28/12/2022
भगवान महावीर का संदेश - जियो और जीने दो
जन जन तक पहुँचाना है।
God Mahaveer Swami's message - live and let live
Reach the masses
28/12/2022
*आवश्यक मेसेज !*
सभी यह information पढ़े और शेयर करें ।
*शरीर में ब्लड प्रेशर :*
*120 / 80 -- Normal*
*130 / 85 -- Normal (In Control)*
*140 / 90 -- High (थोड़ा बढ़ा हुआ)*
*150 / 95 -- Very High (बहुत ज्यादा)*
*Oxygen Leval :*
*ऑक्सिजन लेव्हल :*
ऑक्सिजन ऑक्सिमीटर से चेक करने पर..
*94 - Normal*
*95, 96, 97 se 100 oxygen level बहुत अच्छा.*
*90 ते 93 ऑक्सिजन लेव्हल जरा कम*
*80 ते 89 ऑक्सिजन लेव्हल बहुत कम* डॉक्टर की सलाह पर एडमिट होना चाहिए !
*PULSE :*
*72 Per Minute (Standard) बहुत अच्छा.*
*60 --- 80 P.M. (Normal) मध्यम*
*90 ते 120 Pulse (बढ़ा हुआ)*
*TEMPERATURE :*
डिजिटल थरमामीटर से चेक करने पर :
*92 ते 98.6 F (Fever) तक बुखार नही (Normal)*
*99.0 F थोडा बुखार*
*100 .F से 102 F ज्यादा बुखार*
HRCT या chest CT SCAN करने पर.
1. HRCT score: 0 - 8 (Mild Infection).
2.HRCT score: 9 - 18 (Moderate Infection).
3. HRCT score: 19 - 25 गंभीर (Severe Infection) .
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उपचार :
1. Mild infections में नार्मल मेडिसिन से ठीक हो सकते है.
2. सीवियर इंफेक्शन के लिए ऑक्सिजन और वेंटिलेटर की आवश्यकता होती है
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HRCT Score मतलब क्या ?
कोरोना इन्फेक्शन के कारण ऑक्सिजन अब्सॉर्ब करने वाली थैलियो पर सूजन आकर उनमें कफ । पानी भरना ।
CT SCAN करते समय लंग के 25 भाग करके उसमें से कितने भाग इन्फेक्टेड है यह देखकर उसका स्कोर निकला जाता है ।
अर्थात जितना ज्यादा स्कोर उतना ऑक्सीजन लेने में दिक्कत और उतना ही रिस्क ज्यादा ।
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Take care, and Be safe.
*कोरोना के लिए घर पर आवश्यक चिकित्सा किट:--*
1. पारासिटामोल या डोलो 650 mg SOS leve
2. बीटाडीन गार्गल माउथवॉश के लिए गुनगुने पानी के साथ
3. विटामिन सी जैसे
Tab Limcee 500mg चूसने की दिन में 3 या 4 बार ।। ये बहुत ही शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है बहुत ही कारगर है इममुनिटी बढ़ाता है ।। वायरस को असक्रिय कर देती हैं ।
और
Tab विटामिन D3 60k
सप्ताह में एक 4 सप्ताह तक
4.Tab बी कॉम्प्लेक्स साथ मे मल्टीविटामिन एव ट्रेस एलिमेंट्स
जैसे Neurokind plus
रोज एक 10 से 15 दिन तक
इममुनिटी के लिये
5. भाप लेवें - गले मे खराश ठीक एव वायरल लोड कम कर वायरस को असक्रिय कर देता है ।
6. पल्स ऑक्सीमेटर रखे ऑक्सिजन लेवल देखने के लिए ।
