11/10/2023
स्वाति नक्षत्र
स्वाति नक्षत्र के चारो चरण तुला राशि में आते है जन्म के समय यदि चंद्रमा स्वाति नक्षत्र में हो तो जातक की जन्म राशि तुला मानी जाती है।
इस नक्षत्र में जन्म होने पर चरण अनुसार रु,रे, रो,ता अक्षरों से नाम शुरू होता है।
स्वाति नक्षत्र का स्वामी शुक्र है।
देवता वायुदेव है।
स्वाति नक्षत्र के लोग पक्के व्यापारी होते है,खरीदी बिक्री के काम में कुशल,सफल मीडिएटर,दलाली, एजेंसी आदि कार्यों में निपुण होते है।
अंदर से कुछ और बाहर से कुछ और होते है।
मीठा बोलते है।मन के भावों को शीघ्र ही प्रगट नही होने देते है।
सरकारी कार्यों से अच्छा लाभ होता है।
कामुक होते है तथा विपरीत लिंगी के प्रति सहज ही आकर्षित हो जाते है तथा स्वयं भी दूसरे को शीघ्र ही अपनी ओर आकर्षित कर लेते है।
सुंदरता के प्रति इनमे विशेष आकर्षण होता है।
सुंदर और शालीन स्त्रीयों के प्रति विशेष आकर्षण रखते है।
बहुत सारे विषयो का कम अधिक ज्ञान रखते है।
बोलने में कुशल, शत्रु कम ही होते है। सभी के प्रति सम दृष्टि रखते है यानी छोटा बड़ा जाति पाती धर्म आदि के प्रति सम भाव रखते है।
परिवार इनका बड़ा होता है ,स्टाफ बड़ा होता है।
अपने कुल में अधिक उन्नतिशील होते है।
उत्साही होते है,जीवन के तीन पुरुषार्थ ,(धर्म अर्थ काम) इन्हे सहज ही सुलभ हो जाते है।
जीवन को जीने की कला जानते है, खाने पीने एवम खुश रहने में विश्वास करने वाले होते है।
ईश्वर में दृढ़ विश्वास होता है लेकिन धार्मिक क्रियाओं के पालन में कम सक्रिय होते है।
मानवता में विश्वास रखते है और एक अच्छे मनुष्य होते है।
जय श्री कृष्णा