Kumar keshav classes

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28/02/2023

आज हम बात करते है भारत के संविधान के भाग-1 के विषय में-

परिचय - भारतीय संविधान के भाग-1 का शीर्षक संघ और उसका राज्यक्षेत्र है इसमें अनुच्छेद 1,अनुच्छेद 2 ,अनुच्छेद 3 एवं अनुच्छेद 4 सम्मिलित है जिनका हम आज विस्तृत अध्ययन करने का पूरा प्रयत्न करेंगे।

अनुच्छेद 1 - इस अनुच्छेद के अनुसार वर्णित है कि इंडिया अर्थात भारत राज्यों का संघ होगा।

ध्यान देने योग्य बात यह है कि अनुच्छेद 1 में फेडरेशन की जगह यूनियन शब्द का प्रयोग किया गया है जो भारत के विशिष्ट स्वरुप को दर्शाता है।

अनुच्छेद 1 के आधार पर भारत में दो संकल्पना के बीच अन्तर किया जाता है जो कि निम्नलिखित है-

भारत का संघ- यह एक संकीर्ण अभिव्यक्ति है जिसमें राज्यों को शामिल किया जाता है। तकनीकी दृष्टी से इसमें वे क्षेत्र शामिल है जिनके साथ संघ या केंद्र शक्ति का विभाजन करता है।भारत का राज्य क्षेत्र - यह एक व्यापक अभिव्यक्ति है जिसमें राज्य, संघ शासित क्षेत्र और अर्जित क्षेत्र सभी शामिल है। व्यावहार में भारत के राज्यक्षेत्र से तात्पर्य वह सम्पूर्ण क्षेत्र है जिस पर भारत की संप्रभुता का विस्तार है।

अनुच्छेद 2- इसमें वर्णित है कि संसद किसी विदेशी क्षेत्र को भारत में सम्मिलित कर सकती है।

आगे 1960 में वेरूवाड़ी विवाद में सर्वोच्च न्यायालय ने अनुच्छेद 2 की व्याख्या करते हुए निर्धारित किया कि संसद संविधान संशोधन के द्वारा भारतीय क्षेत्र को विदेशी राज्य को समर्पित कर सकती है।

35वाँ संविधान संशोधन 1974 के द्वारा सिक्किम का भारत में विलय किया गया और 36 वाँ संविधान संशोधन 1975 के द्वारा सिक्किम को राज्य का दर्जा दिया गया।

100 वाँ संविधान संशोधन 2005 के द्वारा भारत और बांग्लादेश सीमा समझौता को लागू किया गया जिसके अंतर्गत 111 गलियारे बांग्लादेश को और 51 गलियारे भारत को दिये गये।

अनुच्छेद 3 - इसमें वर्णित है कि संसद किसी राज्य के नाम, सीमा या क्षेत्रफल में परिवर्तन कर सकती है एवं नए राज्य का निर्माण कर सकती है।

नए राज्य के निर्माण की प्रक्रिया- इससे संबंधित प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन में लाया जा सकता है किंतु राष्ट्रपति की सिफारिश जरूरी है। राष्ट्रपति इस विधेयक को संबंधित राज्य या राज्यों के पास भेजता है इसका उद्देश्य इन राज्य या राज्यों के विचार जानना है। राष्ट्रपति इसकी समय सीमा भी तय कर सकता है और राज्य के विचार बाध्यकारी नहीं है। आगे राष्ट्रपति की अनुमति से यह विधेयक सदन में प्रस्तुत होता है और साधारण बहुमत की प्रक्रिया से पारित होता है।

नए राज्य के निर्माण में संयुक्त बैठक भी हो सकती है ।

नए राज्य के निर्माण के पक्ष में तर्क -

नए राज्य का निर्माण भारतीय संविधान के बहुलवादी स्वरूप के अनुकूल हैछोटे राज्य का प्रशासन जनता से अधिक निकट होता है और वह अधिक उत्तरदायी भी होता हैनए राज्यों के निर्माण से शक्ति का विकेंद्रीकरण भी होता है

