29/05/2026
नमस्कार साथियों
साथियों देखों कैसे हरियाणा में गेस्ट टीचर्स के अच्छे दिन आने वाले हैं। परंतु दिल्ली के गेस्ट टीचर्स जो भारत के सभी अस्थाई शिक्षकों में सबसे काबिल हैं उनके बुरे दिन खत्म होने के नाम नहीं ले रहे हैं ऐसा क्यों हो रहा है कभी सोचा है।हम बताते हैं।
1:- 2014 में जब हमने गेस्ट टीचर्स को रिनुअल करवाया था केस के माध्यम से और केस जीतने बाद में आमरण अनशन भी करना पड़ा था।तब जाकर सरकार झुकी थी। परंतु उसके बाद गेस्ट टीचर्स संतुष्ट होकर बैठ गए ।
2:- जब रेगुलर की लड़ाई लड रहे थे और जीत के बहुत करीब थे तब झोलाछाप डॉक्टर और उसके साथी जो पिछले 16 महीनों से मछली की आंख पर निशाना लगाने की नौटंकी कर रहे हैं वो सरकार के दास बनने में लगे हुए थे।
3:- 2016 में सरकार को झोलाछाप डॉक्टर व उसके साथियों (मछली की आंख पर निशाना साधने वाले)द्वारा ये बोलकर आना की #तोबड़िया को नौकरी से हटा दो फिर गेस्ट टीचर्स की हिम्मत नहीं होगी सरकार के खिलाफ धरना करने की।और वो ही हुआ गेस्ट टीचर्स के मन से आज तक हटने का डर नहीं निकला है।
4:- 2017 में जब तोबड़िया व उसके संगठन ने लगातार धरने कर-कर के जब #वेतन #वृद्धि करवाई। तब प्रतिदिन वेतन वृद्धि के खिलाफ फीक्स सैलरी की मांग की तो गेस्ट टीचर्स का समर्थन नहीं मिला और कुछ गेस्ट टीचर्स ने ये कहा गया कि राजनीति न करो जो मिल रहा है वो मिलने दो।
5:-2019 में जब सभी को 28 फरवरी को हटा दिया था तब फिर से तोबड़िया व उसके संगठन ने सरकार के खिलाफ जाकर 8दिनों तक मनीष सिसोदिया के घर को घेर कर सभी गेस्ट टीचर्स को वापस नौकरी पर लेने के आदेश करवाया। जबकि तोबड़िया 3साल बाद नौकरी पर लगा था court के माध्यम से फिर भी सरकार के खिलाफ गया।
6:- 2019 का धरना विशाल रूप ले रहा था और policy बनाने का दवाब सरकार पर आ गया था और मनीष सिसोदिया जी ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा था कि मैं LG साहब के पास बिल लेकर जा रहा हूं। तब प्रवीन तोबड़िया व उसके संगठन ने गेस्ट टीचर्स से कहा था कि जब तक policy हम देख न ले तब तक हम यहां से नहीं हटेंगे, परंतु गेस्ट टीचरों ने साथ नहीं दिया।
7:- 2017 -2019 तक गेस्ट टीचर्स को रेगुलर व वेतन वृद्धि करवाने के नाम पर सरकार के दास लोगों लगभग 3000 गेस्ट टीचर्स से 4-5 करोड़ रुपए लेकर अपने निजी कार्य करें। जिससे गेस्ट टीचर्स का विश्वास COURT से व अपने सच्चे और कुछ चोर नेताओं पर से भी हट गया।
8:- 2019के धरना प्रदर्शन के कारण सरकार ने एक बार फिर कोरोना में #प्रवीन #तोबड़िया, #मनीष #गौड़, #दीपक को नौकरी से हटा दिया और गेस्ट टीचर्स इस बार भी 2016 में जब पहली बार तोगड़िया को हटाया था उसी समय की तरह मौन रहे,
यहां तक कि जो इनके बहुत खास साथियों ने भी दूरी बना ली थी कारण जो भी रहा हो। परंतु परिणाम ये रहा कि नौकरी पर 3साल बाद आने पर इनकी मानसिकता भी गेस्ट टीचर्स की तरह हो गई कि जो होगा सबका होगा वो हमारा भी हो जाएगा।जिसका परिणाम ये है कि किसी गेस्ट टीचर्स की हिम्मत नहीं है कि वो सरकार के खिलाफ धरना करने की सोच भी सके। क्योंकि हम करेंगे नहीं और कोई कर नहीं सकता।
9:- सबसे बड़ा कारण झोलाछाप डॉक्टर द्वारा जाति की राजनीति करना उसने अपने संगठन में एक जाति विशेष को ही रखा ताकि जाति के नाम पर उनको पागल बना कर पैसे कमाता रहे और कोई विरोध न करें।
इस पोस्ट से कुछ को मिर्ची लगने वाली हैं परन्तु सत्य बताना जरूरी था।
जब लगे कि AGTA सही था तब बता देना आज भी हम वोही दम रखते हैं जो 2019 तक रखते थे। सरकार से अपनी बातें मनवाने का।
धन्यवाद
निवेदक:- मनीष गौड़ व पवन पहलवान