21/06/2024
Yog Divya Shakti
*Benefits of Kunjal Kriya*
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*Kunjal Kriya gives an effective wash to our digestive system.
Hence, it helps to eliminate all diseases caused by poor digestion.*
*The biggest benefit of
21/06/2024
20/08/2023
ELECTRO HOMEOPATHY🥸 CAMP AT SECTOR-13 ROHINI, NORTH DELHI
02/07/2022
*योग द्वारा उपचार*
*रोग मुक्त होना है, तो हमें योग की शरण में जाना ही होगा। योग का तृतीय चरण है योगासन। इसलिए बच्चों से अनुरोध है कि वे आसन करें, निरोग रहें और खुश रहें*
*नोट : कृपया अपने शरीर की वर्तमान स्थिति के अनुसार किसी अनुभवी योगाचार्य से कौन सा आसन करना या नहीं करना यह जान ले तथा किसी आसन के करने की सही विधि क्या है, सांस की क्या स्थिति ,अंतर कुंभक या बाहर कुंभक करना है उसका ज्ञान प्राप्त करें , तत पश्चात अपने स्वस्थ जीवन की यात्रा शुरू करे. शुभेच्छा - योग दिव्य शक्ति 7836086000*
पेट की बिमारियों में- उत्तानपादासन, पवनमुक्तासन, वज्रासन, योगमुद्रासन, भुजंगासन, मत्स्यासन।
सिर की बिमारियों में- सर्वांगासन, शीर्षासन, चन्द्रासन।
मधुमेह- पश्चिमोत्तानासन, नौकासन, वज्रासन, भुजंगासन, हलासन, शीर्षासन।
वीर्यदोष- सर्वांगासन, वज्रासन, योगमुद्रा।
गला- सुप्तवज्रासन, भुजंगासन, चन्द्रासन।
आंखें- सर्वांगासन, शीर्षासन, भुजंगासन।
गठिया- पवनमुक्तासन, पद्ïमासन, सुप्तवज्रासन, मत्स्यासन, उष्ट्रासन।
नाभि- धनुरासन, नाभि-आसन, भुजंगासन।
गर्भाशय- उत्तानपादासन, भुजंगासन, सर्वांगासन, ताड़ासन, चन्द्रानमस्कारासन।
कमर दर्द – हलासन, चक्रासन, धनुरासन, भुजंगासन।
फेफड़े- वज्रासन, मत्स्यासन, सर्वांगासन।
यकृत- लतासन, पवनमुक्तासन, यानासन।
गुदा,बवासीर,भंगदर आदि में- उत्तानपादासन, सर्वांगासन, जानुशिरासन, यानासन।
दमा- सुप्तवज्रासन, मत्स्यासन, भुजंगासन।
अनिद्रा- शीर्षासन, सर्वांगासन, हलासन, योगमुद्रासन।
गैस- पवनमुक्तासन, जानुशिरासन, योगमुद्रा, वज्रासन।
जुकाम- सर्वांगासन, हलासन, शीर्षासन।
मानसिक शांति के लिए- सिद्धासन, योगासन, शतुरमुर्गासन, खगासन योगमुद्रासन।
रीढ़ की हड्डी के लिए- सर्पासन, पवनमुक्तासन, सर्वांगासन, शतुरमुर्गासन करें।
गठिया के लिए- पवनमुक्तासन, साइकिल संचालन, ताड़ासन किया करें।
गुर्दे की बीमारी में- सर्वांगासन, हलासन, वज्रासन, पवनमुक्तासन करें।
गले के लिए- सर्पासन, सर्वांगासन, हलासन, योगमुद्रा करें।
हृदय रोग के लिए- शवासन, साइकिल संचालन, सिद्धासन किया करें।
दमा के लिए- सुप्तवज्रासन, सर्पासन, सर्वांगासन, पवनतुक्तासन, उष्ट्रासन करें।
रक्तचाप के लिए- योगमुद्रासन, सिद्धासन, शवासन, शक्तिसंचालन क्रिया करें।
सिर दर्द के लिए- सर्वांगासन,
20/04/2022
शास्त्रार्थ में क्रोध आने का अर्थ है – हार मान लेना
जैसा कि सभी जानते हैं कि
आद्य शंकराचार्य और मंडन मिश्र के बीच सोलह दिन तक लगातार ऐतिहासिक शास्त्रार्थ चला था.
उस शास्त्रार्थ में निर्णायिका थीं – मंडन मिश्र की धर्मपत्नी "देवी भारती".
