29/04/2023
शिकायत (स्वलिखित)
तुम खुश हो तो तुम्हें खुश ही रहने दिया जाय...
क्यूँ... हमारी उलझनो में उलझाया जाय...
दूर होकर बेफिक्र हो...
तो क्यूँ...तुम्हें करीब लाया जाय...
हमें तो सदा से हैं परेशानियां...
तुम्हें क्यूँ...परेशान किया जाय...
माना की सुकून हैं तुम्हारा साथ...
पर क्यूँ... तुम्हारा सुकून छिना जाय...
रिश्ते तो अहसास पर चलते हैं...
पर क्यूँ... खत्म हुये अहसास को टटोला जाय...
सब समय की बात हैं क्यूँ... बिती यादो में रोया जाय...
तुम खुश हो तो तुम्हें खुश ही रहने दिया जाय...
लिखिका "शर्मा"
धार