अवधी समाज

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अवधी भाषा और अवधीभाषी समाज का लोकधर्म?

अवधी समाज:अवध की किसान चेतना और जन साहित्य के सरोकारो का मंच।आपका प्रोत्साहन हमारी शक्ति है।
(बलभद्र प्रसाद दीक्षित पढीस,वंशीधर शुक्ल,रमई काका ये तीनों अवधी भाषा के जनकवि हैं। उनकी स्मृति को प्रणाम करते हुए यह पेज बनाया बया है । उनके समय और उनके विषय में /उनकी कृतियों के विषय में कोई आधिकारिक जानकारी भी मित्र यहां साझा कर सकते हैं।बाकी मित्रो के सुझाव आमंत्रित हैं।)मित्रो का बहुत सहयोग मिला काका ज

Podcast Prof Surya Prasad Dixit 14/01/2026

प्रो सूर्य प्रसाद दीक्षित जी के साथ डॉ अनामिका श्रीवास्तव,
अनुभव की सीढ़ी चैनल की विशेष प्रस्तुति

Podcast Prof Surya Prasad Dixit Podcast Prof Surya Prasad Dixit

Photos from अवधी समाज's post 23/11/2025

*लड़ुवा और मठोंलिया*

उपनयन संस्कार यानी कि यज्ञोपवीत या जनेऊ संस्कार। हमारे देश में जन्म से लेकर मृत्यु तक 16 संस्कारों का विशेष महत्व है और इन संस्कारों के अनुसार खानपान का भी विशेष ध्यान रखा जाता है ।उपनयन संस्कार एक ऐसा संस्कार है जो कि बच्चों के शिक्षा आरंभ की आयु को तय करता है। इस संस्कार के द्वारा बालक शिक्षा ग्रहण करने के लिए गुरु के पास गुरुकुल जाता था। इस संस्कार को समाज से जोड़ने के लिए विधिवत सामाजिक आयोजन होता था। आज शिक्षा ग्रहण करने की स्थितियां पूर्णतः परिवर्तित हो चुकी है, मगर संस्कार की अवधारणा परिवर्तन के साथ कायम है। अब इस संस्कार को प्रायः विवाह के साथ जोड़कर आयोजित कर दिया जाता है। खैर, बात हो रही है व्यंजन की तो इस संस्कार में लड़ुवा और मठोंलिया जैसे मीठे व्यंजन विशेष रूप से बनाया जाते हैं।
लड़ुवा बनाने के लिए बेसन के सेव बना कर उन्हें गुड़ का पाग बना कर उसमें सेव मिला कर लड्डू बना लिए जाते हैं।
मठोंलिया बनाने के मैदा या महीन कपड़े से छान कर आटे में मोयन (घी) मिला कर दूध और थोड़ी सी शक्कर डाल कर अच्छे से मल कर पानी की सहायता से पीठी तैयार कर ली जाती है। आटा अच्छे से तैयार कर उसे थोड़ी मोटी पूरी की तरह बेल लीजिए फिर किनारे पर गोंठ कर डिजाइन बना कर अच्छे से घी में तल कर तैयार कर लीजिए।बाद में तैयार मठोंलिया को शक्कर का पाग बना कर पाग लिया जाता है। यह दोनों मीठे पकवान महीनों खराब नहीं होते हैं । लड़ुवा और मठोंलिया को उपनयन संस्कार के अतिरिक्त विवाह संस्कार में वायने के लिए तैयार कराया जाता हैं।

19/11/2025

*अवधी व्यंजन रसेवर*

कहा जाता है "जहाँ गाँठ तहँ रस नहीं", किंतु गन्ने के पोर पोर में रस समाहित होता है। परोपकारी भावना से संयुक्त इसका पूरा अस्तित्व मिठास, पौष्टिक गुणों से भरपूर बहुत उपयोगी होता है। गन्ने का, चीपी ,राब, गुड़ और चीनी इत्यादि भोज्य पदार्थ इससे निर्मित होते हैं, यहां तक कि गन्ने का रस निकालने के उपरांत बचा हुआ छिलका जलावन के काम आ जाता है। यही नहीं, गन्ने का रस खराब नहीं होता है। पुराना या बासी रस सिरके के रूप में प्रयुक्त किया जाता है।
यह तो हम सभी जानते हैं कि हमारे देश में जीविकोपार्जन का प्रमुख साधन कृषि ही है। इसलिए यहां के व्यंजन भी उपज के अनुसार ही प्रचलित और बनाए जाते हैं। जब गन्ने की फसल होती है तो फिर बनाया जाता है," रसेवर या रसियार"यानी रस से पूर्ण श्रेष्ठ भोजन। रसेवर गन्ने के रस में चावल पकाकर तैयार किया जाता है। पक जाने पर इसमें स्वाद और इच्छानुसार डाल सकते हैं।इस मीठे खाद्य पदार्थ को दूध, दही या मट्ठा से खाने पर इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है। मौसम भी है, मौका भी है और दस्तूर भी है तो देर किस बात की, बनाइए स्वादिष्ट रसियार। खाइये और खिलाइये। चित्र गूगल वाल से

