Shri Lal Bahadur Shastri National Sanskrit University

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Shri Lal Bahadur Shastri National Sanskrit University Traditional Sanskrit University A Central University established by an act of parliament

श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के यशस्वी कुलपति प्रोफेसर मुरलीमनोहर पाठक का राष्ट्र...
15/09/2026

श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के यशस्वी कुलपति प्रोफेसर मुरलीमनोहर पाठक का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शताब्दी-दीर्घ राष्ट्रसेवा, समाजनिर्माण और सांस्कृतिक चेतना के जागरण को केंद्र में रखकर लिखा गया चिंतनपरक एवं दृष्टिपरक आलेख प्रकाशित हुआ है।

श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर मुरलीमनोहर पाठक ‘वसुधैव कुटुम्बकम् हिन्दी सम...
15/09/2026

श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर मुरलीमनोहर पाठक ‘वसुधैव कुटुम्बकम् हिन्दी सम्मान’ से सम्मानित

पौरोहित्य विभाग ने एक वर्षीय प्रशिक्षणार्थियों को वितरित की ‘संस्कार प्रकाश’ पुस्तककुलपति प्रो. मुरलीमनोहर पाठक ने पुस्त...
15/09/2026

पौरोहित्य विभाग ने एक वर्षीय प्रशिक्षणार्थियों को वितरित की ‘संस्कार प्रकाश’ पुस्तक
कुलपति प्रो. मुरलीमनोहर पाठक ने पुस्तक वितरण पहल की सराहना करते हुए दी बधाई

नई दिल्ली। श्री लालबहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के पौरोहित्य विभाग द्वारा 13 सितम्बर 2026 को एक वर्षीय पौरोहित्य प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के प्रशिक्षणार्थियों को ‘संस्कार प्रकाश’ पुस्तक का वितरण किया गया। कार्यक्रम विश्वविद्यालय के स्वर्ण जयंती सदन स्थित कक्ष संख्या 301 में सम्पन्न हुआ।कार्यक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मुरलीमनोहर पाठक के संरक्षकत्व तथा पौरोहित्य विभागाध्यक्ष एवं पौरोहित्य प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के संयोजक प्रो. रामराज उपाध्याय के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया।इस अवसर पर कुलपति प्रो. मुरलीमनोहर पाठक ने पौरोहित्य विभाग की इस सार्थक एवं विद्यार्थी-केंद्रित पहल के लिए विभाग को बधाई दी। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को आवश्यक पुस्तकें एवं अध्ययन-सामग्री उपलब्ध कराना उनकी शिक्षा को सुगम बनाने के साथ-साथ ज्ञान के प्रति उनके उत्साह को भी सुदृढ़ करता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ‘संस्कार प्रकाश’ जैसी उपयोगी पुस्तकें प्रशिक्षणार्थियों के शैक्षिक एवं व्यावहारिक ज्ञान को समृद्ध करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। कुलपति ने विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें अध्ययन, साधना, अनुशासन और परिश्रम के साथ पौरोहित्य परंपरा की गरिमा को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।पौरोहित्य विभाग द्वारा प्रो. रामराज उपाध्याय की अध्यक्षता में विगत कई वर्षों से विद्यार्थियों के हित में यह प्रकल्प निरन्तर संचालित किया जा रहा है। इसका प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आर्थिक अभाव किसी भी विद्यार्थी की शिक्षा में बाधक न बने। इसी उद्देश्य के अनुरूप पौरोहित्य प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों को आवश्यक पुस्तकें एवं अध्ययन-सामग्री उपलब्ध कराई जाती हैं।कार्यक्रम का शुभारम्भ वैदिक मंगलाचरण से हुआ। एक वर्षीय डिप्लोमा पाठ्यक्रम के छात्र श्री मनीष चन्द्र जोशी ने वैदिक मंगलाचरण प्रस्तुत किया। इसके पश्चात् मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित देश-विदेश में व्यवसाय से जुड़े श्री अशर्फीलाल जी ने विद्यार्थियों को सम्बोधित किया। उन्होंने शिक्षा, परिश्रम और लक्ष्य के प्रति समर्पण को सफलता का आधार बताते हुए विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। तत्पश्चात् उन्होंने अपने करकमलों से सभी प्रशिक्षणार्थियों को ‘संस्कार प्रकाश’ पुस्तकें प्रदान कीं।कार्यक्रम में पौरोहित्य विभाग की इस पहल को विद्यार्थियों के शैक्षिक एवं व्यावहारिक विकास की दृष्टि से अत्यन्त उपयोगी बताया गया। पुस्तक वितरण का यह प्रकल्प पौरोहित्य शिक्षा को अधिक सुलभ, गुणवत्तापूर्ण एवं प्रभावी बनाने की दिशा में विभाग की निरन्तर प्रतिबद्धता का परिचायक है।कार्यक्रम का सञ्चालन डॉ. नीतेश झा ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. मधुसूदन शर्मा ने प्रस्तुत किया। अन्त में शान्तिमन्त्र के साथ कार्यक्रम का विधिवत् समापन हुआ।

हिमालय नाद विभूषण से सम्मानित हुए योगाचार्य डॉ. नवदीप जोशीहिमालय दिवस पर ऋषिकेश में ढोल की थाप ने जीवंत की लोक परंपराऋषि...
15/09/2026

