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📢 हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की महत्वपूर्ण सूचनामार्च, 2026 में आयोजित होने वाली मैट्रिक और जमा दो की वार्षिक परीक...
10/12/2025

📢 हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की महत्वपूर्ण सूचना

मार्च, 2026 में आयोजित होने वाली मैट्रिक और जमा दो की वार्षिक परीक्षाओं के लिए
✅ नियमित परीक्षार्थी,
✅ कम्पार्टमेंट,
✅ अतिरिक्त विषय (डिप्लोमा होल्डर सहित),
✅ केवल अंग्रेज़ी,
✅ इम्प्रूवमेंट ऑफ परफॉर्मेंस के पात्र छात्र–छात्राएं अपने प्रवेश पत्र हेतु ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

🗓️ आवेदन की तिथियाँ:
🔹 बिना विलम्ब शुल्क: 11.12.2025 से 26.12.2025 तक
🔹 विलम्ब शुल्क सहित: 31.12.2025 तक
📌 आवेदन प्रक्रिया केवल संबंधित विद्यालय के माध्यम से ऑनलाइन होगी।

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13/11/2025

🔴✨ KVS & NVS Recruitment 2025 ✨🔴
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“Ready for the next challenge — TGT (Medical) Exam 2025 💪”
13/11/2025

“Ready for the next challenge — TGT (Medical) Exam 2025 💪”

01/10/2020

*आज का प्रेरक प्रसङ्ग*

!! *मैं बंदूकें बो रहा हूं* !!
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🇮🇳 *शहीद भगत सिंह*

कहते हैं ‘पूत के पांव पालने में ही दिखाई पड़ जाते हैं'। पांच वर्ष की बाल अवस्था में ही भगत सिंह के खेल भी अनोखे थे। वह अपने साथियों को दो टोलियों में बांट देता था और वे परस्पर एक-दूसरे पर आक्रमण करके युद्ध का अभ्यास किया करते। भगतसिंह के हर कार्य में उसके वीर, धीर और निर्भीक होने का आभास मिलता था। एक बार सरदार किशनसिंह (पिताजी) इस बालक को लेकर अपने मित्र श्री नन्द किशोर मेहता के पास उनके खेत पर गए। दोनों मित्र बातों में लग गए और बालक भगत अपने खेल में लग गया।

नन्द किशोर मेहता का ध्यान भगतसिंह के खेल कि ओर आकृष्ट हुआ। भगतसिंह मिट्टी के ढेरों पर छोटे-छोटे तिनके लगाए जा रहा था। उनके इस कार्य को देखकर नंद किशोर मेहता बड़े स्नेहभाव से बालक भगतसिंह से बातें करने लगे-

‘‘तुम्हारा क्या नाम है ?'' श्री नंदकिशोर मेहता ने पूछा।

बालक ने उत्तर दिया-‘‘भगतसिंह।''

‘‘तुम क्या कर रहे हो ?''

‘‘मैं बंदूकें बो रहा हूं।'' बालक भगतसिंह ने बड़े गर्व से उत्तर दिया।

‘‘बंदूकें...?''

‘‘हां, बंदूकें।''

‘‘वह क्यों ?''

‘‘अपने देश के स्वतंत्र कराने के लिए।''

‘‘तुम्हारा धर्म क्या है ?''

‘‘देशभक्ति। देश की सेवा करना।''

श्री नन्द किशोर मेहता राष्ट्रीय विचारों से ओत-प्रोत राष्ट्रभक्त व्यक्ति थे। उन्होंने बालक भगतसिंह को बड़े स्नेहपूर्वक अपनी गोदी में उठा लिया। मेहता जी उसकी बातों से अत्यधिक प्रभावित हुए और सरदार किशन सिंह से बोले, ‘‘भाई ! तुम बड़े भाग्यवान् हो, जो तुम्हारे घर में ऐसे होनहार व विलक्षण बालक ने जन्म लिया है। मेरा इसे हार्दिक आशीर्वाद है, यह बालक संसार में तुम्हारा नाम रोशन करेगा। देशभक्तों में इसका नाम अमर होगा।''

