कल सुबह रचेगा एक नया इतिहास!
14 जून 2026 की यह सुबह पूरे विश्व के लिए ऐतिहासिक होने वाली है! केंद्रीय आयुष राज्यमंत्री ( स्वतंत्र प्रभार ) श्री प्रतापराव जाधव जी के नेतृत्व में आयुष मंत्रालय, मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योग बनाने जा रहे हैं एक नया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड।
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Shri Lal Bahadur Shastri National Sanskrit University
Traditional Sanskrit University A Central University established by an act of parliament
03/06/2026
इग्नू बी.एड. द्वितीय वर्ष की 12 दिवसीय कार्यशाला का सफल समापन
श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के अंतर्गत संचालित इग्नू लर्नर सपोर्ट सेंटर (07190) द्वारा बी.एड. द्वितीय वर्ष के 41 अध्येताओं के लिए आयोजित 12 दिवसीय कार्यशाला का सफलतापूर्वक समापन शुक्रवार को संपन्न हुआ। यह कार्यशाला 18 मई से 29 मई 2026 तक आयोजित की गई, जिसमें अध्येताओं ने शिक्षण-अधिगम, विद्यालयीय अनुभवों, व्यक्तित्व विकास तथा व्यावसायिक दक्षताओं से संबंधित विभिन्न गतिविधियों में उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
समापन समारोह की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. मुरली मनोहर पाठक ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने अध्येताओं को एक संवेदनशील, उत्तरदायी एवं नवाचारी शिक्षक बनने का आह्वान करते हुए कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान का संप्रेषक ही नहीं, बल्कि समाज एवं राष्ट्र निर्माण का आधार भी होता है।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि एवं शिक्षा शास्त्र विभागाध्यक्षा प्रो. रचना वर्मा मोहन ने अध्येताओं को कार्यशाला के दौरान अर्जित ज्ञान एवं कौशल को व्यवहारिक जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया। विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित लर्नर सपोर्ट सेंटर की पूर्व कार्यक्रम प्रभारी एवं शिक्षा शास्त्र विभाग की वरिष्ठ प्राध्यापिका प्रो. मीनाक्षी मिश्रा ने अध्येताओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उनके शिक्षकीय दायित्वों पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर वर्तमान कार्यक्रम प्रभारी डॉ. सुरेंद्र महतो, सहायक कार्यक्रम प्रभारी डॉ. जितेंद्र कुमार, कार्यशाला प्रभारी डॉ. भारती कौशल तथा शिक्षा शास्त्र विभाग के अन्य अध्यापकगण भी उपस्थित रहे।
समापन समारोह में अध्येताओं ने समूह-गीत, कार्यशाला वृत्त, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों एवं अनुभव-साझाकरण के माध्यम से अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में कार्यशाला के दौरान प्राप्त अनुभवों और उपलब्धियों को भी साझा किया गया।
अंत में सभी प्रतिभागियों, अतिथियों एवं अध्यापकों के लिए जलपान की व्यवस्था की गई। उत्साह, उल्लास एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न इस कार्यक्रम के साथ कार्यशाला का सफल समापन हुआ।
इग्नू लर्नर सपोर्ट सेंटर (07190)
श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली
Press Information Bureau - PIB, Government of India
University Grants Commission
Ministry of Education
03/06/2026
श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के योग विज्ञान विभाग के डॉ. नवदीप जोशी द्वारा विश्वविद्यालय के शैक्षणिक योगदान एवं प्रवेश संबंधी जानकारी पर आधारित लेख प्रतिष्ठित राष्ट्रीय समाचार पत्र अमर उजाला में प्रकाशित हुआ है।
यह लेख विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उत्कृष्टता, संस्कृत एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के संवर्धन तथा विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध प्रवेश अवसरों को व्यापक जनसमुदाय तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण प्रयास है।
