11/12/2020
किसी भी शैक्षणिक संस्था की पहचान , उसकी सफलता असफलता, गुणवत्ता का द्योतक उसके विद्यार्थी ही होते हैं। विद्यालय , महाविद्यालय, विश्वविद्यालय सबकी अमूल्य धरोहर होते हैं उनके छात्र। उनकी शैक्षणिक यात्रा को प्रारम्भिक स्तर से पूर्णता तक ले जाने में शैक्षणिक संस्थानों द्वारा कितना भी परिश्रम किया जाए, मायने नहीं रखता है। पूर्व छात्रों के जीवन की सफलता समृद्धि खुशहाली एवं उनके व्यक्तिगत पारिवारिक सामाजिक आर्थिक राष्ट्रीय धार्मिक तथा जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में उनके जीने की कला एवं उसमें प्राप्त होने वाले उनके खुशी को देखकर ही शैक्षणिक संस्थानों को एक विशिष्ट मानक प्राप्त होता है।
डीजे कॉलेज ने 122 वर्षों के अपने इतिहास में स्वतंत्रता से पूर्व से लेकर आज तक न जाने कितने विद्यार्थियों के भविष्य का निर्माण किया है।
डीजे कॉलेज के एलुमनी समिति का गठन 2016 में किया गया था। इस दायित्व का निर्वहन कॉमर्स विभाग के प्रोफेसर सुनील कुमार गुप्ता जी के द्वारा किया जा रहा है। ऑफलाइन व्यवस्था होने से इसका प्रचार-प्रसार अधिक नहीं हो सका। पुनश्च लगभग 100 से 200 के बीच पूर्व छात्र जुड़ गए हैं। अब पुनः महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ गोपाल प्रसाद यादव जी ने पूर्व छात्रों को महाविद्यालय से पुनः जोड़ने के लिए गूगल ऑनलाइन फॉर्म के माध्यम से एक प्रयास किया है।
यह कार्य संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ विश्वजीत विद्यालंकार को उन्होंने सौंपा है। अतः मुंगेर की धरोहर एवं शिक्षा क्षेत्र का एक भव्य मंदिर डीजे कॉलेज के सभी भूतपूर्व विद्यार्थियों से हम सब आवाहन करते हैं कि, उपर्युक्त गूगल फॉर्म को भरे
https://forms.gle/hoFDRZQCCQoFXC8v6
एवं अपने महाविद्यालय से जुड़कर, अपनी मातृ संस्था के शैक्षणिक व्यवस्था में वर्तमान 21वीं सदी के साथ संयोजन बैठाने में आप सभी अपना योददान अवश्य प्रदान करें। डीजे कॉलेज आपकी अपनी संस्था है। अपनी जड़ों से जुड़ कर आनंदित होवें तथा मुंगेर को एक विशिष्ट शैक्षणिक पहचान देने में कॉलेज का सहयोग करें।
ऑनलाइन व्यवस्था में एवं सोशल नेटवर्किंग में उम्मीद है , हम सभी कि 122 वर्षों का परिवार पुनः एकत्रित होकर महाविद्यालय की शैक्षणिक गरिमा में अभिवर्द्धन करेंगे।
आर० डी० & डी० जे० कॉलेज, मुंगेर विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रों से सम्पर्क अभियान