16/12/2023
कोशिश
सिर झुका कर उदास यूं कब तक रहोगे
जिंदगी से हार कर कहां तक आगे बढ़ोगे?
मंजिलें ऊंची अगर हैं तो रास्ते जरूर होंगे
थकन से हार कर यूं किस तरह बैठे रहोगे?
मानता हूं, मरू में कोई नहीं होता सहारा
फिर भी परिंदे किस तरह करते गुजारा?
वक्त को यूं झुक कर सलाम क्यों करना
गर्दिशों की सोच कर भला क्यों डरना?
उड़ान वह है की बंधन टूट कर बिखर जाएं
बेखौफ हम उनकी छाती पर गुजर जाएं।
तड़प को अपनी तलवार बनाओ तो जाने
अपने अंतर को फौलाद बनाओ तो माने।
मनुज से बड़ा है मनुज का मनुज बनना
समय के साज पर विजय का गीत गाना।
तमाम लोगों ने लिख दिया है नाम पानी में
कोशिशें ही तो सदा बदलती रही कहानी में।