SMART SPAN Consultancy

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हर घर, समाज में शिक्षा, शिक्षकों, माता-?

31/01/2024

हम सब हनुमान चालीसा पढते हैं, सब रटा रटाया...

क्या हमे चालीसा पढते समय पता भी होता है कि हम हनुमानजी से क्या कह रहे हैं या क्या मांग रहे हैं?

बस रटा रटाया बोलते जाते हैं। आनंद और फल शायद तभी मिलेगा जब हमें इसका मतलब भी पता हो।

तो लीजिए पेश है श्री हनुमान चालीसा अर्थ सहित!!

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श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुरु सुधारि।
बरनऊँ रघुवर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।
📯《अर्थ》→ गुरु महाराज के चरण.कमलों की धूलि से अपने मन रुपी दर्पण को पवित्र करके श्री रघुवीर के निर्मल यश का वर्णन करता हूँ, जो चारों फल धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को देने वाला हे।★
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बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरो पवन कुमार।
बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेश विकार।★
📯《अर्थ》→ हे पवन कुमार! मैं आपको सुमिरन.करता हूँ। आप तो जानते ही हैं, कि मेरा शरीर और बुद्धि निर्बल है। मुझे शारीरिक बल, सदबुद्धि एवं ज्ञान दीजिए और मेरे दुःखों व दोषों का नाश कर दीजिए।★
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जय हनुमान ज्ञान गुण सागर,
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥1॥★
📯《अर्थ 》→ श्री हनुमान जी! आपकी जय हो। आपका ज्ञान और गुण अथाह है। हे कपीश्वर! आपकी जय हो! तीनों लोकों,स्वर्ग लोक, भूलोक और पाताल लोक में आपकी कीर्ति है।★
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राम दूत अतुलित बलधामा,
अंजनी पुत्र पवन सुत नामा॥2॥★
📯《अर्थ》→ हे पवनसुत अंजनी नंदन! आपके समान दूसरा बलवान नही है।★
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महावीर विक्रम बजरंगी,
कुमति निवार सुमति के संगी॥3॥★
📯《अर्थ》→ हे महावीर बजरंग बली! आप विशेष पराक्रम वाले है। आप खराब बुद्धि को दूर करते है, और अच्छी बुद्धि वालो के साथी, सहायक है।★
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कंचन बरन बिराज सुबेसा,
कानन कुण्डल कुंचित केसा॥4॥★
📯《अर्थ》→ आप सुनहले रंग, सुन्दर वस्त्रों, कानों में कुण्डल और घुंघराले बालों से सुशोभित हैं।★
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हाथ ब्रज और ध्वजा विराजे, काँधे मूँज जनेऊ साजै॥5॥★
📯《अर्थ》→ आपके हाथ मे बज्र और ध्वजा है और कन्धे पर मूंज के जनेऊ की शोभा है।★
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शंकर सुवन केसरी नंदन, तेज प्रताप महा जग वंदन॥6॥★
📯《अर्थ 》→ हे शंकर के अवतार! हे केसरी नंदन! आपके पराक्रम और महान यश की संसार भर मे वन्दना होती है।★
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विद्यावान गुणी अति चातुर,
राम काज करिबे को आतुर॥7॥★
📯《अर्थ 》→ आप प्रकान्ड विद्या निधान है, गुणवान और अत्यन्त कार्य कुशल होकर श्री राम काज करने के लिए आतुर रहते है।★
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प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया,
राम लखन सीता मन बसिया॥8॥★
📯《अर्थ 》→ आप श्री राम चरित सुनने मे आनन्द रस लेते है। श्री राम, सीता और लखन आपके हृदय मे बसे रहते है।★
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सूक्ष्म रुप धरि सियहिं दिखावा,
बिकट रुप धरि लंक जरावा॥9॥★
📯《अर्थ》→ आपने अपना बहुत छोटा रुप धारण करके सीता जी को दिखलाया और भयंकर रूप करके.लंका को जलाया।★
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भीम रुप धरि असुर संहारे,
रामचन्द्र के काज संवारे॥10॥★
📯《अर्थ 》→ आपने विकराल रुप धारण करके.राक्षसों को मारा और श्री रामचन्द्र जी के उदेश्यों को सफल कराया।★
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लाय सजीवन लखन जियाये,
श्री रघुवीर हरषि उर लाये॥11॥★
📯《अर्थ 》→ आपने संजीवनी बुटी लाकर लक्ष्मणजी को जिलाया जिससे श्री रघुवीर ने हर्षित होकर आपको हृदय से लगा लिया।★
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रघुपति कीन्हीं बहुत बड़ाई,
तुम मम प्रिय भरत सम भाई॥12॥★
📯《अर्थ 》→ श्री रामचन्द्र ने आपकी बहुत प्रशंसा की और कहा की तुम मेरे भरत जैसे प्यारे भाई हो।★
