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क्या आपको पता है कि भारत में मोबाइल क्रांति की शुरुआत 31 जुलाई को ही हुई थी? जी हां, आज से ठीक 20 साल पहले भारत में सेलु...
01/08/2015

क्या आपको पता है कि भारत में मोबाइल क्रांति की शुरुआत 31 जुलाई को ही हुई थी? जी हां, आज से ठीक 20 साल पहले भारत में सेलुलर नेटवर्क से पहली फोन कॉल की गई थी। 31 जुलाई 1995 को पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री ज्योति बसु ने कोलकाता में मोदी टेल्सट्रा (Modi Telstra) कंपनी के मोबाइल नेट (MobileNet) सर्विस की शुरुआत की थी।

ज्योति बसु ने तत्कालीन नरसिंहा राव सरकार के टेलीकॉम मंत्री सुख राम को मोबाइल कॉल की थी। यह कॉल MobileNet नेटवर्क का इस्तेमाल करके कोलकाता के राइटर्स बिल्डिंग से दिल्ली स्थित संचार भवन के बीच की गई थी।

इस वक्त शायद ही किसी के मन ये बात आई होगी कि एक दिन हम मोबाइल के बिना नहीं रह पाएंगे। हम अपनी छोटी सी छोटी जरूरतों के लिए इस पर निर्भर हो जाएंगे। जब भारत में मोबाइल नेटवर्क की शुरुआत हुई तबं आउटगोइंग के साथ-साथ इनकमिंग कॉल के लिए भी पैसा लगता था।

प्राइस, पॉलिसी और टेक्नोलॉजी ने समय के साथ देश में मोबाइल की स्थिति को पूरी तरह से बदल डाला। पहले कॉल दरें सस्ती हुईं, फिर इनकमिंग कॉल के लिए पैसा लगना बंद हो गया। आज की तारीख में तो पूरे देश में नंबर पोर्टिब्लिटी की सेवा भी शुरू कर दी गई है।

देश में आई मोबाइल क्रांति का अनुमान इस आंकड़े से लगाया जा सकता है कि 125 करोड़ आबादी वाले इस देश में मोबाइल फोन उपभोक्ताओं की संख्या करीब 98 करोड़ है। ये आंकड़े मई महीने के अंत तक के हैं। अनुमान यह भी लगाया जा रहा है कि इस साल के अंत तक मोबाइल फोन उपभोक्ताओं की संख्या एक अरब से अधिक हो जाएगी।

31/03/2015

'किल बटन' से स्मार्टफोन चोरी पर लगेगी लगाम

सैन फ्रांसिस्को: स्मार्टफोन की चोरी एवं लूट पर रोक लगाने के लिए अमेरिका के कम से कम आठ राज्यों के सांसद फोन में एक 'किल बटन' को अनिवार्य करवाने की कोशिश कर रहे हैं। मीडिया रिपर्टों से यह जानकारी मिली। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, अमेरिका के कनेक्टिकट, इलिनॉयस, मिसिसिपी, मिसौरी, न्यू मेक्सिको, न्यूयार्क, ओरेगॉन और वर्जीनिया प्रांतों में एक कानून लाकर इस नए बटन को मोबाइल फोन में शामिल करने को मान्यता देने की तैयारी की जा रही है।

नए स्मार्टफोन में एक नया सॉफ्टवेयर पहले से ही अपलोड होगा, जिसकी मदद से मोबाइल के चोरी होने या खोने की हालत में स्मार्टफोन को रिमोट के जरिए निष्क्रिय किया जा सकेगा, जिससे फोन चोर या किसी अन्य के लिए किसी काम का नहीं रह जाएगा।

कैलिफोर्निया और मिनेसोटा पहले इस तरह का कानून संसद में पेश कर चुके हैं, जिसके तहत स्मार्टफोन निर्माताओं के लिए सभी फोन में 'किल बटन' को शामिल करना अनिवार्य है। यह कानून इसी साल एक जुलाई से लागू हो जाएगा।