वास्तव में समय आने पर मेहता की यह भविष्यवाणी सत्य सिद्ध हुई।

मां भारती के वीर सपूत "शहीद भगतसिंह" के 113वें जन्म दिवस पर "शिक्षा विभाग समाचार" शैक्षणिक समूह परिवार की और कोटि-कोटि नमन व प्रणाम🙏
*जय हिंद-जय भारत*🇮🇳🇮🇳

📔🏆 *शिक्षा विभाग समाचार* 🏆📔

27/09/2020

*आज का प्रेरक प्रसङ्ग*

!! *TARGET (लक्ष्य)* !!
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बिना लक्ष्य के जीवन बिना पता लिखें लिफाफे के समान हैं, जो कहीं भी पहुंच सकता हैं।

एक लड़के ने एक बार एक बहुत ही धनवान व्यक्ति को देखकर धनवान बनने का निश्चय किया। वह धन कमाने के लिए कई दिनों तक मेहनत कर धन कमाने के पीछे पड़ा रहा और बहुत सारा पैसा कमा लिया। इसी बीच उसकी मुलाकात एक विद्वान से हो गई। विद्वान के ऐश्वर्य को देखकर वह आश्चर्यचकित हो गया और अब उसने विद्वान बंनने का निश्चय कर लिया और अगले ही दिन से धन कमाने को छोड़कर पढने-लिखने में लग गया।

वह अभी अक्षर ज्ञान ही सिख पाया था, की इसी बीच उसकी मुलाकात एक संगीतज्ञ से हो गई। उसको संगीत में अधिक आकर्षण दिखाई दिया, इसीलिए उसी दिन से उसने पढाई बंद कर दी और संगीत सिखने में लग गया। इसी तरह काफी उम्र बित गई, न वह धनी हो सका ना विद्वान और ना ही एक अच्छा संगीतज्ञ बन पाया। तब उसे बड़ा दुख हुआ। एक दिन उसकी मुलाकात एक बहुत बड़े महात्मा से हुई। उसने महात्मन को अपने दुःख का कारण बताया।

महात्मा ने उसकी परेशानी सुनी और मुस्कुराकर बोले, “बेटा, दुनिया बड़ी ही चिकनी है, जहाँ भी जाओगे कोई ना कोई आकर्षण ज़रूर दिखाई देगा। एक निश्चय कर लो और फिर जीते जी उसी पर अमल करते रहो तो तुम्हें सफलता की प्राप्ति अवश्य हो जाएगी, नहीं तो दुनियां के झमेलों में यूँ ही चक्कर खाते रहोगे। बार-बार रूचि बदलते रहने से कोई भी उन्नत्ति नहीं कर पाओगे।” युवक महात्मां की बात को समझ गया और एक लक्ष्य निश्चित कर उसी का अभ्यास करने लगा।

*शिक्षा*:-
उपर्युक्त कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती हैं कि हमें भी शुरुआत से ही एक लक्ष्य बनाकर उसी के अनुरूप मेहनत करना चाहिए। इधर-उधर भटकने की बजाय एक ही जगह, एक ही लक्ष्य पर डटे रहने से ही सफलता व उन्नति प्राप्त की जा सकती हैं।

📔🏆 *शिक्षा विभाग समाचार* 🏆📔

25/09/2020

*सुंदरता*

*एक सभा में गुरु जी ने प्रवचन के दौरान*
*एक 30 वर्षीय युवक को खडा कर पूछा कि
- *आप मुम्बई मेँ जुहू चौपाटी पर चल रहे हैं और सामने से एक सुन्दर लडकी आ रही है तो आप क्या करोगे* ?
युवक ने कहा - उस पर नजर जायेगी, उसे देखने लगेंगे।
गुरु जी ने पूछा - वह लडकी आगे बढ गयी तो क्या पीछे मुडकर भी देखोगे ?
लडके ने कहा - हाँ, अगर धर्मपत्नी साथ नहीं है तो। (सभा में सभी हँस पडे)

गुरु जी ने फिर पूछा - जरा यह बताओ वह सुन्दर चेहरा आपको कब तक याद रहेगा ?
युवक ने कहा 5 - 10 मिनट तक, जब तक कोई दूसरा सुन्दर चेहरा सामने न आ जाए।

