Central Sanskrit University

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The Sansthan was established in 15th October, 1970 as an autonomous organisation registered under the Societies Registration Act, 1860 (Act XXI of 1860) for the development and promotion of Sanskrit all over the country.

स्वच्छता को बनाएं जीवन का हिस्सा।Central Sanskrit University केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली में ‘स्वच्छता ही ...
25/09/2026

स्वच्छता को बनाएं जीवन का हिस्सा।

Central Sanskrit University केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली में ‘स्वच्छता ही सेवा-2026’ अभियान के अंतर्गत पार्किंग क्षेत्र में विशेष स्वच्छता अभियान आयोजित किया गया।

विश्वविद्यालय के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने श्रमदान करते हुए पार्किंग क्षेत्र की साफ-सफाई की और स्वच्छ, स्वस्थ एवं व्यवस्थित परिसर के निर्माण का संदेश दिया।

इस अवसर पर कुलसचिव प्रो.आर. जी. मुरलीकृष्ण ने कहा कि स्वच्छता को केवल अभियान तक सीमित न रखकर इसे अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति की नियमित सहभागिता से स्वच्छ वातावरण और स्वच्छ समाज का निर्माण संभव है।

उन्होंने प्रतिदिन कम से कम एक घंटे श्रमदान के लिए देने का आह्वान करते हुए कहा कि श्रमदान केवल सफाई नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी और सामूहिक सहभागिता की भावना को मजबूत करने का माध्यम है।

अभियान में विश्वविद्यालय के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
Shrinivasa Varakhedi Shrinivasa Varakhedi Murali Krishna Ministry of Education

#स्वच्छताहीसेवा #स्वच्छभारत #श्रमदान

माननीय प्रधानमंत्री श्री Narendra Modi नरेन्द्र मोदी जी ने नई दिल्ली प्रधानमंत्री निवास पर श्री पेजावर अधोक्षज मठ, उडुपी...
23/09/2026

माननीय प्रधानमंत्री श्री Narendra Modi नरेन्द्र मोदी जी ने नई दिल्ली प्रधानमंत्री निवास पर श्री पेजावर अधोक्षज मठ, उडुपी के श्री श्री विश्वप्रसन्नतीर्थ स्वामीजी से भेंट की तथा पद्म विभूषण यतीकुल चक्रवर्ती श्री विश्वेशतीर्थ स्वामीजी की जन्मशताब्दी समारोह के लोगो का अनावरण किया।

इस गरिमामय अवसर पर Central Sanskrit University कुलपति प्रो. Shrinivasa Varakhedi श्रीनिवास वरखेड़ी जी की उपस्थिति रही। माननीय प्रधानमंत्री जी ने श्री विश्वेशतीर्थ स्वामीजी के भक्ति, विद्या और सेवा से परिपूर्ण जीवन एवं उनके प्रेरणादायी योगदान को स्मरण किया तथा कहा कि जन्मशताब्दी समारोह के अंतर्गत होने वाली विभिन्न पहलें उनके महान आदर्शों को आगे बढ़ाने में सहायक होंगी। श्री विश्वेशतीर्थ स्वामीजी की ज्ञान, संस्कृत, आध्यात्मिकता और सेवा की महान परंपरा को सादर नमन।
Vishwesha Vani PMO India Pralhad Joshi Ministry of Education Indian Knowledge Systems, MoE Shrinivasa Varakhedi Murali Krishna

22/09/2026
22/09/2026
22/09/2026
पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती के अवसर पर केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर परिसर   एवं पंडित दीनदयाल उपाध्...
22/09/2026

पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती के अवसर पर
केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर परिसर एवं पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति समारोह समिति, जयपुर के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय शैक्षिक शोध संगोष्ठी ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय : एकात्म मानवदर्शन एवं भारतीय ज्ञान परंपरा’ का शुभारंभ कल दिनांक 21 सितम्बर को हुआ।