इस बीच आई कई रिपर्टों के अनुसार, सैन फ्रांसिस्को, न्यूयार्क और लंदन में दूरसंचार उपकरण बनाने वाली कंपनियों द्वारा अपने उपकरणों में 'किल बटन' शामिल करने के बाद से स्मार्टफोन की चोरी में तेजी से कमी दर्ज की गई।

लैपटॉप की बेकार बैटरी से जलेगा बल्बशोधकर्ताओं के अनुसार लैपटॉप की बेकार हो चुकी बैटरियों में इतनी जान होती है कि उससे झु...
12/12/2014

लैपटॉप की बेकार बैटरी से जलेगा बल्ब

शोधकर्ताओं के अनुसार लैपटॉप की बेकार हो चुकी बैटरियों में इतनी जान होती है कि उससे झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले लोगों के घरों में रोशनी की जा सकती है.

कंप्यूटर कंपनी आईबीएम की ओर से कराए गए एक शोध में ऐसी बैटरियों का परीक्षण किया गया जो लैपटॉप के लिए उपयोगी नहीं थीं.

परीक्षण में शामिल 70 फ़ीसदी बैटरियों से एक एलईडी बल्ब को एक साल तक रोज़ाना क़रीब चार घंटे से जलाया जा सकता था.

इस तकनीकी का पहला परीक्षण इसी साल भारत के बैंगलुरु में किया गया.
सबसे सस्ता विकल्प
शोधकर्ताओं का कहना है कि बेकार हो गई पुरानी बैटरियों का इस्तेमाल बिजली के मौजूदा विकल्पों से सस्ता है.

उनका मानना है कि इससे बढ़ते हुए इलेक्ट्रॉनिक कचरे पर लगाम लगाने में मदद मिल सकती है.

विकासशील देशों में इलेक्ट्रॉनिक कचरे की समस्या बढ़ती जा रही है.

माना जा रहा है कि सड़क किनारे दुकान लगाने वाले खोमचे वाले और झुग्गियों में रहने वाले ग़रीब लोगों के बीच पुरानी बैटरियों का इस्तेमाल लोकप्रिय होगा.
ऊर्जा का विकल्प
अमरीका के मैसेचुएट्स इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉज़ी की रिसर्च मैगज़ीन ' टेक्नॉलॉज़ी रिव्यू' ने लिखा है कि आईबीएम की भारतीय यूनिट के इस शोध पर कैलिफोर्निया के सैन जोस में होने वाले एक कांफ्रेंस में चर्चा की जाएगी.

आईबीएम की रिसर्च टीम का कहना है कि अमरीका में ही हर साल तकरीबन पांच करोड़ कंप्यूटर फेंक दिए जाते हैं.

सौर ऊर्जा का विकल्प अपेक्षाकृत महंगा है और शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि बिजली के बिना काम चलाने वाले चालीस करोड़ लोगों को इससे मदद मिल सकती है.

इंटरनेट की स्पीड होगी और तेज  टेलिकॉम कंपनियां लंबे समय से बेहद हाई स्पीड वाली मोबाइल इंटरनेट सर्विस देने का वादा करती र...
24/11/2014

इंटरनेट की स्पीड होगी और तेज

टेलिकॉम कंपनियां लंबे समय से बेहद हाई स्पीड वाली मोबाइल इंटरनेट सर्विस देने का वादा करती रही हैं, लेकिन स्पीड को लेकर उनका मनमाना रवैया बरकरार है। 23 अगस्त से वे ऐसा नहीं कर सकेंगी। टेलिकॉम रेग्युलेटर ट्राई के नए आदेश के मुताबिक, मोबाइल कंपनियों को 23 अगस्त से कन्ज़यूमर्स को इस्तेमाल के समय के कम से कम 80 पर्सेंट हिस्से में डेटा प्लान के मुताबिक मिनिमम डाउनलोड की पूरी स्पीड देनी होगी।