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सहस बदन तुम्हरो जस गावैं,
अस कहि श्री पति कंठ लगावैं॥13॥★
📯《अर्थ 》→ श्री राम ने आपको यह कहकर
हृदय से.लगा लिया की तुम्हारा यश हजार मुख से सराहनीय है।★
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सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा,
नारद,सारद सहित अहीसा॥14॥★
📯《अर्थ》→श्री सनक, श्री सनातन, श्री सनन्दन, श्री सनत्कुमार आदि मुनि ब्रह्मा आदि देवता नारद जी, सरस्वती जी, शेषनाग जी सब आपका गुण गान करते है।★
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जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते,
कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते॥15॥★
📯《अर्थ 》→ यमराज,कुबेर आदि सब दिशाओं के रक्षक, कवि विद्वान, पंडित या कोई भी आपके यश का पूर्णतः वर्णन नहीं कर सकते।★
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तुम उपकार सुग्रीवहि कीन्हा,
राम मिलाय राजपद दीन्हा॥16॥★
📯《अर्थ 》→ आपनें सुग्रीव जी को श्रीराम से मिलाकर उपकार किया, जिसके कारण वे राजा बने।★
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तुम्हरो मंत्र विभीषण माना,
लंकेस्वर भए सब जग जाना ॥17॥★
📯《अर्थ 》→ आपके उपदेश का विभिषण जी ने पालन किया जिससे वे लंका के राजा बने, इसको सब संसार जानता है।★
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जुग सहस्त्र जोजन पर भानू,
लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥18॥★
📯《अर्थ 》→ जो सूर्य इतने योजन दूरी पर है की उस पर पहुँचने के लिए हजार युग लगे। दो हजार योजन की दूरी पर स्थित सूर्य को आपने एक मीठा फल समझ कर निगल लिया।★
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प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहि,
जलधि लांघि गये अचरज नाहीं॥19॥★
📯《अर्थ 》→ आपने श्री रामचन्द्र जी की अंगूठी मुँह मे रखकर समुद्र को लांघ लिया, इसमें कोई आश्चर्य नही है।★
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दुर्गम काज जगत के जेते,
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥20॥★
📯《अर्थ 》→ संसार मे जितने भी कठिन से कठिन काम हो, वो आपकी कृपा से सहज हो जाते है।★
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राम दुआरे तुम रखवारे,
होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥21॥★
📯《अर्थ 》→ श्री रामचन्द्र जी के द्वार के आप.रखवाले है, जिसमे आपकी आज्ञा बिना किसी को प्रवेश नही मिलता अर्थात आपकी प्रसन्नता के बिना राम कृपा दुर्लभ है।★
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सब सुख लहै तुम्हारी सरना,
तुम रक्षक काहू.को डरना॥22॥★
📯《अर्थ 》→ जो भी आपकी शरण मे आते है, उस सभी को आन्नद प्राप्त होता है, और जब आप रक्षक. है, तो फिर किसी का डर नही रहता।★
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आपन तेज सम्हारो आपै,
तीनों लोक हाँक ते काँपै॥23॥★
📯《अर्थ. 》→ आपके सिवाय आपके वेग को कोई नही रोक सकता, आपकी गर्जना से तीनों लोक काँप जाते है।★
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भूत पिशाच निकट नहिं आवै,
महावीर जब नाम सुनावै॥24॥★
📯《अर्थ 》→ जहाँ महावीर हनुमान जी का नाम सुनाया जाता है, वहाँ भूत, पिशाच पास भी नही फटक सकते।★
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नासै रोग हरै सब पीरा,
जपत निरंतर हनुमत बीरा॥25॥★
📯《अर्थ 》→ वीर हनुमान जी! आपका निरंतर जप करने से सब रोग चले जाते है,और सब पीड़ा मिट जाती है।★
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संकट तें हनुमान छुड़ावै,
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥26॥★
📯《अर्थ 》→ हे हनुमान जी! विचार करने मे, कर्म करने मे और बोलने मे, जिनका ध्यान आपमे रहता है, उनको सब संकटो से आप छुड़ाते है।★
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सब पर राम तपस्वी राजा,
तिनके काज सकल तुम साजा॥ 27॥★
📯《अर्थ 》→ तपस्वी राजा श्री रामचन्द्र जी सबसे श्रेष्ठ है, उनके सब कार्यो को आपने सहज मे कर दिया।★
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और मनोरथ जो कोइ लावै,
सोई अमित जीवन फल पावै॥28॥★
📯《अर्थ 》→ जिस पर आपकी कृपा हो, वह कोई भी अभिलाषा करे तो उसे ऐसा फल मिलता है जिसकी जीवन मे कोई सीमा नही होती।★
