STV Hindi Academy

STV Hindi Academy मातृभाषा हिंदी की उन्नति को समर्पित स?

भारतीय मानस में विद्यमान वैपरीत्य व अंतर्विरोधों के शमन का प्रयास ( बौद्धिकता, वैचारिकता व विभिन्न वादों से जूझते हुए व्यवहारिक धरातल की तलाश मात्र )

नीचे दिए गए लिंक पर जाकर पूरा वीडियो देख सकते हैं... https://youtu.be/aj3-GREK3Y0
12/06/2020

नीचे दिए गए लिंक पर जाकर पूरा वीडियो देख सकते हैं...

https://youtu.be/aj3-GREK3Y0

17/03/2013

आलोचना-कर्म अतिवाद का पर्याय नहीं हो सकती ........ अतिवादी आलोचना कूड़ा है , इससे ज्यादा कुछ नहीं ...... !!!!!

25/01/2013

तथाकथित विद्वानों से अपील है कि वे जब-जब पुरानी अवधारनाओं को नाश करने का आवाहन करें , अपनी नई अवधारणा भी बताते जाएँ ......, हम भी तो जाने आपकी नई अवधारणा क्या है ...????

अगर आपके पास कुछ नई अवधारणा नहीं है तो आपको कोई हक नहीं है पुरानी अवधारणा पर आघात करने का ..... इससे समाज में अराजकता को ही बढ़ावा मिलेगा .... !!!!! नई व्यवस्था लाइए , पुराना अपने आप हट जाएगा , इसके लिए थोथे भाषणबाजी कि क्या जरूरत... ?????

बदलिए क्राइम नेसन की धारणा ......... !!!!!!!!!http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/01/130117_rape_report_uk_ak....
24/01/2013

बदलिए क्राइम नेसन की धारणा ......... !!!!!!!!!

http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/01/130117_rape_report_uk_ak.shtml

ब्रिटेन में हाल ही में आई एक सरकारी रिपोर्ट बताती है कि महिलाएँ यहाँ भी उतनी सुरक्षित नहीं और बलात्कार और दूसरे सेक्स अपराध यहाँ भी बड़ी समस्या हैं.

जन नायक कर्पूरी ठाकुर को शत-शत नमन........ !!!!!
24/01/2013

जन नायक कर्पूरी ठाकुर को शत-शत नमन........ !!!!!

24/01/2013

जे एस वर्मा कमिटी ने जो रिपोर्ट जमा की है उसमें सामाजिक , कानूनी , पुलिसिया व राजनैतिक ताने-बाने को तो दोषपूर्ण माना गया है , परंतु भ्रष्ट मीडिया को पूरी तरह बख्स दिया है ...... !!!!!!!!!

मैंने अपने आस-पास की जितनी भी स्त्रियॉं को देखा है, कोई भी अपने घर के अंदर गुलाम नहीं है ..... घर के अधिकांश निर्णय वही ...
24/01/2013

मैंने अपने आस-पास की जितनी भी स्त्रियॉं को देखा है, कोई भी अपने घर के अंदर गुलाम नहीं है ..... घर के अधिकांश निर्णय वही लेती है .... उनकी गुलामी सामाजिक है ..... पितृ सत्तात्मक समाज होने के कारण पुरुष वर्ग का एक तबका या सामाजिक ठेकेदार फतवा जारी करता है तब एक आम पुरुष को बिरादरी से बाहर होने के डर के कारण बात माननी पड़ती है और स्त्रियॉं से भी मनमानी पड़ती है ........ अब ये मनमाने का तरीका व्यक्तिगत भिन्नता व पति - पत्नी के आपसी सामंजस्य पर निर्भर करता है ..... !!!!!!! अगर मान-मनयुअल के दौरान बात बिगड़ती है, तो इसके लिए दोनों जिम्मेदार होंगे सिर्फ पुरुष नहीं ....!!!!! पतियों के गिड़गिड़ाने व बेबशी के कई किस्से सुने हैं .... !!!! एक आम पुरुष टेनिस के बॉल की तरह होता है ....... इधर से समाज लतियाता है , उधर से पत्नी और पुरुषों की बेबसी देखो, बेचारे पुरुषत्व मोह रो भी नहीं पाते जो मन हल्का हो जाए ,,,,, !!!!!!

स्त्री - पुरुष के बीच संघर्ष पैदा करने से सामाजिक ठेकेदारों का मनोबल व महत्व बढ़ेगा ही ...... जबकि जरूरत है , समाज के ठेकेदारों के मनोबल को तोड़ने की ..... !!!!

22/01/2013

वर्तमान समाज में रचना के लिए कौन लड़ता है ..... लड़ाई तो उससे प्राप्त होने वाले पद , पैसा , प्रतिष्ठा , पुरस्कार आदि के लिए होती है ...... !!!!!!