अगर कंपनी का दावा है कि वो ग्राहकों को 7.2 एमबीपीएस या 21 एमबीपीएस की हाई स्पीड देगी, तो किसी भी परिस्थिति में उसे कम से कम 5 एमबीपीएस या 16 एमबीपीएस की स्पीड देनी ही होगी। ये मिनिमम डाउनलोड स्पीड होगी। यह नियम 2G और 3G सभी सर्विस के मामले में लागू होगा।

वायरलेस डेटा सर्विस रेग्युलेशन के लिए क्वॉलिटी पैरामीटर्स में भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) के संशोधन के अनुसार, ‘प्रत्येक सेवा प्रदाता को मोबाइल और डोंगल दोनों तरीकों से दी जाने वाली इंटरनेट योजनाओं में उपलब्ध न्यूनतम डाउनलोड स्पीड के बारे में ग्राहकों को बताना होगा।’
TRAI का कहना है कि कंपनियां विज्ञापनों में इंटरनेट ग्राहकों को लुभाने के लिए 7.2 एमबीपीएस या 21 एमबीपीएस की हाई स्पीड का वादा करती हैं। इस स्पीड पर एक फिल्म 12 से 14 मिनट में डाउनलोड हो जानी चाहिए। कंपनियों ने TRAI को बताया है कि उनकी सर्वाधिक तीव्र गति वाली 3जी सेवा पर मिनिमम डाउनलोड स्पीड 399 केबीपीएस से लेकर 2.48 एमबीपीएस के बीच है।

स्मार्टफ़ोन की लत छुड़ाने के लिए ऐप सिंगापुर के तीन छात्रों ने एक प्रतियोगिता में ऐसा मोबाइल ऐप विकसित करने के लिए फ़ंड ...
24/11/2014

स्मार्टफ़ोन की लत छुड़ाने के लिए ऐप

सिंगापुर के तीन छात्रों ने एक प्रतियोगिता में ऐसा मोबाइल ऐप विकसित करने के लिए फ़ंड जीता है जो लोगों को स्मार्टफ़ोन की लत छुड़ाने में मददगार साबित होगा.
'ऐपल ट्री' नामक यह एप्लीकेशन लोगों को अपने मोबाइल की स्क्रीन में घुसे रहने के बजाए दोस्तों और परिजनों के साथ ज़्यादा वक़्त बिताने के लिए प्रेरित करेगा.
ये एप्लीकेशन दो या अधिक दोस्तों के अपने फ़ोन एक साथ रखने पर फ़ोन को स्थिर कर देती है.
यदि फ़ोन को छुआ न जाए तो स्क्रीन पर सेब का पेड़ बनने लगता है. ज़्यादा देर स्क्रीन न छूने पर पेड़ पर 'डिजीटल सेब' उग आते हैं जो फ़ोन इस्तेमाल न करने के इंसेटिव के तौर पर यूज़र को मिलते हैं.
जितनी देर फ़ोन को न छुआ जाए उतने ज़्यादा ही डिजीटल सेब उगते हैं जो यूज़र के लिए ईनाम होते हैं.
द स्ट्रेट टाइम्स की वेबसाइट के मुताबिक छात्रों के समूह ने सालाना स्प्लेश अवॉर्ड्स में हिस्सा लिया था जहाँ "सिंगापुर के लोगों को आपस में क़रीब लाने" के विषय पर उन्हें काम करना था.