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चारों जुग परताप तुम्हारा,
है परसिद्ध जगत उजियारा॥29॥★
📯《अर्थ 》→ चारो युगों सतयुग, त्रेता, द्वापर तथा कलियुग मे आपका यश फैला हुआ है, जगत मे आपकी कीर्ति सर्वत्र प्रकाशमान है।★
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साधु सन्त के तुम रखवारे,
असुर निकंदन राम दुलारे ।।30॥★
📯《अर्थ 》→ हे श्री राम के दुलारे ! आप.सज्जनों की रक्षा करते है और दुष्टों का नाश करते है।★
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अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता,
अस बर दीन जानकी माता॥31॥★
📯《अर्थ 》→ आपको माता श्री जानकी से ऐसा वरदान मिला हुआ है, जिससे आप किसी को भी आठों सिद्धियां और नौ निधियां दे सकते है।★
1.) अणिमा → जिससे साधक किसी को दिखाई नही पड़ता और कठिन से कठिन पदार्थ मे प्रवेश कर.जाता है।★
2.) महिमा → जिसमे योगी अपने को बहुत बड़ा बना देता है।★
3.) गरिमा → जिससे साधक अपने को चाहे जितना भारी बना लेता है।★
4.) लघिमा → जिससे जितना चाहे उतना हल्का बन जाता है।★
5.) प्राप्ति → जिससे इच्छित पदार्थ की प्राप्ति होती है।★
6.) प्राकाम्य → जिससे इच्छा करने पर वह पृथ्वी मे समा सकता है, आकाश मे उड़ सकता है।★
7.) ईशित्व → जिससे सब पर शासन का सामर्थय हो जाता है।★
8.)वशित्व → जिससे दूसरो को वश मे किया जाता है।★
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राम रसायन तुम्हरे पासा,
सदा रहो रघुपति के दासा॥32॥★
📯《अर्थ 》→ आप निरंतर श्री रघुनाथ जी की शरण मे रहते है, जिससे आपके पास बुढ़ापा और असाध्य रोगों के नाश के लिए राम नाम औषधि है।★
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तुम्हरे भजन राम को पावै,
जनम जनम के दुख बिसरावै॥33॥★
📯《अर्थ 》→ आपका भजन करने से श्री राम.जी प्राप्त होते है, और जन्म जन्मांतर के दुःख दूर होते है।★
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अन्त काल रघुबर पुर जाई,
जहाँ जन्म हरि भक्त कहाई॥34॥★
📯《अर्थ 》→ अंत समय श्री रघुनाथ जी के धाम को जाते है और यदि फिर भी जन्म लेंगे तो भक्ति करेंगे और श्री राम भक्त कहलायेंगे।★
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और देवता चित न धरई,
हनुमत सेई सर्व सुख करई॥35॥★
📯《अर्थ 》→ हे हनुमान जी! आपकी सेवा करने से सब प्रकार के सुख मिलते है, फिर अन्य किसी देवता की आवश्यकता नही रहती।★
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संकट कटै मिटै सब पीरा,
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥36॥★
📯《अर्थ 》→ हे वीर हनुमान जी! जो आपका सुमिरन करता रहता है, उसके सब संकट कट जाते है और सब पीड़ा मिट जाती है।★
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जय जय जय हनुमान गोसाईं,
कृपा करहु गुरु देव की नाई॥37॥★
📯《अर्थ 》→ हे स्वामी हनुमान जी! आपकी जय हो, जय हो, जय हो! आप मुझपर कृपालु श्री गुरु जी के समान कृपा कीजिए।★
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जो सत बार पाठ कर कोई,
छुटहि बँदि महा सुख होई॥38॥★
📯《अर्थ 》→ जो कोई इस हनुमान चालीसा का सौ बार पाठ करेगा वह सब बन्धनों से छुट जायेगा और उसे परमानन्द मिलेगा।★
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जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा,
होय सिद्धि साखी गौरीसा॥39॥★
📯《अर्थ 》→ भगवान शंकर ने यह हनुमान चालीसा लिखवाया, इसलिए वे साक्षी है कि जो इसे पढ़ेगा उसे निश्चय ही सफलता प्राप्त होगी।★
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तुलसीदास सदा हरि चेरा,
कीजै नाथ हृदय मँह डेरा॥40॥★
📯《अर्थ 》→ हे नाथ हनुमान जी! तुलसीदास सदा ही श्री राम का दास है।इसलिए आप उसके हृदय मे निवास कीजिए।★
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पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रुप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥★
📯《अर्थ 》→ हे संकट मोचन पवन कुमार! आप आनन्द मंगलो के स्वरुप है। हे देवराज! आप श्री राम, सीता जी और लक्ष्मण सहित मेरे हृदय मे निवास कीजिए।★
ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ
🌹सीता राम दुत हनुमान जी को समर्पित🌹
🍒💠🍒💠🍒💠🍒💠🍒
🙏🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹🙏
जय जय श्री राम🙏

