07/06/2026
स्पेस स्टेशन पर आई ऐसी आफत, ठीक करने के लिए रूसी वैज्ञानिक ने उठा ली आरी, फूल गई NASA की सांसें
इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर जब मौत बनकर हवा का रिसाव अचानक दोगुना हो गया तब जीरो ग्रैविटी में मौजूद वैज्ञानिकों के पैरों तले जमीन खिसक गई. अंतरिक्ष की असीम गहराइयों में एक ऐसी इमरजेंसी घोषित हुई जिसने नासा (NASA) के कमांड सेंटर में बैठे अधिकारियों के पसीने छुड़ा दिए. संकट के उस खौफनाक मोड़ पर रूस के अंतरिक्ष यात्रियों ने ज्वेज्दा मॉड्यूल की दरार को ठीक करने के लिए जब ‘देसी जुगाड़’ अपनाते हुए सीधे आरी उठा ली तो नासा की सांसें हलक में अटक गईं. अंतरिक्ष स्टेशन के इतिहास में पहली बार अमेरिकी स्पेस एजेंसी को लगा कि रूसी वैज्ञानिकों की यह सनकी जिद पूरे स्टेशन को तबाह कर देगी. पलक झपकते ही ह्यूस्टन से ‘सेफ-हेवन’ का डरावना आदेश गूंजा और पांच अंतरिक्ष यात्री अपनी जान बचाने के लिए बदहवास होकर स्पेसएक्स क्रू ड्रैगन यान के अंदर जा छिपे. करीब दो घंटे तक रूस और अमेरिका के बीच जिंदगी और मौत की जो जंग चली, उसने अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में सबसे बड़ा हाई-वोल्टेज ड्रामा खड़ा कर दिया.
05/06/2026
तस्वीर में दिख रहे व्यक्ति मणिपुर के 29 वर्षीय भारतीय खगोलभौतिकीविद (Astrophysicist) डॉ. रोनाल्डो लैशराम (Dr. Ronaldo Laishram) हैं। उन्होंने अंतरिक्ष में आकाशगंगाओं (Galaxies) के एक अत्यंत प्राचीन और विशाल समूह की खोज की है, जिसे 'लोकतक प्रोटोक्लस्टर' (Loktak Protocluster) नाम दिया गया है।
यह खोज मणिपुर के थौबाल जिले के खंगाबॉक गांव के रहने वाले डॉ. रोनाल्डो लैशराम के नेतृत्व में की गई है। वह वर्तमान में 'नेशनल एस्ट्रोनॉमिकल ऑब्जर्वेटरी ऑफ जापान' (NAOJ) में एक रिसर्चर हैं।
इस विशालकाय प्राचीन ढांचे को खोजने के लिए वैज्ञानिकों ने नासा (NASA) के जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप (JWST) और जापान के सुबारू टेलिस्कोप से मिले डेटा का उपयोग किया है।
01/06/2026
दिल्ली और उसके आसपास के मौसम का सुहावना होने की असली वजह जानकर हैरान हो जायेंगे
उत्तर भारत में भीषण गर्मी के बाद आए इस सुहावने बदलाव के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
मौसम में बदलाव के कारण:
पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance): भूमध्यसागरीय क्षेत्र से आने वाली ये हवाएं भारत के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों में बारिश और बादल लाती हैं, जिससे तापमान में भारी गिरावट आती है।
सक्रिय मानसून की आहट: जून का महीना होने के कारण मानसून की हवाएं धीरे-धीरे उत्तर की ओर बढ़ रही हैं। नमी वाली हवाओं के चलते उमस भले ही हो, लेकिन सीधी चिलचिलाती धूप से राहत मिली है।
बादलों की आवाजाही: पिछले कुछ दिनों में लगातार बादल छाए रहने और कहीं-कहीं हल्की बारिश होने से वातावरण ठंडा हो गया है।
26/05/2026
गीज़ा का 'ग्रेट पिरामिड' दुनिया के सात प्राचीन अजूबों में से एकमात्र जीवित संरचना है, जो लगभग 3,800 वर्षों तक दुनिया की सबसे ऊंची इमारत रही थी。
प्राचीन काल के विशालकाय मकबरे हैं, जिन्हें वहां के राजाओं (फैरो) को दफनाने के लिए बनाया गया था।
लोकप्रिय धारणा के विपरीत, इन्हें बनाने वाले मजदूर गुलाम नहीं थे, बल्कि कुशल कारीगर और स्वतंत्र नागरिक थे जिन्हें बाकायदा वेतन दिया गया था
23/05/2026