हिमालय नाद विभूषण से सम्मानित हुए योगाचार्य डॉ. नवदीप जोशी

हिमालय दिवस पर ऋषिकेश में ढोल की थाप ने जीवंत की लोक परंपरा

ऋषिकेश, प्रेस विज्ञप्ति। हिमालय दिवस के अवसर पर ऋषिकेश स्थित स्वामीनारायण आश्रम में आयोजित दो दिवसीय धरोहर संवाद कार्यक्रम में योग, भारतीय ज्ञान परंपरा एवं हिमालयी संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए योगाचार्य डॉ. नवदीप जोशी को “हिमालय नाद विभूषण” अवार्ड से सम्मानित किया गया। उन्हें यह सम्मान आरएसएस के प्रांत कार्यवाह दिनेश सेमवाल, संस्कृतिकर्मी प्रो. डी.आर. पुरोहित, साहित्यकार गणेश खुगशाल ‘गणी’ एवं महंत रामकृष्ण महाराज ने प्रदान किया।

अपनी धरोहर न्यास की ओर से आयोजित कार्यक्रम में उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों से आए ढोल-दमाऊ वादकों ने पारंपरिक ताल, जागर एवं लोक रचनाओं की प्रस्तुति देकर हिमालय की समृद्ध नाद एवं लोक संस्कृति को जीवंत किया। टिहरी के ढोल वादक डॉ. सोहनलाल ने मंत्रों के साथ ढोल की विभिन्न तालों का प्रदर्शन किया और ढोल वादन की 750 से अधिक तालों की परंपरा की जानकारी दी।

कार्यक्रम में बानेश्वर के मोहन दास, बढ़ाकेदार के बचन दास, अल्मोड़ा के सुंदर दास तथा माणा गांव के कुंदन सिंह कगोला ने भी लोक वाद्य एवं पारंपरिक लोक विधाओं की प्रस्तुति दी।

अपनी धरोहर संस्था के अध्यक्ष विजय भट्ट ने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य ढोल-दमाऊ से जुड़े पारंपरिक ज्ञान, कौशल और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।

इस अवसर पर मेयर शंभू पासवान, नोभम स्थानी जुयाल, दिनेश बम, डॉ. श्याम सिंह कार्की, राजेश भट्ट, वीरेंद्र बिष्ट, कमल जीना, एल.पी. जोशी, सुनीता पंवार, मधु असवाल सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

विश्व हिन्दी महासम्मेलन 2026 में कुलपति प्रोफेसर मुरलीमनोहर पाठक को ‘वसुधैव कुटुम्बकम् हिन्दी सम्मान’हिन्दी, भारतीय ज्ञा...
14/09/2026

विश्व हिन्दी महासम्मेलन 2026 में कुलपति प्रोफेसर मुरलीमनोहर पाठक को ‘वसुधैव कुटुम्बकम् हिन्दी सम्मान’

हिन्दी, भारतीय ज्ञान-परम्परा, उच्च शिक्षा, शोध एवं सांस्कृतिक संवाद के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए प्रतिष्ठित सम्मान

नई दिल्ली, 14 सितम्बर 2026। हिन्दी दिवस के अवसर पर नई दिल्ली स्थित इण्डिया इण्टरनेशनल सेण्टर में आयोजित विश्व हिन्दी महासम्मेलन 2026 में श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के कुलपति प्रोफेसर मुरलीमनोहर पाठक को प्रतिष्ठित ‘वसुधैव कुटुम्बकम् हिन्दी सम्मान’ से सम्मानित किया गया। हिन्दी भाषा, भारतीय ज्ञान-परम्परा, उच्च शिक्षा, शोध तथा सांस्कृतिक संवाद के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया गया यह सम्मान उनके शैक्षणिक एवं संस्थागत नेतृत्व की महत्वपूर्ण उपलब्धि है।सम्मेलन का मुख्य विषय ‘वसुधैव कुटुम्बकम् और हिन्दी : वैश्विक संवाद की साझा भाषा’ रहा। देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों से आए शिक्षाविदों, साहित्यकारों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों तथा हिन्दीप्रेमियों ने सम्मेलन में सहभागिता की। वक्ताओं ने हिन्दी को भारतीय सांस्कृतिक चेतना, ज्ञान-विनिमय, मानवीय मूल्यों और विश्वबन्धुत्व की भावना को अभिव्यक्त करने वाली सशक्त भाषा के रूप में रेखांकित किया।समारोह के मुख्य अतिथि भारत सरकार के पूर्व केन्द्रीय मन्त्री श्री अश्विनी कुमार चौबे रहे। सम्मेलन में हिन्दी की वैश्विक भूमिका, भारतीय भाषाओं की समृद्ध परम्परा तथा विश्व समुदाय के मध्य सांस्कृतिक एवं बौद्धिक संवाद की सम्भावनाओं पर व्यापक विमर्श हुआ।
कुलपति के नेतृत्व में विश्वविद्यालय ने अर्जित की नई शैक्षणिक ऊँचाइयाँ
प्रोफेसर मुरलीमनोहर पाठक के कुशल एवं दूरदर्शी नेतृत्व में श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने शिक्षा, शोध, गुणवत्ता, नवाचार तथा संस्थागत विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। उनके नेतृत्व में विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद् (NAAC) द्वारा A++ ग्रेड प्राप्त हुआ, जो संस्थान की शैक्षणिक गुणवत्ता, शोध-संस्कृति, प्रशासनिक दक्षता और संस्थागत उत्कृष्टता को रेखांकित करता है।यह उपलब्धि विश्वविद्यालय की विकास-यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। इसमें अध्यापकों, अधिकारियों, कर्मचारियों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों के सामूहिक प्रयासों के साथ-साथ कुलपति के प्रभावी नेतृत्व की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। प्रोफेसर पाठक ने विश्वविद्यालय की कार्यसंस्कृति में गुणवत्ता, अनुशासन, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व को विशेष महत्व देते हुए शैक्षणिक उत्कृष्टता तथा प्रशासनिक सुधारों को संस्थागत विकास का आधार बनाया है।

