20/12/2020
#जोहार जय आदिवासी
कौन है बेलोसा बबीता कच्छप क्यों पूरे देश का आदिवासी उनकी गिरफ़्तारी से आक्रोश में आ गया ?
क्यों सरकार को नक्सली बोल कर गिरफतार करना पड़ा ??
तो सुनो ये वो शेरनी है जो आदिवासी महासभा और पूरे देश के आदिवासीयों का थिंक टैंक है और कानून का मास्टर ब्लास्टर है।
इनकी सुप्रीम कोर्ट में तीन याचिका दर्ज है एक है आदिवासी क्षेत्र में चुनाव असंवैधानिक है, दूसरी है 5वीं अनुसूची के पालन के लिए,और तीसरी ipc और crpc के लिए।।
एक महिला जो घर तो छोड़ो जिला छोड़ो राज्य छोड़कर पूरे देश में जनजागरण कर रही है, जिसने अपने जीवन अपने समाज और लोगों के लिए समर्पित कर दिया।
बेलोसा बबीता कच्छप वो क्रांतिकारी योद्धा है जो खूंटी में कई अधिकारियों (कार्यपालिक शक्ति) से 1500 ग्राम वासियों के साथ ग्राम सभा और आदिवासीयों हक़ और अधिकारों के लिए खुला बहस करती है उनकी संवैधानिक जानकारी के सामने सरकार की कार्यपालिक शक्ति भी कुछ नहीं कर सकी।
उन्होंने आदिवासियों को सबसे पहले सिखाया की वो इस देश का मूल मालिक है उन्होंने आदिवासियों को उनकड हक़ और अधिकारों की शिक्षा दी और अपने हक़ और अधिकारों के लिए संघर्ष करने की ताकत दी।
बेलोसा बबीता कच्छप उस बलिदान का नाम है जिसे बिरसा मुंडा ने दिया था,
बेलोसा बबीता क उस त्याग का नाम है जो आदिवासियों के लिए गोविन्द गुरू ने किया।
बेलोसा बबीता कच्छप उस बलिदान का नाम है टांट्या मामा ने दिया। वो आदिवासी समाज की अम्बेडकर है जिन्होंने आदिवासियों को संवैधानिक शिक्षा प्रदान की उन्हें उनके हक़ और अधिकारों की जानकारी दी जो संविधान प्रदत्त है।
जोहार बेलोसा बबीता कच्छप।
जय बिरसा जय आदिवासी।।