उद्घाटन सत्र में Central Sanskrit University कुलपति प्रो. Shrinivasa Varakhedi श्रीनिवास वरखेडी मुख्य अतिथि तथा प्रज्ञा प्रवाह के राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्री जे. नंदकुमार मुख्य वक्ता रहे।सिडनी संस्कृत स्कूल, ऑस्ट्रेलिया की संस्थापक प्राचार्य एवं पीआरओ डॉ. मीनाक्षी श्रीनिवासन (ऑस्ट्रेलिया) ने ऑनलाइन माध्यम से विशिष्ट अतिथि के रूप में सहभागिता की। पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति समारोह समिति, जयपुर के अध्यक्ष प्रो. मोहन लाल छीपा एवं परिसर प्रभारी निदेशक प्रो. श्रीधर मिश्र भी मंचासीन रहे।

कुलपति प्रो. Shrinivasa Varakhedi श्रीनिवास वरखेडी ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा व्यक्ति, समाज, प्रकृति एवं सृष्टि के बीच संतुलित एवं समन्वित संबंध की समग्र दृष्टि प्रदान करती है। उन्होंने भारतीय चिंतन की वैश्विक प्रासंगिकता को शिक्षा एवं शोध के माध्यम से आगे बढ़ाने पर बल दिया।

संगोष्ठी में देश-विदेश से लगभग 300 विद्वान, शिक्षक एवं शोधार्थी प्रत्यक्ष एवं ऑनलाइन माध्यम से सहभागी हैं। प्रथम दिवस 7 तकनीकी सत्र आयोजित हुए तथा 22 सितंबर को भी 7 तकनीकी सत्र आयोजित होंगे।

इस अवसर पर दो पुस्तकों का विमोचन भी हुआ
• पंडित दीनदयाल उपाध्याय : एकात्म मानवदर्शन एवं भारतीय ज्ञान परंपरा • दीनदयाल उपाध्याय विचारितम् एकात्म मानवदर्शनम्

संगोष्ठी में एकात्म मानवदर्शन, भारतीय ज्ञान परंपरा, शिक्षा, संस्कृति, समाज, अर्थव्यवस्था, राष्ट्रचिंतन, सामाजिक समरसता एवं समकालीन संदर्भों पर शोधपरक विमर्श किया जा रहा है।
Indian Knowledge Systems, MoE Ministry of Education Murali Krishna

21/09/2026

Is reading a translation enough to truly understand Shakespeare?

Prof. Arindam Chakrabarti shares his profound perspective on translations, language, and literary comprehension in our latest episode of साक्षात्कारधारा.

What are your thoughts on reading classics through translations? Let us know in the comments!

Shrinivasa Varakhedi Shrinivasa Varakhedi Murali Krishna Central Sanskrit University

धर्म व्यक्ति और समाज को जोड़ने, बिखरने से बचाने तथा निरंतर उन्नति की ओर ले जाने वाला अनुशासन है – डॉ. मोहन भागवत जी सेवा...
18/09/2026

धर्म व्यक्ति और समाज को जोड़ने, बिखरने से बचाने तथा निरंतर उन्नति की ओर ले जाने वाला अनुशासन है – डॉ. मोहन भागवत जी सेवाज्ञ संस्थानम् के राष्ट्रीय उपक्रम ‘युवा धर्म संसद-2026’ का शुभारम्भ