लोगों को करीब लाने की कोशिश

टीवी चैनल न्यूज़ एशिया की रिपोर्ट के मुताबिक विजेता छात्रों में से एक लिबर्न लिन ने बताया कि, "उन्हें यह विचार दोस्तों की मुलाक़ातों के दौरान एक मित्र के सभी फ़ोन को एक स्थान पर रख देने की सलाह से आया."
छात्रों को मार्च 2015 तक ये एप्लीकेशन विकसित करनी है. इसके लिए इन्हें क़रीब 24 हज़ार अमरीकी डॉलर की इनामी राशि भी दी गई है.
इसे सिंगापुर के पचासवें जन्मदिवस के मौक़े पर होने वाले समारोह में लांच किया जाएगा.
(बीबीसी मॉनिटरिंग दुनिया भर के टीवी, रेडियो, वेब और प्रिंट माध्यमों में प्रकाशित होने वाली ख़बरों पर रिपोर्टिंग और विश्लेषण करता है. आप बीबीसी मॉनिटरिंग की खबरें ट्विटर और फ़ेसबुक पर भी पढ़ सकते हैं. बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

How Does the Internet Work ?
25/03/2014

How Does the Internet Work ?

http://www.datacenterscanada.com - SIMPLE explanation of how the internet really works. Understand networks, inter-networks, data packets, peering and intern...

फ़ेसबुक ने 'लाइक' के विकल्प के तौर पर 'सिम्पथाइज़' बटन विकसित किया है जिसे यूज़र किसी ख़ास स्थिति में इस्तेमाल कर सकते ह...
09/01/2014

फ़ेसबुक ने 'लाइक' के विकल्प के तौर पर 'सिम्पथाइज़' बटन विकसित किया है जिसे यूज़र किसी ख़ास स्थिति में इस्तेमाल कर सकते हैं.

अब अगर कोई यूज़र फ़ेसबुक में स्टेटस अपडेट में निगेटिव इमोशन के विकल्प का इस्तेमाल करता है तो 'लाइक' बटन 'सिम्पथाइज़' में बदल जाएगा.
फ़ेसबुक के एक इंजीनियर ने कंपनी के एक कार्यक्रम में कहा कि इस बटन को एक आंतरिक परियोजना के तहत विकसित किया गया है.

लेकिन उन्होंने बाद में कहा कि कंपनी की फिलहाल इसे जारी करने की कोई योजना नहीं है.

क्लिक करें फ़ेसबुक ने 'कम्पैशन रिसर्च डे' का आयोजन किया था जहां लोगों और शोधकर्ताओं से राय मांगी गई.

इस कार्यक्रम के सवाल-जवाब सत्र में एक श्रोता ने पूछा कि अगर यूज़र अपने परिजन की मृत्यु की ख़बर पोस्ट करता है तो उसके लिए 'लाइक' सही विकल्प नहीं होगा. तो क्या फ़ेसबुक ने इसमें बदलाव करने की कोई योजना बनाई है.
हैकाथॉन परियोजना
इस पर फ़ेसबुक के क्लिक करें सॉफ्टवेयर इंजीनियर डैन मूरिएलो ने कहा एक इंजीनियर ने हैकाथॉन परियोजना पर काम किया है जिसमें 'लाइक' बटन बदलकर 'सिम्पथाइज़' हो जाता है.

मूरिएलो ने बताया कि यह बटन हर पोस्ट पर काम नहीं करेगा लेकिन अगर आप स्टेटस अपडेट में कोई ख़ास इमोशन टैग करते हैं तो फिर 'लाइक' बटन बदलकर 'सिम्पथाइज़' हो जाएगा.

उन्होंने कहा, "इसे लेकर बहुत सारे लोग काफ़ी उत्साहित थे. लेकिन हमने तय किया कि इसे जारी करने का अभी सही समय नहीं है."

फ़ेसबुक क्लिक करें हैकाथॉन ऐसे आयोजन हैं जिनमें कंपनी के इंजीनियर इकट्ठे होते हैं और नए विचारों पर माथापच्ची करते हैं.

फ़ेसबुक चैट और फ्रैंड सजेस्टर जैसी सुविधाओं का सूत्रपात ऐसे ही आयोजनों में हुआ था.