गुरु जी ने उस युवक से कहा - अब जरा सोचिए,
आप जयपुर से मुम्बई जा रहे हैं और मैंने आपको एक पुस्तकों का पैकेट देते हुए कहा कि मुम्बई में अमुक महानुभाव के यहाँ यह पैकेट पहुँचा देना।

आप पैकेट देने मुम्बई में उनके घर गए।
उनका घर देखा तो आपको पता चला कि ये तो बडे अरबपति हैं।

घर के बाहर 10 गाडियाँ और 5 चौकीदार खडे हैं। आपने पैकेट की सूचना अन्दर भिजवाई तो वे महानुभाव खुद बाहर आए। आप से पैकेट लिया। आप जाने लगे तो आपको आग्रह करके घर में ले गए। पास में बैठकर गरम खाना खिलाया। जाते समय आप से पूछा - किसमें आए हो ? आपने कहा- लोकल ट्रेन में। उन्होंने ड्राइवर को बोलकर आपको गंतव्य तक पहुँचाने के लिए कहा और आप जैसे ही अपने स्थान पर पहुँचने वाले थे कि उस अरबपति महानुभाव का फोन आया - भैया, आप आराम से पहुँच गए।

अब आप बताइए कि आपको वे महानुभाव कब तक याद रहेंगे ?
युवक ने कहा - गुरु जी ! जिंदगी में मरते दम तक उस व्यक्ति को हम भूल नहीं सकते।
गुरु जी ने युवक के माध्यम से सभा को संबोधित करते हुए कहा
"यह है जीवन की हकीकत।"

*"सुन्दर चेहरा थोड़े समय ही याद रहता है*,
*पर हमारा सुन्दर व्यवहार जीवन भर याद रहता है* ।"

बस यही है जीवन का गुरु मंत्र ,अपने चेहरे और शरीर की सुंदरता से ज़्यादा अपने व्यवहार की सुंदरता पर ध्यान दे,जीवन आनंददायक बन जाएगा

इसलिए आप सबसे अनुरोध हैं कि व्यवहार कुशल बने इंसानियत के नाते संवेदनशील बने सबका साथ दे सबको सपोर्ट करे सबको साथ लेके चलना है ताकि इस मुश्किल समय में सबका घर चल सके सभी कमा पाए सबके घरों में सभी खुश सुखी और स्वस्थ रहे।

21/09/2020

*आज का प्रेरक प्रसङ्ग*

!! *बदलाव ही जीवन हैं* !!
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शहर के पास बसे एक छोटे से गाँव में फलों (Fruits) की बहुत कमी थी। वहाँ लोग अमीर तो नहीं थे पर दिल के सच्चे थे। वहाँ फलों के केवल कुछ पेड़ ही दिखाई देते थे। गाँव में फलों की कमी को देखते हुए भगवान ने अपने दूत को बुलाया और कहा, ”तुम गाँव में जाओ और सभी से कहो कि वह एक दिन में केवल एक ही फल खाये और हो सके तो फलों के पौधे लगाये।” दूत ने ऐसा ही किया उसने सभी को एक फल खाने और फलों के पौधे लगाने को कहा। पीढ़ी दर पीढ़ी ऐसा ही चलता रहा, और धीरे धीरे वहां का पर्यावरण संरक्षित होने लगा।

क्यूंकि बचे हुए फलों के बीजो से और नए नए पौधे निकल गए थे, और वहां के लोगो ने भी शहर से फलों के छोटे छोटे पौधे लाकर लगा दिए थे। जो अब बड़े होकर फल देने लगे थे। कुछ वर्षो में ही पूरा गाँव हराभरा हो गया था। अब वहां किसी भी फल की कोई कमी नहीं थी। गाँव के सभी फलों के पेड़ फलों से लदे पड़े थे, परन्तु अब भी गाँव के लोग दिन में केवल एक ही फल खाते थे। दिन में केवल एक फल खाना चाहिये, इस तरह का उन्होंने एक रिवाज बना लिया था। वह वर्षो से चली परम्परा के प्रति आज भी पूरी तरह वफादार थे।

