कहें पुखराज

कहें पुखराज

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लेखक, कवि, विचारक। मेरी रचनाएँ और कुछ नहीं सिर्फ़ मेरा नज़रिया है। " Past is experience ! Present is experiment ! Future is expect ion !

Use your experience, in your experiment,
to achieve your expectation !!! "

~ Success Through Knowledge.

~ Knowledge Is Power.

~ Skill Development Through Education...!

17/06/2026

धूप भी छाँव भी ज़िंदगी निराली मैंने यह देखा है,
हर आँख नम यहाँ और सवाली मैंने यह देखा है।

कुदरत बनाती तो ग़लत होने पर मिटा भी देती है,
कहीं खिल रही कहीं मुरझी डाली मैंने यह देखा है।

जीवन है तो उतार-चढ़ाव मुश्किलें तमाम आनी है,
बिना मुश्किलों का जीवन ख़याली मैंने यह देखा है।

फलदार पेड़ जब भी देखा मैंने झुका ही हुआ देखा,
मेहनत किए बग़ैर ना आती रवानी मैंने यह देखा है।

कुदरत का इंसाफ़ तो होकर ही रहता है "पुखराज"
दिखा देती औकात कुदरत सयानी मैंने यह देखा है।

~ पुखराज

( स्वरचित एवं मौलिक रचना सर्वाधिकार सुरक्षित)

14/06/2026

"ह्रदयस्पर्शी एवं मार्मिक"


निःशब्द 😓😓

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