हार-जीत का निर्णय होना
बाक़ी था, लेकिन शास्त्रार्थ के अंतिम दौर में "देवी भारती" को अचानक किसी आवश्यक काम से जाना पड़ गया.
जाने से पहले देवी भारती ने दोनों विद्वानों के गले में फूलों की एक एक माला डालते हुए कहा, ये दोनों मालाएं मेरी अनुपस्थिति में
आपकी हार और जीत का फैसला करेंगी.
लोगों को यह बात विचित्र लगी परन्तु आद्य शंकराचार्य ने मुस्कराते हुए सर झुकाकर उनकी बात को स्वीकार कर लिया.
देवी भारती वहाँ से चली गईं और शास्त्रार्थ की प्रक्रिया चलती रही.
जब देवी भारती वापस लौटीं तो शास्त्रार्थ सुन रहे अन्य विद्वान उनको बताने के लिए आगे बढ़े कि उनकी अनुपस्थिति में क्या क्या चर्चा हुई.
लेकिन देवी भारती ने उन्हें
रोक दिया और खुद ही अपनी निर्णायक नजरों से आद्य शंकराचार्य और मंडन मिश्र को बारी-बारी से देखा...
और आद्य शंकराचार्य को शास्त्रार्थ में विजयी घोषित
कर दिया.
वैसे वहाँ उपस्थित ज्यादातर दर्शक भी यही मान रहे थे लेकिन उनको भी आश्चर्य था कि बिना शास्त्रार्थ को सुने देवी भारती ने एकदम सही निर्णय कैसे सुना दिया.
एक विद्वान ने देवी भारती से अत्यंत नम्रतापूर्वक जिज्ञासा की – हे देवी! आप तो शास्त्रार्थ के मध्य ही चली गई थीं, फिर वापस लौटते ही आपने बिना किसी से पूछे ऐसा निर्णय
कैसे दे दिया?
देवी भारती ने मुस्कुराकर जवाब दिया – जब भी कोई विद्वान शास्त्रार्थ में पराजित होने लगता है और उसे अपनी हार की झलक दिखने लगती है तो वह क्रोधित होने लगता है.
मेरे पति के गले की माला उनके क्रोध की ताप से सूख चुकी है, जबकि शंकराचार्य जी की माला के फूल अभी भी पहले की भाँति ताजे हैं,
इससे पता चलता है कि मेरे पति क्रोधित हो गए थे.
विदुषी देवी भारती की यह बात सुनकर वहाँ मौजूद सभी दर्शक उनकी जय जयकार करने लगे.
आज पहले की तरह शास्त्रार्थ नहीं होते हैं लेकिन सोशल मीडिया ने दूर दूर रहने वालों को शास्त्रार्थ का माध्यम उपलब्ध करा दिया. सोशल मीडिया पर चल रही चर्चा (शास्त्रार्थ) का परिणाम भी देवी भारती के सिद्धांत से ज्ञात किया जा सकता है.
अगर किसी बिषय पर कोई चर्चा हो रही हो
01/12/2021
Learning
सर्दियों का फल बेर खाएं और कई सेहत समस्याओं से निजात पाएं
1. यदि आपकी त्वचा पर कट लगा हो या घाव हो जाए तो आप बेर का गूदा घिसकर घाव पर लगा लें। ऐसा करने से घाव जल्दी भरता है।
2. बेर का सेवन खुश्की और थकान को दूरने में मदद करता है।
3. बेर की पत्तियों में कैल्शियम, फास्फोरस, मैग्नीशियम, पोटेशियम, सोडियम, क्लोरीन, प्रचुर मात्रा में होता है। यदि आप बेर और नीम के पत्ते पीसकर सिर में लगाएं तो इससे सिर के बाल गिरने कम होते हैं।
4. बेर का जूस पीने से बुखार और फेफड़े संबंधी रोग ठीक होते है।
5. बेर पर नमक और काली मिर्च लगाकर खाने से अपच की समस्या दूर होती है।
6. सूखे हुए बेर खाने से कब्ज और पेट संबंधित परेशानियां दूर होती हैं।
7. अगर आप बेर को छाछ के साथ लेंगे तो इससे घबराहट, उलटी आना और पेट दर्द से राहत मिलती है।
8. नियमित बेर खाने से अस्थमा के रोगियों को भी आराम मिलता है साथ ही अगर किसी को मसूड़ों में घाव हो गया हो तो वह भी जल्दी भर जाताहैं।
ऐसे और भी कई योग,आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा और एक्यूप्रेशर में बताये गए एवं माने हुए सुप्रसिद् व रोजमर्रा जीवन में काम आने वाले कारगर नुस्ख़े पढ़ने और लाभ प्राप्त करने के लिए योग दिव्य शक्ति फाउंडेशन ग्रुप से जुड़िए।
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योगाचार्य राकेश नारंग
7836086000
🔥घर बना खण्डहर🔥
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👌एक सेठ जी थे, जो दिन-रात अपना काम-धँधा बढ़ाने में लगे रहते थे। उन्हें तो बस, शहर का सबसे अमीर आदमी बनना था। धीरे-धीरे पर आखिर वे नगर के सबसे धनी सेठ बन ही गए।
इस सफलता की ख़ुशी में उन्होने एक शानदार घर बनवाया। गृह प्रवेश के दिन, उन्होने एक बहुत शानदार पार्टी का आयोजन किया। जब सारे मेहमान चले गए तो वे भी अपने कमरे में सोने के लिए चले आए। थकान से चूर, जैसे ही बिस्तर पर लेटे, एक आवाज़ उन्हें सुनायी पड़ी...
