11/01/2026
डिब्बे में डिब्बे में केक
मेरे सर करोड़ों में एक
उपर से गिरा बम, 2025 खत्म
नीचे से निकला आलू, 2026 चालू
बच्चों की इन भोली पंक्तियों के साथ वर्ष 2025 ने विद्यालय में अपनी अंतिम घंटी बजाई।
कल विद्यालय का अंतिम कार्य दिवस था। छोटे-छोटे हाथों ने अपने शिक्षकों के लिए ग्रीटिंग्स बनाई थीं। रंग-बिरंगे काग़ज़, फूल, तारे, टेढ़ी-मेढ़ी रेखाएँ—और उन सबके बीच लिखे मासूम से शुभकामना संदेश। ग्रीटिंग्स खोलते ही मन भर आया। लगा, जैसे काग़ज़ के भीतर बच्चों का दिल धड़क रहा हो।
वास्तव में ये ग्रीटिंग्स सिर्फ़ काग़ज़ नहीं थीं, बल्कि बच्चों के मन में अपने शिक्षकों के लिए छिपे प्रेम, स्नेह और अपनत्व का सजीव प्रतिबिंब थीं।
हम शिक्षकों के वर्ष भर के परिश्रम की असली कमाई यही तो है—बच्चों का स्नेह। हमारी कार्यशैली पर कोई चाहे जितने प्रश्न उठाए, हमारे लिए सबसे बड़ा प्रमाण पत्र हमारे बच्चे ही हैं। वही हमारा रिपोर्ट कार्ड हैं, वही हमारी सबसे सच्ची उपलब्धि।
वंचित घरों से आने वाले ये बच्चे बहुत कुछ करना चाहते हैं। वे सुंदर से सुंदर ग्रीटिंग्स बना सकते हैं, बस उनके घरों में अच्छे काग़ज़ नहीं होते, रंग नहीं होते। ऐसे में विद्यालय ही उनका एकमात्र सहारा बनता है—एक ऐसी जगह, जहाँ वे बेझिझक अपनी कूची चला सकें, अपने सपनों में रंग भर सकें। विद्यालय वह आँगन है, जहाँ उन्हें सपने देखने और उन्हें जीने की आज़ादी मिलती है।
वर्ष 2025 अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। यह समय केवल कैलेंडर बदलने का नहीं, बल्कि आत्ममंथन का भी है। ईमानदारी से स्वयं से पूछने का समय है—हमने पूरे वर्ष बच्चों को क्या दिया? क्या और बेहतर कर सकते थे? कहाँ कुछ कम रह गया?
नया वर्ष आते ही हम कई संकल्प लेते हैं। उन संकल्पों में एक यह भी होना चाहिए कि आने वाले वर्ष में हम अपने विद्यालय के लिए, अपने बच्चों के लिए और भी अच्छा काम करेंगे। और अधिक संवेदनशीलता के साथ, और अधिक समर्पण के साथ, और अधिक विश्वास के साथ।
नववर्ष 2026 के लिए हार्दिक अग्रिम शुभकामनाएँ।
आइए, नए वर्ष में बच्चों के सपनों को और उजले रंग दें।
*अनन्त शक्ति*
पीएम श्री विवेकानंद सेवाश्रम मध्य विद्यालय, टुंडी, धनबाद