Ministry of Education
Dharmendra Pradhan
University Grants Commission
Amar Ujala
भारतीय भाषाओं का संवर्धन ही आत्मनिर्भर भारत की सशक्त पहचान - प्रो. मुरलीमनोहर पाठक
CBSE केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा आर-3 (त्रिभाषा सूत्र) को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप लागू किया जा रहा है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को बहुभाषिक शिक्षा प्रदान करना तथा भारतीय भाषाओं को सशक्त बनाना है।
कुलपति प्रो. मुरलीमनोहर पाठक ने कहा कि #त्रिभाषा सूत्र विद्यार्थियों को मातृभाषा, भारतीय भाषाओं तथा वैश्विक भाषाओं के संतुलित अध्ययन का अवसर प्रदान करता है। इससे विद्यार्थी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहते हैं तथा आधुनिक वैश्विक ज्ञान से भी परिचित होते हैं।
उन्होंने कहा कि मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करने से विद्यार्थियों की समझ, आत्मविश्वास, रचनात्मकता तथा बौद्धिक क्षमता अधिक सुदृढ़ होती है। बहुभाषिक शिक्षा न केवल शैक्षिक समानता को बढ़ावा देती है, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपराओं और राष्ट्रीय एकता को भी सशक्त बनाती है।
अनेक शिक्षाविदों का मत है कि भारत जैसे बहुभाषिक देश में भारतीय भाषाओं का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। मातृभाषा आधारित शिक्षा विद्यार्थियों के हित में है, क्योंकि इससे उनकी प्रतिभा स्वाभाविक रूप से विकसित होती है। विद्यार्थी अपनी मातृभाषा में सरलता से अध्ययन कर सकते हैं तथा अपने विचार प्रभावी ढंग से व्यक्त कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत भाषाओं की विविधता वाला राष्ट्र है। यदि प्रारंभिक अवस्था में विद्यार्थी अपनी मातृभाषा से जुड़ते हैं, तो यह देश के भविष्य के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का स्पष्ट मत है कि विद्यार्थी अपनी परिचित भाषा में सबसे बेहतर सीखते हैं। इसी दृष्टि से शिक्षा को केवल अंग्रेज़ी भाषा तक सीमित न रखकर भारतीय भाषाओं को भी समान महत्व देने पर बल दिया गया है।
त्रिभाषा सूत्र के प्रमुख उद्देश्य हैं -
• भारतीय भाषाओं का संरक्षण एवं संवर्धन
• विद्यार्थियों का समुचित बौद्धिक विकास
• शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित करना
• सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ बनाना
• भारत की भाषाई विविधता को बढ़ावा देना
प्रो. पाठक ने स्पष्ट किया कि यह नीति भारतीय भाषाओं के सम्मान, संरक्षण और संवर्धन का संतुलित एवं दूरदर्शी प्रयास है।
Ministry of Education
President of India
Vice President of India
Dharmendra Pradhan
PMO India
DDNewsLive
Press Information Bureau - PIB, Government of India
17/05/2026
राष्ट्रीय संगोष्ठी के संयोजक प्रो. भागीरथि नन्द ने कहा कि उत्तराखण्ड के आचार्य दिनेश चन्द्र जोशी जी ने सदैव युवा पीढ़ियों को संस्कृत अध्ययन को जीवन का अभिन्न अंग बनाने के लिए प्रेरित किया। ‘स्वस्तिवाचनम्’ संस्था की स्थापना के माध्यम से उन्होंने इस विश्वास को प्रोत्साहित किया कि भारतीय संस्कृति, कला, दर्शन, समाज और पर्यावरण के समग्र चिन्तन को प्राचीन संस्कृत ग्रन्थों के आलोक ज्ञान परम्परा को प्रामाणिक, स्पष्ट और सार्थक रूप से प्राप्त किया जा सकता है। ये कालजयी ग्रन्थ, जिन्होंने विश्वभर के विद्वानों को लंबे समय से आकर्षित कर ज्ञान प्रदान किया है, आज भी भारत की स्थायी सांस्कृतिक धरोहर का प्रतिनिधित्व करते हैं। प्रो. भागीरथि नन्द ने आगे कहा कि आचार्य जोशी की बौद्धिक विरासत तथा उनके आजीवन योगदान को संस्कृत जगत और व्यापक शैक्षणिक समुदाय सदैव आदरपूर्वक स्मरण करेगा।
Gajendra Singh Shekhawat
Ministry of Culture, Government of India
Sahitya Akademi
PMO India
