Chandan Jacrr

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JACRR: Just Acquire Comprehensive Reliable Resources.

30/07/2023

एक अतिसुन्दर महिला ने विमान में प्रवेश किया और अपनी सीट की तलाश में नजरें घुमाईं।

उसने देखा कि उसकी सीट एक ऐसे व्यक्ति के बगल में है। जिसके दोनों ही हाथ नहीं है।

महिला को उस अपाहिज व्यक्ति के पास बैठने में झिझक हुई।

उस 'सुंदर' महिला ने एयरहोस्टेस से बोली "मै इस सीट पर सुविधापूर्वक यात्रा नहीं कर पाऊँगी।

क्योंकि साथ की सीट पर जो व्यक्ति बैठा हुआ है उसके दोनों हाथ नहीं हैं।

" उस सुन्दर महिला ने एयरहोस्टेस से सीट बदलने हेतु आग्रह किया।

असहज हुई एयरहोस्टेस ने पूछा, "मैम क्या मुझे कारण बता सकती है..?"

'सुंदर' महिला ने जवाब दिया "मैं ऐसे लोगों को पसंद नहीं करती। मैं ऐसे व्यक्ति के पास बैठकर यात्रा नहीं कर पाउंगी।"

दिखने में पढी लिखी और विनम्र प्रतीत होने वाली महिला की यह बात सुनकर एयरहोस्टेस अचंभित हो गई।

महिला ने एक बार फिर एयरहोस्टेस से जोर देकर कहा कि "मैं उस सीट पर नहीं बैठ सकती। अतः मुझे कोई दूसरी सीट दे दी जाए।"

एयरहोस्टेस ने खाली सीट की तलाश में चारों ओर नजर घुमाई, पर कोई भी सीट खाली नहीं दिखी।

एयरहोस्टेस ने महिला से कहा कि "मैडम इस इकोनोमी क्लास में कोई सीट खाली नहीं है, किन्तु यात्रियों की सुविधा का ध्यान रखना हमारा दायित्व है।

अतः मैं विमान के कप्तान से बात करती हूँ। कृपया तब तक थोडा धैर्य रखें।" ऐसा कहकर होस्टेस कप्तान से बात करने चली गई।

कुछ समय बाद लोटने के बाद उसने महिला को बताया, "मैडम! आपको जो असुविधा हुई, उसके लिए बहुत खेद है |

इस पूरे विमान में, केवल एक सीट खाली है और वह प्रथम श्रेणी में है। मैंने हमारी टीम से बात की और हमने एक असाधारण निर्णय लिया। एक यात्री को इकोनॉमी क्लास से प्रथम श्रेणी में भेजने का कार्य हमारी कंपनी के इतिहास में पहली बार हो रहा है।"

'सुंदर' महिला अत्यंत प्रसन्न हो गई, किन्तु इसके पहले कि वह अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करती और एक शब्द भी बोल पाती...

एयरहोस्टेस उस अपाहिज और दोनों हाथ विहीन व्यक्ति की ओर बढ़ गई और विनम्रता पूर्वक उनसे पूछा

"सर, क्या आप प्रथम श्रेणी में जा सकेंगे..? क्योंकि हम नहीं चाहते कि आप एक अशिष्ट यात्री के साथ यात्रा कर के परेशान हों।

यह बात सुनकर सभी यात्रियों ने ताली बजाकर इस निर्णय का स्वागत किया। वह अति सुन्दर दिखने वाली महिला तो अब शर्म से नजरें ही नहीं उठा पा रही थी।

तब उस अपाहिज व्यक्ति ने खड़े होकर कहा,

"मैं एक भूतपूर्व सैनिक हूँ। और मैंने एक ऑपरेशन के दौरान कश्मीर सीमा पर हुए बम विस्फोट में अपने दोनों हाथ खोये थे।

सबसे पहले, जब मैंने इन देवी जी की चर्चा सुनी, तब मैं सोच रहा था। की मैंने भी किन लोगों की सुरक्षा के लिए अपनी जान जोखिम में डाली और अपने हाथ खोये..?

