15/09/2026
इंसान का रिज़्क़ अल्लाह तआला ने उसके लिए मुकर्रर कर रखा है। वह अपने बंदे को वहाँ से भी रिज़्क़ देता है, जहाँ से इंसान को गुमान भी नहीं होता।
अल्लाह तआला फ़रमाता है: “ज़मीन पर चलने वाला कोई जानदार ऐसा नहीं जिसका रिज़्क़ अल्लाह के ज़िम्मे न हो।”
[📖 सूरह हूद 11:6]
और फ़रमाया: “जो अल्लाह से डरता है, अल्लाह उसके लिए निकलने का रास्ता बना देता है और उसे वहाँ से रिज़्क़ देता है जहाँ से उसे गुमान भी नहीं होता।” [📖 सूरह अत-तलाक़ 65:2-3]
रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया: “अगर तुम अल्लाह पर ऐसा भरोसा रखो जैसा भरोसा रखने का हक़ है, तो वह तुम्हें उसी तरह रिज़्क़ देगा जैसे परिंदों को देता है। वे सुबह भूखे निकलते हैं और शाम को पेट भरे लौटते हैं।” [📖 जामे अत-तिर्मिज़ी, 2344]
इसलिए रिज़्क़ की फ़िक्र में मायूस मत हो। मेहनत करो, हलाल रास्ता अपनाओ और अल्लाह पर भरोसा रखो।
जिस रिज़्क़ को अल्लाह ने तुम्हारे लिए लिख दिया है, वह तुम्हें होकर रहेगा—चाहे वह किसी भी रास्ते से आए। अल्लाह हमें हलाल रिज़्क़ और उसमें बरकत अता फ़रमाए। आमीन।
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