाश्ता में क्या देना,रात को हर हालत में 9 बजे से पहले खाना बनाना है।अगर सास-ससुर बीमार पड़ जाए तो पूरे मन या बेमन से बहु ही देखभाल करती है।
अगर एक दिन के लिये बहु बीमार पड़ जाए या फिर कही चले जाएं, तो पूरे घर की धुरी हिल जाती है ।। परंतु यदि बेटा 15 दिवस की यात्रा पर भी चला जाये तो भी बहू के भरोसे घर सुचारू रूप से चलता रहता है ।।
बिना बहू के सास-ससुर को ऐसा लगता है जैसा उनकी लाठी ही किसी ने छीन ली हो। वे चाय नाश्ता से लेकर खाना के लिये छटपटा जाएंगे।कोई और पूछने वाला उनके पास नही होता ।
क्योंकि बेटे के पास समय नही है,और अगर बेटे को समय मिल जाये भी तो वो कुछ नही कर पायेगा क्योंकि उसे ये मालूम ही नही है *कि माँ-बाबूजी को सुबह से रात तक क्या क्या देना है।*
क्योंकि बेटे के चंद सवाल है और उसकी ज़िम्मेदारी खत्म...
जैसे माँ-बाबूजी को खाना खाएं,चाय पियें, नाश्ता किये, लेकिन कभी भी ये जानने की कोशिश नही करते कि वे क्या खाते हैं कैसी चाय पीते हैं।ये लगभग सभी घरों की कहानी है।मैंने तो ऐसी बहुएं देखी है जिसने अपनी सास की बीमारी में तन मन से सेवा करती थी,
और ऐसे कई बहु के उदाहरण हैं!
कभी अगर बहु दुनिया से चले जाएं तो बेटा फिर एक बहु ले आता है, क्योंकि वो नही कर पाता अपने माँ-बाप की सेवा,उसे खुद उस बहु नाम की लाठी की ज़रूरत पड़ती है। *इसलिये मेरा मानना है कि बहु ही होती हैं बुढ़ापे की असली लाठी* ।
अतः अपनी बहू में सिर्फ *कमिया* मत ढूंढे, उसकी *अच्छाइयों* की कद्र करे ।।
*संदेश*-
*बहु की त्याग और सेवा को भी पहचानिएं*
*बेटे से पहले बहु को अपना मानो*❗
08/02/2022
पोस्ट -( 1316 ) - श्री मद् भागवत महापुराण - ( ११६ ) - परमहंस संहिता -समीक्षा -- जरासंध द्वारा मथुरा पर आक्रमण --- स्कन्ध 10 अध्याय 50 --
****** कर्म प्रधान विश्व रचि राखा । जो जस करै सो तस फल चाखा ।। ******
🚫 गर्ग संहिता के अनुसार - भगवान श्री कृष्ण द्वारा मुक्त किये गए धोबी ( रजक ,), दर्जी , माली के पूर्व जन्म का परिचय --
🎈 रामावतार के समय जिस #धोबी ने श्री सीता जी पर झूठे लांछन लगाये थे जिसके कारण सीता जी को श्री राम ने त्यागा था , वही धोबी कंस के कपड़े लेकर जा रहा था - उस जन्म में उसके किये भयँकर पाप की सजा #उसे_श्री_कृष्ण_रूप_में_प्रभु_ने_सजा_में_मृत्यु_देकर_मुक्ति_प्रदान_की ---
🎈 श्री जनक जी के यहां जिस दर्जी ने श्री सीता जी व राम जी के कपड़े सिले थे ,उसने ही बालक रूप में मथुरा में आकर धोबी से मिले कपड़ों को ठीक किया था । श्री कृष्ण आदि के पकड़े ठीक करने वाला वही दर्जी था और
🎈 कुबेर का माली जो परम् हरि भक्त था वह ही माली रूप में आया था ,प्रभु ने उन दोनो के यहां जाकर उन्हें परम् सौभाग्य प्रदान किया ---
