Morning Institute of Technology Nawagarh chatti

Morning Institute of Technology Nawagarh chatti शिक्षा ही जीवन है .
अशिक्षित को शिक्षा दो, अज्ञानी को ज्ञान…
शिक्षा से ही बन सकता हैं, भारत देश महान…

01/01/2026

आज 365 पन्नों की किताब का पहला खाली पन्ना है जो भी लिखिए, अच्छा लिखिए ।
नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं।

बुराई का होता है विनाश, दशहरा लाता है उम्मीदों की आस, रावण की तरह आपके दुख भी मिट जाएं, ...अपने भीतर के रावण को जो खुद आ...
11/10/2024

बुराई का होता है विनाश, दशहरा लाता है उम्मीदों की आस, रावण की तरह आपके दुख भी मिट जाएं, ...
अपने भीतर के रावण को जो खुद आग लगाएगा, सच मानिए सही मायने में वही दशहरा मनाएगा। दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं
काल कोई भी हो हर काल की यही रीत होगी, हमेशा अच्छाई की बुराई पर जीत होगी। दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं

मां सिद्धिदात्री के बारे में पौराणिक कथाएं ये हैं:कहा जाता है कि जब दैत्य महिषासुर के अत्याचारों से परेशान होकर सभी देवत...
11/10/2024

मां सिद्धिदात्री के बारे में पौराणिक कथाएं ये हैं:
कहा जाता है कि जब दैत्य महिषासुर के अत्याचारों से परेशान होकर सभी देवता भगवान शिव और भगवान विष्णु के पास पहुंचे, तब वहां मौजूद सभी देवताओं से एक तेज उत्पन्न हुआ.
इसी तेज से एक दिव्य शक्ति का निर्माण हुआ, जिसे मां सिद्धिदात्री कहा जाता है.
मां सिद्धिदात्री की अनुकंपा से ही भगवान शिव का आधा शरीर देवी हो गया था और वह अर्धनारीश्वर कहलाएं.
भगवान शिव ने मां सिद्धिदात्री की कठोर तपस्या कर आठों सिद्धियों को प्राप्त किया था.

मां सिद्धिदात्री से जुड़ी कुछ और बातेंः

मां सिद्धिदात्री, मां दुर्गा के नौ रूपों में से एक हैं.

नवरात्रि के नौवें दिन इनकी पूजा की जाती है.

मान्यता है कि इस दिन शास्त्रीय विधि-विधान और पूर्ण निष्ठा के साथ साधना करने वाले साधक को सभी सिद्धियों की प्राप्ति हो जाती है.

मां सिद्धिदात्री के वाहन सिंह हैं.

ये कमल पुष्प पर भी आसीन होती हैं.

इनकी दाहिनी तरफ़ के नीचे वाले हाथ में कमलपुष्प है.

इन्हें बैंगनी रंग बहुत पसंद है.

माँ दुर्गा के आठवां  स्वरुप महा गौरी के नाम से जाना और पूजा जाता है.  मान्यतायों के अनुसार बाल्यकाल में आदिशक्ति ने भगवा...
10/10/2024

माँ दुर्गा के आठवां स्वरुप महा गौरी के नाम से जाना और पूजा जाता है. मान्यतायों के अनुसार बाल्यकाल में आदिशक्ति ने भगवान् शिव को पति रूप में पाने के लिए घोर तपस्या की थी जिसके कारण उनका शरीर काला पड़ गया था. माँ पारवती की तपस्या से भगवान् शिव ने प्रसन्न होकर पवित्र गंगा जल से इनके शरीर को धोया. गंगा जल से धुलकर माँ का शरीर विद्युत् के समान गौर वर्ण का हो गया, अति गौर वर्ण के कारण ही उनका नाम महा गौरी पड़ा. इस दिन माँ के भक्त कन्याओं को माँ भगवती का स्वरुप मानकर उनकी बहुत श्रद्धा के साथ पूजा करते हैं. माँ के आशीर्वाद से उनके भक्तो के असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं. संकट से मुक्ति एवं बुद्धि और धन-सम्पदा में वृद्धि होती है. इनका वाहन वृषभ है.