वन्दे मातरम्सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्शस्यशामलां मातरम् ।शुभ्रज्योत्स्नापुलकितयामिनींफुल्लकुसुमितद्रुमदलशोभिनींसुहासिनीं ...
06/08/2013

वन्दे मातरम्
सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्
शस्यशामलां मातरम् ।
शुभ्रज्योत्स्नापुलकितयामिनीं
फुल्लकुसुमितद्रुमदलशोभिनीं
सुहासिनीं सुमधुर भाषिणीं
सुखदां वरदां मातरम् ।। १ ।। वन्दे मातरम् ।
कोटि-कोटि-कण्ठ-कल-कल-निनाद-कराले
कोटि-कोटि-भुजैर्धृत-खरकरवाले,
अबला केन मा एत बले ।
बहुबलधारिणीं नमामि तारिणीं
रिपुदलवारिणीं मातरम् ।। २ ।। वन्दे मातरम् ।
तुमि विद्या, तुमि धर्म
तुमि हृदि, तुमि मर्म
त्वं हि प्राणा: शरीरे
बाहुते तुमि मा शक्ति,
हृदये तुमि मा भक्ति,
तोमारई प्रतिमा गडि
मन्दिरे-मन्दिरे मातरम् ।। ३ ।। वन्दे मातरम् ।
त्वं हि दुर्गा दशप्रहरणधारिणी
कमला कमलदलविहारिणी
वाणी विद्यादायिनी, नमामि त्वाम्
नमामि कमलां अमलां अतुलां
सुजलां सुफलां मातरम् ।। ४ ।। वन्दे मातरम् ।
श्यामलां सरलां सुस्मितां भूषितां
धरणीं भरणीं मातरम् ।। ५ ।। वन्दे मातरम् ।।

..मौत के बाद क्या होगा आपके ई मेल का ??कभी सोचा है कि मौत के बाद आपके  ई मेल, फेसबुक स्टेटस और अन्य सूचनाओं का क्या होगा...
08/07/2013

..मौत के बाद क्या होगा आपके ई मेल का ??
कभी सोचा है कि मौत के बाद आपके ई मेल, फेसबुक स्टेटस और अन्य सूचनाओं का क्या होगा? जानी मानी सॉफ्टवेयर कंपनी गूगल ने अब इस समस्या हल करने का फैसला किया है.
इन्हें या तो आपके किसी खास दोस्त या रिश्तेदार को सौंपा जा सकता है या फिर इनकी गोपनीयता बरकरार रखते हुए इन्हें डिलीट किया जा सकता है.
सब कुछ आपकी पसंद पर निर्भर करता है.सॉफ्टवेयर कंपनी गूगल अब अपने यूजर्स को इस बात की इजाजत देगी कि वो तय कर सकें कि मौत के बाद उन्हें उनकी निजी सूचनाओं का क्या करना है. इन्हें या तो किसी खास दोस्त, रिश्तेदार को सौंपा जा सकता है या फिर उसे डिलीट भी किया जा सकता है.

इंटरनेट

केवल मौत ही नहीं अगर आपका मन इंटरनेट से ऊब गया है और आप कुछ समय के लिए ब्रेक लेना चाहते हैं तो भी ये विकल्प आपके लिए संभव होंगे. हां, बस ध्यान रखने वाली बात ये है कि ये सुविधा फिलहाल गूगल के पास ही है.
पूरी दुनिया में क्लिक करें इंटरनेट का इस्तेमाल करने वालों ने इस बारे में चिंता जताई थी.
इसी के बाद गूगल ने ये फैसला किया है. गूगल की ओर से जारी बयान में कहा गया है,” हमें उम्मीद है कि इस नये फीचर से आपको आपके क्लिक करें डिजिटल जीवन के बारे में योजना बनाने में मदद मिलेगी.यह गोपनीय और सुरक्षित तो है ही इससे आपके चाहने वालों को भी आसानी ही होगी.”
गूगल का मुख्यालय अमेरिका के कैलीफोर्निया में है. कंपनी यू ट्यूब, फोटो संपादित करने वाला सॉफ्टवेयर पिकासा और ब्लॉग स्पॉट को भी संचालित करती है.