शिक्षा, शोध और नवाचार को नई दिशा
कुलपति के नेतृत्व में विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों को शोधपरक दृष्टि, गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा और विद्यार्थियों के समग्र विकास से जोड़ने पर विशेष बल दिया जा रहा है। पारम्परिक ज्ञान और आधुनिक शैक्षणिक आवश्यकताओं के मध्य सार्थक समन्वय स्थापित करने की दिशा में निरन्तर प्रयास किए जा रहे हैं।प्रोफेसर मुरलीमनोहर पाठक का दृष्टिकोण है कि संस्कृत, हिन्दी तथा भारतीय ज्ञान-परम्परा को केवल पारम्परिक अध्ययन तक सीमित न रखते हुए आधुनिक अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और वैश्विक विमर्श से जोड़ा जाना चाहिए। इसी दृष्टि के अनुरूप विश्वविद्यालय में शोध, अकादमिक विमर्श, अन्तर्विषयक अध्ययन तथा ज्ञान-विनिमय की संस्कृति को प्रोत्साहित किया जा रहा है।उन्होंने विद्यार्थियों के लिए ऐसे शैक्षणिक वातावरण के निर्माण पर बल दिया है, जिसमें ज्ञानार्जन के साथ रचनात्मकता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नैतिक मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व का भी विकास हो।
समग्र विश्वविद्यालय विकास की दिशा में निरन्तर पहल
प्रोफेसर पाठक के नेतृत्व में विश्वविद्यालय के समग्र विकास को बहुआयामी दृष्टि से आगे बढ़ाया जा रहा है। शैक्षणिक अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण, शोध गतिविधियों के विस्तार, डिजिटल संसाधनों के प्रभावी उपयोग, अकादमिक गुणवत्ता में निरन्तर सुधार तथा प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।विश्वविद्यालय में आधुनिक शैक्षणिक आवश्यकताओं के अनुरूप अनुसंधानपरक वातावरण विकसित करने, विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने तथा भारतीय ज्ञान-परम्परा को समकालीन संदर्भों से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।कुलपति प्रोफेसर मुरलीमनोहर पाठक ने संस्थागत विकास को केवल भौतिक संसाधनों के विस्तार तक सीमित न रखते हुए उसे शैक्षणिक गुणवत्ता, मानवीय मूल्यों, शोध की प्रतिष्ठा और सामाजिक उपयोगिता से जोड़ने का प्रयास किया है। उनके दृष्टिकोण में विश्वविद्यालय की वास्तविक पहचान उसके भवनों से नहीं, बल्कि उसकी ज्ञान-संस्कृति, शोध-परम्परा और विद्यार्थियों के भविष्य-निर्माण से निर्धारित होती है।
संस्थागत नेतृत्व और प्रशासनिक दक्षता का सशक्त उदाहरण
कुलपति के रूप में प्रोफेसर पाठक ने विश्वविद्यालय के शैक्षणिक वातावरण को अधिक सुदृढ़, अनुशासित और विकासोन्मुख बनाने की दिशा में निरन्तर कार्य किया है। शैक्षणिक गुणवत्ता, प्रशासनिक पारदर्शिता, उत्तरदायित्व, समयबद्ध कार्यप्रणाली तथा विद्यार्थियों के हितों को संस्थागत प्राथमिकताओं में प्रमुख स्थान दिया गया है।उन्होंने अध्यापकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए रचनात्मक एवं प्रेरणादायी वातावरण विकसित करने पर विशेष बल दिया है। शोध, नवाचार और अकादमिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करते हुए विश्वविद्यालय की कार्यसंस्कृति को अधिक सक्रिय, उत्तरदायी और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।उनकी दृष्टि में शिक्षा केवल उपाधि प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि चरित्र-निर्माण, बौद्धिक विकास, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्र-निर्माण का सशक्त आधार है।