अवन्तिका (उज्जैन) की पुण्यभूमि स्थित गीता भवन सभागार में आयोजित सेवाज्ञ संस्थानम् के राष्ट्रीय उपक्रम ‘युवा धर्म संसद' के छठवें संस्करण (2026) का भव्य शुभारंभ मुख्य अतिथि परम पूज्य
डॉ. मोहन भागवत जी, सरसंघचालक, Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ। इस अवसर पर उद्घाटन सत्र में Central Sanskrit University के कुलपति प्रो. Shrinivasa Varakhedi प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी पूज्य आचार्य श्री मिथिलेशनन्दिनी शरण जी महाराज (संरक्षक सेवाज्ञ संस्थानम् ) और श्री आशीष आशु जी (राष्ट्रीय अध्यक्ष सेवाज्ञ संस्थानम्) उपस्थित रहें।
युवा धर्म संसद में देशभर के 25 राज्यों से लगभग 1600 युवा प्रतिभागी तथा 300 से अधिक शिक्षाविद, शिक्षक, शोधकर्ता, विद्वान एवं धर्माचार्य शामिल होकर धर्म, संस्कृति, शिक्षा, तकनीक, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्र निर्माण से जुड़े विषयों पर संवाद कर रहे हैं।
स्वागत वक्तव्य में पूज्य आचार्य मिथिलेशनंदिनीशरण जी महाराज ने युवाओं को आत्मनिर्माण और भारत-बोध का संदेश देते हुए कहा कि अपने से नीचे को जीतने में वास्तविक विजय नहीं है, बल्कि जो आपसे उच्च है, उसे सिद्ध करने में विजय है। भारतीय युवा केवल युवा होने तक सीमित न रहे, बल्कि अपने निर्माण के साथ भारत को पहचाने। युवाओं के प्रश्नों में स्वयं युवा उपस्थित रहें और अपने प्रश्नों को बाजार, राजनीति अथवा अन्य बाहरी परिदृश्यों से प्रभावित होने के बजाय अपनी आत्मचेतना और जीवन-मूल्यों से जोड़कर देखें।

केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. Shrinivasa Varakhedi श्रीनिवास वरखेड़ी ने युवाओं को भारत की ज्ञान परंपरा और आत्मबोध से जोड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि युवाओं को ‘इंडिया से भारत’ की ओर ले जाने वाली चेतना के साथ आत्मवान बनना चाहिए। युवा पीढ़ी के भीतर आत्मविश्वास, ज्ञान और भारतीय दृष्टि का विकास ही समाज और राष्ट्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी।

उद्घाटन सत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के परमपूज्यनीय सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने धर्म को केवल वृद्धावस्था या धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित मानने की धारणा को अस्वीकार करते हुए कहा कि धर्म का विचार युवावस्था से ही शुरू होना चाहिए। उन्होंने कहा कि धर्म जीवन के प्रारंभ से अंत तक मनुष्य के आचरण और निर्णयों को दिशा देने वाला तत्व है। सुख-दुख आते-जाते रहते हैं, लेकिन धर्म नित्य रहता है और मनुष्य के जीवन में उसके कर्तव्य, आचरण और उत्तरदायित्व को निर्धारित करता है।

मोहन भागवत जी ने धर्म और ‘रिलीजन’ के बीच अंतर को स्पष्ट करते हुए कहा कि धर्म को केवल ‘रिलीजन’ के अर्थ में समझना उचित नहीं है। उन्होंने धर्म को ‘धृ’ धातु से जोड़ते हुए कहा कि जिसका अर्थ धारण करना है। धर्म व्यक्ति और समाज को जोड़ने, उन्हें बिखरने से बचाने तथा निरंतर उन्नति की ओर ले जाने वाला अनुशासन है। धर्म जीवन से दूर जाने या सब कुछ छोड़ देने का नाम नहीं है, बल्कि भौतिक जीवन के साथ आध्यात्मिक उन्नति और सामाजिक उत्तरदायित्व का संतुलन स्थापित करने की दृष्टि है तथा निरंतर उन्नति की ओर ले जाने वाला अनुशासन है। धर्म जीवन से दूर जाने या सब कुछ छोड़ देने का नाम नहीं है, बल्कि भौतिक जीवन के साथ आध्यात्मिक उन्नति और सामाजिक उत्तरदायित्व का संतुलन स्थापित करने की दृष्टि है।