Press Information Bureau - PIB, Government of India
Central Sanskrit University
National Sanskrit University, Tirupati
17/05/2026
संस्कृति मंत्रालय ने दिनेश चंद्र जोशी की जन्म शताब्दी समारोह पर जारी किया डाक टिकट
16/05/2026
उत्तराखण्ड में संस्कृत को राजभाषा का सम्मान दिलाने में आचार्य दिनेश चन्द्र जोशी का ऐतिहासिक योगदान : प्रो. श्रीनिवास वरखेडी
भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय, साहित्य अकादेमी एवं देश के तीन केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालयों ने 15 मई 2026 को श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में प्रख्यात संस्कृत विद्वान्, सांस्कृतिक चिन्तक एवं आध्यात्मिक मनीषी आचार्य दिनेश चन्द्र जोशी की जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया।
इस राष्ट्रीय संगोष्ठी के अवसर पर Central Sanskrit University के माननीय कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेडी ने कहा कि संस्कृत उत्तराखण्ड की द्वितीय राजभाषा है और इस मान्यता के लिए आचार्य दिनेश चन्द्र जोशी जी ने सशक्त प्रयास किए थे, जिसे राज्य सरकार ने वर्ष 2010 में औपचारिक रूप से स्वीकार किया। उन्होंने कहा वह उत्तराखण्ड के माननीय मुख्यमंत्री से आग्रह करेंगे कि Central Sanskrit University के सहयोग से राज्य के सभी जनपदों के संस्कृत विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में प्रतिवर्ष आचार्य दिनेश चन्द्र जोशी स्मृति में विशिष्ट व्याख्यानमाला आयोजित की जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि भारतभर के विद्वान् एकत्र होकर युवा पीढ़ी को प्रेरित करें तथा संस्कृत के समुज्जवल भविष्य के लिए एक ठोस मार्गदर्शिका तैयार करें। उन्होंने यह भी घोषणा की कि केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय आचार्य दिनेश चन्द्र जोशी की स्मृति में आयोजित कार्यक्रमों हेतु आर्थिक सहयोग प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार अन्य संस्थानों को भी एकत्रित होकर आचार्य दिनेश चन्द्र जोशी की विरासत का उत्सव मनाना चाहिए तथा संस्कृत संवर्धन हेतु उनके दृष्टिकोण और संकल्प को श्रद्धांजलि अर्पित करनी चाहिए।
इस अवसर पर प्रो. श्रीनिवास वरखेडी जी को आचार्य दिनेश चन्द्र जोशी की जन्मशताब्दी पर डाक विभाग द्वारा लोकार्पित डाक टिकट भी भेंट की गई।
Gajendra Singh Shekhawat
Ministry of Culture, Government of India
Sahitya Akademi
PMO India
Press Information Bureau - PIB, Government of India
Central Sanskrit University
16/05/2026
आचार्य दिनेश चन्द्र जोशी का सम्पूर्ण जीवन ज्ञान, करुणा और भारतीय संस्कृति को समर्पित था : प्रो. मुरलीमनोहर पाठक
भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के तत्वावधान में साहित्य अकादेमी, श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय तथा राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के संयुक्त सहयोग से 15 मई 2026 को श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में प्रख्यात संस्कृत विद्वान, सांस्कृतिक चिन्तक एवं आध्यात्मिक मनीषी आचार्य दिनेश चन्द्र जोशी की जन्मशती के उपलक्ष्य में एक गरिमामय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन संपन्न हुआ।
संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. मुरलीमनोहर पाठक ने कहा कि आचार्य दिनेश चन्द्र जोशी का सम्पूर्ण जीवन ज्ञान, करुणा और भारतीय संस्कृति को समर्पित था। उन्होंने कहा कि आचार्य जोशी का जीवन अत्यंत उद्देश्यमय रहा तथा उन्होंने अपने जीवन में कभी विश्राम नहीं किया। वे निरन्तर संस्कृत साहित्य के व्यापक अध्ययन एवं उसके मर्म को आत्मसात करने में संलग्न रहे।