नॉर्मल 90 से ऊपर होना चाहिए
22/12/2020
https://www.facebook.com/1084816681658034/posts/2869680059838345/?app=fbl
"कभी कर्ज लेने की मत सोचना और अगर लेना पड़े तो उसे चुकाना अपना फर्ज समझना"।
✍️मुनि श्री १०८ #प्रमाणसागरजी महाराज
#ज्ञानकल्याणक पर्व
#चाँदनपुर के #महावीर तोरी छबि प्यारी
⛳आज 3 मई वैसाख शुक्ला दशमी रविवार जिन शासन नायक व् अंतिम तीर्थंकर महावीर स्वामी का ज्ञान कल्याणक है जो कि पावापुर में हुआ था | आज के ही दिन संध्या के समय हस्त नक्षत्र में साल वृक्ष के नीचे केवलज्ञान की प्राप्ति हुई थी | दर्शन करें इस पवित्र स्थान के --- ( कुबेर ने समवशरण की रचना की ,भगवान महावीर मध्य भाग में विराजमान हुए ,समवशरण की बारहों सभाएं भर गयीं ,सभी सतृष्ण लोचनों से भगवान महावीर की ओर देख रहे थे उनके कान दिव्य उपदेश का श्रवण करने को व्याकुल थे ,पर महावीर स्वामी मौन थे | केवलज्ञान की प्राप्ति पर भी 66 दिन तक उनकी दिव्य ध्वनि नहीं खिरी | तब इंद्र ने अवधिज्ञान से जाना कि सभा में कोई गणधर नहीं है –बिना #गणधर के #तीर्थंकर की वाणी नहीं खिरती | इंद्र गौतम गोत्रीय इंद्रभूति ब्राह्मण को युक्ति से लाये मान गलित होते ही भगवान से दीक्षित होकर प्रथम गणधर बने तब भगवान की दिव्यध्वनि खिरी |)
आप सभी 👨👩👦👦जन को 1008 तीर्थंकर श्री महावीर प्रभु के ज्ञान कल्याणक की हार्दिक बधाईयां.ओर मंगल कामनाएं....
जिन मन्दिर 🐆🎪 🐆में साक्षात विराजित
महावीर प्रभु के पावन चरणों मे त्रिकाल त्रिबार नमोस्तु भगवन 👏
27/04/2020
कल दिनाँक 26 अप्रेल वार रविवार
परम देवाधिदेव प्रथम तीर्थंकर श्री १००८ #आदिनाथभगवान ने हस्तिनापुर की पावन धरा पर १ वर्ष १३ दिन के उपवास के बाद गन्ने के रस से प्रथम पारणा किया
उसी दिन से #आहारदान की परम्परा का पादुर्भाव हुआ
आज भी जैन समाज में हजारों श्रावक गण अपनी अपनी शक्ति के अनुसार १ वर्ष १३ दिन का उपवास करते हैं और #अक्षयतृतीया के शुभ दिन #हस्तिनापुर की धरा पर गन्ने के रस से पारणा करते हैं अर्थात उपवास खोलते हैं
कहते अक्षय तृतीया वाले दिन निर्धन से निर्धन व्यक्ति को भी निस्वार्थ भाव से दान देना चाहियें
जिस भाव से जिस वस्तु का आप दान देते हो उसी के अनुरूप आपको अक्षय फल प्राप्त होता हैं
अक्षय तृतीया आपके लिए आपके परिवार के लिए पूरे विश्व के लिए शुभ हो ऐसी मंगल कामना के साथ
🙏"अक्षय तृतीया"🙏
की अग्रिम #शुभकामनाएं
इस बार हस्तिनापुर के साथ साथ पूरे विश्व में अक्षय तृतीया का सामूहिक महोत्सव "कोरोना महामारी" के कारण स्थगित कर दिया गया हैं जो की उचित और मानवता के पक्ष में हैं
" #कोरोना महामारी" जैसी आपदा का इस धरा पर आना अकारण नहीं हैं
हमारे स्वाद, स्वार्थ व महत्वाकांक्षाऔं के पीछे छुपे हुए अपराधो का फल हैं