हिन्दी और भारतीय ज्ञान-परम्परा के प्रति प्रतिबद्धता
प्रोफेसर मुरलीमनोहर पाठक हिन्दी को भारत की सांस्कृतिक स्मृति, सामाजिक संवेदना और राष्ट्रीय चेतना की सशक्त संवाहक भाषा मानते हैं। उनके अनुसार हिन्दी का विकास भारतीय भाषाओं के सम्मान, उच्चस्तरीय शोध, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा वैश्विक स्तर पर ज्ञान-विनिमय के व्यापक विस्तार से जुड़ा है।वे भारतीय ज्ञान-परम्परा को आधुनिक विश्व की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रस्तुत करने तथा युवा पीढ़ी को अपनी भाषायी और सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने की दिशा में निरन्तर प्रयत्नशील हैं। उनके शैक्षणिक नेतृत्व में भाषा, साहित्य, संस्कृति और ज्ञान-विज्ञान के विविध आयामों को परस्पर जोड़ते हुए भारतीय ज्ञान-परम्परा को समकालीन विमर्श से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
विश्व हिन्दी महासम्मेलन में हिन्दी के वैश्विक स्वरूप पर व्यापक विमर्श
विश्व हिन्दी विद्यापीठ तथा भारतीय पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस सम्मेलन में हिन्दी के अन्तरराष्ट्रीय स्वरूप, भारतीय भाषाओं की परस्पर समृद्धि तथा वैश्विक शान्ति के लिए सांस्कृतिक संवाद की आवश्यकता पर व्यापक चर्चा हुई।सम्मेलन के आयोजन में भूमण्डलीय शान्ति प्रतिष्ठान के अध्यक्ष डॉ. मार्कण्डेय राय तथा भारतीय पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण संस्थान के कुलाध्यक्ष डॉ. प्रियरंजन त्रिवेदी की महत्वपूर्ण भूमिका रही।उल्लेखनीय है कि विश्व हिन्दी विद्यापीठ का उद्घाटन 14 सितम्बर 2000 को आयोजित सहस्राब्दी विश्व हिन्दी सम्मेलन के अवसर पर तत्कालीन उपप्रधानमन्त्री एवं राजभाषा मन्त्री श्री लालकृष्ण आडवाणी द्वारा किया गया था। इस गौरवशाली परम्परा को आगे बढ़ाते हुए विश्व हिन्दी महासम्मेलन हिन्दी को वैश्विक संवाद, ज्ञान-विनिमय और सांस्कृतिक सहभागिता की प्रभावशाली भाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने की दिशा में निरन्तर प्रयासरत है।
विश्वविद्यालय परिवार में हर्ष और गौरव
कुलपति प्रोफेसर मुरलीमनोहर पाठक को प्राप्त ‘वसुधैव कुटुम्बकम् हिन्दी सम्मान’ से श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय परिवार में हर्ष और गौरव का वातावरण है। अध्यापकों, अधिकारियों, कर्मचारियों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने इस सम्मान को कुलपति के शैक्षणिक एवं बौद्धिक योगदान के साथ-साथ विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा से जुड़ी महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा है।विश्वविद्यालय परिवार का मानना है कि यह सम्मान प्रोफेसर मुरलीमनोहर पाठक के व्यक्तिगत शैक्षणिक योगदान के साथ-साथ उस संस्थागत दृष्टि और कार्य-संस्कृति का भी सम्मान है, जिसके माध्यम से विश्वविद्यालय शिक्षा, शोध, नवाचार, भारतीय ज्ञान-परम्परा और अकादमिक उत्कृष्टता के क्षेत्र में निरन्तर आगे बढ़ रहा है।NAAC द्वारा प्राप्त A++ ग्रेड तथा विश्वविद्यालय में जारी विकासोन्मुख शैक्षणिक एवं संस्थागत गतिविधियाँ इस प्रगति-यात्रा को नई गति प्रदान कर रही हैं। ‘वसुधैव कुटुम्बकम् हिन्दी सम्मान’ इस यात्रा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में जुड़ गया है, जो हिन्दी, भारतीय ज्ञान-परम्परा और वैश्विक सांस्कृतिक संवाद के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करता है।

हिंदी के निरंतर प्रयोग से ही सुदृढ़ होगी भाषायी चेतनाकुलपति प्रो. मुरलीमनोहर पाठक ने कहा—हिंदी भारतीय संस्कृति, परंपरा औ...
10/09/2026

हिंदी के निरंतर प्रयोग से ही सुदृढ़ होगी भाषायी चेतना
कुलपति प्रो. मुरलीमनोहर पाठक ने कहा—हिंदी भारतीय संस्कृति, परंपरा और राष्ट्रीय अस्मिता की सशक्त अभिव्यक्ति