लेकिन जब आप सभी की प्रतिक्रिया देखी तो अब अपने आप पर गर्व हो रहा है कि मैंने अपने देश और देशवासियों के लिए अपने दोनों हाथ खोये।"

और इतना कह कर, वह प्रथम श्रेणी में चले गए।

'सुंदर' महिला पूरी तरह से अपमानित होकर सर झुकाए सीट पर बैठ गई।

कहानी का मर्म:--विचारों में उदारता नहीं है तो ऐसी सुंदरता का कोई मूल्य नहीं है।

28/07/2023

17 साल की उम्र में उन्हें कॉलेज से निकाल दिया गया। 25 साल की उम्र में उनकी माँ की बीमारी से मृत्यु हो गई। 26 साल की उम्र में वह अंग्रेजी पढ़ाने के लिए पुर्तगाल चली गईं। 27 साल की उम्र में उनकी शादी हो गई! उसके पति ने उसके साथ दुर्व्यवहार किया,इसके बावजूद उनकी बेटी का जन्म हुआ!
28 साल की उम्र में उनका तलाक हो गया और उन्हें गंभीर अवसाद का पता चला। 29 साल की उम्र में, वह कल्याण पर रहने वाली एक अकेली माँ थी। 30 साल की उम्र में वह इस धरती पर नहीं रहना चाहती थी।
लेकिन, उसने अपना सारा जुनून उस काम को करने में लगा दिया जिसे वह किसी और से बेहतर कर सकती थी
और उसने लिखना शुरू किया
31 साल की उम्र में आख़िरकार उन्होंने अपनी पहली किताब प्रकाशित की। 35 साल की उम्र में, उन्होंने 4 किताबें जारी कीं और उन्हें वर्ष की लेखिका नामित किया गया।
42 साल की उम्र में, उन्होंने अपनी नई किताब की रिलीज़ के पहले दिन ही 11 मिलियन प्रतियां बेच दीं। ये महिला हैं जे.के. राउलिंग. याद रखें कि 30 साल की उम्र में उसने आत्महत्या के बारे में कैसे सोचा था?
आज, हैरी पॉटर 15 बिलियन डॉलर से अधिक मूल्य का एक वैश्विक ब्रांड है।
कभी हार नहीं मानें! अपने आप पर यकीन रखें! जोश में रहें! कड़ी मेहनत करें। अभी इतनी देर नहीं हुई है।

28/07/2023

इसका नाम भोला है। जब यह पैदा हुआ तो इसके पिता सलाना बीस हजार रुपये कमाते थे। अंधे बच्चे को देखकर लोगों ने उससे छुटकारा पाने और संस्थान में कहीं छोड़ देने की सलाह दी, लेकिन पिता नहीं माने।

10वीं क्लास में नब्बे प्रतिशत अंक हासिल करने के बावजूद उन्हें 12वीं क्लास में विज्ञान विषय लेने की अनुमति नहीं दी गई।
उन्होंने राज्य सरकार को अदालत में घसीटा और छह महीने तक केस लड़ा, उन्होंने केस जीत लिया और 12वीं में विज्ञान में अट्ठानवे प्रतिशत अंक हासिल किए।

जब भारत के प्रमुख यूनिवर्सिटियों ने उन्हें दाखिला देने से इनकार कर दिया, तो उन्होंने विदेश और दुनिया के चार बेहतरीन यूनिवर्सिटियों में आवेदन करने के बारे में सोचा।

"एमआईटी, स्टैनफोर्ड, बार्कले और कार्नेज" ने न केवल उन्हें दाखिला दिया बल्कि स्कॉलरशिप भी दी। उन्होंने एमआईटी को चुना, जिससे वे एमआईटी के पहले नेत्रहीन छात्र बन गये।

2012 में अमेरिका से लौटने पर उन्होंने बोलैंट इंडस्ट्रीज के नाम से सेट अप बनाया।
आज इस सेट अप में साठ फीसद लोग या तो गरीब हैं या विकलांग हैं।
और इन गरीबों और विकलांगों के बावजूद ये सेटअप साठ करोड़ का हो गया है।

श्रीकांत भोला के मुताबिक

''मैं दुनिया की नजरों में अंधा हूं और जब उन सबने कहा कि यह कुछ नहीं कर सकता उस वक्त मैंने उनकी तरफ देखकर कहा था - मैं कुछ भी कर सकता हूं।"

उद्देश्य - आप कुछ भी कर सकते हो🙏।

24/07/2023

क्या आप इन्हें जानते हैं?

अद्भुत अकल्पीय व्यक्तित्व....