जैन धर्म में ५ पाप बताएं गये हैं
१. हिंसा
२. झूठ
३. चोरी
४. कुशील
५. परिगृह
पाप तो सभी बड़े और घातक परिणामों को देने वाले होते हैं परन्तु परिगृह को सबसे बड़ा पाप बताया गया हैं परिगृह अर्थात आवश्यकता से अधिक वस्तु को रखना बहुत बार आपने सुना भी होगा
"लोभ पाप का बाप होता हैं"
आपके सद्कर्मो के पुण्य उदय से आपके पास संपत्ति का भण्डार हैं तो उसका सदोपयोग करों नहीं तो एक दिन वो आपको ही नुकसान देने लगेगी
धर्म क्या हैं "वस्तु का स्वभाव ही धर्म है" जिस तरह पानी का स्वभाव शीतल है उसी तरह लक्ष्मी का स्वभाव चंचल हैं अगर आप लक्ष्मी को बांधकर रखना चाहोगे तो वो अपने आप चली जायेगी
जब लक्ष्मी अपने आप जाती हैं तो बहुत कष्ट देकर जाती हैं
वही आप धन का निरन्तर दान के माध्यम से सेवा कार्यों में उपयोग करते हो तो लक्ष्मी जी आपसे प्रसन्न रहती हैं और पुन्हा पुन्हा बढ़ते रूप में आपके पास आती हैं
अज्ञानी से अज्ञानी व्यक्ति भी जनता हैं की मृत्यु अटल हैं और अपने साथ हम अपने कर्मों को लेकर जाते हैं
जो निकल गया वो वापिस नहीं ला सकते पर जो हमारे हाथ में हैं उससे हम अपने भविष्य को काफी हद
#भारतीयसंस्कृति में पर्व, त्याहारों और व्रतों का अपना एक अलग महत्व है। ये हमें हमारी सांस्कृतिक परंपरा से जहां जोड़ते हैं वहीं हमारे आत्मकल्याण में भी कार्यकारी होते हैं। वैशाख शुक्ला तृतीया को #अक्षयतृतीयापर्व मनाया जाता है। इस दिन जैनधर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव (आदिनाथ ) ने राजा श्रेयांस के यहां #इक्षुरस का आहार लिया था, जिस दिन तीर्थंकर ऋषभदेव का आहार हुआ था, उस दिन वैशाख शुक्ला तृतीया थी। उस दिन राजा श्रेयांस के यहां भोजन, अक्षीण (कभी खत्म न होने वाला ) हो गया था। अतः आज भी लोग इसे अक्षय तृतीया कहते हैं। जैनधर्म के अनुसार भरत क्षेत्र में इसी दिन से आहार दान की परम्परा शुरू हुई। ऐसी मान्यता है कि मुनि का आहार देने वाला इसी पर्याय से या तीसरी पर्याय से मोक्ष प्राप्त करता है। राजा श्रेयांस ने भगवान आदिनाथ को आहारदान देकर अक्षय पुण्य प्राप्त किया था, अतः यह तिथि अक्षय तृतीया के रूप में मानी जाती है। यह दिन बहुत ही शुभ होता है, इस दिन बिना मुर्हूत निकाले शुभ कार्य संपन्न होते हैं।
#जम्बूद्वीप के भरतक्षेत्र में विजयार्ध पर्वत से दक्षिण की ओर मध्य आर्यखण्ड में कुलकरों में अंतिम कुलकर नाभिराज हुए। उनके मरूदेवी नाम की पट्टरानी थी। रानी के गर्भ में जब #जैनधर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव आये तब गर्भकल्याणक उत्सव देवों ने बडे़ ठाठ से मनाया और जन्म होने पर #जन्मकल्याणक मनाया। फिर दीक्षा कल्याणक होने के बाद ऋषभदेव ने छःमाह तक घोर तपस्या की। छः माह के बाद चर्या (आहार) विधि के लिए ऋषभदेव भगवान ने अनेक ग्राम नगर शहर में विहार किया, किन्तु जनता व राजा लोगों को आहार की विधि मालूम न होने के कारण भगवान को धन, कन्या, पैसा, सवारी आदि अनेक वस्तु भेंट की। भगवान ने यह सब अंतराय का कारण जानकर पुनः वन में पहुंच छःमाह की तपश्चरण योग धारण कर लिया।