🌼🥀!!बोलो सियावर रामचन्द्र की जय!!🥀🌼

22/01/2024

सदियों का संकल्प पूरा हो रहा है,
प्रतीक्षा की घड़ियां बीत चुकी हैं, असंख्य रामभक्तों के तप, त्याग, बलिदान का प्रतिफल मिल रहा है...
अयोध्या के नवनिर्मित भव्य, दिव्य व अलौकिक श्री राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का दिन आ गया है।

इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनें!
आओ दीपक जलाओ और मंगल गीत गाओ
श्री राम अयोध्या पधार चुके हैं !!

जय श्री राम
जय जय श्री राम

नरेश कुमार शर्मा "दिल्ली नरेश"
"भक्त शिरोमणि श्रीराम भक्त हनुमान सेवाश्री संस्थान"

Photos from SMART SPAN Consultancy's post 06/04/2023

✨ *Beautiful please do read*

*हनुमान चालीसा - हिंदी में अनुवाद*

*श्रीगुरु चरन सरोज रज*
मेरे गुरु/अभिभावक के चरणकमलों में

*निज मन मुकुर सुधारि।*
मैं अपने दिल के दर्पण को शुद्ध करता हूँ

*बरनउँ रघुबर बिमल जसु*
मैं बेदाग राम की कहानी का वर्णन करता हूं

*जो दायकु फल चारि॥*
जो चार फल देते है (4 पुरुषार्थ: इच्छा, समृद्धि, धार्मिकता, मुक्ति)

*बुद्धिहीन तनु जानिकै*
खुद को कमजोर और नासमझ समझकर

*सुमिरौं पवनकुमार।*
मैं पवन पुत्र (हनुमान) का चिंतन करता हूं

*बल बुद्धिविद्या देहु मोहिं*
शक्ति, ज्ञान और सभ्यता प्रदान करने के लिए

*हरहु कलेश विकार ॥*
और जीवन के सभी दुखों को दूर करने के लिए।

*जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।*
मैं ज्ञान और गुणों के गहरे समुद्र, भगवान हनुमान की महिमा करता हूं

*जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥*
मैं बंदर आदमी "वानर" की महिमा करता हूं, जो तीनों लोकों (पृथ्वी, वातावरण और परे) को रोशन करते है।

*राम दूत अतुलित बल धामा।*
मैं भगवान राम के वफादार दूत की महिमा करता हूं,

*अंजनि पुत्र पवनसुत नामा॥*
जिसे अंजना (अंजनीपुत्र) और पवन के पुत्र (पवनसुता) के पुत्र के रूप में भी जाना जाता है

*महाबीर बिक्रम बजरंगी।*
आप प्रतिष्ठित योद्धा हैं, साहसी हैं और "इंद्र के वज्र" के रूप में ताकत रखते हैं

*कुमति निवार सुमति के संगी॥*
आप नीच मन का नाश करते हैं और उत्तम बुद्धि से मित्रता करते हैं

*कंचन बरन बिराज सुबेसा।*
सोने के रंग का होने के कारण वह अपने सुंदर रूप में रहते है

*कानन कुंडल कुंचित केसा॥*
आप झुमके और घुंघराले बालों को सजाते हैं।

*हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।* आप एक हाथ में "वज्र" और दूसरे में झंडा धारण करते हैं

*काँधे मूँज जनेऊ साजै॥*
आप अपने कंधे पर "मुंजा घास" द्वारा तैयार किया गया पवित्र धागा "जनेऊ" सजाते हैं

*शंकर सुवन केसरी नंदन।*
आप केसरी के पुत्र शिव की प्रसन्नता हैं

*तेज प्रताप महा जग बंदन॥*
आपके पास एक राजसी आभा है और आपकी पूरी दुनिया द्वारा प्रशंसा की जाता है

*बिद्यावान गुनी अति चातुर।*
आप अठारह प्रकार की विद्याओं के प्रशंसनीय धाम हैं

*राम काज करिबे को आतुर॥*
आप हमेशा भगवान राम की सेवा के लिए तैयार हैं

*प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।*
आप भगवान राम की किंवदंतियों को सुनना पसंद करते हैं

*राम लखन सीता मन बसिया॥*
आप राम, उनकी पत्नी सीता और उनके छोटे भाई लक्ष्मण के हृदय में निवास करते हैं।

*सूक्ष्म रूप धरी सियहिं दिखावा।*
आपने लघु रूप धारण कर सीता को खोजा

*बिकट रूप धरि लंक जरावा॥*
और आपने सोने की बनी लंका को स्थूल रूप में प्रज्वलित करके आग लगा दी