🎈 इच्छारूप धारण करने वाली #राक्षसी_सूपनखा_ही_कुब्जा_हुई_थी -- श्री राम रावण युद्ध के बाद खिन्न चित्त होकर सूपनखा पुष्कर तीर्थ चली गयी थी और वहां जल में खड़े होकर श्री राम को पति रूप में पाने की लालसा से भगवान शंकर की काफी लंबे समय तक तपस्या की थी - भगवान शंकर ने द्वापर के अंत मे उसकी कामना पूर्ण होने का वरदान दिया था - श्रीकृष्ण की कृपा से कुब्जा से अति सुंदरी तरुणी बनकर उसने श्री कृष्ण के रूप में परम् प्रभु का सानिध्य प्राप्त किया -
🎈 दैत्यराज दानवीर #बलि_का_पुत्र , समस्त शस्त्र धारियों में श्रेष्ठ, हजारो हाथियों के समान बलवान ,जिसका नाम " #मन्दमति" था एक बार , मतवाली चाल से चलते समय एक बूढ़े " त्रित " मुनि को गिरा देने के कारण वह , मुनि के श्राप से " #कुबलियापीड " हाथी बना -
🎈पूर्वकाल में अमरावतीपुरी में " उतथ्य " नाम के प्रसिद्ध महामुनि के कामदेव के समान कांतिवान पांचों पुत्रो ने ब्राम्हणोचित कर्मो , वेदाध्ययन आदि को त्याग कर , मद से उन्मत्त होकर , राजा बलि के यहां प्रतिदिन मल्लयुद्ध की शिक्षा लेनी प्रारम्भ की थी - तब क्रोधवश पिता उतथ्य मुनि के श्राप से वे पांचों , चारूड , मुष्टिक ,कूट , शल ,और तोषल - के रूप में अवतरित हुए और फिर कंस के अनुयायी बन गए थे -
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महाबली कंस के मारे जाने पर ,उसकी दोनो पत्नियां -- #अस्ति_और_प्राप्ति - बड़े दुख के साथ अपने पिता महाबली राजा जरासंध के पास गयी , श्री कृष्ण द्वारा कंस के मारे जाने का समाचार सुनकर जरासंध ने अत्यंत कुपित होकर इस भूतल को यदुवंशियों से शून्य कर देने के उद्देश्य से बहुत विशाल सेना के साथ मथुरापुरी पर आक्रमण कर दिया - जरासंध को निमित्त बनाकर पृथ्वी पर के दुष्ट और पापी राजाओ को नष्ट करने और साधु पुरुषों का प्रिय करने के उद्देश्य से प्रभु श्री कृष्ण ने उनका संहार कर पृथ्वी का भार उतारने का निश्चय किया ।
🔕 श्री कृष्ण बलराम जी के साथ मथुरा नगर से बाहर निकले फिर उनके स्मरण करते ही आकाश से दो दिव्य रथ ,सभी दिव्य शस्त्रों के सहित उतर आए । सारथी दारूक के अनुरोध पर भगवान श्री कृष्ण ,अपने दिव्य रथ पर और दूसरे पर श्री बलराम जी आरूढ़ हुए और अपनी सेना के साथ जरासंध से युद्ध करने
मथुरा नगर के बाहर निकले -
🌏 जरासंध के साथ ही धृतराष्ट्र पुत्र #दुर्योधन , विन्ध्य देश और बंग देशों के राजा भी सेनाओ के साथ , प्रभु से युद्ध करने लगे -श्री कृष्ण ने अपने शारंगधनुष से विरोधियों की सारी सेनाओं का नाश कर दिया -
इस प्रकार जरासंध की सेनाओं का सभी ओर से संहार हो जाने पर , दुर्योधन ,विन्धराज और बंग नरेश सब भयभीत होकर रण भूमि से भाग गए - जरासंध को बलराम जी ने परास्त करके उसका वध करना चाहा तभी श्री कृष्ण ने उन्हें रोक दिया और जरासंध को रिहा करवा दिया - अपमानित हारा हुआ जरासंध वापस अपने नगर चला गया ।