दिशाहीन नारिवाद जब हजारों वर्षों तक शिक्षा के मामले में भारतीय महिलाएं हाशिए पर थीं तब समाज का एक वर्ग था जो अध्यनरत था ...
20/01/2013

दिशाहीन नारिवाद

जब हजारों वर्षों तक शिक्षा के मामले में भारतीय महिलाएं हाशिए पर थीं तब समाज का एक वर्ग था जो अध्यनरत था .... वर्तमान समाज में प्रचलित अधिकांश धारणाएं उन्हीं के द्वारा स्थापित हैं ..... अगर आपको उनकी धारणाओं को काटना है तो उनसे ज्यादा अध्यनरत होना पड़ेगा ........ नारीवादियों की थोथी बातें सतह पर ही वार करेंगी , जबकि जरूरत है जड़ पर प्रहार करने की ......!!!!!!



पिछले दो-चार दशकों के अध्यन के दौरान ही कुछ स्त्रियॉं के अंदर अगर नारिवाद पनप रहा है जो एक स्वाभाविक प्रक्रिया ही है (ज्ञानवर्धन व अहंकारवर्धन समानान्तरगामी हैं ) तो फिर आसानी से पुरुषों के मर्दवाद को समझा जा सकता है ..... !!!!!!



कुछ महिलाओं ने सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए नफरत फैलाने का ज़ो ठीका लिया है वह काबिले तारीफ है , भले ही वो इसका ठीकरा मर्दों पड़ फोरती हों .....!!!!! वे नारी स्वतन्त्रता की जगह नारी-स्वच्छंदता की मांग कर रही हैं... ऐसा लगता है जैसे नारी स्वतन्त्रता का पहला सोपान योनिक स्वतन्त्रता ही है ...... !!!!!!



हम सभी जानते हैं एक स्त्री जब जन्म लेती हैं , तब उसके अंदर योनिकता जैसी कोई बात नहीं होती ..... तब उसके लिए जरूरी होता है उसका आहार , पोषण , स्वास्थ्य आदि ..... फिर कुछ बड़े होने पर शिक्षा , सुरक्षा, सुविधा आदि का मुद्दा आता है ..... योनिकता तो बहुत बाद की कड़ी है जो जवानी के साथ समाप्त भी हो जाती है ..... मगर पोषण , स्वास्थ्य , शिक्षा जैसे मुद्दे जीवन पर्यंत बने रहते हैं .... !!!!! नारीवादी नारी सम्मान के प्रति सही में गंभीर हैं तो उन्हें योनिकता की जगह इन मुद्दों पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए .... !!!!



कुछ दिनों पहले एक सर्वे में दावा किया गया था कि भारत में लगभग 40% बच्चे असुरक्षित अवस्था में जीने को मजबूर हैं .... तो निस्संदेह इसमें सिर्फ भावी पुरुष ही नहीं भावी महिलाएं भी होंगी ..... अब यह मुद्दा नारीवादियों कि प्राथमिकता में है ही नहीं ... !!!!! इस मुद्दे को कौन उठाएगा ....???



एक आंकड़े के अनुसार लगभग 6.8 लाख सेक्स वर्कर रजिस्टर्ड हैं , नाको के अनुमान के अनुसार अभी लगभग 12.63 लाख सेक्स वर्कर भारत में हैं.... !!!! इनकी माली हालत जग जाहीर है , ये भी महिलाएं ही हैं ..... इनके मुद्दे को कौन उठाएगा ....???



जहाँ तक योनिकता का सवाल है तो हमारे मनीषियों ने संयमित जीवन ( वो भी हमारी भोगोलिकता के कारण ) जीने की बात की है संकीर्णता की नहीं ...., अगर ऐसा होता तो हमारे यहाँ कामसूत्र नहीं लिखी जाती , अजंता एलोरा , खजूराहों की मूर्तियाँ नहीं बनती ......, क्या ये सब हमारी संकीर्ण सोंच का नतीजा है ??? यह हमारी उद्दात्त सोंच है .... इसकी कभी पश्चिम से तुलना नहीं की जा सकती ....!!!! जहाँ तक धर्म ग्रन्थों का सवाल है तो उसकी रचना उसके ठेकेदारों ने की है , आम जनता ने नहीं .... अत: धर्म ग्रन्थों का हवाला देकर आम पुरुषों को नहीं घसीटा जा सकता या घसीटा जाना चाहिए , जैसा अकसर नारीवादियाँ करती हैं ..... !!!!!!



भारतीय परिप्रेक्ष्य में वर्तमान नारिवाद दिशाहीन ही नज़र आ रही है ..... मुझे उम्मीद है कि आगे आने वाली पीढ़ी से है , जो स्त्री विमर्श के मुद्दे को संजीदगी से उठाएगी ......, वह सिर्फ 9-10% महानगरीय कामकाजी स्त्रियॉं को ही शामिल नहीं करेंगी अपितु ज्यादा से ज्यादा स्त्रियॉं को समावेशित करेगी ...... !!!!! वह पीढ़ी सिर्फ धर्म ग्रन्थों से तकियानूसी ही नहीं ढूंढेगी , इसके साथ ही इतिहास , भूगोल , जीव विज्ञान , मनोविज्ञान आदि का भी अध्यन करेगी और एक समग्र दृष्टिकोण के साथ मुद्दों को उठाएगी .....!!!!!