अवधि पूर्ण होने के बाद पारणा करने के लिए चर्या मार्ग से ईर्यापथ शुद्धि करते हुए ग्राम, नगर में भ्रमण करते-करते कुरूजांगल नामक देश में पधारे। वहां हस्तिनापुर में कुरूवंश के शिरोमणि महाराज सोम राज्य करते थे। उनके श्रेयांस नाम का एक भाई था उसने सर्वार्थसिद्धि नामक स्थान से चयकर यहां जन्म लिया था।
एक दिन रात्रि के समय सोते हुए उसे रात्रि के आखिरी भाग में कुछ स्वप्न आये। उन स्वप्नों में मंदिर, कल्पवृक्ष, सिंह, वृषभ, चंद्र, सूर्य, समुद्र, आग, मंगल द्रव्
* #अक्षयतृतीयापर्व का विस्तृत #इतिहास --*
भव्यात्माओं !! भगवान #ऋषभदेव का जब छह माह का योग पूर्ण हो गया, वे यतियों-मुनियों की #आहार विधि बतलाने के उद्देश्य से शरीर की स्थिति के लिये निर्दोष आहार हेतु निकल पड़े ।
महामेरू भगवान ऋषभदेव ईर्यापथ से गमन कर रहे हैं, अनेकों ग्राम नगर शहर आदि में पहुँच रहे हैं । उन्हें देखकर मुनियों की चर्या को न जानने वाली प्रजा बड़े उमंग से साथ सन्मुख आकर उन्हें प्रणाम करती है। उनमें से कितने ही लोग कहने लगते हैं कि हे देव! प्रसन्न होइये और कहिये क्या काम है ? हम सब आपके किंकर हैं, कितने ही भगवान के पीछे-पीछे हो लेते हैं । अन्य कितने ही लोग बहुमूल्य रत्न लाकर भगवान् के सामने रख देते हैं और कहते हैं कि हे नाथ! प्रसन्न होइये, तुच्छ भेंट स्वीकार कीजिये, कितने ही सुन्दरी और तरुणी कन्याओं को सामने करके कहते हैं प्रभो! आप इन्हें स्वीकार कीजिये, कितने ही लोग वस्त्र, भोजन, माला आदि अलंकार ले-लेकर उपस्थित हो जाते हैं, कितने ही लोग प्रार्थना करते हैं कि प्रभो! आप आसन पर विराजिये,।भोजन कीजिये इत्यादि इन सभी निमित्तों से प्रभु की चर्या में क्षण भर के लिए विघ्न पड़ जाता है और वे पुनः आगे बढ़ जाते हैं। इस प्रकार से जगत को आश्चर्य में डालने वाली गूढ़ चर्या से विहार करते हुए भगवान के छह माह व्यतीत हो जाते हैं l
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★ * #राजाश्रेयांस के सात स्वप्न -*
एक दिन रात्रि के पिछले भाग में हस्तिनापुर के युवराज श्रेयांसकुमार सात स्वप्न देखते हैं। प्रसन्नचित्त होते हुए प्रात: #राजासोमप्रभ के पास पहुंचकर निवेदन करते हैं कि हे भाई ! आज मैंने उत्तम-उत्तम सात स्वप्न देखे हैं सो आप सुनें-
1). प्रथम ही सुवर्णमय सुमेरूपर्वत देखा है.
