30/04/2020
ओज़ोन पर्त उपचार
पर्यावरण संरक्षण संबंधी मोंट्रियल प्रोटोकॉल, क्योटो प्रोटोकॉल, पृथ्वी सम्मेलन जैसे बहुराष्ट्रीय सम्मेलनों के बावजूद ओज़ोन पर्त का क्षय को रोकने में सम्पूर्ण विश्व की असमर्थता की वजह से ओज़ोन पर्त का क्षय अत्यंत जटिल एवं गंभीर विषय बन गया था। आज विश्वव्यापी कोरोना महामारी के चलते परिवहन उद्योग, थर्मल पावर प्लांट, हवाई सेवा, घरेलू कारख़ाने, औद्योगिक गतिविधियों,मानवीय क्रियाकलापों की बंदी से जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण में कमी से नदियों,झीलों, तालाबों, पहाड़ो,ग्लेशियर और वनस्पतियों की शुद्धता लौट आई हैं, गंगा,यमुना जैसी नदियों में निर्मल जल धारा फिर बहने लगी है। जो इससे पूर्व बुरी तरह प्रदूषित हो चुकी थी। फोम उद्योगों में कोल्ड स्टोरेज इमारतों,कोल्ड चैन इंफ्रास्ट्रक्चर, आटोमोबाइल, कमर्शियल रेफ्रिजरेशन, वाटर गीजर, थर्मो वेयर आदि के का विनिर्माण कार्य और उपयोग बंद होने से क्लोरो फ्लोरो कार्बन,हेलोन्स,कार्बन टेराक्लोराइड,हाइड्रो क्लोरो फ्लोरो कार्बन जैसे ओज़ोन क्षरकों में अभूतपूर्व कमी आई,जिससे पचास प्रतिशत तक सीएफसी उत्सर्जित होता है,जिस कारण समतापमंडल में स्थित भूमंडलीय सुरक्षा कवच ओज़ोन परत जो सूर्य से उत्सर्जित हानिकारक पराबैंगनी किरणों को वायुमंडल में ही रोककर त्वचा कैंसर,मानव पशुओं डीएनए संरचनाओं में बदलाव, मोतियाबिंद,प्रतिरोधक क्षमताओं में कमी, प्रकाश संश्लेषण क्रिया को प्रभावित, खाद्य श्रृंखला और समुद्री जीवन की क्षति से बचाती है। वैज्ञानिकों के अनुसार इस जीवनदायिनी ओज़ोन परत में मौजूद सुराख का दस लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र भर गया है। जो सम्पूर्ण विश्व के लिए एक अतुल्य आकस्मिक चमत्कार की तरह है। ओजोन एक वायुमंडलीय गैस है, जो वायुमंडल में अल्प मात्रा में मौजूद हैं, ओज़ोन वायुमंडल में दस लाख वायु अणु पर दस से भी कम ओज़ोन अणु पाए जाते है। ऑक्सीजन के तीन परमाणु संयोग कर एक ओज़ोन अणु बनाते हैं, इसका हल्का नीला रंग और इससे गंध आती है वायुमंडलीय के समतापमंडल में ओज़ोन गैस का नब्बे प्रतिशत भाग और क्षोभमंडल में यह बहुत कम मात्रा में मौजूद हैं। क्षोभमंडल में यह गैस अल्प मात्रा में भी मानव फेफड़ो, तंतुओं, पेड़-पौधों को नुकसान पहुँचा सकती है, मानवजनित ओद्योगिक प्रदूषण के फलस्वरूप इसकी मात्रा बढ़ रही हैं और समतापमंडल में जहाँ इसकी आवश्यकता है, निरन्तर घट रही है, इसलिए मानवीय सभ्यता को इसके भयंकर प्रभाव से संरक्षण हेतु सोलह सितंबर को हर साल विश्व ओज़ोन दिवस मनाया जाता है। जिसके माध्यम से विश्व के समस्त देश ओज़ोन पर्त के क्षय पर चिंता व्यक्त कर समाधान हेतु प्रतिबद्धता प्रदर्शित करती है। आज पर्यावरण विरोधी गतिविधियों पर रोक के सकारात्मक प्रभाव ने सम्पूर्ण विश्व को निर्देशित किया है,कि पर्यावरण के संरक्षण और ओज़ोन पर्त के क्षय निवारण हेतु पर्यावरण विरोधी गतिविधियों पर स्थायी लगाम अपरिहार्य आवश्यकता है।
अजीत यादव