30/07/2018
भारत का सामान्य परिचय
पुराणों में ‘आर्यावर्त ’ के नाम से विख्यात इसका नाम उत्तर में बसने वाले आर्यों के नाम पर पड़ा ।पुनः राजा भरत (दुष्यन्त के पुत्र) के नाम पर भारतवर्ष पड़ा । वैदिक आर्यों ने उत्तर-पश्चिम की ओर बहने वाली यहाँ की नदी को सिन्धु कहा, जिसे ईरानियों ने हिन्दू कहा । इसी आधार पर भारत देश को ‘हिन्दुस्तान’ कहा गया । इसी प्रकार यूनानियों तथा रोमवासियों ने सिन्धु को क्रमशः इण्डोस और इण्डस तथा इस क्षेत्र को ‘इंडिया’ कहना प्रारम्भ किया ।
भारत: विविधताओं का देश
भारत एक विशाल देश है । यह श्रीलंका से 45 गुना, इंग्लैण्ड से 12, जापान से 8 तथा पाकिस्तान से 4 गुना बड़ा है, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका का एक तिहाई तथा रूस का 5वां भाग है । इस प्रकार 32,87,782/ वर्ग कि.मी. क्षेत्र में विस्तृत यह विश्व का सातवां (2.4%) बड़ा देश है । इससे अधिक क्षेत्रफल में 6 देश अवरोही क्रम में इस प्रकार हैं - रूस, कनाड़ा, चीन, संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्राजील तथा आस्ट्रलिया ।
जनसंख्या की दृष्टि से यह चीन के बाद विश्व का दूसरा (16.7%) बड़ा देश है । इस विशालता के बावजूद यह सदैव से एक अखण्ड भौगोलिक इकाई रहा है । यहाँ अनेक विदेशी अपनी संस्कृति लेकर आए; यथा प्राचीन काल में आर्य, मंगोल, तुर्क, हूण आदि । उत्तर से स्थलीय भाग होकर आए जबकि मध्यकाल में ज्यादातर विदेशी जैसे - अंगे्रज, डच, पुर्तगाली आदि दक्षिण के जलीय भाग होकर भारत आए ।
प्राचीन काल में आए अधिकांश विदेशी भारतीय संस्कृति में आत्मसात हो गए । प्रो0 डोडवैल ने ठीक ही कहा है कि ‘भारतीय संस्कृति एक विशाल महासागर के समान है, जिसमें अनेक दिशाओं से विभिन्न जातियाँ और धर्म रूपी नदियाँ आकर विलीन होती है ।’’ वर्तमान युग में इसी तरह की विशेषताओं को बहुत हद तक अमेरिका धारण करता है । यही कारण है कि इसे - ‘मेल्टिंग पॉट ;(Melting Pot) जैसे विशेषणों में अभिहित किया जाता है ।
भारत अनेक विभिन्नताओं वाला देश है । यहाँ किसी भी अन्य महाद्वीप की अपेक्षा अधिक विविधता मिलती है । यहाँ प्राचीनतम आर्कियन युग से लेकर आज तक की नवीनतम चट्टानें एवं पर्वत श्रेणियां पाई जाती हैं । विषुवतरेखीय से लेकर ध्रुवीय जलवायु वनस्पतियाँ, मिट्टियाँ आदि पाई जाती हैं । विश्व की सभी प्रजाति, धर्म, विचार तथा विविध मानवीय क्रिया-कलापों में संलग्न लोग यहाँ निवास करते हैं ।