डिलीट

गूगल का कहना है कि उसके यूजर्स सूचनाओं को तीन, छह, नौ या फिर 12 महीने बाद डिलीट करवा सकते हैं.
ये उन पर निर्भर करता है.
हालांकि इस बारे में अंतिम फैसला करने से पहले यूजर्स से ई मेल या दिए गए नंबर पर क्लिक करें एसएमएस के जरिए बात की जाएगी.
गूगल के अलावा फेसबुक ने भी मौत के बाद यूजर्स के खाते पर मौजूद सामग्री को यादगार बनाने का विकल्प तैयार किया है.

शोधकर्ताओं के एक दल ने दुनिया के 500 सबसे तेज़ सुपरकंप्यूटरों की सूची जारी की है. इनमें चीन के तियान्हे-2 को दुनिया का स...
08/07/2013

शोधकर्ताओं के एक दल ने दुनिया के 500 सबसे तेज़ सुपरकंप्यूटरों की सूची जारी की है. इनमें चीन के तियान्हे-2 को दुनिया का सबसे तेज़ सुपरकंप्यूटर बताया गया है.
इस मौक़े पर शोधकर्ताओं ने भी हैरानी जताई क्योंकि इस नए कंप्यूटर के 2015 तक तैयार होने की उम्मीद नहीं थी.
इससे पहले नवंबर 2010 से जून 2011 के बीच भी चीन को दुनिया का सबसे तेज़ सुपरकंप्यूटर बनाने का गौरव हासिल हुआ था.
नई सूची में दूसरे और तीसरे नंबर पर क्लिक करें अमरीका का 'टाइटन' और 'सिक्वोया' रहे जबकि जापान का 'के कंप्यूटर' दुनिया का चौथा सबसे तेज़ सुपरकंप्यूटर है.
यह सूची साल में दो बार जारी की जाती है. ताज़ा सूची मैनहाइम यूनीवर्सिटी में कंप्यूटर साइंस के प्रोफ़ेसर हैंस मियुर की देखरेख में तैयार की गई है.
सुपर क्लिक करें कंप्यूटर की गति मापने वाली संस्था लिनपैक बेंचमार्क के अनुसार तियान्हे-2 सुपर कंप्यूटर 33.86 पेटाफ़्लॉप प्रति सेकंड की गति से चलता है.इसका मतलब है कि ये सुपर कंप्यूटर एक सेकंड में 33 हज़ार 860 ट्रिलियन कैलकुलेशन करता है.
चीनी सरकार के अनुसार इसे दक्षिण पूर्वी प्रांत ग्युआनडॉंग के ग्युआंगज़ो शहर में मौजूद नेशनल सुपर कंप्यूटर सेंटर में स्थापित किया जाएगा. जहां दक्षिणी चीन के लोग शोध और तकनीकी पढ़ाई के लिए इसका इस्तेमाल कर सकेंगे.

तियान्हे-2 की ख़ासियत
ये सुपरकंप्यूटर 31 लाख 20 हज़ार प्रोसेसर कोर का इस्तेमाल करता है और इसके कैलकुलेशन के लिए इंटेल के आइवी ब्रिज और ज़िऑन फ़ाइ चिप्स का इस्तेमाल किया गया है.लेकिन 500 सबसे तेज़ सुपर कंप्यूटर की सूची जारी करने वाले दल में शामिल अमरीका की यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेनेस के जैक डोंगारा के अनुसार इस नए सुपरकंप्यूटर की कई चीज़ें चीन में बनाई गई हैं और उनकी ख़ास विशेषताएं हैं.