*भीम रूप धरि असुर सँहारे।*
आपने भयानक रूप धारण करके सभी राक्षसों को नष्ट कर दिया

*रामचन्द्र के काज सँवारे॥*
और इसी तरह आपने श्री राम के सभी कार्य किए।

*लाय सँजीवनि लखन जियाए।*
आपने द्रोणागिरी पर्वत को हिमालय से लाये, जिसमें संजीवनी लंका थी और लक्ष्मण को बचाया।

*श्रीरघुबीर हरषि उर लाए॥*
इस कार्य से प्रसन्न होकर श्री राम ने आपको गले लगा लिया।

*रघुपति कीन्हीं बहुत बड़ाई।*
राम ने कई बार तालियाँ बजाईं।

*तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥*
राम ने तो यहां तक ​​कह दिया कि तुम उन्हें उनके भाई भरत के समान प्रिय हो।

*सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।*
हजारों लोग आपको श्रद्धांजलि देंगे

*अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥*
यह कह रहा है; राम ने फिर गले लगाया

*सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।*
ब्रम्हा और मुनिष जैसे कई संत:

*नारद सारद सहित अहीसा॥*
नारद और शारद ने हनुमान को आशीर्वाद दिया है।

*जम कुबेर दिक्पाल जहाँ ते।*
यम कुबेर और दिकपाल जहाँ हैं

*कबी कोबिद कहि सकैं कहाँ ते॥*
कवि और लेखक, कोई भी हनुमान की महिमा को स्पष्ट नहीं कर सका।

*तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।*
आप सुग्रीव के प्रति परम उदार थे

*राम मिलाय राजपद दीन्हा॥*
राम के साथ उनकी मित्रता की और उन्हें अपना राज्य किष्किंधा प्राप्त किया

*तुम्हरो मन्त्र बिभीषन माना।*
विभीषण ने भी आपके मंत्र का समर्थन किया, परिणामस्वरूप, लंका के राजा बन गए

*लंकेश्वर भए सब जग जाना॥*
लंका का पूर्व राजा रावण आपसे डरता था।

*जुग सहस्र जोजन पर भानू।*
सूर्य, जो पृथ्वी से हजारों की दूरी पर है

*लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥*
आपने इसे मीठा वाला फल मानकर निगल लिया।

*प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।*
अपने मुंह में अंगूठी रखकर

*जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं॥*
यह आश्चर्यजनक नहीं है कि आपने समुद्र को छलांग लगा दी

*दुर्गम काज जगत के जेते ।*
दुनिया के अस्पष्ट कार्य

*सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥*
आपकी कृपा से प्राप्त हुए

*राम दुआरे तुम रखवारे।*
आप राम के दरबार के द्वारपाल और संरक्षक हैं

*होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥*
आपकी सहमति के बिना कोई भी उसके दरबार में प्रवेश नहीं कर सकता

*सब सुख लहै तुम्हारी शरना।*
आपके शरणागत को सभी सुख मिलते हैं

*तुम रक्षक काहू को डर ना॥*
आप जिसकी रक्षा करते हैं, उसका कोई भय नहीं रह सकता

*आपन तेज सम्हारो आपै ।*
एक बार जब आप अपनी शक्तियों का स्मरण करते हैं

*तीनौं लोक हाँक ते काँपे॥*
तीनों दुनिया डर से कांपने लगती हैं

*भूत पिशाच निकट नहिं आवै।*
बुरी आत्माएं परेशान नहीं कर सकतीं

*महाबीर जब नाम सुनावै॥*
जब कोई आपका भजन गाता है और आपको याद करता है।

*नासै रोग हरै सब पीरा।*
आप सभी बीमारियों को नष्ट करते हैं और सभी निराशाओं को दूर करते हैं

*जपत निरंतर हनुमत बीरा॥*
जो नियमित रूप से आपको याद करते हैं।

*सब पर राम तपस्वी राजा।*
हालांकि राम सर्वोच्च हैं

*तिन के काज सकल तुम साजा॥*
आप उसके सभी कार्यों को पूरा करते हैं।

*और मनोरथ जो कोई लावै।*
अगर किसी को कभी कुछ चाहिए

*तासु अमित जीवन फल पावै॥*
आप उसकी इच्छाओं को कई गुना पूरा करते हैं

*साधु संत के तुम रखवारे।*
आप संत हैं और रक्षक का ध्यान करते हैं

*असुर निकंदन राम दुलारे॥*
आप राक्षसों का वध करते हैं और राम को प्रिय हैं

*अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।*
आपके पास आठ अलौकिक शक्तियां और नौ खजाने हैं

*अस बर दीन्ह जानकी माता॥*
और यह आपको माता सीता द्वारा प्रदान किया गया है।

*तुम्हरे भजन राम को पावै।*
जो कोई भी आपके भजन गाता है, वह सीधे सर्वोच्च व्यक्ति, राम का अधिकारी होता है