आपसे कोई पूछे भारत के सबसे पढ़े लिखे व्यक्ति का नाम बताइए जो,

डॉक्टर भी रहा हो,

बैरिस्टर भी रहा हो,

IPS अधिकारी भी रहा हो,

IAS अधिकारी भी रहा हो,

विधायक,मंत्री, सांसद भी रहा हो,

चित्रकार, फोटोग्राफर भी रहा हो,

मोटिवेशनल स्पीकर भी रहा हो,

पत्रकार भी रहा हो,

कुलपति भी रहा हो,

संस्कृत,गणित का विद्वान भी रहा हो,

इतिहासकार भी रहा हो,

समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र का भी ज्ञान रखता हो,

जिसने काव्य रचना भी की हो !

अधिकांश लोग यही कहेंगे,"क्या ऐसा संभव है,आप एक व्यक्ति की बात कर रहे हैं या किसी संस्थान की?"

पर भारतवर्ष में ऐसा एक व्यक्ति मात्र 49 वर्ष की अल्पायु में भयंकर सड़क हादसे का शिकार हो,इस संसार से विदा भी ले चुका है !

उस व्यक्ति का नाम है श्रीकांत जिचकर ! श्रीकांत जिचकर का जन्म 1954 में संपन्न मराठा कृषक परिवार में हुआ था ! वह भारत के सर्वाधिक पढ़े-लिखे व्यक्ति थे,जो गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज है !

श्रीकांत जी ने 20 से अधिक डिग्री हासिल की थीं !

कुछ रेगुलर व कुछ पत्राचार के माध्यम से ! वह भी फर्स्ट क्लास, गोल्डमेडलिस्ट,कुछ डिग्रियां तो उच्च शिक्षा में नियम ना होने के कारण उन्हें नहीं मिल पाई जबकि इम्तिहान उन्होंने दे दिया था !

उनकी डिग्रियां/ शैक्षणिक योग्यता इस प्रकार थीं...

MBBS,MD gold medalist,

LLB, LLM,

MBA,

Bachelor in journalism ,

संस्कृत में डी.लिट. की उपाधि यूनिवर्सिटी टॉपर ,

M. A इंग्लिश,

M.A हिंदी,

M.A हिस्ट्री,

M.A साइकोलॉजी,

M.A सोशियोलॉजी,

M.A पॉलिटिकल साइंस,

M.A आर्कियोलॉजी,

M.A एंथ्रोपोलॉजी,

श्रीकान्तजी 1978 बैच के आईपीएस व 1980 बैच आईएएस अधिकारी भी रहे !
1981 में महाराष्ट्र में विधायक बने,

1992 से लेकर 1998 तक राज्यसभा सांसद रहे !

श्रीकांत जिचकर ने वर्ष 1973 से लेकर 1990 तक तमाम यूनिवर्सिटी के इम्तिहान देने में समय गुजारा !

1980 में आईएएस की केवल 4 महीने की नौकरी कर इस्तीफा दे दिया !

26 वर्ष की उम्र में देश के सबसे कम उम्र के विधायक बने, महाराष्ट्र सरकार में मंत्री भी बने,

14 पोर्टफोलियो हासिल कर सबसे प्रभावशाली मंत्री रहे !

महाराष्ट्र में पुलिस सुधार किये !

1992 से लेकर 1998 तक बतौर राज्यसभा सांसद संसद की बहुत सी समितियों के सदस्य रहे,वहाँ भी महत्वपूर्ण कार्य किये !

1999 में भयंकर कैंसर लास्ट स्टेज का डायग्नोज हुआ,डॉक्टर ने कहा आपके पास केवल एक महीना है !

अस्पताल पर मृत्यु शैया पर पड़े हुए थे...लेकिन आध्यात्मिक विचारों के धनी श्रीकांत जिचकर ने आस नहीं छोड़ी उसी दौरान कोई सन्यासी अस्पताल में आया उसने उन्हें ढांढस बंधाया संस्कृतभाषा,शास्त्रों का अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया कहा तुम अभी नहीं मर सकते, अभी तुम्हें बहुत काम करना है।

चमत्कारिक तौर से श्रीकांत जिचकर पूर्ण स्वस्थ हो गए।

स्वस्थ होते ही राजनीति से सन्यास लेकर संस्कृत में डी.लिट. की उपाधि अर्जित की!