नए राज्य के निर्माण के विपक्ष में तर्क-

बार बार नए राज्य बनाने से राज्य निर्माण का एक राजनैतिक सिलसिला शुरू हो जाता है और जैसे ही नए राज्य का निर्माण हो जाता है फिर से नए राज्य की माँग शुरू हो जाती है।अधिक संख्या में राज्य होने से सीमा विवाद एवं नदी जल विवाद को बढ़ावा मिलता हैअधिक संख्या में राज्य होने से राष्ट्रीय महत्त्व की योजनाओं को कार्यान्वित करने में बाधा आती है। वर्तमान मे भारत की तेज गति से विकसित अर्थव्यवस्था के लिए ये सही नही है ।

अंततः कहा जा सकता है कि भारत में राज्य निर्माण के संबंध में हमे लचीली नीति अपनानी चाहिए यदि भौगोलिक, आर्थिक और प्रशासनिक कारणों से नए राज्य के निर्माण की जरूरत है तो नया राज्य बनाना चाहिए लेकिन केवल राजनीतिक लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से नए राज्य निर्माण से बचना चाहिए।

अनुच्छेद 4- इसके अनुसार जब अनुच्छेद 2 और अनुच्छेद 3 के तहत संसद कार्य करती है तो भले ही उसे पहली अनुसूची, चौथी अनुसूची और अन्य प्रावधानों में संशोधन होता है लेकिन उसे अनुच्छेद 368 के सन्दर्भ में संविधान संशोधन नहीं कहा जाएगा।

31/08/2022

Success demand 6 things:-

Hardwork

Sacrifice

Struggle

Faith

Patience

Passion

26/08/2022

एक बार स्वामी विवेकानन्द अपने आश्रम में सो रहे थे। कि तभी एक व्यक्ति उनके पास आया जो कि बहुत दुखी था और आते ही स्वामी विवेकानन्द के चरणों में गिर पड़ा और बोला महाराज मैं अपने जीवन में खूब मेहनत करता हूँ हर काम खूब मन लगाकर भी करता हूँ फिर भी आज तक मैं कभी सफल व्यक्ति नहीं बन पाया। उस व्यक्ति कि बाते सुनकर स्वामी विवेकानंद ने कहा ठीक है। आप मेरे इस पालतू कुत्ते को थोड़ी देर तक घुमाकर लाये तब तक आपके समस्या का समाधान ढूँढ़ता हूँ। इतना कहने के बाद वह व्यक्ति कुत्ते को घुमाने के लिए चला गया। और फिर कुछ समय बीतने के बाद वह व्यक्ति वापस आया। तो स्वामी विवेकानन्द ने उस व्यक्ति से पूछा की यह कुत्ता इतना हाँफ क्यों रहा है। जबकि तुम थोड़े से भी थके हुए नहीं लग रहे हो आखिर ऐसा क्या हुआ ?
इस पर उस व्यक्ति ने कहा कि मैं तो सीधा अपने रास्ते पर चल रहा था जबकि यह कुत्ता इधर उधर रास्ते भर भागता रहा और कुछ भी देखता तो उधर ही दौड़ जाता था. जिसके कारण यह इतना थक गया है । इसपर स्वामी विवेकानन्द ने मुस्कुराते हुए कहा बस यही तुम्हारे प्रश्नों का जवाब है. तुम्हारी सफलता की मंजिल तो तुम्हारे सामने ही होती है. लेकिन तुम अपने मंजिल के बजाय इधर उधर भागते हो जिससे तुम अपने जीवन में कभी सफल नही हो पाए. यह बात सुनकर उस व्यक्ति को समझ में आ गया था। की यदि सफल होना है तो हमे अपने मंजिल पर ध्यान देना चाहिए।
कहानी से शिक्षा

स्वामी विवेकानन्द के इस कहानी से हमें यही शिक्षा मिलती है की हमें जो करना है। जो कुछ भी बनना है। हम उस पर ध्यान नहीं देते है, और दूसरों को देखकर वैसा ही हम करने लगते है। जिसके कारण हम अपने सफलता के लक्ष्य के पास होते हुए दूर भटक जाते है। इसीलिए यदि जीवन में सफल होना है! तो सदा हमें अपने लक्ष्य पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए !।