*जनम जनम के दुख बिसरावै॥*
और जीवन की सभी प्रतिकूलताओं और नकारात्मकताओं से छुटकारा दिलाता है।

*अंत काल रघुबर पुर जाई।*
जो हमारा भक्त है, वह अपने शरीर की मृत्यु के बाद परमात्मा के धाम में जाता है

*जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई॥*
और उसके बाद जब उनका पुनर्जन्म होता है, तो वे हमेशा भगवान के भक्त के रूप में जाने जाते हैं

*और देवता चित्त न धरई।*
जो किसी दूसरे भगवान से प्रार्थना नहीं करता

*हनुमत सेइ सर्व सुख करई॥*
लेकिन केवल आपको, यहां तक ​​​​कि वह जीवन के सभी खजाने को प्राप्त करता है (आमतौर पर यह कहा जाता है कि हर भगवान कुछ न कुछ प्रदान करता है)

*संकट कटै मिटै सब पीरा।*
सभी रोग दूर हो जाते हैं और सभी विपत्तियों से छुटकारा मिल जाता है

*जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥*
एक बार जब कोई आपका भक्त बन जाए और आपको याद करे।

*जय जय जय हनुमान गोसाईं।*
मैं विजयी, सभी इंद्रियों के स्वामी, हनुमान की प्रशंसा करता हूं

*कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥*
जैसे गुरु अपने शिष्य पर अपनी कृपा बरसाते हैं, वैसे ही मुझे अपने आशीर्वाद से नहलाएं

*जो शत बार पाठ कर कोई।*
जो इस स्तोत्र का 100 बार पाठ करता है

*छूटहि बंदि महा सुख होई॥*
उसके सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और उसे जीवन का सारा खजाना मिल जाता है।

*जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा।*
जो कभी इस चालीसा का पाठ करता है

*होय सिद्धि साखी गौरीसा॥*
सभी शक्तियों को प्राप्त करता है और भगवान शिव इसके साक्षी हैं।

*तुलसीदास सदा हरि चेरा।*
तुलसीदास, जो इस चालीसा के रचयिता हैं, सदैव आपके शिष्य रहेंगे

*कीजै नाथ हृदय महँ डेरा॥*
और वह हमेशा अपनी आत्मा में विराजमान प्रभु से प्रार्थना करता है।

*पवनतनय संकट हरन मंगल मूरति रूप।*
मैं पवन पुत्र का आह्वान करता हूं, जो मेरे जीवन के सभी दुखों को दूर करने के लिए एक शुभ रूप है

*राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सुर भूप॥*
मैं आपसे प्रार्थना करता हूं कि मेरे हृदय में राम, सीता और लक्ष्मण के साथ निवास करें।

22/03/2023

संवत्सर का अर्थ है, सम+वत्सर यानि पूर्ण वर्ष। शास्त्रों के अनुसार, ब्रह्माजी ने इस दिन सम्पूर्ण सृष्टि और लोकों का सृजन किया था। इसी दिन भगवान विष्णु का मत्स्यावतार भी हुआ था। हिंदू शास्त्रों के अनुसार नव संवत्सर चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि से प्रारम्भ होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार संवत के 5 भेद होते हैं, सौर, सावन, चांद्र, बार्हस्पत्य और नाक्षत्र। एक संवत में 12 मास होते हैं, चैत्र से फाल्गुन तक इनका क्रम निश्चित है। एक संवत में 6 ऋतुएं होती हैं।

*माता भगवती जगदंबा* की कृपा से ये नया वर्ष आपको, नयी प्रेरणा दे और आपको अपने लक्ष्यों की प्राप्ति हो।🙏🏼🙏🏼

*सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया।*
*सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित् दुःखभाग् भवेत्।*

सभी सुखी होवें, सभी रोगमुक्त रहें, सभी मंगलमय के साक्षी बनें और किसी को भी दुःख का भागी न बनना पड़े।

*इन्हीं मंगलकामनओं के साथ "आप सभी सनातनी और सत्य सनातन संस्कृति का सम्मान करने वाले भाई बहनों को परिवार" सहित विक्रम संवत्सर २०८० (2080) एवं चेत्र नवरात्री की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई....*

*।। जय माता दी ।।*
🚩🚩🙏🌹❤️🌹🙏🚩🚩

नरेश कुमार शर्मा "दिल्ली नरेश"
*"ऑल इंडिया स्टूडेंट्स वेलफेयर काउंसिल"*
*"मीडिया पुलिस पब्लिक"*

27/08/2022
13/07/2022

गुरु पूर्णिमा : अगर आपका नहीं है कोई गुरु, तो उनके गुरु हैं स्वयं श्री हनुमान

जिन लोगों का कोई गुरु नहीं हैं उनको चिंता करने कि आवश्यकता नहीं है, इस समस्या का समाधान गोस्वामी तुलसीदास ने कर दिया है. तुलसीदास ने हनुमान चालीसा में लिखा है,

जै जै जै हनुमान गोसाई
कृपा करहु गुरुदेव की नाई

भौतिकवादी युग में गुरु के प्रति आस्था में न्यूनता आयी है, जिसके परिणाम स्वरूप जीवन में अशांति, असुरक्षा और मानवीय गुणों का अभाव पैदा हो रहा है.