तियान्हे-2 की क्षमता इस सूची में शामिल दूसरे सबसे तेज़ क्लिक करें सुपर कंप्यूटर टाइटन से दोगुना है.

लिनपैक बेंचमार्क के अनुसार टाइटन सुपर कंप्यूटर 17.59 पेटाफ़्लॉप प्रति सेकंड की गति से काम करता है.

जैक डोंगारा के अनुसार अमरीका 2015 तक अब कोई दूसरा सुपर कंप्यूटर नहीं बनाएगा.

चौथे नंबर पर शामिल जापान का के कंप्यूटर 10.51 पेटाफ़्लॉप प्रति सेकंड की रफ़्तार से काम करता है.

जानकारों के अनुसार 500 सबसे तेज़ सुपर कंप्यूटरों की ताज़ा सूची में चीन के 66, अमरीका के 252, जापान के 30, ब्रिटेन के 29, फ़्रांस के 23 और जर्मनी के 19 सुपर कंप्यूटर शामिल हैं.

अगर आपका फ़ोन एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम पर चलता है तो अब से हर नया ऐप डाउनलोड करते समय सावधान रहिए.क्योंकि मोबाइल सुरक्षा...
08/07/2013

अगर आपका फ़ोन एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम पर चलता है तो अब से हर नया ऐप डाउनलोड करते समय सावधान रहिए.
क्योंकि मोबाइल सुरक्षा पर शोध करने वाली कंपनी ब्लूबॉक्स ने एंड्रॉयड की ऐप वेरिफ़िकेशन प्रणाली में एक ख़ामी ढूंढ निकाली है. कंप्यूटर की भाषा में ऐसी कमियों या ख़ामियों को 'बग' कहा जाता है.
इस बग के कारण आप ग़लती से कोई ऐसा ऐप डाउनलोड कर सकते हैं जो आपके डाटा को सफ़ाचट कर जाए.
ब्लूबॉक्स का दावा है कि इस बग के कारण एंड्रॉयड फोनों के डाटा को चुराना संभव है. ब्लूबॉक्स ने इस खामी को “मास्टर की” नाम दिया है.
एंड्रॉयड की इस खामी का फ़ायदा उठाकर चोर किसी एंड्रॉयड फ़ोन से डाटा चुराने, चोरी से बातचीत सुनने या अवांछित मैसेज भेजने के साथ ही अन्य कोई भी मनचाही हरकत कर सकते हैं.

किसने बनवाया केदारनाथ मंदिर? माना जाता है कि आदि गुरु शंकराचार्य ने केदरानाथ मंदिर की स्‍थापना की थी। इस मंदिर का निर्मा...
07/07/2013

किसने बनवाया केदारनाथ मंदिर?
माना जाता है कि आदि गुरु शंकराचार्य ने केदरानाथ मंदिर की स्‍थापना की थी। इस मंदिर का निर्माण पांडवों ने हजारों वर्ष पहले करवाया था। मंदिर की आयु के बारे में कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है पर एक हजार वर्षों से केदारनाथ एक महत्वपूर्ण तीर्थयात्रा रहा है। राहुल सांकृत्यायन के अनुसार ये 12-13वीं शताब्दी का है। ग्वालियर से मिली राजा भोज स्तुति के अनुसार मौजूदा मंदिर उनका बनवाया हुआ है जो 1076-99 काल के थे। एक मान्यतानुसार वर्तमान मंदिर 8वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य द्वारा बनवाया गया जो पांडवों द्वारा द्वापर काल में बनाए गए पहले के मंदिर के बगल में है। मंदिर के बडे धूसर रंग की सीढियों पर पाली या ब्राह्मी लिपि में कुछ खुदा है, जिसे स्पष्ट जानना मुश्किल है। फिर भी इतिहासकार मानते हैं कि शैव लोग आदि शंकराचार्य से पहले से ही केदारनाथ जाते रहे हैं।

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