रोस्कोस्मोस के कॉस्मोनॉट सर्गेई रिज़िकोव को यूरोपियन रोबोटिक आर्म के आखिर में देखा जा सकता है, जब वह इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के बाहर छह घंटे, नौ मिनट के स्पेसवॉक के दौरान एक हाई-रिज़ॉल्यूशन कैमरे पर काम कर रहे थे।
अंतरिक्ष स्टेशन (Space Station) पृथ्वी की निचली कक्षा में तैरती हुई एक विशाल वैज्ञानिक प्रयोगशाला है। वर्तमान में मुख्य रूप से अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) सक्रिय है, जो लगभग 400 किमी की ऊँचाई पर 28,000 किमी/घंटा की रफ्तार से चक्कर लगा रहा है।
22/05/2026
एक SpaceX ड्रैगन कार्गो स्पेसक्राफ्ट, जिसका नोज़ कोन खुला है और डॉकिंग मैकेनिज्म दिख रहा है, एक्सपीडिशन 74 क्रू के लिए लगभग 6,500 पाउंड खाना, सप्लाई और इक्विपमेंट लेकर इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन के पास पहुँच रहा है। यह मिशन NASA के लिए स्पेस स्टेशन के लिए SpaceX की 34वीं कमर्शियल रीसप्लाई सर्विस फ़्लाइट थी।
19/05/2026
भारत 2027 तक अपनी पहली स्वदेशी बुलेट ट्रेन लॉन्च करने की तैयारी में है। यह ट्रेन 250-280 किमी/घंटा की रफ्तार से दौड़ेगी और 'आत्मनिर्भर भारत' को मजबूत करेगी। मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड कॉरिडोर पर काम जारी है
18/05/2026
जीवाश्म वैज्ञानिकों ने दक्षिणी चीन में पूरी तरह से संरक्षित डायनासोर के घोंसले खोजे हैं, जिनमें से कुछ में अंडों के अंदर मुड़े हुए जीवाश्म भ्रूण पाए गए हैं
दक्षिणी फ्रांस में लगभग 70-72 मिलियन वर्ष पूर्व के 100 से अधिक डायनासोर के अंडे पाए गए हैं, जो उनके विलुप्त होने से ठीक पहले की अवधि के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं।
शोधकर्ताओं ने भारत की नर्मदा घाटी में एक विशाल घोंसला बनाने का स्थान खोजा है, जहां उन्हें टाइटनोसॉर से संबंधित 250 से अधिक अंडों वाले 92 घोंसले मिले हैं।
.
18/05/2026
कामी रीता शेरपा (Kami Rita Sherpa) दुनिया के सबसे प्रसिद्ध और महान पर्वतारोहियों में से एक हैं। उनके नाम माउंट एवरेस्ट पर सबसे अधिक बार चढ़ने का विश्व रिकॉर्ड है।
उनके बारे में कुछ मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
1. एवरेस्ट फतह का विश्व रिकॉर्ड
कामी रीता शेरपा ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी, माउंट एवरेस्ट (8848.86 मीटर), पर सबसे ज्यादा बार चढ़ने का रिकॉर्ड बनाया है। मई 2024 में उन्होंने 30वीं बार एवरेस्ट पर सफलतापूर्वक कदम रखकर अपने ही पिछले रिकॉर्ड को तोड़ा था। वह पिछले कई सालों से लगातार अपने ही रिकॉर्ड को नया रूप दे रहे हैं।
2. शुरुआती जीवन और पृष्ठभूमि
जन्म: उनका जन्म 1970 में नेपाल के सोलुखुम्बु जिले के थामे गांव में हुआ था।
पारिवारिक पृष्ठभूमि: उनका परिवार पर्वतारोहण से गहराई से जुड़ा हुआ है। उनके पिता नेपाल के शुरुआती पेशेवर शेरपा गाइडों में से एक थे, और उनके भाई ने भी कई बार एवरेस्ट फतह किया है।
3. करियर की शुरुआत
कामी रीता ने 1992 में एक गाइड और कुली (Porter) के रूप में काम करना शुरू किया था। उन्होंने 1994 में (24 साल की उम्र में) पहली बार माउंट एवरेस्ट पर फतह हासिल की थी। तब से वह लगभग हर साल एवरेस्ट की चढ़ाई कर रहे हैं।
4. 'एवरेस्ट मैन' के रूप में पहचान
उन्हें दुनिया भर में "एवरेस्ट मैन" के नाम से भी जाना जाता है। एक पेशेवर गाइड (Sherpa Guide) के रूप में, उनका मुख्य काम विदेशी पर्वतारोहियों के लिए रास्ता तैयार करना, रस्सियां बांधना (Rope Fixing) और उन्हें सुरक्षित रूप से चोटी तक पहुंचाना होता है।