कल सारे दिन मोबाइल में और फेसबुक पर हिन्दू नववर्ष के इतने शुभकामना संदेश मिले जितने अंग्रेज़ी न्यू ईयर पर नहीं मिले थे.
पर इस खुशी में थोड़ी सी खटाई पड़ गयी जब फेसबुक पर यह अनावश्यक विवाद दिखाई दिया कि इसे हिन्दू नववर्ष ना कहकर भारतीय नववर्ष कहा जाए.
इसका एक पक्ष तो यह है कि आप जो "हिन्दू" है, उसी से "भारतीय" को परिभाषित करने का प्रयास कर रहे हैं. यदि यह होता तो सुखद था. पर मुझे डर है "हिन्दू" के ऊपर "भारतीय" के चयन के पीछे का कारण यह नहीं है. बल्कि यह चिंता है कि अगर हम इसे हिन्दू से जोड़कर प्रस्तुत करेंगे तो अनेक लोग, कुछ जो हिन्दू नहीं हैं, और कुछ जो हिन्दू होते हुए भी अपनी हिन्दू पहचान के प्रति सहज नहीं हैं, वे इससे नहीं जुड़ना चाहेंगे. इसलिए उनकी भावनाओं का ख्याल रखते हुए हम इसे हिन्दू नहीं, भारतीय नववर्ष कहें.
हम सेल्फ-गोल मारने में माहिर हैं. जीत हमें हज़म नहीं होती. चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के प्रति लोगों की यह जागृति हिन्दू सेंटीमेंट की जीत है. अहिन्दू या नाममात्र के हिंदुओं के भरोसे, सेक्युलरिज्म के 70 वर्षों के माहौल में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को "भारतीय नववर्ष" के रूप स्थापित करने से किसी को किसी ने नहीं रोका था. आज जब देश और समाज हिन्दू नववर्ष मना रहा है तो खुद हमसे ही यह जीत नहीं पच रही. बल्कि एक निरर्थक और अनावश्यक बहस खड़ी करके हम अपनी जीत के उत्साह पर खुद ही पानी डाल रहे हैं. बिना यह समझे कि जो हमारे साथ आज तक नहीं आया है, उसे साथ आना ही नहीं है. उनका विचार करके अपनी यात्रा को स्थगित करने का क्या अर्थ है.
दूसरा बड़ा प्रश्न है, हिन्दू सिर्फ भारत में ही नहीं हैं. दुनिया के दूरदराज के इलाकों में, मॉरिशस, फिजी, त्रिनिदाद, दक्षिण अफ्रीका, केन्या में लाखों हिन्दू रह रहे हैं. पाकिस्तान और बांग्लादेश में भी लाखों हिन्दू हैं. उनके लिए यह "भारतीय" नववर्ष कैसे काम करेगा? बल्कि उन देशों के हिन्दू भारत की ओर किस आशा और विश्वास से देखते हैं, इसकी हमें कोई समझ नहीं है. पाकिस्तान और बांग्लादेश के हिन्दू भारतीय हिन्दू से किस अपेक्षा से मिलते हैं...उसके बाद उन्हें भारत का हिन्दू अपनी छोटी छोटी आईडेन्टिटीज में बंटा हुआ, और आपसी छुद्र द्वंद और द्वेष में उलझा हुआ मिलता है...उसकी निराशा का अंदाजा आप नहीं लगा सकते. जब भारत का एक हिन्दू अपनी हिन्दू पहचान से मुँह छुपाता है तो वह स्नेह-सूत्र एक झटके में टूट जाता है जो भारत के बाहर के हिन्दू एकतरफा महसूस करते हैं.
सच कहूँ तो भारत के हिन्दू कुएँ के मेढक हैं. वे अपनी अवस्था को पूरे विश्व के सापेक्ष देख पाने में असमर्थ हैं. उन्हें आज भी लगता है कि वे बहुसंख्यक हैं और देश के अन्य अल्पसंख्यकों की भावनाओं और हितों का ख्याल रखना उनकी ड्यूटी है. जबकि पूरी दुनिया के परिपेक्ष्य में हम एक छोटी, असंगठित और कमजोर माइनॉरिटी हैं...हमारी समस्या अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा नहीं है...बल्कि अपने अस्तित्व और संस्कृति की रक्षा है. दूसरों को हमारे संस्कारों और मूल्यों से जुड़ने की ना तो कोई तत्परता है, ना कोई मजबूरी है. हम अपने संस्कार और मूल्य बचा लें वही बहुत है. और वह शुद्ध हिन्दू मूल्य हैं, उसे बनावटी भारतीयता की सजावट से नहीं बचाया जा सकेगा.
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Bjp ka naya nara..choro padhai..lelo kadhai ..lakri ki kathi ..kathi pe ghora naukari nahi mile to becho pakora..!!
17/03/2018
उम्मीद पे दुनिया कायम है दोस्तो.. जब तक है जान टिके रहो...
आदतो को समय समय पे बदल देना चाहिए..... वर्ना यही आदते समय के साथ मजबुरिया बन जाती है
#नजरिया
जिंदगी मे आप तब बड़े हो जाते हैं,जब आप ये सब समझ जाते हैं..
की शक्तिमान बनते बनते आप डा जेकाल बन गये हैं
■ ट्रेन में पढ़ी जाने वाली किताबें :-
★ 1AC - बिज़नेस मैगज़ीन , मार्क्स, एडिसन, गॅलिलिओ, लिंकन, मार्टिन ल्युथर..
★ 2AC - शेल्डन, ब्रुक्स, शेक्सपियर, ऍरिस्टोटल..
★ 3AC - गांधी, ओबामा, अब्दुल कलाम, चेतन भगत, ओशो, अरुंधती रॉय, रॉबिन शर्मा, दीपक चोप्रा, शिव खेरा..
★ Sleeper - क्रिकेट सम्राट तेंडुलकर, मनोरमा, फिल्म फेयर, बाबा रामदेव, अध्यात्म..
★ General - प्रेमिका का बदला, कमसिन जवानी, खौफनाक हवेली, खूंखार रात, मनोहर कहानियाँ मस्तराम, घर का वैध, 21दिन मे मनचाही लड़की कैसे पटाये..😝😝😂😂
हम किस सदी मे जी रहे है जहाँ प्रधानमन्त्री अजान पर भाषण देने के लिये रूक जाता हैं परंतु लाखो युवाओं के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड पर मौन रूप धारण किये हुए हैं। पाँच दिन से छात्र SSC scam को लेकर भूखे प्यासे सडक पर रात बिताकर भ्रष्ट तंत्र के खिलाफ आवाज़ उठा रहे हैं परंतु न प्रधानमंत्री को फर्क पडता हैं ना ही उनकी पार्टी के प्रवक्ताओं व नेताओं को।। यही विकास की असल तस्वीर हैं । जहाँ जीडीपी ,जीएसटी ,नोटबंदी बडे बडे शब्द गिनाए जाते हैं परंतु रोजगार को लेकर या तो व्यापम स्कैम मिलता हैं या फिर ssc scam। वैकेंसी निकलेगी तो सिर्फ चुनाव आने पर ।। बाकी पकोड़े तो बनाना आता ही होगा ।।
03/03/2018
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