वह खुद तो दिन में केवल एक ही फल खाते थे, और अगर शहर कोई उनसे फल लेने आता, तो वह उसे भी खाली हाथ लौटा देते थे। इसका परिणाम यह हुआ कि टनो – टन फल बर्बाद होने लगे, और सड़को पर भी इधर -उधर बिखरे दिखाई देते। भगवान को यह सब देखकर बहुत बुरा लगा, और उन्होंने तुरन्त अपने एक दूत को बुलाया और कहा, ” जाओ और गाँव वालो से कहो वह अब जितना मर्जी फल खाये, और बचे हुए फलों को दूसरे शहरों में को बाट दे।”

दूत यह सन्देश लेकर गाँव में गया, परन्तु गाँव वालो ने उसकी एक ना सुनी और उसे मार कर भगा दिया। गाँव वालो के दिमाग में अपने पूर्वजो की बात इतनी गहरी तरह बैठ चुकी थी, कि वह अब किसी की कोई बात सुनने को तैयार ही नहीं थे। वो फलों को बर्बाद करने के लिए तैयार थे, परन्तु अपनी सोच बदलने को तैयार नहीं थे।

*Moral:-*

दोस्तों, इस कहानी में काफी सच्चाई हैं, हमारे समाज में आज भी लोग बिल्ली के रास्ता काटने, कौवे के कांव – कांव करने, रात को झाड़ू ना लगाने से लेकर ऊँच-नीच और जात -पात की अनेको मानसिकताओं से जुड़े हैं। जिनका वास्तव में आज कोई अर्थ ही नहीं हैं।
जैसे इस कहानी में इस तरह की चीजो को मानने वाले खुद को बड़ा ही धार्मिक और ईश्वर को मानने वाला समझते हैं, वैसे ही हमारे समाज में भी इन सभी मान्यताओं को मानने वाले लोग खुद को बड़ा ही पवित्र और सबसे बड़ा संत समझते हैं। जबकि सच्चाई कुछ और ही होती हैं। हमें भी समय के बदलते हुए स्वरुप को देखते हुए, अपनी सोच को निरन्तर विकसित करना चाहिए। जो आज सही है, वो कल गलत हो सकता है, और जो कल गलत सकता है, वो परसो सही भी हो सकता है।

📔🏆 *शिक्षा विभाग समाचार* 🏆📔

19/09/2020

*आज का प्रेरक प्रसङ्ग*

!! *नमक का स्वाद* !!
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एक बार एक परेशान और निराश व्यक्ति अपने गुरु के पास पहुंचा और बोला – “गुरूजी मैं जिंदगी से बहुत परेशान हूँ। मेरी जिंदगी में परेशानियों और तनाव के सिवाय कुछ भी नहीं है। कृपया मुझे सही राह दिखाइये।” गुरु ने एक गिलास में पानी भरा और उसमें मुट्ठी भर नमक डाल दिया। फिर गुरु ने उस व्यक्ति से पानी पीने को कहा। उस व्यक्ति ने ऐसा ही किया। गुरु :- इस पानी का स्वाद कैसा है?? “बहुत ही ख़राब है” उस व्यक्ति ने कहा। फिर गुरु उस व्यक्ति को पास के तालाब के पास ले गए। गुरु ने उस तालाब में भी मुठ्ठी भर नमक डाल दिया।

फिर उस व्यक्ति से कहा – इस तालाब का पानी पीकर बताओ की कैसा है। उस व्यक्ति ने तालाब का पानी पिया और बोला – गुरूजी यह तो बहुत ही मीठा है। गुरु ने कहा – “बेटा जीवन के दुःख भी इस मुठ्ठी भर नमक के समान ही है। जीवन में दुखों की मात्रा वही रहती है – न ज्यादा न कम। लेकिन यह हम पर निर्भर करता है कि हम दुखों का कितना स्वाद लेते है। यह हम पर निर्भर करता है कि हम अपनी सोच एंव ज्ञान को गिलास की तरह सीमित रखकर रोज खारा पानी पीते है या फिर तालाब की तरह बनकर मीठा पानी पीते है।”

*Moral of The Story*

“एक मुट्ठी भर नमक, एक गिलास में भरे मीठे पानी को खारा बना सकता है लेकिन वही मुट्ठी भर नमक अगर तालाब या झील में डाल दिया जाए तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा। इसी तरह अगर हमारे भीतर सकारात्मक उर्जा का स्तर ऊँचा है तो छोटी-छोटी परेशानियों एंव समस्याओं से हमें कोई फर्क नहीं पड़ेगा।”

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