23/03/2023
#अजगर
Superiority Complex का चोला हम जितना ही गहरा और मोटा ओढ़ें रहते हैं, हमें सुरक्षा का उतना ज्यादा आभास होता रहता है परन्तु सच पूछिए तो ये गुब्बारे में भरी हवा की तरह है।
हमारा पद, हमारी उम्र, हमारी जाति, हमारा ज्ञान, हमारा वैभव इस गुब्बारे में हवा भरने के लिए नहीं है और इन सब चीजों से हम जो अपने अहंकार रुपी गुब्बारे में हवा ही भरते रहेंगे,,
तो वहीं गजल है "तुम्हारी दौलत नयी-नयी है$$"
समझिए, ये सब जो भी हमें प्राप्य है इसे हम दुसरों को दिखाने में क्यों मरे जा रहे हैं.. हाँ आपके पास है 'दिखाइए' "दिखाना भी चाहिए" पर "दिखाने के लिए दिखाना" ""दर्द देगा आपको"" क्योंकि कुछ देखेंगे 'बहुत नहीं भी देखेंगे' और कहीं ऐसा हो गया "जिसको दिखाना था उसी ने नहीं देखा" फिर तो काट़ों तो खुन नहीं वाली स्थिति हो जाएगी।।
पर एक बात है.. कि.. जीवन में सबकुछ पा लिया फिर करें क्या..!?? टाइम नहीं कटता.. क्योंकि अबतक का तो पूरा पाने की मेहनत में खर्च कर दिया और अब कुछ करने को है नहीं "दिखावे के सिवा" क्योंकि इसी दिखावे की लड़ाई को जीतने के लिए ही तो पूरे जीवन एड़ी चोटी का जोर लगाया और अब भी ना दिखाएं तो मेहनत तो सारी पानी हो जाएगी.. बात तो आप की भी सही है.. अब जिन्दगी में करें क्या??
यह गहन प्रश्न है..
और अब शुरु होती है "जीवंतता"
जैसे पर्वत की चोटी पर चढ़ते हैं तो वापस भी आना होता है।।
सागर में गहरे गोते लगाते हैं तो किनारे पर आते ही हैं।।
साँस गहरी भरते हैं तो वापस धीरे-धीरे छोड़ते भी हैं।।
अजगर जब किसी जीव को एक ही बार में निगलता है तो वह उसे महीनों पचाता है। अजगर को निगलने में समय नहीं लगता परन्तु अजगर बनना बड़ी बात है। सब कोई अजगर नहीं होता और भगवान ने यदि आपको इतना सामर्थ्य दिया है 'अजगर' के जैसा कि आपने एक ही बार में इतना ज्ञान और पुरुषार्थ निगल रखा है तो स्थिर हो जाइए और पचाइए इसे।।
स्थिर भाव से, हौले-हौले
पहले तो आपमें वो सामर्थ्य पैदा हुआ था कि आप एक ही बार में निगल पायें, आपको अजगर बनना पड़ा था और यदि आप छोटे-मोटे जीव हैं तो पहले अजगर बनिए।। हाँ.. कोई बात नहीं,, आप यदि आज अजगर नहीं बनना चाहते तो आपको अजगर को देख के जलन नहीं करनी चाहिए।। आपको अजगर को पूरा सम्मान देने के साथ ही, स्वयं को भी पूरा सम्मान देना चाहिए।।
हर जीव परमात्मा की संतान है और परमात्मा ने सबको अपना-अपना सामर्थ्य प्रदान किया है और समस्या तब आती है जब हम अपने सामर्थ्य को गौड़ करके अजगर बनने की कोशिश करने लगते है।।
जंगल में सब तरह के जीव हैं और हर कोई अजगर नहीं बन सकता, सबकी अपनी अपनी सामर्थ्य है।।
अब चलिए वापस चलते हैं- उस मुद्दे पर जिस पर बात शुरु हुई थी कि "पचाना कैसे है??"
तो देखिए साथियों-
"दुनिया में आए हो तो लब कर लो
थोड़ा सा जी लो
थोड़ा-थोड़ा मर लो।।"
इन पक्तियों को याद रखिए- आज का सार ये है कि सभी से "लब" करना है, लब समझते हैं ना.. माने प्यार बस करना ही नहीं है
"सबसे प्रेमभाव रखना भी है।" छोटा-बड़ा, अमीर-गरीब, मालिक-स्वीपर, जाति पाती कोई भी हो।। सबसे "भावपूर्ण" प्रेम रखना है।
("भावपूर्ण" शब्द को ठहर के समझिए पहले।।)
तभी आप जो प्रेम रुपी जीव को निगले बैठें हो वो #पचेगा
और प्रेम को पचाते हुए कभी भी ये नहीं सोचना कि 'मुझे वापस प्रेम नहीं मिला" क्योंकि पचाना तो आपको है ना
(वापस पाने की इच्छा आपके निगले हुए भोजन में विष का काम करेगी)
अहंकार नहीं करना
गुस्सा तो बिल्कुल नहीं करना
क्योंकि ये याद रखना कि
थोड़ा सा जीना है
और
थोड़ा-थोड़ा मरना भी है
तो फिर #प्रेम बाटिए
#सच्चा_प्रेम
(यहाँ एक बात नोट करने की है कोई कह सकता है कि मेरे पास सबकुछ है पर प्रेम तो है नहीं, मैं प्रेम कैसे बांटू.. तो मैं आपको अपने गहरे अनुभव से बताना चाहूंगा कि "प्रेम पाने के एक ही स्त्रोत है #परमात्मा , परमात्मा में गहरी और भावपूर्ण आस्था रखिए और परमात्मा के माध्यम से प्राप्त प्रेम को पचाइए, यहीं जीवन का उद्देश्य होना चाहिए।)
तो फिर #प्रेम बाटिए
#सच्चा_प्रेम
रात के ढाई बजे, यहीं भाव जगे है तो मैं भी अपना प्रेम पचा रहा हूँ, पूरे भाव और आस्था के साथ.. यह प्रेम यदि आप तक पहुंचे तो गुनगुनाईयेगा जरुर.. दुनिया में आए हो तो लब कर लो 🎶🎼
#जलतादीया