🌋 युद्ध मे जो कुछ धन वित्त हाथ लगा वह सब लेकर श्री कृष्ण और बलराम ने सूतो ,माग़धो , और वंदीजनो से विजय गान सुनते हुए ,शंख ध्वनि ,दुन्दुभी नाद और वेद मंत्रों के भारी घोष के साथ मथुरा नगर में प्रवेश किया ।
🚫 जरासंध ने फिर उतनी ही सेनाओं के साथ मथुरा पर 17 बार आक्रमण किया परंतु श्री कृष्ण ने
हर बार उसकी सारी सेना नष्ट करके दुष्ट राजाओं को मारकर पृथ्वी का भार उतारने के अपने संकल्प को पूरा किया । परन्तु जरासंध को पराजित कर जीवित छोड़ दिया -
🍎 गर्ग संहिता के अनुसार -- श्री कृष्ण के प्रभाव से समस्त यादव अभ्युदय को प्राप्त हुए ,उन्हें अस्त्रो के बल से सदा आक्रमणकारी शत्रुओं को लूटने का साहस हो गया ,
🔕 तब बालक और पनिहारिने भी बिना युद्ध के ही शत्रुओं की सम्पत्ति का हरण करने लगी 🔕
इस प्रकार सत्रह बार अपनी सेना का संहार कराकर जरासंध परास्त हुआ -तदनन्तर अट्ठारहरवी बार उसके साथ महाबली #कालयवन ने भी बहुत विशाल मलेच्छो की सेना के साथ मथुरा पर डेरा डाल दिया -मलेच्छो की सेना देखकर , अपने नगर को भयविव्हल जानकर ,दोनो ओर से आने वाले भय पर विचार करके श्री कृष्ण , बलराम जी के साथ चिंतित हो गए -
🎈अपने सजातीय बन्धुओ की रक्षा के लिए ,माधव ने भयँकर गर्जना करने वाले समुद्र के भीतर ,एक ही रात में #द्वारका दुर्ग का निर्माण कराया --वहां विश्वकर्मा ने आठो दिग्पालों की सिद्धियां निर्मित की ,तथा वहां बैकुंठ की सारी सम्पत्ति का दर्शन होता था -
🌏 तदन्तर श्री हरि ने योग शक्ति से समस्त आत्मीय जनों को द्वारका दुर्ग में पंहुचा कर वे बलराम जी की आज्ञा लेकर मथुरा नगर से बिना अस्त्र सस्त्र के ही बाहर निकले --
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05/02/2022
भीष्म पितामह ने अर्जुन को 4 प्रकार का भोजन ना करने की सलाह दी।
1:- जिस थाली को क़ोई व्यक्ति लांघ कर गया हो वह भोजन नाली में पड़े कीचड़ के समान है!वह भोजन योग्य नहीं है!
2:- जिस थाली को ठोकर लग गई या पांव लग गया वह भोजन भिष्टा के समान है!वह भोजन योग्य नहीं है!
3:- जिस भोजन की थाली में या भोजन में बाल (केश) पड़ा हो वह दरिद्रता के समान है!भोजन योग्य नहीं है!
4:- जिस थाली में पति पत्नी एक साथ भोजन कर रहे हों वह भोजन भी योग्य नहीं है!लेकिन पत्नी अगर अपने पति की झूठी थाली या पति का झूंठा खाती है!तो उसे चारों धाम का पुण्य फल मिलता है!
हे अर्जुन बेटी अगर कुमारी हो और पिता के साथ एक ही थाली में भोजन करती है! तो उस पिता की कभी अकाल मृत्यु नहीं हो सकती क्योंकि बेटी पिता की अकाल मृत्यु को हर लेती है!
और स्मरण रखियेगा ☝️☝️
संस्कार दिये बिना सुविधाएं देना ही पतन का कारण है!
सुविधाएं अगर आपने बच्चों को नहीं दी,तो वो थोडी देर ही रोयेंगे लेकिन संस्कार नहीं दिये तो वो जिन्दगी भर रोयेंगे 🙏🙏🙏🙏
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