उन्होंने कहा कि मनुष्य प्रकृति की दृष्टि से अत्यंत सीमित क्षमताओं वाला प्राणी होते हुए भी अपनी बुद्धि के बल पर सृष्टि में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सका है। इसलिए उसके साथ सृष्टि के प्रति उत्तरदायित्व भी जुड़ा है। उन्होंने युवाओं को जीवन में परिश्रम और आर्थिक प्रगति के साथ सामाजिक जिम्मेदारी निभाने का संदेश देते हुए कहा कि मनुष्य को अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ दूसरों के हित और कल्याण का भी ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने सत्य, करुणा, शुचिता और तप को मानवीय धर्म के महत्वपूर्ण आधारों के रूप में रेखांकित किया।

सरसंघचालक जी ने कहा कि धर्म केवल बड़े-बड़े सिद्धांतों और व्याख्यानों तक सीमित नहीं है। भोजन के बाद कचरा न फैलाना, यातायात के नियमों का पालन करना, दूसरों को कष्ट न देना, अपने कर्तव्यों का पालन करना और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाना भी धर्म के आचरण का हिस्सा है। धर्म का वास्तविक स्वरूप पुस्तकों को पढ़ने या उसके बारे में बोलने से अधिक उसके व्यवहार में उतरने से प्रकट होता है।

उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि व्यक्तिगत सफलता को व्यापक सामाजिक सफलता से जोड़कर देखा जाए। उन्होंने कहा कि व्यक्ति की जीत तभी सार्थक है, जब उसकी जीत में दूसरों की भी जीत शामिल हो। युवाओं को ज्ञान, दान और दुर्बलों के संरक्षण की भावना के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया। साथ ही अपनी उपासना और परंपरा के प्रति दृढ़ रहते हुए अन्य उपासनाओं के प्रति सम्मान रखना भी भारतीय जीवन-दृष्टि का महत्वपूर्ण पक्ष है।

सेवाज्ञ संस्थानम् के तहत आयोजित युवा धर्म संसद का यह छठा संस्करण है। इससे पूर्व काशी, अयोध्या, मथुरा, हरिद्वार और कांचीपुरम में आयोजन हो चुके हैं। आयोजन का उद्देश्य युवाओं को भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति, धर्म, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्र निर्माण के प्रश्नों पर विचार करने के लिए एक राष्ट्रीय मंच उपलब्ध कराना है।

तीन दिवसीय आयोजन में धर्म की अस्तित्वपरक अवधारणा एवं चारित्रिक उत्तरदायित्व, भारतीय संस्कृति, शिक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और तकनीक, सूचना एवं विचार का संघर्ष, सामाजिक उत्तरदायित्व, मानवीय मूल्य तथा राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका जैसे समसामयिक विषयों पर विभिन्न सत्रों में संवाद और मंथन किया जा रहा है।

युवा चिंतन, संस्कृति, परंपरा और राष्ट्रबोध के इस महाआयोजन में पूज्य सरसंघचालक जी का उद्बोधन बेहद प्रेरणादायी रहा।
Ministry of Education Pralhad Joshi Indian Knowledge Systems, MoE Murali Krishna Samskrita Bharati Samskrit Promotion Foundation




विश्वप्रसन्नतीर्थ स्वामीजी को ‘सनातनधर्मप्रवर्तनाचार्य’ की उपाधि से सम्मानितCentral Sanskrit University केंद्रीय संस्कृत...
18/09/2026

विश्वप्रसन्नतीर्थ स्वामीजी को ‘सनातनधर्मप्रवर्तनाचार्य’ की उपाधि से सम्मानित

Central Sanskrit University केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली में पूज्य श्री विश्वप्रसन्नतीर्थ स्वामीजी, पीठाधीश्वर, पेजावर अधोक्षज मठ, उडुपी की दिव्य उपस्थिति एवं कुलपति प्रो. Shrinivasa Varakhedi श्रीनिवास वरखेड़ी जी की अध्यक्षता में साधु समागम, ग्रंथ लोकार्पण, सम्मान समारोह एवं नवशोध केंद्रों के उद्घाटन का आयोजन किया गया।

