Aakarsh Classes

Aakarsh Classes An institute of IIT-JEE(Mains+Adv.) | NEET | Pre-Foundation | NTSE | KVPY | Olympaid | Board

शिवरात्रि का अर्थ शिव की रात। शास्त्र के अनुसार, हर सोमवार का दिन शिव की पूजा के लिए उपयुक्त है। हर महीने के कृष्णपक्ष क...
01/03/2022

शिवरात्रि का अर्थ शिव की रात। शास्त्र के अनुसार, हर सोमवार का दिन शिव की पूजा के लिए उपयुक्त है। हर महीने के कृष्णपक्ष की चतुर्दशी तिथि शिवरात्रि होती है। फाल्गुन में महीने में वही खास तिथि महाशिवरात्रि हो जाती है।

महाशिवरात्रि के दिन देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में शिवभक्तों का जमावड़ा लगता है। इनके नाम हैं- सोमनाथ, मल्लिकार्जुन, महाकालेश्वर, औंकारेश्वर, केदारनाथ, भीमशंकर, विश्वेश्वर, त्र्यंबकेश्वर, वैद्यनाथ, नागेश्वर, रामेश्वर और घिष्णेश्वर। हिंदू शैव संप्रदाय वालों के लिए यह सबसे बड़ा धार्मिक अनुष्ठान है। दुनिया के सभी शिवालयों में इस दिन अंधकार और अज्ञानता को दूर करने का संकल्प लिया जाता है। दिनभर उपवास रखकर शिवलिंग को दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल से स्नान कराया जाता है।

शिवपुराण के अनुसार, इसी रात शिव और पार्वती का विवाह हुआ था। इसका मतलब हुआ, शिव और शक्ति या फिर पुरुष और आदिशक्ति यानी प्रकृति का मिलन। एक और मान्यता है कि इसी दिन बह्माण्ड की रचना हुई थी।

सती के शोक में भगवान शिव गहन समाधि में चले गए, ध्यानमग्न हो गए। उनके ध्यान को कोई तोड़ ही नहीं पाता। भगवान विष्णु और ब्रह्मा भी सारे जतन करके हार गए। सृष्टि का संचालन भी बाधित होने लगा। देवतागण की समझ में नहीं आ रहा था कि भगवान शिव का ध्यान तोड़ने के लिए क्या जाए?

दूसरी तरफ हिमालय की बेटी के रूप में सती का पुनर्जन्म होता है। उनका नाम रखा गया- पार्वती। पार्वती शिव को पाने के लिए कठिन तपस्या करती हैं। पहले तो शिव ने पार्वती को तपस्या करने से रोक दिया, लेकिन अन्य देवताओं के सहारे पार्वती शिव का मन जीत लेती हैं।

फिर एक विशाल समारोह में शिव-पार्वती का विवाह हुआ। उस दिन भी फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि थी। इसीलिए लड़कियां शिव के समान वर पाने के लिए इस दिन शिव की पूजा करती हैं। मध्यकालीन इतिहास से पता चलता है कि संसार की मंगल कामना के लिए लड़कियां, विवाहित, विधवाएं सभी स्त्रियां शिवरात्रि का व्रत करती हैं।



......

28/02/2022

National Science Day is celebrated across India on February 28 every year to mark the contribution of scientists towards the development of the country. It also commemorates the discovery of the Raman Effect by prominent physicist Sir Chandrasekhara Venkata Raman. Back in 1930, sir CV Raman was awarded the Nobel Prize for Raman Effect.

Why do we celebrate National Science Day?

The main aim to celebrate National Science Day is to commemorate the discovery of the Raman Effect by Nobel laureate, physicist CV Raman. Raman Effects refers to the phenomenon in spectroscopy discovered by Noble Prize-winning Physicist. Sir CV Raman discovered the effect while working in the laboratory of the Indian Association for the Cultivation of Science, Kolkata.

The National Council for Science & Technology asked the government of India in 1986 to designate February 28 as National Science Day. Since 1987, National Science Day is celebrated across the country.

प्रत्येक वर्ष 28 फरवरी को भारत में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिन प्रसिद्ध भारतीय भौतिक विज्ञानी सर सी.वी. रमन (Sir C.V. Raman) द्वारा वर्ष 1928 में रमन प्रभाव (Raman’s Effect) की खोज को चिह्नित करने के लिए मनाया जाता है। जिन्होंने वर्ष 1930 में अपने इस उल्लेखनीय खोज के लिए भौतिकी विषय में नोबेल पुरस्कार जीता था। इस दिन को एक खास विषय (theme) के साथ मनाया जाता है। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य लोगों को अपने दैनिक जीवन में विज्ञान के महत्व के बारे में जागरूक करना और विज्ञान और प्रौद्योगिकी को लोकप्रिय बनाकर लोगों को प्रोत्साहित करना है। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के इस अवसर पर, हम आपके साथ कुछ प्रसिद्ध वैज्ञानिकों के उद्धरण, National Science Day Quotes in Hindi के रूप में साझा कर रहे हैं।

      &_medical_team  is going on....                    't_look_here_and_there
26/02/2022





&_medical_team
is going on....










't_look_here_and_there

Entrance Exam prepration by AAKARSH CLASSES            etc
26/02/2022

Entrance Exam prepration by AAKARSH CLASSES





etc

13/02/2022
सनातन धर्म में माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि बहुत महत्वपूर्ण मानी गई है। यह पंचमी तिथि ज्ञान और बुद्धि की देवी मां...
13/02/2022

सनातन धर्म में माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि बहुत महत्वपूर्ण मानी गई है। यह पंचमी तिथि ज्ञान और बुद्धि की देवी मां सरस्वती को समर्पित है। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन मां सरस्वती की विधि अनुसार पूजा करने से ज्ञान बुद्धि और विवेक में वृद्धि होती है। वहीं, वाणी में भी मधुरता आती है। मां सरस्वती की आराधना करने से भक्तों को हर कार्य में सफलता मिलती है। बसंत पंचमी को रतिकाम महोत्सव भी कहा जाता है। सरस्वती पूजा पर छात्रों को विशेष रुप से मां सरस्वती की पूजा करनी चाहिए |

मां लक्ष्‍मी का हाथ हो,सरस्‍वती जी का साथ हो,गणेश जी का निवास हो,और देवताओं के आशीर्वाद से,नए साल में आपके जीवन में प्रक...
01/01/2022

मां लक्ष्‍मी का हाथ हो,
सरस्‍वती जी का साथ हो,
गणेश जी का निवास हो,
और देवताओं के आशीर्वाद से,
नए साल में आपके जीवन में प्रकाश ही प्रकाश हो।
Happy New Year 2022

Address

Dighwara
8441207

Opening Hours

Monday 10am - 6pm
Tuesday 10am - 6pm
Wednesday 10am - 6pm
Thursday 10am - 6pm
Friday 10am - 6pm
Saturday 10am - 6pm
Sunday 10am - 6pm

Telephone

+917294840610

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Aakarsh Classes posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The School

Send a message to Aakarsh Classes:

Shortcuts

Share