19/06/2026
चंद्रमा के पास अपनी रोशनी नहीं है, फिर वह सफेद क्यों दिखाई देता है?
चंद्रमा अपने आप रोशनी पैदा नहीं करता। यानी चंद्रमा सूर्य की तरह जलता हुआ तारा नहीं है। फिर भी हमें रात में चंद्रमा चमकता हुआ और सफेद दिखाई देता है, क्योंकि वह सूर्य की रोशनी को परावर्तित करता है।
इसे आसान भाषा में ऐसे समझिए:
जैसे अंधेरे कमरे में कोई सफेद दीवार हो। अगर उस दीवार पर टॉर्च की रोशनी डालें, तो दीवार चमकती हुई दिखाई देती है। दीवार खुद रोशनी नहीं बना रही होती, वह बस टॉर्च की रोशनी को हमारी आँखों तक वापस भेज रही होती है।
ठीक यही काम चंद्रमा करता है।
सूर्य की रोशनी चंद्रमा की सतह पर पड़ती है। चंद्रमा की सतह उस रोशनी का कुछ हिस्सा वापस अंतरिक्ष में परावर्तित कर देती है। जब वही परावर्तित रोशनी हमारी आँखों तक पहुँचती है, तो हमें चंद्रमा चमकता हुआ दिखाई देता है।
चंद्रमा सफेद क्यों दिखता है?
सूर्य की रोशनी हमें सफेद दिखती है, लेकिन असल में उसमें कई रंग मिले होते हैं — लाल, नारंगी, पीला, हरा, नीला, जामुनी आदि। जब सूर्य की यह मिली-जुली रोशनी चंद्रमा की सतह से टकराकर वापस आती है, तो वह हमें लगभग सफेद या हल्की पीली-सफेद दिखाई देती है।
चंद्रमा की सतह मिट्टी, धूल और चट्टानों से बनी है। इसे लूनर डस्ट या चंद्र धूल भी कहा जाता है। यह सतह सूर्य की रोशनी को पूरी तरह शीशे की तरह वापस नहीं फेंकती, बल्कि थोड़ी मात्रा में रोशनी फैलाकर परावर्तित करती है। इसी वजह से चंद्रमा हमें चमकदार सफेद-सा दिखाई देता है।
फिर चंद्रमा कभी पीला या लाल क्यों दिखता है?
कई बार चंद्रमा सफेद नहीं, बल्कि पीला, नारंगी या लाल दिखाई देता है। ऐसा खासकर तब होता है जब चंद्रमा क्षितिज के पास होता है, यानी उगते या डूबते समय।
उस समय चंद्रमा की रोशनी को हमारी आँखों तक पहुँचने से पहले पृथ्वी के वायुमंडल की मोटी परत से होकर गुजरना पड़ता है। वायुमंडल नीली रोशनी को ज्यादा फैला देता है और लाल-पीली रोशनी हमारी आँखों तक ज्यादा पहुँचती है। इसलिए चंद्रमा हमें पीला, नारंगी या लाल दिखाई दे सकता है।
यही कारण है कि कई बार पूर्णिमा का चाँद बहुत बड़ा और हल्का पीला या नारंगी लगता है।
चंद्रमा इतना चमकदार क्यों लगता है?
चंद्रमा असल में सूर्य जितना चमकदार नहीं है। वह सूर्य की रोशनी का बहुत कम हिस्सा ही वापस लौटाता है। लेकिन रात में आसमान अंधेरा होता है, इसलिए चंद्रमा हमें बहुत चमकीला दिखाई देता है।
मतलब चंद्रमा बहुत ज्यादा रोशनी नहीं दे रहा होता, बल्कि अंधेरे आसमान के मुकाबले वह ज्यादा चमकदार लगता है।
चंद्रमा के घटने-बढ़ने का कारण भी यही रोशनी है
चंद्रमा हमेशा सूर्य की रोशनी से आधा प्रकाशित रहता है, लेकिन पृथ्वी से हमें उसका उतना ही हिस्सा दिखाई देता है जितना हमारी तरफ रोशन होता है।
इसी वजह से हमें कभी पूरा चाँद दिखाई देता है, कभी आधा, कभी छोटा टुकड़ा और कभी बिल्कुल नहीं। इन्हें हम चंद्रमा की कलाएँ कहते हैं — जैसे अमावस्या, अर्धचंद्र और पूर्णिमा।
आसान निष्कर्ष
चंद्रमा की अपनी कोई रोशनी नहीं होती। वह सूर्य की रोशनी को परावर्तित करता है। सूर्य की सफेद रोशनी चंद्रमा की धूल और चट्टानों वाली सतह से टकराकर हमारी आँखों तक आती है, इसलिए चंद्रमा हमें सफेद और चमकता हुआ दिखाई देता है।
सीधी बात:
चंद्रमा खुद नहीं चमकता, वह सूर्य की रोशनी उधार लेकर चमकता हुआ दिखाई देता है।