रतन टाटा (28 दिसंबर 1937 – 9 अक्टूबर 2024) भारतीय उद्योगपति थे जो टाटा समूह के पूर्व अध्यक्ष रहे। वे भारत की सबसे बड़ी व...
10/10/2024

रतन टाटा (28 दिसंबर 1937 – 9 अक्टूबर 2024) भारतीय उद्योगपति थे जो टाटा समूह के पूर्व अध्यक्ष रहे। वे भारत की सबसे बड़ी व्यापारिक इकाई, टाटा समूह, के 1991 से 2012 तक अध्यक्ष थे। इसके अतिरिक्त, अक्टूबर 2016 से फरवरी 2017 तक वे समूह के कार्यकारी अध्यक्ष भी रहे।

मां कालरात्रि की कथा (Maa Kalratri Katha)पौराणिक कथा के अनुसार, शुंभ-निशुंभ और रक्तबीज नाम के राक्षस ने लोकों में आतंक म...
09/10/2024

मां कालरात्रि की कथा (Maa Kalratri Katha)
पौराणिक कथा के अनुसार, शुंभ-निशुंभ और रक्तबीज नाम के राक्षस ने लोकों में आतंक मचा रखा था। इनके अत्याचार से सभी देवी-देवता परेशान हो गए थे। ऐसे में देवी-देवता ने भगवान शिव से इस समस्या से मुक्ति पाने के लिए कोई उपाय मांगा।

मां कात्यायनी की व्रत कथाइन्हीं कात्य के गोत्र में विश्वप्रसिद्ध महर्षि कात्यायन उत्पन्न हुए थे। इन्होंने मां पराम्बा की...
08/10/2024

मां कात्यायनी की व्रत कथा
इन्हीं कात्य के गोत्र में विश्वप्रसिद्ध महर्षि कात्यायन उत्पन्न हुए थे। इन्होंने मां पराम्बा की उपासना करते हुए कई वर्षों तक बड़ी कठिन तपस्या की थी। उनकी इच्छा थी कि मां भगवती उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लें, उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर मां भगवती ने उनकी यह प्रार्थना स्वीकार कर ली।

07/10/2024

पहाड़ों पर रहकर सांसारिक जीवों में नवचेतना का निर्माण करने वालीं स्कंदमाता। नवरात्रि में पांचवें दिन इस देवी की पूजा-अर्चना की जाती है। कहते हैं कि इनकी कृपा से मूढ़ भी ज्ञानी हो जाता है। स्कंद कुमार कार्तिकेय की माता के कारण इन्हें स्कंदमाता नाम से अभिहित किया गया है। इनके विग्रह में भगवान स्कंद बालरूप में इनकी गोद में विराजित हैं।

इस देवी की चार भुजाएं हैं। ये दाईं तरफ की ऊपर वाली भुजा से स्कंद को गोद में पकड़े हुए हैं। नीचे वाली भुजा में कमल का पुष्प है। बाईं तरफ ऊपर वाली भुजा में वरदमुद्रा में हैं और नीचे वाली भुजा में कमल पुष्प है। इनका वर्ण एकदम शुभ्र है। ये कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं। इसीलिए इन्हें पद्मासना भी कहा जाता है। सिंह इनका वाहन है।


शास्त्रों में इसका काफी महत्व बताया गया है। इनकी उपासना से भक्त की सारी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं। भक्त को मोक्ष मिलता है। सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी होने के कारण इनका उपासक अलौकिक तेज और कांतिमय हो जाता है। अतः मन को एकाग्र रखकर और पवित्र रखकर इस देवी की आराधना करने वाले साधक या भक्त को भवसागर पार करने में कठिनाई नहीं आती है।


उनकी पूजा से मोक्ष का मार्ग सुलभ होता है। यह देवी विद्वानों और सेवकों को पैदा करने वाली शक्ति है यानी चेतना का निर्माण करने वालीं। कहते हैं कालिदास द्वारा रचित रघुवंशम महाकाव्य और मेघदूत रचनाएं स्कंदमाता की कृपा से ही संभव हुईं।

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