नई दिल्ली। श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में हिंदी माह-2026 के अंतर्गत विभिन्न भाषायी एवं साहित्यिक गतिविधियों का आयोजन उत्साहपूर्वक किया जा रहा है। इसी क्रम में 10 सितंबर 2026 को विश्वविद्यालय परिसर में छात्र-छात्राओं के लिए निबंध लेखन तथा गैर-शैक्षणिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों श्रुतलेख लेखन प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। इन प्रतियोगिताओं में प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए हिंदी के प्रति अपनी अभिरुचि, भाषायी दक्षता एवं अभिव्यक्ति-कौशल का परिचय दिया।प्रातः 10:30 बजे छात्र-छात्राओं के लिए निबंध लेखन प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतियोगिता में ‘देश का आधार : शिक्षा और स्वास्थ्य’, ‘राष्ट्र की उन्नति में युवाओं की भूमिका’ तथा ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ विषय निर्धारित किए गए थे। विद्यार्थियों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, युवा शक्ति, राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक समन्वय एवं राष्ट्रनिर्माण से जुड़े विभिन्न आयामों को अपने लेखन में रचनात्मक, तार्किक एवं प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया। विशेष रूप से ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ विषय के माध्यम से विद्यार्थियों ने भारत की विविध भाषायी, सांस्कृतिक एवं सामाजिक परंपराओं में निहित एकात्मता और राष्ट्रीय एकता की भावना को रेखांकित किया।निबंध लेखन प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में डॉ. बेजवाड़ा कामाक्षमा, श्रीमती वंदना शुक्ला तथा डॉ. सुदेश कुमार शामिल रहे। निर्णायक मंडल ने प्रतिभागियों के लेखन का मूल्यांकन विषय की समझ, विचारों की मौलिकता, भाषा एवं वर्तनी की शुद्धता, तार्किकता तथा अभिव्यक्ति की प्रभावशीलता के आधार पर किया।सायं 2:30 बजे गैर-शैक्षणिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए श्रुतलेख लेखन प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसमें प्रतिभागियों ने हिंदी के शुद्ध लेखन, वर्तनी एवं भाषायी दक्षता का परिचय दिया। श्रुतलेख लेखन प्रतियोगिता के माध्यम से प्रतिभागियों की हिंदी भाषा पर पकड़, श्रवण क्षमता तथा शुद्ध लेखन-कौशल को परखा गया। इस अवसर पर कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाने के लिए प्रो. अभिषेक तिवारी भी पहुंचे। उनकी उपस्थिति से प्रतिभागियों में उत्साह का संचार हुआ। प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में डॉ. ब्रजेश कुमार मिश्र, डॉ. सुदेश कुमार तथा डॉ. श्वेता यादव शामिल रहीं।कुलपति प्रो. मुरलीमनोहर पाठक ने दोनों प्रतियोगिताओं के आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए सभी प्रतिभागियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि हिंदी केवल संप्रेषण का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा, जीवन-मूल्यों और राष्ट्रीय अस्मिता की सशक्त अभिव्यक्ति है। भाषा की वास्तविक प्रतिष्ठा उसके निरंतर एवं सहज प्रयोग से स्थापित होती है। विद्यार्थियों और कार्मिकों की ऐसी गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता हिंदी के प्रति बढ़ती आत्मीयता और जागरूकता का परिचायक है। उन्होंने विद्यार्थियों से हिंदी के माध्यम से भारतीय संस्कृति की विविध धाराओं को समझने तथा ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को सुदृढ़ करने का आह्वान किया।कुलसचिव प्रो. पवन कुमार शर्मा ने प्रतिभागियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हिंदी को केवल राजभाषा तक सीमित न रखकर ज्ञान, शिक्षा, प्रशासन और सामाजिक संवाद की प्रभावशाली भाषा के रूप में अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भारत की भाषायी एवं सांस्कृतिक विविधता उसकी विशिष्ट शक्ति है तथा हिंदी विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों के बीच संवाद एवं आत्मीयता का सशक्त माध्यम बन सकती है। ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की संकल्पना को साकार करने में भारतीय भाषाओं के परस्पर सम्मान और संवाद की महत्वपूर्ण भूमिका है।हिंदी राजभाषा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष प्रो. जगदेव कुमार शर्मा ने कहा कि हिंदी भारतीय समाज की सांस्कृतिक विविधता, संवेदना और राष्ट्रीय एकात्मता को जोड़ने वाली सशक्त भाषा है। उन्होंने कहा कि किसी भी भाषा की समृद्धि उसके निरंतर प्रयोग और सृजनात्मक अभिव्यक्ति से होती है। निबंध लेखन एवं श्रुतलेख लेखन जैसी प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों तथा कार्मिकों में हिंदी के प्रति रुचि विकसित करने के साथ उनकी लेखन क्षमता, शुद्ध वर्तनी और अभिव्यक्ति-कौशल को सुदृढ़ करती हैं। उन्होंने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए हिंदी के अधिकाधिक व्यवहारिक प्रयोग का आह्वान किया।कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. नीरज भारद्वाज की विशेष भूमिका रही। उन्होंने प्रतियोगिताओं के आयोजन में सक्रिय योगदान देते हुए प्रतिभागियों के लिए सुव्यवस्थित एवं सकारात्मक वातावरण सुनिश्चित किया। उनके प्रयासों से दोनों प्रतियोगिताओं का आयोजन प्रभावी एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।हिंदी माह-2026 के अंतर्गत आगामी दिनों में हिंदी टंकण, टिप्पण एवं प्रारूपण, काव्य-पाठ, वाद-विवाद तथा विभिन्न विषयों पर कार्यशालाओं सहित अनेक भाषायी एवं साहित्यिक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। टिप्पण एवं प्रारूपण प्रतियोगिता क, ख एवं ग वर्ग के अंतर्गत आयोजित की जाएगी। इन गतिविधियों में विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी-कर्मचारी, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएं सहभागिता करेंगे।14 सितंबर को माननीय मंत्री जी के संदेश का विश्वविद्यालय के समस्त कार्मिकों के बीच संदेश-वाचन किया जाएगा। हिंदी माह-2026 का समापन 30 सितंबर को पुरस्कार एवं समापन समारोह के साथ होगा। इस अवसर पर विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को प्रमाण-पत्र एवं पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।

हिंदी केवल भाषा नहीं, भारतीय संस्कृति और अस्मिता की पहचान : कुलपति प्रो. मुरलीमनोहर पाठकहिंदी के व्यवहारिक प्रयोग को कार...
09/09/2026

हिंदी केवल भाषा नहीं, भारतीय संस्कृति और अस्मिता की पहचान : कुलपति प्रो. मुरलीमनोहर पाठक
हिंदी के व्यवहारिक प्रयोग को कार्य-संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बनाने का आह्वान

नई दिल्ली। श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में हिंदी माह-2026 का शुभारंभ वाचस्पति सभागार में दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। कुलपति प्रो. मुरलीमनोहर पाठक, कुलसचिव प्रो. पवन कुमार शर्मा, वित्त अधिकारी श्री संतोष कुमार श्रीवास्तव एवं प्रो. जगदेव कुमार शर्मा ने दीप प्रज्वलित कर हिंदी माह-2026 के आयोजन का शुभारंभ किया। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता कुलपति प्रो. मुरलीमनोहर पाठक ने की। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के अध्यापक, अधिकारी-कर्मचारी, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।कुलपति प्रो. मुरलीमनोहर पाठक ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि हिंदी केवल संप्रेषण का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा, जीवन-मूल्यों और राष्ट्रीय अस्मिता की सशक्त अभिव्यक्ति है। हिंदी के स्वरूप में भारत की सामाजिक चेतना, सांस्कृतिक विविधता और लोकजीवन की गहरी छाप दिखाई देती है। भारतीय समाज को संवाद के सूत्र में जोड़ने तथा उसकी सांस्कृतिक विरासत को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने में हिंदी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।उन्होंने कहा कि किसी भाषा की प्रतिष्ठा केवल उसके प्रति सम्मान व्यक्त करने से नहीं, बल्कि उसके सहज और निरंतर प्रयोग से सुनिश्चित होती है। हिंदी को हमारे दैनिक व्यवहार, कार्यालयीन कार्यों, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और शैक्षणिक गतिविधियों में स्वाभाविक स्थान मिलना चाहिए। भाषा जब व्यवहार और कार्यप्रणाली का हिस्सा बनती है, तभी उसका प्रभाव व्यापक और स्थायी होता है।प्रो. पाठक ने कहा कि विश्वविद्यालय ज्ञान, विचार और व्यक्तित्व निर्माण के प्रमुख केंद्र हैं। इसलिए उच्च शिक्षण संस्थानों का दायित्व है कि वे विद्यार्थियों को भारतीय भाषाओं और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने के साथ उनमें अपनी भाषा के प्रति आत्मीयता तथा गौरव-बोध विकसित करें। हिंदी के माध्यम से युवा पीढ़ी भारतीय साहित्य, दर्शन, इतिहास और ज्ञान-परंपरा को आधुनिक संदर्भों में समझने की दृष्टि प्राप्त कर सकती है।उन्होंने कहा कि संस्कृत की समृद्ध ज्ञान-परंपरा और हिंदी की व्यापक सामाजिक पहुंच के बीच स्वाभाविक संबंध है। श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय जैसे संस्थान इस संबंध को और सुदृढ़ करते हुए भारतीय ज्ञान-विरासत को व्यापक समाज तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। हिंदी इस ज्ञान-परंपरा को आधुनिक समाज और नई पीढ़ी से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बन सकती है।कुलपति ने कहा कि हिंदी माह का उद्देश्य केवल विभिन्न प्रतियोगिताओं और कार्यक्रमों का आयोजन करना नहीं, बल्कि हिंदी के प्रति सकारात्मक वातावरण तैयार करना और उसके व्यावहारिक प्रयोग को प्रोत्साहित करना होना चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालय परिवार से आह्वान किया कि हिंदी माह की गतिविधियों को उत्साहपूर्वक अपनाने के साथ भाषा के प्रयोग को वर्षभर अपने कार्य और व्यवहार का हिस्सा बनाएं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि हिंदी माह-2026 विश्वविद्यालय में भाषायी जागरूकता, रचनात्मकता और कार्य-संस्कृति को नई दिशा देने में सार्थक सिद्ध होगा।