प्रो. पाठक ने कहा कि इसी साधना के परिणामस्वरूप उनके व्यक्तित्व में करुणा, शान्ति, ज्ञान, समन्वय और परोपकार जैसे श्रेष्ठ गुण विकसित हुए। उन्होंने वैदिक संस्कृति और भारतीय दर्शन पर अपने प्रवचनों के माध्यम से समाज को संस्कृत का वास्तविक स्वरूप समझाया, जो आज भी श्रेष्ठ समाज निर्माण की दिशा में प्रेरणास्रोत बना हुआ है।
उन्होंने आगे कहा कि आचार्य दिनेश चन्द्र जोशी जैसे महान विद्वानों का जीवन भारतीय ज्ञान परम्परा की जीवंत अभिव्यक्ति है। उनके विचारों और आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए वर्षभर जन्मशती से जुड़े शैक्षिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए।
Gajendra Singh Shekhawat
Jyotiraditya M Scindia
Ministry of Culture, Government of India
Sahitya Akademi
PMO India
Press Information Bureau - PIB, Government of India
Central Sanskrit University
National Sanskrit University, Tirupati
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16/05/2026
आचार्य दिनेश चन्द्र जोशी भारतीय ऋषि परम्परा के जीवंत प्रतिनिधि थे : डॉ. माधव कौशिक
Ministry of Culture, Government of India के तत्वावधान में Sahitya Akademi, श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय तथा राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के संयुक्त सहयोग से 15 मई 2026 को श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में प्रख्यात संस्कृत विद्वान, सांस्कृतिक चिन्तक एवं आध्यात्मिक मनीषी आचार्य दिनेश चन्द्र जोशी की जन्मशती के उपलक्ष्य में एक गरिमामय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन संपन्न हुआ।
उद्घाटन सत्र में Sahitya Akademi के अध्यक्ष डॉ. माधव कौशिक ने अपने संबोधन में कहा कि आचार्य दिनेश चन्द्र जोशी अनेक दृष्टियों से प्राचीन ऋषि परम्परा के प्रतिनिधि थे। उन्होंने कहा कि यह जन्मशती समारोह वस्तुतः सम्पूर्ण ऋषि परम्परा का स्मरण है। उन्होंने कहा कि आचार्य दिनेश चन्द्र जोशी जैसे महापुरुष केवल ग्रंथों के विद्वान नहीं थे, बल्कि ऐसे आध्यात्मिक शिक्षक थे जिन्होंने समाज को भारतीय संस्कृति का वास्तविक स्वरूप समझाया। उन्होंने आगे कहा कि आज भारत की सभ्यतागत चेतना का जो स्वरूप दिखाई देता है, वह इसी आचार्य परम्परा का परिणाम है। वेद, उपनिषद और पुराणों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि ये केवल पुस्तकें नहीं, बल्कि जीवित परम्पराएँ हैं जो आज भी समाज में विद्यमान हैं। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जैसे हिमखंड का केवल दस प्रतिशत भाग जल के ऊपर दिखाई देता है और शेष नब्बे प्रतिशत जल के भीतर रहता है, उसी प्रकार पुस्तकें ज्ञान का केवल एक अंश हैं, जबकि भारत की वास्तविक शक्ति उसकी लोकपरम्पराओं, लोकगीतों और लोकनृत्यों में निहित है, जिन्हें आचार्य दिनेश चन्द्र जोशी जैसे महान व्यक्तित्वों ने सुरक्षित एवं संरक्षित रखा।
Gajendra Singh Shekhawat
Jyotiraditya M Scindia
Ministry of Culture, Government of India
Sahitya Akademi
PMO India
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Central Sanskrit University
National Sanskrit University, Tirupati
Ministry of Education
University Grants Commission
16/05/2026
संस्कृति मंत्रालय ने आचार्य दिनेश चन्द्र जोशी की स्मृति में वर्षभर चलने वाले कार्यक्रमों की घोषणा की।
भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने साहित्य अकादेमी, श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय तथा राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के संयुक्त सहयोग से 15 मई 2026 को श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में प्रख्यात संस्कृत विद्वान, सांस्कृतिक चिन्तक एवं आध्यात्मिक मनीषी आचार्य दिनेश चन्द्र जोशी की जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया।