"मैं तुम्हारी आत्मा हूँ, और अब मैं तुम्हारा शरीर छोड़ कर जा रही हूँ !!"
सेठ घबरा कर बोले, "अरे! तुम ऐसा नहीं कर सकती!!, तुम्हारे बिना तो मैं मर ही जाऊँगा। देखो!, मैंने वर्षों के तनतोड़-परिश्रम के बाद यह सफलता अर्जित की है। अब जाकर इस सफलता को आमोद प्रमोद से भोगने का अवसर आया है। सौ वर्ष तक टिके, ऐसा मजबूत मकान मैने बनाया है। यह करोड़ों रूपये का, सुख सुविधा से भरपूर घर, मैंने तुम्हारे लिए ही तो बनाया है!, तुम यहाँ से मत जाओ।"
आत्मा बोली, "यह मेरा घर नहीं है, मेरा घर तो तुम्हारा शरीर था, स्वास्थ्य ही उसकी मजबूती थी, किन्तु करोड़ों कमाने के चक्कर में, तुमने इसके रख-रखाव की अवहेलना की है। मौज-शौक के कबाड़ तो भरता रहा, पर मजबूत बनाने पर किंचित भी ध्यान नहीं दिया। तुम्हारी गैर जिम्मेदारी ने इस अमूल्य तन का नाश ही कर डाला है।"
आत्मा नें स्पष्ट करते हुए कहा, "अब इसे ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, थायरॉइड, मोटापा, कमर दर्द जैसी बीमारियों ने घेर लिया है। तुम ठीक से चल नहीं पाते, रात को तुम्हे नींद नहीं आती, तुम्हारा दिल भी कमजोर हो चुका है। तनाव के कारण, ना जाने और कितनी बीमारियों का घर बन चुका है, ये तुम्हारा शरीर!!"
"अब तुम ही बताओ, क्या तुम किसी ऐसे जर्जरित घर में रहना चाहोगे, जिसके चारो ओर कमजोर व असुरक्षित दीवारें हो, जिसका ढाँचा चरमरा गया हो, फर्नीचर को दीमक खा रही हो, प्लास्टर और रंग-रोगन उड़ चुका हो, ढंग से सफाई तक न होती हो, यहाँ वहाँ गंदगी पड़ी रहती हो। जिसकी छत टपक रही हो, जिसके खिड़की दरवाजे टूटे हों!! क्या रहना चाहोगे ऐसे घर में? नहीं रहना चाहोगे ना!! ...इसलिए मैं भी ऐसे आवास में नहीं रह सकती।"
सेठ पश्चाताप मिश्रित भय से काँप उठे!! अब तो आत्मा को रोकने का, न तो सामर्थ्य और न ही साहस सेठ में बचा था। एक गहरी निश्वास छोड़ते हुए आत्मा, सेठ जी के शरीर से निकल पड़ी... सेठ का पार्थिव बंगला पडा रहा।
मित्रों, ये कहानी आज अधिकांश लोगों की हकीकत है। सफलता अवश्य हासिल कीजिए, किन्तु स्वास्थ्य की बलि देकर नहीं। अन्यथा सेठ की तरह मंजिल पा लेने के बाद भी, अपनी सफलता का लुत्फ उठाने से वंचित रह जाएँगे!!
*😊"पहला सुख निरोगी काया"😊
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