श्रीमद् आनन्दतीर्थ माध्वाचार्य के ‘श्री माध्वभाष्य/ब्रह्मसूत्र-द्वैतभाष्य’ के प्रथम हिंदी अनुवाद सहित पाँच महत्त्वपूर्ण ग्रंथों का लोकार्पण किया गया। यह अनुवाद प्रो. काशीनाथ न्यौपाने, निदेशक, प्रकाशन विभाग, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा किया गया है।

इस अवसर पर पेजावर अधोक्षज मठ, उडुपी पूज्य श्री विश्वप्रसन्नतीर्थ स्वामीजी को केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा ‘सनातनधर्मप्रवर्तनाचार्य’ की उपाधि से सम्मानित किया गया।

नवस्थापित शोध केंद्र में मुम्बा देवी आदर्श स्नातकोत्तर शोध संस्थान, मुंबई, भारतीय ज्ञान परंपरा प्रभाग, डेक्कन कॉलेज परिसर, पुणे, संस्कृत अकादमी, हैदराबाद; तथा हरियाणा संस्कृत विद्यापीठ, बघोला का उद्घाटन भी स्वामीजी के कर-कमलों द्वारा संपन्न हुआ। इन केंद्रों के माध्यम से भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े विविध विषयों में गुणवत्तापूर्ण शोध, अध्ययन, प्रकाशन एवं अकादमिक गतिविधियों को विस्तार मिलेगा।

कार्यक्रम में UCCI (Union Catalogue Database) का लोकार्पण भी हुआ, जिसके माध्यम से संस्कृत, पाली एवं प्राकृत की पांडुलिपियों से संबंधित कैटलॉग एवं शोध-सामग्री को एक मंच पर उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है।

मुख्य अतिथि प्रो. मुरली मनोहर पाठक जी, कुलपति, Shri Lal Bahadur Shastri National Sanskrit University
श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय तथा आचार्य चांदकिरण सलूजा जी, निदेशक, Samskrit Promotion Foundation संस्कृत संवर्धन प्रतिष्ठान सहित अनेक विद्वान, शोधार्थी एवं विश्वविद्यालय परिवार के सदस्य उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का संचालन प्रो. गणेश टी. पण्डित द्वारा किया गया तथा कार्यक्रम संयोजक प्रो. मधुकेश्वर भट्ट रहे।

यह आयोजन संस्कृत, शास्त्र, भारतीय दर्शन एवं ज्ञान-विज्ञान की समृद्ध परंपरा को आधुनिक अकादमिक संदर्भों में आगे बढ़ाने की केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता का सशक्त प्रतिपादन रहा।
Shrinivasa Varakhedi Pralhad Joshi Ministry of Education Indian Knowledge Systems, MoE Vishwesha Vani Murali Krishna

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राष्ट्रसेवा के प्रतीक, भारत के यशस्वी प्रधानमन्त्री श्री Narendra Modi जी श्री नरेन्द्र मोदी जी को जन्मदिवस की हार्दिक ब...
17/09/2026

राष्ट्रसेवा के प्रतीक, भारत के यशस्वी प्रधानमन्त्री श्री Narendra Modi जी श्री नरेन्द्र मोदी जी को जन्मदिवस की हार्दिक बधाई एवं अशेष शुभकामनाएँ।
संस्कृत भाषा, सनातन संस्कृति तथा राष्ट्र निर्माण के प्रति आपका समर्पित नेतृत्व हम सभी के लिए प्रेरणादायी है। Central Sanskrit University केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय परिवार आपके दीर्घायु एवं उत्तम स्वास्थ्य की मंगल कामना करता है।
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