Sant Vani - संत वाणी
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!!=======कहानी======!!
🔵'जो बोएगा वही पाएगा'🔵
❣एक गांव में एक किसान रहता था जो दूध से दही और मक्खन बनाकर बेचने का कार्य करता था ! एक दिन उसकी बीवी ने उसे मक्खन तैयार करके दिया वह उसे बेचने शहर गया वह मक्खन गोल पेड़े की शक्ल में था तथा हर पेड़े का वजन 1 किलो था !
❣शहर में किसान ने उस मक्खन को हमेशा की तरह एक दुकानदार को बेच दिया और दुकानदार से चाय चीनी तेल साबुन वगैरह खरीदकर अपने गांव रवाना हो गया
किसान के जाने के बाद दुकानदार ने एक पेड़े का वजन किया तो पेड़ा 900 ग्राम का निकला फिर तो उस दुकानदार ने हर पेड़े का वजन किया परंतु सभी 900 ग्राम के निकले अगले हफ्ते किसान फिर से हमेशा की तरह मक्खन लेकर दुकानदार की दहलीज पर चढ़ा तो दुकानदार ने चिल्लाते हुए किसान से कहा दफा हो जाओ किसी बेईमान और धोखेबाज शख्स से मुझे कारोबार नहीं करना 900 ग्राम मक्खन को 1 किलो बताकर बेचने वाले शख्स की शक्ल भी नहीं देखना चाहता तब किसान बड़ी विनम्रता से बोला भाई हम तो गरीब,बेचारे लोग हैं हमारे पास माल तोलने के लिए बाट (वजन) खरीदने की हैसियत कहां है ! मैं तो आपसे जो 1 किलो चीनी लेकर जाता हूं ! उसी को तराजू के एक पलड़े में रखकर दूसरे पलड़े में उतने ही वजन का मक्खन तोल कर ले आता हूं🙏🙏
🙏🙏 हम दूसरों को देंगे वही लौटकर आएगा चाहे वह.....
इज्जत हो❤सम्मान हो ❤या चाहे धोखा हो !!🧡
🙏🌹🌹🙏
03/04/2020
18/03/2019
स्वार्थ का संसार । नाटिका । दिगंबर जैन मंदिर ऋषभ विहार दिल्ली आचार्यश्री 108 विद्यासागर जी महाराज कि प्रेरणा से और मुनि श्री 108 वीर सागर जी महाराज, मुनि श्री 108 विशाल सागर जी महाराज ...
07/03/2019
हमें अपने जाति,कुल, बल, रूप का घमंड नहीं करना चाहिए। 🙏 *मैत्री विचार* 🙏 ********************** आज *मुनि श्री क्षमासागर जी* कहते हैं कि हमें अपने जाति,कुल, बल, रूप का घमंड नहीं करना चाहिए,...
24/02/2019
कट जाएंगे मिट जाएंगे तेरे पाप तमाम। रे मन भज ले रे गुरु नाम । दिल्ली । आशिक जैन संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री 108 प्रणमम्य सागर जी महाराज मुनि श्री ...
----- *नालायक* -----
देर रात अचानक ही उनकी तबियत बिगड़ गयी। आहट पाते ही नालायक उनके सामने था।
ड्राइवर बुलाने की बात हुयी, पर इतनी जल्दी ड्राइवर कहाँ आ पायेगा, कहते हुये उसने सहज जिद और अपने मजबूत कंधो के सहारे उन्हे कार में बिठाया और तेज़ी से हॉस्पिटल की ओर भागा।
"धीरे चला नालायक, एक काम जो इससे ठीक से हो जाए।" वृद्ध उसपर चीखें।
"आप ज्यादा बातें ना करें बाउजी, बस तेज़ साँसें लेते रहिये, हम हॉस्पिटल पहुँचने वाले हैं।" अस्पताल पहुँचकर उन्हे डाक्टरों की निगरानी में सौंप,वो बाहर चहलकदमी करने लगा
, बचपन से आज तक अपने लिये वो नालायक ही सुनते आया था। नालायक फिर से फेल हो गया। नालायक को अपने यहाँ कोई चपरासी भी ना रखे। कोई बेवकूफ ही इस नालायक को अपनी बेटी देगा। बेचारी के भाग्य फूटें थे जो इस नालायक के पल्ले पड़ गयी।
बाउजी की सुन दोनों भाई और बाकी सदस्य भी उसे नालायक ही बुलाते हैं। बस एक माँ ही हैं जिसने उसके असल नाम को अबतक जीवित रखा है, पर आज अगर उसके बाउजी को कुछ हो गया तो शायद वे भी..
इस ख़याल के आते ही उसकी आँखे छलक गयी और वो उनके लिये प्रार्थना में डूब गया। प्रार्थना में शक्ति थी या समस्या मामूली, डाक्टरों ने वृद्ध को घर जाने की अनुमति दे दी।
घर लौटकर उनके कमरे में छोड़ते हुये वृद्ध एक बार फिर चीखें,
"छोड़ नालायक ! तुझे तो लगा होगा कि बूढ़ा अब लौटेगा ही नहीं।"
उदास वो उस कमरे से निकला, तो वृद्धा से रहा नहीं गया, "इतना सब तो करता है, बावजूद इसके आपके लिये वो नालायक ही है ?"
इसबार वृद्ध ने आश्चर्य भरी नजरों से उनकी ओर देखा और फिर नज़रें नीची करते हुये बोले,
"तुम भी शायद मेरे शब्दों से ही धोखा खा गयीं ?
अरे, क्या कमी है हमारे इस बेटे में। अपना परिवार, हम दोनों को, घर-मकान, पुश्तैनी कारोबार, रिश्तेदार और रिश्तेदारी सब कुछ तो बखूबी सम्भाल रहा है, जबकि बाकी दोनों लायक बेटे सिर्फ अपने बीबी और बच्चों को।
इतना सब के बाद भी इसे बेटा कह के नहीं बुला पाने का, गले से नहीं लगा पाने का दुःख तो मुझे भी होता है, पर उससे भी अधिक डर लगता है कि कहीं ये भी लायक ना बन जाये।तुम चाहो तो इसे मेरा स्वार्थ ही कह लो। "कहते हुये उन्होंने अपने हाथ जोड़ दिये जिसे वृद्धा ने झट से अपनी हथेलियों में भर लिया।
दूसरी ओर दरवाज़े पर खड़ा वो आंसुओं में तरबतर हो गया था। उसे लगा कि दौड़ कर अपने बाउजी के गले से लग जाये पर ऐसा करते ही उसके बाउजी झेंप नहीं जाते, वो अपने कमरे की ओर बढ़ गया।
29/06/2017
आचार्य श्री 108 विद्या सागर जी महाराज के संयम स्वर्ण महोत्सव 50वां दीक्षा दिवस छस्तीसगढ़ 2017.06.28 परम् पूज्य संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्या सागर जी महाराज के संयम स्वर्ण महोत्सव 50वां दीक्षा दिवस छस्तीसगढ़ 2017.06.28
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