04/05/2023
#मकतब #मदरसा #तालीम #तरबियत
आज कल जब नौजवान लडको और लड़कियों की ईमान इस्लाम की हिफाजत की बात आती है
तो सब से पहले उनके बचपन की तालीम और तरबियत की बात दिमाग में आती है
छोटे बच्चे हरी लकड़ी के समान होते है
जेसे हरी गीली लकड़ी जिस तरफ जिस तरह आप मोड़ना चाहे मोड सकते हे
वैसे ही छोटे बच्चो को बचपन में जैसी आदतें अखलाक स्वभाव देंगे वैसे हमेशा रहेंगे
वैसे तो बच्चो का पेहला मदरसा माँ की गोद हे मां बाप अगर थोड़ी फिकर करले तो बच्चो को अच्छी तालीम तरबियत दे सकते है
मां बाप नेक है तो उनकी नेकी का असर औलाद पर जरूर पड़ता है
दूसरा नंबर आता है मदरसा और मकतब का जहां बच्चो को ईमान इस्लाम की मजहब की अकाईद की कुरआन और सुन्नत की शुरुआत की इब्तिदाई तालीम दी जाती है
प्यारे नबी सल्लल्लाहू अलैहि व सल्लम का जीवन बताया जाता है
अल्लाह की पहचान कराई जाती है
इस्लामी अकीदे मजबूत कराए जाते है
इस्लामी अहकाम को प्रेक्टिकल सिखाया जाता है
माँं बाप के साथ दूसरे रिश्तेदारों और पड़ोसियों मिलने जुलने वालो से कैसा बरताव करना सिखाया जाता
कुरआन को सही पढ़ना सिखाया जाता हे कुछ जरूरत की सुरते जबानी याद कराई जाती है
उर्दू लिखना पढ़ना सिखाया जाता हे
इस्लाम का इतिहास बताया जाता है
खुलासा ये के इस्लाम की बुनियाद
बच्चो में मजबूत करने में मदरसों और मकतब का बहोत अहम रोल है
Maulana Muhammad Yamaani