23/05/2022

काल-चक्र को समझ ना पाया
मूल्यवान समय भी गवाया
लौट समय फिर कभी ना आया
काल-चक्र को समझ ना पाया। ।
सही समय पर उठ ना पाया
सारा समय व्यर्थ ही गवाया
परीणाम स्वरूप कुछ मिल ना पाया
काल-चक्र को समझ ना पाया।।
काल-चक्र जब समझ में आया
भूत से जब भविष्य घबराया
तब वर्तमान पर समय लगाया
व्यर्थ समय उद्देश्यपूर्ण बनाया
काल-चक्र जब समझ में आया। ।

- कुमार केशव


05/02/2022

एक नायक,जो अपने शौर्य,ईमानदारी और सज्जनता के लिए जाने जाते थे वो एक सन्यासी से सलाह लेने पहुचे। सन्यासी ध्यान मे बैठे था जब सन्यासी ने ध्यान पूर्ण कर लिया तब नायक ने उससे पूछा- मैं इतना हीन क्यूँ महसूस करता हूँ मैंने ना जाने कितनी लड़ाइयां जीती है,कितने ही असहाय लोगों की मदद की है फिर भी जब मैं और लोगों को देखता हूँ तो लगता है कि मैं उनके सामने कुछ भी नहीं है,मेरे जीवन का कोई महत्व ही नहीं है।
यह सुनकर सन्यासी बोला कि पहले मैं और लोगों के प्रश्नों के उत्तर दे दूं फिर तुमसे बात करूंगा।
नायक इन्तेज़ार करता रहा शाम ढ़लने वाली थी सब लोग घर चले गए नायक सन्यासी से बोला कि क्या अब आपके पास मेरे लिए समय है।
सन्यासी ने नायक को इशारे करते हुए अपने पीछे आने को कहा, चांद की रोशनी में सब कुछ बड़ा सांत और सौम्य था,सारा वातावरण बड़ा ही मोहक प्रतीत हो रहा था।
सन्यासी ने नायक से कहा कि तुम चांद को देख रहे हों । वो सारी रात इसी तरह चमकता रहेगा, हमे शीतलता पहुंचायेगा,लेकिन कल सुबह फिर सूरज निकल जाएगा,और सूरज की रोशनी तो कहीं अधिक तेज होती है,उसी की बजह से हम दिन में खूबसूरत पेड़ों,पहाड़ों और पूरी प्राकृति को देख पाते हैं, मैं तो यही कहूँगा की चांद की कोई जरूरत ही नहीं है।उसका अस्तित्व ही बेकार है।
यह सुनकर नायक ने कहा-अरे! आप क्या कह रहे हैं, ऐसा बिल्कुल नहीं है,चांद और सूरज बिल्कुल अलग अलग है।दोनों की अपनी-अपनी उपयोगिता है आप इस तरह दोनों की तुलना नहीं कर सकते।
सन्यासी मुस्कराया और बोला इसका मतलब तुम्हें अपनी समस्या का हल पता है। हर इंसान दूसरे से अलग होता है,हर किसी की अपनी-अपनी खूबियां होती है,और वे अपने अपने तरीके से दुनिया को लाभ पहुंचाते हैं बस यही प्रमुख हैं वाकी सब गौण है ।

हम सभी अपने आप में प्रमुख होते हैं।किसी अन्य से अपनी तुलना करना व्यर्थ है 🙏🙏🙏

Important formula
18/01/2022

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21/05/2021




https://youtu.be/Api28sp6Tmc
19/05/2021

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नमस्कार दोस्तों मैं आज आपके लिए लेकर आया हूं एक बहुत ही खास टॉपिक जिसका नाम है जिसका पूरा नाम wide area network।यदि आप के ....

07/03/2021


मेरे प्यारे सभी देशवासियों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें
25/01/2021

मेरे प्यारे सभी देशवासियों को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें



शिक्षा सबसे शक्तिशाली हथियार है। जिसका उपयोग आप दुनिया को बदलने के लिए कर सकते हैं।       and   batches
13/01/2021

शिक्षा सबसे शक्तिशाली हथियार है। जिसका उपयोग आप दुनिया को बदलने के लिए कर सकते हैं।


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