तुलसीदास ने रामचरित मानस और हनुमान चालीसा के प्रारंभ में ही गुरु वंदना की है. उन्होंने कहा है कि अगर किसी का गुरु नहीं है तो वह हनुमान जी को अपना गुरु बना सकता है. ईश्वर का साक्षात्कार बिना गुरुकृपा के होना कठिन है. हनुमान जी के सामने पवित्र भाव रखते हुए उन्हें अपना गुरु बनाया जा सकता है. एकमात्र हनुमान जी ही है जिनकी कृपा हम गुरु की तरह प्राप्त कर सकते हैं. तुलसीदास जी ने हनुमान चालीसा का शुभारंभ ही गुरु के चरणों में नमन करते हुए किया है-

श्री गुरु चरन सरोज रज निज मन मुकुरु सुधारि
बरनऊं रघुवर बिमल जसु, जो दायक फल चारि
बुद्धि हीन तनु जानके, सुमिरौ पवन कुमार
बल बुद्धि विद्या देहु मोहि हरहु कलेश विकार

तुलसीदास ने हनुमान चालीसा में सभी को बजरंगबली को अपना गुरु बनाने को कहा है. उन्होंने शिष्य को सचेत करते हुए कहा है कि हनुमान जी को गुरु बनाने के बाद अनुशासित रहना अनिवार्य है. अपनी मति और गति सही दिशा की ओर रखनी चाहिए. राम भक्त श्री हनुमान की कृपा पानी हो तो उन्हें नियम, भक्ति और समर्पण से ही प्रसन्न किया जा सकता है. हनुमान जी उन्हीं पर कृपा करते हैं जिनके विचार नेक होते हैं.
कुमति निवार सुमति के संगी....

रामचरितमानस के आरंभ में सर्वप्रथम गुरु वंदना को ही प्रधानता दी गई है.

श्रीगुर पद नख मनि गन जोती ।
सुमिरत दिब्य दृष्टि हियँ होती ।।

अर्थात् श्री गुरु चरण के स्मरण मात्र से ही आत्मज्योति का विकास हो जाता है. भारतीय संस्कृति में गुरु पद को सर्वोपरि माना गया है. जीव को ईश्वर की अनुभूति और साक्षात्कार कराने वाली मान प्रतिमा गुरु ही हैं. इस कारण गुरु का साक्षात् त्रिदेव तुल्य स्वीकार किया है.

गुरुर्ब्रह्मा, गुरुर्विष्णु, गुरुर्देवो महेश्वरः
गुरुःसाक्षात् परम ब्रह्म तस्मै श्री गुरुवे नमः।।

इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है कि हमारी प्राचीन गुरुकुल परंपरा. गुरुकुल संस्कृति ने महर्षि, तपस्वी, राष्ट्रभक्त, चक्रवर्ती सम्राट और जगद्गुरु तक के सुयोग्य महापुरुष उपलब्ध कराएं हैं. मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम ने भी गुरु महिमा को सर्वोपरि माना है. जनकपुरी में ऋषि विश्वामित्र की सेवा इसका प्रमाण है.

तेइ दोउ बंधु प्रेम जनु जीते ।
गुर पद कमल पलोटत प्रीते ⁠।⁠।

समस्त धार्मिक संप्रदाय गुरु पद की महिमा को स्वीकार करते हैं. गुरु के निर्देशन की अवज्ञा करने के लिए जीवन में सुख और सफलता प्राप्त करना असंभव माना गया है.

गुर कें बचन प्रतीति न जेही ।
सपनेहुँ सुगम न सुख सिधि तेही ।।

भारतीय संस्कृति में गुरु आश्रय रहित व्यक्ति को अत्यंत हेय माना गया है. वर्तमान समय में भौतिकवादी जन समुदाय में गुरु के प्रति आस्था का प्रायः अभाव सा होता जा रहा है. विशेष कर युवा वर्ग इससे दूर है. जिसके परिणामस्वरूप जीवन में अशांति, असुरक्षा और मानवीय गुणों का अभाव हो रहा है. हमारे देश के ऋषि-महर्षि, तीर्थकर और संतमहापुरुष गौतम बुद्ध, महावीर जैसी दिव्य विभूतियों ने गुरु पद से अपने उपदेशों से उदार भावना स्थापित की.

