30/06/2026
मैंने अपने 25 वर्ष के शिक्षण कार्य के दौरान बच्चो में अनुशासन को लेकर एक बात नोटिस करी बच्चों को पीछे हाथ बांधकर चलवाने की प्रथा, और यह प्रथा पुराने समय से चली आ रही हैl
लेकिन अगर आधुनिक बाल मनोविज्ञान और शिक्षा विज्ञान के हिसाब से देखा जाए, तो यह तरीका बिल्कुल सही नहीं है क्योकि -
छोटे बच्चे जब चलते हैं, तो उनके हाथ उनका शारीरिक संतुलन बनाने में मदद करते हैं। अगर कोई बच्चा अचानक फिसल जाए या ठोकर खाकर गिरे, तो वह अपने हाथों का इस्तेमाल करके खुद को गंभीर चोट लगने से बचाता है। हाथ पीछे बांध देने से बच्चे के चेहरे, सिर या दांतों पर सीधी चोट लगने का खतरा बहुत बढ़ जाता है।
साथ ही छोटे बच्चों का शरीर बढ़ रहा होता है तो उनका नेचुरल बॉडी पोस्चर फ्री होना चाहिए। हाथ पीछे करके जबरदस्ती चलने से उनकी रीढ़ की हड्डी और कंधों पर गलत दबाव पड़ता है, जो लंबे समय में उनके शारीरिक विकास के लिए सही नहीं है।
एक चीज जो मैंने नोटिस की वो ये क़ि हाथ पीछे बंधवाकर चलवाना बच्चों को एक तरह से "कैदी" जैसा महसूस करवाता है। यह उनके आत्म-सम्मान को ठेस पहुंचाता है। अनुशासन का मतलब डर या दबाव नहीं होता, बल्कि आत्म-नियंत्रण सिखाना होता है। इस तरीके से बच्चे नियम का पालन तो मजबूरी में कर लेते हैं, पर उनके अंदर स्कूल या शिक्षकों के प्रति डर और गुस्सा पैदा होने लगता है।
मैंने बच्चो को बहुत मारा पीटा है पर वो कभी मुझेसे इतने नाराज नहीं हुए जितने पीछे हाथ बांधकर चलवाने वाले शिक्षकों से |
एक बात हमेशा याद रखें सच्चा अनुशासन हमेशा अंदर से आना चाहिए, किसी शारीरिक पाबंदी या डर से नहीं। बच्चों को गरिमा और आजादी के साथ सही दिशा दिखाना ही सबसे असरदार तरीका है।
A Flop Teacher