वे कहा करते थे संस्कृत भाषा के अध्ययन के बाद मेरा जीवन ही परिवर्तित हो गया है ! मेरी ज्ञान पिपासा अब पूर्ण हुई है।

पुणे में संदीपनी स्कूल की स्थापना की,

नागपुर में कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना की जिसके पहले कुलपति भी बने !

उनका पुस्तकालय किसी व्यक्ति का निजी सबसे बड़ा पुस्तकालय था जिसमें 52000 के लगभग पुस्तकें थीं!

उनका एक ही सपना बन गया था, भारत के प्रत्येक घर में कम से कम एक संस्कृत भाषा का विद्वान हो तथा कोई भी परिवार मधुमेह जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों का शिकार ना हो!

यूट्यूब पर उनके केवल 3 ही मोटिवेशनल हेल्थ फिटनेस संबंधित वीडियो उपलब्ध हैं!

ऐसे असाधारण प्रतिभा के लोग, आयु के मामले में निर्धन ही देखे गए हैं,अति मेधावी, अति प्रतिभाशाली व्यक्तियों का जीवन ज्यादा लंबा नहीं होता,शंकराचार्य महर्षि दयानंद सरस्वती, विवेकानंद भी अधिक उम्र नहीं जी पाए थे!

2 जून 2004 को नागपुर से 60 किलोमीटर दूर महाराष्ट्र में ही भयंकर सड़क हादसे में श्रीकांत जिचकर का निधन हो गया।

संस्कृत भाषा के प्रचार प्रसार व Holistic health को लेकर उनका कार्य अधूरा ही रह गया।

ऐसे शिक्षक, चिकित्सक,विधि विशेषज्ञ,प्रशासक व राजनेता के मिश्रित व्यक्तित्व को शत-शत नमन।

Copied...

09/07/2023

एक बार 94 साल के एक बूढ़े व्यक्ति को मकान मालिक ने किराया न दे पाने के कारण उसे मकान से निकाल दिया। बूढ़े व्यक्ति के पास एक पुराना बिस्तर, कुछ एल्युमीनियम के बर्तन, एक प्लास्टिक की बाल्टी और एक मग आदि के अलावा शायद ही कोई और सामान था। बूढ़े ने मालिक से किराया देने के लिए कुछ समय देने का अनुरोध किया। पड़ोसियों को भी बूढ़े आदमी पर दया आयी और उनके कहने पर मकान मालिक को किराए का भुगतान करने के लिए उस बूढ़े आदमी को कुछ दिनों की मोहलत देने के लिए मना लिया।

वह बूढ़ा आदमी अपना सामान अंदर ले गया। रास्ते से गुजर रहे एक पत्रकार ने रुक कर यह सारा नजारा देखा। उसने सोचा कि यह मामला उसके समाचार पत्र में प्रकाशित करने के लिए उपयोगी होगा। उसने एक शीर्षक भी सोच लिया,
”क्रूर मकान मालिक, बूढ़े को पैसे के लिए किराए के घर से बाहर निकाल देता है।”

फिर उसने किराएदार बूढ़े की और किराए के घर की कुछ तस्वीरें भी ले लीं।
पत्रकार ने जाकर अपने प्रेस मालिक को इस घटना के बारे में बताया। प्रेस के मालिक ने तस्वीरों को देखा और हैरान रह गए। उन्होंने पत्रकार से पूछा, कि क्या वह उस बूढ़े आदमी को जानता है?
पत्रकार ने कहा, नहीं।
अगले दिन अखबार के पहले पन्ने पर बड़ी खबर छपी। शीर्षक था,
”भारत के पूर्व प्रधान मंत्री गुलजारीलाल नंदा एक दयनीय जीवन जी रहे हैं”।
खबर में आगे लिखा था कि कैसे पूर्व प्रधान मंत्री किराया नहीं दे पाने के कारण कैसे उन्हें घर से बाहर निकाल दिया गया।
टिप्पणी की थी कि आजकल फ्रेशर भी खूब पैसा कमा लेते हैं। जबकि एक व्यक्ति जो दो बार पूर्व प्रधान मंत्री रह चुका है और लंबे समय तक केंद्रीय मंत्री भी रहा है, उसके पास अपना ख़ुद का घर भी नहीं??
दरअसल गुलजारीलाल नंदा को वह स्वतंत्रता सेनानी होने के कारण रु. 500/- प्रति माह भत्ता मिलता था। लेकिन उन्होंने यह कहते हुए इस पैसे को भी अस्वीकार कर दिया था, कि उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों के भत्ते के लिए स्वतंत्रता की लड़ाई नहीं लड़ी। बाद में दोस्तों ने उसे यह स्वीकार करने के लिए विवश कर दिया कि उनके पास जीवन यापन का अन्य कोई स्रोत नहीं है। अतः वो इसी पैसों से वह अपना किराया देकर गुजारा करते थे।