17/11/2025

अवध केवल एक क्षेत्र विशेष का नाम नहीं है, यह एक पूरी परंपरा है- हमारे जीने की कला है ।खान पान ,रहन-सहन, संस्कृति, विचार और नैसर्गिक सौंदर्य से परिपूर्ण यह क्षेत्र सदैव लोगों को आकर्षित करता रहा है। नजाकत ,नफासत से परिपूर्ण अवध भूमि अपनी सादगी से सबको मोहित करता है ।व्यंजनों की बात करें तो पोषक तत्वों से भरपूर यहां के व्यंजन स्वास्थ्य वर्धक,कम खर्चीले और स्वाद से भरपूर होते हैं। विशेष आयोजनों और उत्सवों पर यह व्यंजन घर पर उपलब्ध सामग्रियों से ही तैयार कर लिए जाते हैं। ऐसा ही एक व्यंजन है ,"गुलगुला ",जो जन्म दिवस यानी कि सालगिरह के अवसर पर बनाया जाता है। गुड़ या चीनी ,घी,थोड़ी सी मेवा को गेहूं के आटे में मिला कर घी में तल कर स्वादिष्ट मिठाई तैयार की जाती है। सोहर गीत के साथ गुलगुले का स्वाद मुंह और मन दोनों में मिठास भर देता है।

Photos from अवधी समाज's post 19/10/2025

18-10-2025 को यूपी प्रेस क्लब हजरतगंज लखनऊ में 'खरखइंचा' पत्रिका के लोकार्पण एवँ भारतेन्दु भइया को श्रद्धांजलि के कुछ चित्र

19/10/2025
10/10/2025

"अवधी त्रिधारा" #जगदीशपीयूष #सुशीलसिद्धार्थ व #डॉभारतेंदुमिश्र की अंतिम कड़ी डॉ० भारतेंदु मिश्र ने ढाई तीन साल से कैंसर से लड़ते-लड़ते दिल्ली के धर्मशिला नारायणा अस्पताल में 9/10 अक्टूबर, 2025 की रात लगभग 1 बजे उन्होंने इस फ़ानी दुनिया को अलविदा कह दिया। वरिष्ठ कवि, गीतकार, कथाकार और कई दर्जन पुस्तकों के लेखक, जिनकी लिखी और संपादित की हुई कई पुस्तकें अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या और पाटेश्वरी विश्वविद्यालय, बलरामपुर में स्नातक और परास्नातक के विद्यार्थियों को पढ़ाई जाएँगी। अभी भाई शैलेन्द्र शुक्ल जी ने अवधी पत्रिका #खरखइंचा प्रवेशांक को भारतेंदु मिश्र अंक के रूप में प्रकाशित करवाया है। अवधी गद्य के विकास में डॉ० मिश्र के योगदान को सदैव स्मरण किया जाएगा। "अवधी भाषा" के अनथक योद्धा को सादर नमन एवं हार्दिक श्रद्धांजलि।

09/10/2025

😭😭😭😭 नहीं रहे मेरे बड़े भाई Dr Bhartendu Mishra
वरिष्ठ कवि गीतकार कथा कार कई दर्जन पुस्तकों के लेखक, जिनकी लिखी और संपादित की हुई पुस्तकें अवध विश्वविद्यालय अयोध्या और पाटेश्वरी विश्वविद्यालय बलरामपुर में BA और MA के विद्यार्थियों को पढ़ाई जाएँगी। ढाई तीन साल से कैंसर से लड़ते-लड़ते दिल्ली के धर्मशिला नारायणा अस्पताल में आज लगभग 1 बजे उन्होंने इस फ़ानी दुनिया को अलविदा कह दिया। 😭😭

अवधीसाहित्यकार🥀भारतेन्दु मिश्र से जयकृष्ण सिंह की बातचीत,🥀प्रस्तुति भूमिका मिश्रा#अनुभवकी 18/05/2025

अवधी साहित्यकार भारतेन्दु मिश्र से डॉ जयकृष्ण सिंह कहीं बतकही -

अवधीसाहित्यकार🥀भारतेन्दु मिश्र से जयकृष्ण सिंह की बातचीत,🥀प्रस्तुति भूमिका मिश्रा#अनुभवकी अवधीसाहित्यकार🥀भारतेन्दु मिश्र से जयकृष्ण सिंह की बातचीत,🥀प्रस्तुति भूमिका मिश्रा #अनुभवकीसीढ़ीचैनल

18/05/2025

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