2). दूसरे स्वप्न में जिनकी शाखाओं पर आभूषण लटक रहे हैं ऐसा कल्पवृक्ष देखा है.
3). तृतीय स्वप्न में ग्रीवा को उत्पन्न करता हुआ सिंह देखा है.
4). चतुर्थ स्वप्न में अपने सींग से किनारे को उखाड़ता हुआ बैल देखा है.
5). पंचम स्वप्न में सूर्य और चंद्रमा देखे हैं.
6). छठे स्वप्न में लहरों से लहराता हुआ और रत्नों से शोभायमान समुद्र देखा है.
7). सातवें स्वप्न में अष्ट मंगल द्रव्य को हाथ में लेकर खड़ी हुई ऐसी व्यंतर देवों की मूर्तियां देखी हैं । इनका फल जानने की मुझे अतिशय उत्कंठा हो रही है...
★ *सोमप्रभ द्वारा स्वप्नों का
* #आदिनाथ #भगवान का #परिचय*
*आदिनाथ भगवान के #प्रथमआहार के निमित्त #दान तीर्थ का प्रवर्तन #अक्षयतृतीया महापर्व #महोत्सव दिनांक 26-4-2020 दिन रविवार*
*आदिनाथ भगवान का संक्षिप्त परिचय*
*प्रथम तीर्थंकर*
नाम - *आदिनाथ जी*
चिन्ह - *वृषभ*
द्वीप का नाम - *जम्बूदीप*
क्षैत्र - *पूर्व विदेह*
देश प्रांत - *पुष्कलावती*
नगर - *पुंडरीकिनी*
वहाँ का नाम - *वज्रनाभि* *(ऋषभदेव का जीव तो चक्रवर्ती 11 अंग 14 पूर्व का वेत्ता था।)*
वहाँ के गुरु - *वज्रसेन*
कहां से आये - *सर्वार्थ सिद्धि विमान*
जन्म भूमि - *अयोध्या (साकेत पुरृ)*
वंश - *इक्ष्वाकु वंश*
पिता - *नाभिराज जी*
माता - *मरुदेवी*
गर्भ तिथि - *आषाढ़ कृष्णा दूज*
गर्भ नक्षत्र - *उत्तराषाढ़ा*
जन्म तिथि - *चैत्र कृष्णा नवमी*
जन्म नक्षत्र - *अभिजित*
जन्म राशि - *धनु*
शरीर वर्ण - *तपा हुआ स्वर्ण*
शरीर की ऊंचाई - *500 धनुष*
कुमार काल - *20 लाख पूर्व वर्ष*
राजभोग काल - *63 लाख पूर्व*
केवली काल - *एक हजार वर्ष कम एक लाख पूर्व वर्ष*
पूर्ण आयु - *84 लाख पूर्व वर्ष*
दीक्षा तिथि - *चैत्र कृष्णा 9*
दीक्षा समय , नक्षत्र - *अपरान्ह , उत्तराषाढ़ा*
दीक्षा पालकी - *सुदर्शन*
दीक्षा नगर ,वन - *प्रयाग , सिद्धार्थ वन*
दीक्षा वृक्ष ,वृक्ष ऊंचाई - *वट वृक्ष , 6000 धनुष*
वैराग्य निमित्त - *नीलांजना की मृत्यु*
दीक्षा उपवास नियम - *6 माह का उपवास*
कितने दिनों के बाद आहार - *13 माह 9 दिन बाद*
प्रथम आहार - *इक्षुरस*
आहार दाता - *श्रेयांस राजा*
पारणा नगर - *हस्तिनापुर*
दीक्षित राजा - *चार हजार*
केवलज्ञान तिथि - *फाल्गुन कृष्ण 11*
केवलज्ञान समय ,नक्षत्र - *पूर्वान्ह उत्तराषाढ़ा*
केवलज्ञान वन ,वृक्ष - *शकटावन , वटवृक्ष*
समोशरण विस्तार - *12 योजन*
कुल गणधर - *84*
मुख्य गणधर - *वृषभसेन*