गुर बिनु भव निधि तरइ न कोई ।
जौं बिरंचि संकर सम होई ।।

साधक को जीवन की सार्थकता के लिए योग्य गुरु की कृपा प्राप्त करना अतिआवश्यक होता है. गुरु प्राप्ति के लिए एकलव्य के समान अपार श्रद्धा और विश्वास की आवश्यकता है. गुरु पूर्णिमा को अपने गुरु का पूजन, वंदन और सम्मान करना चाहिए....!!

📖 लेखक को आभार सहित ✍️🎤
*******************************
गुरुपूर्णिमा पर
गुरूदेव को कोटि कोटि नमन

गुरुर्ब्रह्मा, गुरुर्विष्णु, गुरुर्देवो महेश्वरः
गुरुःसाक्षात् परम ब्रह्म तस्मै श्री गुरुवे नमः।।

आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई

शुभ हों आपके दिन रात।
होती रहे सदा आप पर सकारात्मक ऊर्जा की बरसात

🙏🌹🙏📖✍️🎤
नरेश कुमार शर्मा "दिल्ली नरेश"

14/02/2022

14 फरवरी
पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए
भारत माता के वीर जवानों के शौर्य और बलिदान
को शत-शत नमन

📖✍️🎤
नरेश कुमार शर्मा "दिल्ली नरेश"
मीडिया पुलिस पब्लिक
https://facebook.com/Tributeaiswc

AISWC MEDIA Tribute सादर प्रणाम
आपके हमारे अपने, जो हमें छोड़ कर स्वर्ग सिधार चुके हैं यहां इस पेज पर सम्मान सहित आप अपनी श्रद्धांजलि अर्पित कर सकते हैं!
परम पिता परमात्मा समस्त दिवंगत आत्माओं को
अपने श्री चरणों में स्थान देकर मुक्ति प्रदान करें
AISWC MEDIA TRIBUTE

राष्ट्रीय महिला दिवस - Media Police Public 13/02/2022

https://mediapolicepublic.com/news/453302


#राष्ट्रीय_महिला_दिवस

दोस्तों आप सभी जानते हैं कि
8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस होता है
जिसको बड़े धूमधाम से हर देश मनाता है
भारतवर्ष में भी इस दिन बड़े-बड़े प्रोग्राम किए जाते हैं।

आज आपको हम राष्ट्रीय महिला दिवस के बारे में बताते हैं।

# # राष्ट्रीय महिला दिवस 13 फरवरी 2022 की
चर्चा ना बड़े बड़े अखबारों में है।
नाही टीवी चैनलों पर और ना ही सोशल मीडिया पर इसको प्रसारित किया जाता / जा रहा है।

# # # जबकि.... इसका प्रचार प्रसारऔर प्रसारण ज्यादा से ज्यादा होना चाहिए क्योंकि... आज का दिन राष्ट्रीय महिला दिवस के रुप में मनाया जाता है।

# # # # राष्ट्रीय महिला दिवस पर फेसबुक पर "जीवन लोक पेज", मीडियम पुलिस पब्लिक परिवार, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स वेलफेयर काउंसिल, दिव्य सृष्टि सृजन चैरिटेबल ट्रस्ट और अखिल भारतीय ब्राह्मण कल्याण महासभा ट्रस्ट की तरफ से भारतवर्ष की सभी महिलाओं को हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई.....

राष्ट्रीय महिला दिवस सरोजिनी नायडू को समर्पित है।

सरोजिनी नायडू का जन्म 13 फरवरी 1879 को हुआ था। वह बचपन से बुद्धिमान थीं। जब सरोजिनी नायडू 12 साल की थीं, तब से उन्हें कविताएं लिखनी शुरू कर दी थी। बाद में स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया। देश की आजादी और महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। आजादी के बाद सरोजिनी नायडू को पहली महिला राज्यपाल बनने का भी मौका मिला। उनके कार्यों और महिलाओं के अधिकारों के लिए उनकी भूमिका को देखते हुए सरोजिनी नायडू के जन्मदिन के मौके पर राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है।

🙏🌹🙏📖✍️🎤
नरेश कुमार शर्मा "दिल्ली नरेश"
"ऑल इंडिया स्टूडेंट्स वेलफेयर काउंसिल"
"मीडिया पुलिस पब्लिक"
जीवन लोक पेज फेसबुक
https://www.facebook.com/519373598157643/posts/4902614486500177/

राष्ट्रीय महिला दिवस - Media Police Public ’s_Day #राष्ट्रीय_महिला_दिवस दोस्तों आप सभी जानते हैं कि 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस होता है जिसको बड़े ...

09/02/2022

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