कुलसचिव प्रो. पवन कुमार शर्मा ने कहा कि हिंदी को केवल राजभाषा के रूप में देखने के बजाय ज्ञान, प्रशासन और सामाजिक संवाद की प्रभावशाली भाषा के रूप में समझने की आवश्यकता है। किसी भी भाषा की वास्तविक शक्ति उसके व्यापक, निरंतर और सहज प्रयोग में निहित होती है। कार्यालयीन पत्राचार, टिप्पण, प्रारूपण, प्रतिवेदन तथा प्रशासनिक एवं शैक्षणिक कार्यों में हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग से कार्यप्रणाली को सरल, सुगम और प्रभावी बनाया जा सकता है।उन्होंने कहा कि संस्कृत की समृद्ध ज्ञान-परंपरा और हिंदी की व्यापक सामाजिक पहुंच के बीच गहरा संबंध है। हिंदी भारतीय ज्ञान-परंपरा को आधुनिक संदर्भों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बन सकती है। हिंदी का प्रयोग किसी अन्य भाषा के विरोध का विषय नहीं, बल्कि अपनी भाषायी एवं सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान का परिचायक है। उन्होंने हिंदी को पूरे वर्ष विश्वविद्यालय की कार्य-संस्कृति का हिस्सा बनाने पर बल दिया।वित्त अधिकारी श्री संतोष कुमार श्रीवास्तव ने हिंदी के व्यवहारिक एवं कार्यालयीन महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भाषा का विकास तभी संभव है, जब उसका प्रयोग जीवन और कार्यक्षेत्र में निरंतर किया जाए। उन्होंने कहा कि हिंदी माह के अंतर्गत आयोजित प्रतियोगिताएं और गतिविधियां भाषा के प्रति रुचि बढ़ाने के साथ प्रतिभागियों की अभिव्यक्ति क्षमता को भी विकसित करती हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय परिवार से सभी गतिविधियों में उत्साहपूर्वक सहभागिता करने का आह्वान किया।प्रो. जगदेव कुमार शर्मा ने कहा कि हिंदी भारतीय समाज की सांस्कृतिक विविधता को संवाद और संवेदना के सूत्र में जोड़ने वाली महत्वपूर्ण भाषा है। उन्होंने कहा कि भाषा की समृद्धि उसके निरंतर प्रयोग से होती है। हिंदी के अध्ययन, लेखन, पठन-पाठन तथा दैनिक व्यवहार में इसके प्रयोग को बढ़ावा देकर इसे और अधिक सशक्त बनाया जा सकता है।हिंदी माह-2026 के अंतर्गत पूरे माह भाषायी एवं साहित्यिक गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इनमें निबंध लेखन, श्रुतलेखन, हिंदी टंकण, टिप्पण एवं प्रारूपण, काव्य-पाठ, वाद-विवाद तथा विभिन्न विषयों पर कार्यशालाएं प्रमुख हैं। टिप्पण एवं प्रारूपण प्रतियोगिता का आयोजन क, ख एवं ग वर्ग के अंतर्गत किया जाएगा। इन गतिविधियों में विश्वविद्यालय के अध्यापक, अधिकारी-कर्मचारी, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएं सहभागिता करेंगे।14 सितंबर को माननीय मंत्री जी के संदेश का संदेश-वाचन विश्वविद्यालय के समस्त कार्मिकों के बीच किया जाएगा। हिंदी माह का समापन 30 सितंबर को पुरस्कार एवं समापन समारोह के साथ होगा, जिसमें विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को प्रमाण-पत्र एवं पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।उद्घाटन सत्र का संचालन डॉ. नीरज भारद्वाज ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. ब्रजेश कुमार मिश्र ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक अधिकारी-कर्मचारी, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री नहीं, संस्कारयुक्त व्यक्तित्व का निर्माण है : कुलपति प्रो. मुरलीमनोहर पाठकदीक्षारम्भ 2026...
09/09/2026

शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री नहीं, संस्कारयुक्त व्यक्तित्व का निर्माण है : कुलपति प्रो. मुरलीमनोहर पाठक

दीक्षारम्भ 2026 में नवप्रवेशी विद्यार्थियों को ज्ञान, अनुशासन और राष्ट्रबोध का संदेश
नई दिल्ली, 9 अगस्त 2026। श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली में नवप्रवेशी विद्यार्थियों के लिए ‘दीक्षारम्भ छात्र प्रेरणा कार्यक्रम’ का आयोजन स्वामी विवेकानंद सभागार में किया गया। कुलपति प्रो. मुरलीमनोहर पाठक के मार्गदर्शक नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में नवप्रवेशी विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय की समृद्ध ज्ञानपरम्परा, शैक्षणिक व्यवस्था, छात्र सुविधाओं, अनुशासन तथा पाठ्यक्रम से परिचित कराया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक सदस्यों, शोधार्थियों तथा विद्यार्थियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
कुलपति ने शिक्षा को संस्कार और राष्ट्रबोध से जोड़ने का दिया संदेश
नवप्रवेशी विद्यार्थियों को आशीर्वचन प्रदान करते हुए कुलपति प्रो. मुरलीमनोहर पाठक ने कहा कि विश्वविद्यालय में प्रवेश केवल किसी पाठ्यक्रम में अध्ययन का आरम्भ नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कार, अनुशासन और जीवन-मूल्यों से जुड़ने की नई यात्रा है। शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि ऐसे संस्कारवान और उत्तरदायी व्यक्तित्व का निर्माण करना है, जो अपने ज्ञान एवं प्रतिभा का उपयोग समाज और राष्ट्र के हित में कर सके।उन्होंने विद्यार्थियों से भारतीय ज्ञान-परम्परा की गहराई को समझने के साथ आधुनिक ज्ञान-विज्ञान की चुनौतियों के अनुरूप स्वयं को तैयार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों का आचरण, परिश्रम, नैतिकता और कर्तव्यबोध ही उनके व्यक्तित्व की वास्तविक पहचान बनते हैं। उन्होंने नवप्रवेशियों से विश्वविद्यालय की गौरवशाली परम्परा को आत्मसात करते हुए ज्ञान और प्रतिभा के माध्यम से समाज एवं राष्ट्र के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
प्रथम वर्ष में प्रवेश ने तोड़े पिछले कई वर्षों के रिकॉर्ड
इस वर्ष विश्वविद्यालय में प्रथम वर्ष में हुए प्रवेश ने पिछले कई वर्षों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए नया कीर्तिमान स्थापित किया है। प्रवेश संख्या में हुई यह उल्लेखनीय वृद्धि विश्वविद्यालय की बढ़ती शैक्षणिक प्रतिष्ठा तथा विद्यार्थियों और अभिभावकों के बढ़ते विश्वास का परिचायक है।इस उपलब्धि के लिए कुलपति प्रो. मुरलीमनोहर पाठक के दूरदर्शी नेतृत्व के साथ प्रवेश समिति और प्रचार-प्रसार समिति के सुनियोजित एवं समन्वित प्रयासों को विशेष रूप से श्रेय दिया जाता है। विश्वविद्यालय की शैक्षणिक विशिष्टताओं एवं पाठ्यक्रमों को व्यापक स्तर पर विद्यार्थियों तक पहुंचाने की प्रभावी रणनीति ने इस वर्ष प्रवेश को नई ऊंचाई प्रदान की।
शैक्षणिक पीठप्रमुख ने विश्वविद्यालय की परम्परा से कराया परिचय
शैक्षणिक पीठप्रमुख प्रो. भागीरथी नन्द ने स्वागत संबोधन में नवप्रवेशी विद्यार्थियों का अभिनंदन करते हुए विश्वविद्यालय की समृद्ध शैक्षणिक परम्परा एवं अध्ययन-अध्यापन की विशिष्ट व्यवस्था पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को जिज्ञासा, निरंतर अध्ययन और अनुशासित जीवन को अपनी शैक्षणिक यात्रा का आधार बनाने के लिए प्रेरित किया।
छात्र कल्याण पीठप्रमुख ने छात्र सुविधाओं की दी जानकारी
छात्र कल्याण पीठप्रमुख प्रो. सुजाता त्रिपाठी ने विश्वविद्यालय की छात्र-केंद्रित गतिविधियों एवं कल्याणकारी सुविधाओं की जानकारी साझा की। उन्होंने विद्यार्थियों से अध्ययन के साथ रचनात्मक एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता कर अपने व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास की दिशा में आगे बढ़ने का आग्रह किया।
प्रॉक्टर ने अनुशासन एवं एंटी-रैगिंग के प्रति किया जागरूक
प्रॉक्टर एवं एंटी-रैगिंग के नोडल अधिकारी प्रो. परमानंद भारद्वाज ने विश्वविद्यालय की अनुशासन व्यवस्था तथा एंटी-रैगिंग प्रावधानों से विद्यार्थियों को अवगत कराया। उन्होंने पारस्परिक सम्मान, सौहार्द और मर्यादित आचरण को स्वस्थ शैक्षणिक वातावरण की आधारशिला बताते हुए विद्यार्थियों से विश्वविद्यालय की गरिमा और अनुशासन बनाए रखने का आह्वान किया।
शास्त्री प्रथम वर्ष के पाठ्यक्रम एवं वैकल्पिक विषयों पर मार्गदर्शन