जन्म शताब्दी वर्ष स्मृति समारोह को संबोधित करते हुए Ministry of Culture, Government of India के संयुक्त सचिव समर नंदा ने उपस्थित जनसमूह को जानकारी दी कि भारत सरकार के गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में गठित राष्ट्रीय क्रियान्वयन समिति ने आचार्य दिनेश चन्द्र जोशी के सम्मान में 11 अप्रैल 2026 से 11 अप्रैल 2027 तक देशभर में स्मृति कार्यक्रम, शैक्षिक संगोष्ठियाँ, सांस्कृतिक आयोजन, प्रदर्शनियाँ तथा आध्यात्मिक सभाएँ आयोजित करने का निर्णय लिया है।
श्री समर नंदा ने कहा कि आचार्य दिनेश चन्द्र जोशी का जन्म 11 अप्रैल 1926 को उत्तराखण्ड के नैनीताल जनपद के मटेला ग्राम में हुआ था। दुर्गम पर्वतीय क्षेत्र की कठोर परिस्थितियों एवं सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने विद्वत्व, तप, आध्यात्मिक अनुशासन एवं अटूट संकल्प के बल पर भारतीय संस्कृति के उज्ज्वल वाहक के रूप में स्वयं को स्थापित किया। उन्होंने कहा कि उनका जीवन इस सत्य का कालातीत उदाहरण है कि महानता सुविधा से नहीं, बल्कि समर्पण, धैर्य और आन्तरिक शक्ति से प्राप्त होती है।
आचार्य की भारतीय सांस्कृतिक विरासत के प्रति गहरी चिन्ता का उल्लेख करते हुए संयुक्त सचिव समर नंदा ने कहा कि आचार्य ने औपनिवेशिक काल में भारत को देखा था और वे भली-भाँति समझते थे कि किस प्रकार संस्कृत भाषा, गुरुकुल परम्परा और सनातन संस्कृति की जड़ों को कमजोर करने के लिए मानसिक एवं सांस्कृतिक आक्रमण किए गए। नालन्दा विश्वविद्यालय, तक्षशिला और विक्रमशिला जैसे प्राचीन ज्ञान केन्द्रों के विनाश का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल पुस्तकों और पांडुलिपियों पर आक्रमण नहीं था, बल्कि भारत की आत्मा और उसकी पवित्र ज्ञान परम्परा पर प्रहार था।
उन्होंने आगे कहा कि आचार्य दिनेश चन्द्र जोशी युवाओं के साथ निरन्तर जुड़े रहे और उन्हें संस्कृत पत्रकारिता, योग, आयुर्वेद, वास्तुशास्त्र, इण्डोलॉजी तथा पांडुलिपि संरक्षण के क्षेत्र में योगदान देने के लिए प्रेरित करते रहे। उनका विश्वास था कि इन विद्याओं के माध्यम से समाज में वैदिक संस्कृति की पुनः प्रतिष्ठा संभव है। इसी उद्देश्य से उन्होंने वर्ष 2010 में संस्कृत एवं सनातन सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन हेतु “स्वस्तिवाचनम्” संस्था की स्थापना की। वे युवाओं को स्नेहपूर्वक “स्वस्तिवाचक” और “स्वस्तिवाचिका” कहकर संबोधित करते थे।
आचार्य दिनेश चन्द्र जोशी ने अनेक जनप्रतिनिधियों को विधानसभाओं, लोकसभा और राज्यसभा में संस्कृत में शपथ ग्रहण करने के लिए प्रेरित किया। समर नंदा ने राष्ट्रीय संगोष्ठी में उपस्थित प्रतिभागियों को बताया कि यह केवल प्रतीकात्मक प्रयास नहीं था, बल्कि भारत के सांस्कृतिक आत्मसम्मान और सभ्यतागत पहचान के पुनर्जागरण की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम था।
उन्होंने आचार्य दिनेश चन्द्र जोशी के उन सतत प्रयासों का भी उल्लेख किया जिनके परिणामस्वरूप संस्कृत को उत्तराखण्ड की द्वितीय राजभाषा का दर्जा प्राप्त हुआ। उनके दीर्घ संघर्ष, जनजागरण अभियानों और संस्कृत के प्रति अटूट समर्पण के कारण उत्तराखण्ड सरकार ने वर्ष 2010 में संस्कृत को राज्य की द्वितीय राजभाषा घोषित किया, जो भारत की ज्ञान परम्परा के लिए एक ऐतिहासिक क्षण सिद्ध हुआ।
संस्कृत ज्ञान परम्पराओं की समकालीन प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए समर नंदा ने कहा कि आयुर्वेद, खगोलशास्त्र, दर्शन, गणित, योग, अध्यात्म और विज्ञान से संबंधित असंख्य ज्ञान-रत्न आज भी संस्कृत पांडुलिपियों में सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि इस ज्ञान को समाज के समक्ष लाना एक सामूहिक राष्ट्रीय उत्तरदायित्व है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में संस्कृति मंत्रालय “ज्ञान भारतम्” सहित अनेक पहलों के माध्यम से इस दिशा में कार्य कर रहा है।
Gajendra Singh Shekhawat
Jyotiraditya M Scindia
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