समवशरण में सामान्य केवली- *20000 हजार*
पूर्वधारी - *4750*
शिक्षक - *4150*
विपुलमति मन: पर्यय ज्ञानी - *12705*
विक्रिया ऋद्धिधारी - *20600*
अवधिज्ञानी - *9000*
वादियों की संख्या - *12750*
मुख्य गणिनी - *ब्राम्ही*
मुख्य श्रोता - *भरत*
श्रावक - *तीन लाख*
श्राविका - *5 लाख*
यक्ष - *गोमुख (वृषभ)*
यक्षिणी - *चक्रश्वरी*
योग निरोध - *14 दिन पहले*
मोक्ष तिथि - *माघ कृष्ण चौदस*
मोक्ष समय , नक्षत्र - *पूर्वान्ह उत्तराषाढ़ा*
मोक्ष
*इस पंक्ति को एक बार जरूर पढ़े*
*🌹 #भावनाएं 🌹*
*काम,क्रोध,लोभ,मोह,*
*ईर्ष्या,प्रेम,अहंकार आदि सभी भावनाएं एक साथ एक द्वीप पर रहतीे थी;*
*एक दिन समुद्र में एक तूफान आया और द्वीप डूबने लगा;*
*हर भावना डर गई और अपने अपने बचाव का रास्ता ढूंढने लगी;*
*लेकिन प्रेम ने सभी को बचाने के लिए एक नाव बनायी;*
*सभी भावनाओं ने प्रेम का आभार जताते हुए; शीघ्रातिशीघ्र नाव में बैठने का प्रयास किया;*
*प्रेम ने अपनी मीठी नज़र से सभी को देखा कोई छूट न जाये;*
*सभी भावनाएँ तो नाव मे सवार थी लेकिन अहंकार कहीं नज़र नहीं आया;*
*प्रेम ने खोजा तो पाया कि, अहंकार नीचे ही था; ...*
*नीचे जाकर प्रेम ने अहंकार को ऊपर लाने की बहुत कोशिश की,लेकिन अहंकार नहीं माना;*
*ऊपर सभी भावनाएं प्रेम को पुकार रहीं थी;,"जल्दी आओ प्रेम तूफान तेज़ हो रहा है;,यह द्वीप तो निश्चय ही डूबेगा और इसके साथ साथ हम सभी की भी यंही जल समाधि बन जाएगी;। प्लीज़ जल्दी करो;"*
*"अरे अहंकार को लाने की कोशिश कर रहा हूँ; यदि तूफान तेज़ हो जाय तो तुम सभी निकल लेना; मैं तो अहंकार को लेकर ही निकलूँगा" प्रेम ने नीचे से ही जवाब दिया; और फिर से अहंकार को मनाने की कोशिश करने लगा;*
*लेकिन अहंकार कब मानने वाला था यहां तक कि वह अपनी जगह से हिला ही नहीं;*
*अब सभी भावनाओं ने एक बार फिर प्रेम को समझाया कि अहंकार को जाने दो क्योंकि वह सदा से जिद्दी रहा है;*
*लेकिन प्रेम ने आशा जताई,बोला, "मैं अहंकार को समझाकर राजी कर लूंगा तभी आऊगा;..!!"*
*तभी अचानक तूफान तेज हो गया और नाव आगे बढ़ गई;*
*अन्य सभी भावनाएं तो जीवित रह गईं;*
*लेकिन........*
*अन्त में उस अहंकार के कारण प्रेम मर गया;*
*अहंकार के चलते हमेशा प्रेम का ही अंत होता है;*
*आईये #अहंकार का त्याग करते हुए प्रेम को अपने से जुदा न होने दें...!!!*
*हम सब मिलकर जरूर जरूर विचार करें इसी मंगल में भावना के साथ*।