अगले दिन तत्कालीन प्रधान मंत्री ने मंत्रियों और अधिकारियों को वाहनों के बेड़े के साथ उनके घर भेजा। इतने वीआइपी वाहनों के बेड़े को देखकर मकान मालिक दंग रह गया। तब जाकर उसे पता चला कि उसका किराएदार कोई और नहीं बल्कि पूर्व प्रधानमंत्री श्री गुलजारीलाल नंदा जी हैं जो दो दो बार भारत के पूर्व प्रधान मंत्री रह चुके हैं।

मकान मालिक अपने दुर्व्यवहार के लिए तुरंत गुलजारीलाल नंदा जी के चरणों में झुक गया। अधिकारियों और वीआईपीयों ने गुलजारीलाल नंदा से सरकारी आवास और अन्य सुविधाएं को स्वीकार करने का अनुरोध किया। श्री गुलजारीलाल नंदा ने इस बुढ़ापे में ऐसी सुविधाओं का क्या काम, यह कह कर उनके प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।

और अंतिम श्वास तक वे एक सामान्य नागरिक की तरह, एक सच्चे स्वतंत्रता सेनानी बन कर ही रहे। 1997 में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी व एच डी देवगौड़ा के मिलेजुले प्रयासो से उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
पिछले 10 जून को उनकी 26 वीं पुण्यतिथि थी, पर शायद किसी व्यक्ति को स्मरण रहा हो।

18/06/2023
01/12/2017

हम अक्सर इस बात से अधिक परेशान हो जाते हैं की लोग हमारी पीठ के पीछे क्या सोचते हैं ? जबकि ये हमारा विषय है ही नहीं।
हमें इस बात पर अधिक ध्यान देना चाहिए की लोग हमारे सामने क्या कहते हैं।
सामने के विचारों पर ध्यान न देने के कारण हमारे पीछे का वातावरण दूषित हो जाता है, और पीठ पीछे कही गई बातों पर ध्यान देने के कारण हम अपने सामने के वातावरण को बिगाड़ लेते हैं।~ #आशुतोष_राणा

शुभम् भवतु 🌹😊🙏

29/10/2017

Focusing on SPEAKING rather than THINKING. .

13/09/2017

तेरे गिरने में तेरी हार नहीं
तू इंसान है, अवतार नहीं
गिर, उठ, चल, दौड़ फिर भाग
क्यूंकि
जीवन संक्षिप्त है
इसका कोई सार नहीं…

Photos 06/06/2017

एक 18 साल का लङका था। वह बहुत कमजोर था इसलिए सब उसका मजाक बनाते थे। और इस वजह से उसके ज्यादा दोस्त भी नही थे। एक दिन उसको किसी व्यक्ति की कोई बात दिल से लग गई। उसने सोचा इस कमजोरी को दूर करना पङेगा और उसने अपने पङोस मे ही कही बोक्सिँग क्लास मे जाना शुरु कर दिया। जब कभी उसे किसी से लङाया जाता तो वह बहुत मार खाता था। कई दिनोँ तक ऐसा ही चला। सब लोग उस लङके से बोलते थे तू बोक्सिँग छोङ दे तेरे बस की नही है। मगर उस लङके ने किसी की नही सुनी और बोक्सिँग सिखता रहा। 3 साल बाद उसने एक प्रतियोगिता मे भाग लिया और पहला नम्बर प्राप्त किया। जब उसे अपनी जीत के बारे मेँ कुछ कहने के लिए बुलाया तो उसने बस यह कहा कि मेरी जीत मेरी कमजोरी की वजह से हुई है। लोग मुझे मारते थे इस वजह से मैँ मजबूत बनता गया और मेरी मार मेरी जीत का कारण बनी। हमारी कमजोरी हमे लङना सिखाती है बस लङने वाला होना चाहिए।

Photos 14/05/2017
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