सहायक पीठ प्रमुख, शैक्षणिक आदित्य पंचोली ने शास्त्री प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम की संरचना तथा वैकल्पिक विषयों के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी रुचि, क्षमता और भविष्य की शैक्षणिक दिशा को ध्यान में रखते हुए विषय चयन के संबंध में आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया।
KNK कॉलेज की प्रधानाचार्य ने साझा की शैक्षणिक रूपरेखा
कार्यक्रम में KNK College of Naturopathy and Yogic Science की प्रधानाचार्य ने अपने संबोधन में महाविद्यालय, संचालित पाठ्यक्रमों तथा विद्यार्थियों के संबंध में जानकारी साझा की। उन्होंने प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग विज्ञान के क्षेत्र में अध्ययन की संभावनाओं और विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध शैक्षणिक अवसरों पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर कॉलेज के शिक्षकगण तथा प्रथम वर्ष के छात्र-छात्राओं ने भी सहभागिता की।
मंगलाचरण से हुआ कार्यक्रम का शुभारम्भ
कार्यक्रम का शुभारम्भ छात्र अभिषेक द्वारा प्रस्तुत मंगलाचरण से हुआ। इसके पश्चात दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारम्भ किया गया। दीक्षारम्भ के माध्यम से नवप्रवेशी विद्यार्थियों को विश्वविद्यालयीय जीवन की शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं अनुशासनात्मक रूपरेखा से परिचित कराने के साथ उनके भीतर ज्ञान, संस्कार और उत्तरदायित्व की भावना को सुदृढ़ करने का संदेश दिया गया।
विश्वविद्यालय परिवार की रही व्यापक सहभागिता
कार्यक्रम में सहायक कुलसचिव, शैक्षणिक सुच्चा सिंह सहित विश्वविद्यालय के समस्त शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक सदस्यों, शोधार्थियों तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की गरिमापूर्ण उपस्थिति रही। व्यापक सहभागिता ने दीक्षारम्भ कार्यक्रम को विश्वविद्यालय परिवार के सामूहिक शैक्षणिक उत्सव का स्वरूप प्रदान किया।
धन्यवाद ज्ञापन एवं शांतिपाठ के साथ समापन

कार्यक्रम के अंत में प्रो. एम. जयकृष्णन, निदेशक, शोध एवं विकास प्रकोष्ठ ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने कार्यक्रम के सफल आयोजन में सहयोग देने वाले सभी अतिथियों, आचार्यों, अधिकारियों, कर्मचारियों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। शांतिपाठ के साथ दीक्षारम्भ छात्र प्रेरणा कार्यक्रम का विधिवत समापन हुआ।

09/09/2026
एनसीईआरटी में शिक्षापीठ के 12 विद्यार्थियों की इंटर्नशिप शुरूराष्ट्रीय शैक्षिक संस्थान के अनुभव से समृद्ध होगी भावी शिक्...
08/09/2026

एनसीईआरटी में शिक्षापीठ के 12 विद्यार्थियों की इंटर्नशिप शुरू

राष्ट्रीय शैक्षिक संस्थान के अनुभव से समृद्ध होगी भावी शिक्षकों की दृष्टि

नई दिल्ली। श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के शिक्षापीठ के शिक्षाचार्य द्वितीय वर्ष (सत्र 2025–27) के 12 विद्यार्थियों को संस्था-संबद्धता कार्यक्रम के अंतर्गत राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी), नई दिल्ली में चार सप्ताह की इंटर्नशिप के लिए स्वीकृति प्राप्त हुई है। इंटर्नशिप 7 सितंबर से प्रारंभ होकर 5 अक्टूबर 2026 तक चलेगी।

कुलपति प्रो. मुरलीमनोहर पाठक ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि शिक्षक बनने की यात्रा पुस्तकों और कक्षाओं तक सीमित नहीं होती, बल्कि अनुभव, अनुसंधान और निरंतर सीखने से पूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि एनसीईआरटी में प्राप्त अनुभव विद्यार्थियों की भावी अध्यापन-दृष्टि को व्यापक बनाएगा और उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन का वाहक बनने की प्रेरणा देगा।

कुलसचिव प्रो. पवन कुमार शर्मा ने कहा कि एनसीईआरटी में इंटर्नशिप विद्यार्थियों के अकादमिक एवं व्यावसायिक विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण अवसर है। शैक्षिक अनुसंधान, नियोजन और विभिन्न शैक्षिक प्रक्रियाओं का व्यावहारिक अनुभव उन्हें भविष्य की शिक्षक-भूमिका के लिए अधिक सक्षम बनाएगा। उन्होंने सभी विद्यार्थियों के सफल एवं ज्ञानवर्धक इंटर्नशिप की कामना की।

शिक्षापीठ की डीन प्रो. रचना वर्मा मोहन ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वास्तविक शैक्षिक परिवेश का अनुभव भावी शिक्षकों के व्यक्तित्व और शिक्षकीय दृष्टिकोण को समृद्ध करता है। उन्होंने विद्यार्थियों से इंटर्नशिप के प्रत्येक अवसर से सीखने तथा नई शैक्षिक अवधारणाओं एवं नवाचारों को समझने का आह्वान किया।

चार सप्ताह के कार्यक्रम में विभिन्न विषय-विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों को शैक्षिक अनुसंधान, नियोजन एवं अन्य शैक्षिक प्रक्रियाओं को जानने-समझने का अवसर मिलेगा, जिससे उनकी व्यावसायिक दक्षता और अनुसंधानपरक दृष्टि विकसित होगी।

इंटर्नशिप कार्यक्रम की समन्वयिका प्रो. मीनाक्षी मिश्र हैं। कार्यक्रम एनसीईआरटी के अध्यापक शिक्षा विभाग की अध्यक्ष प्रो. शरद सिन्हा के निर्देशन एवं मार्गदर्शन में संचालित होगा तथा कार्यक्रम की संयोजिका अध्यापक शिक्षा विभाग की सहायकाचार्य डॉ. अरुणा कुमारी हैं।

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