अब चुकीं लोहा ही लोहा को काटता है, अत: स्त्रियॉं को भी लोहे की तरह गलना , ढलना और जरूरत पड़ने पर चलना सीखना होगा....तभी यह संघर्ष आगे की दिशा ले पाएगा। यह एक प्रक्रिया है..जो अनवरत चलती रहनी चाहिए ..... !!!!



स्त्री-पुरुष के बीच नफरत , घृणा , द्वेष आदि फैलाने वाला कोई भी वाद हमें अस्वीकार्य होना चाहिए, उसका सामाजिक बहिष्कार हो और एक ऐसा समाज बने जहाँ स्त्री पुरुष के बीच प्यार , सम्मान व संवाद की स्थिति हो ....!!!!



याद रखिए संवादात्मक समाज का निर्माण ही समानता के मूल्य को स्थापित कर सकती है ।

अगर हम किसी की खूबियों के कारण उसे 'पसंद' करते हैं तो उसकी खामियों को भी 'प्यार' देकर अपना सकते हैं ....!!!!! वर्तमान सम...
10/01/2013

अगर हम किसी की खूबियों के कारण उसे 'पसंद' करते हैं तो उसकी खामियों को भी 'प्यार' देकर अपना सकते हैं ....!!!!!

वर्तमान समाज में व्याप्त अकेलापन , अजनबीपन आदि का कारण भी यही है ..... आज की तारीख में आपने कुछ अच्छा किया तो सभी साथ जुड़ना पसंद करेंगे .... परंतु जैसे ही कुछ गलत हुआ तो इसके भुक्त भोगी सिर्फ और सिर्फ आप होंगे .... कोई रहनुमाई नहीं ,,,,, तैयार हो जाइए जो कल तक आपके सगे बने थे , सारी गलतियों का ठीकरा आप पर फोड़ेंगे ... अब आप बच भी नहीं सकते क्योंकि आप तथाकथित अपनों से घिरे हैं .....!!!!

हम सभी जानते हैं कि इन्सान खूबियों व खामियों से भरा है ..... यह अपनों का साथ ही है जो सुनिश्चित करता है कि हम पर कौन-सा गुण हावी होगा ..... वर्तमान में इन्सान ने तरक्की कर ली है एम बी ए करके आफिस को तो मैनेज करना सीख लिया है ... वहाँ कई लोगों को हम मैनेज करते हैं क्यूँ कि यह हमारा प्रोफेसन है .... तो भईया थोड़ा प्रोफेसनिजम घर पर भी दिखाईये , व्यक्तिगत रिश्ते में भी दिखाईये ..... !!!!

व्यक्तिगत अंतर्विरोध ही आधुनिक जीवन शैली में पारिवारिक विखंडन का अहम कारण है ..... बौद्धिकता ने चतुराई दी परंतु लोग अकसर यह भूल जाते हैं कि व्यतिगत रिश्ते में चतुराई दिखाना बौद्धिकता नहीं .....!!!!

पशु भी एक पारिवारिक प्राणी है .....!!!!

मेरा विश्वास अनंत है ....."मानवता अभी जिंदा है " ......"गैग रेप मामले मे जब पीड़िता और उसका दोस्त नंगे पड़े थे तो किसी न...
10/01/2013

मेरा विश्वास अनंत है ....."मानवता अभी जिंदा है " ......

"गैग रेप मामले मे जब पीड़िता और उसका दोस्त नंगे पड़े थे तो किसी ने उनकी मदद नहीं की." यह भी एक सामाजिक सच्चाई है , परंतु मेरा दिल इस बात को नहीं मानता की इंसान मानवता को भूल गया है , जैसा कि पीड़िता के दोस्त के बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी कि समाज मानवता भूल गया है....... !!!!!

मैंने खुद कई बार सड़क पर हादसे के समय राहगीरों को भुक्त-भोगी की मदद करते देखा है ... लेकिन वह सारी घटना जो मुझे याद आ रही है उन घटनाओं में राहगीरों को पुलिस , कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने का डर नहीं था ....!!!! जब आम जनता छोटी -मोटी दुर्घटना में मदद को तैयार रहती है तो फिर बड़ी घटना में क्यूँ नहीं .....?????

यह पुलिस व लचर कानून व्यवस्था की असंवेदनशीलता ही है जो आम नागरिक के जज्बे को कुंठित करती है , अमानवीय बनाती है ....!!!!! मुझे यकीन है कि जिन लोगों ने भी उन पीड़ितों की मदद नहीं की, वे अपने आपको धिक्कार जरूर रहे होंगे !!!

10/01/2013

हाल ही में जारी हुए आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक भारत में साल 2011 में लगभग 35 हज़ार बच्चे गुमशुदा हुए हैं और उनमें से 11 हज़ार पश्चिम बंगाल से हैं. पुलिस का अनुमान है कि महज 30 फीसदी मामले ही वास्तव में दर्ज हो पाए हैं.

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