15/09/2024
यह गर्भ प्रतिमा कुंडादम वडक्कुनाथ स्वामी मंदिर (कोयंबटूर से लगभग 60 किमी) की एक दीवार पर खुदी हुई है।
कल्पना कीजिए कि एक्स-रे की खोज से एक हजार साल पहले उस समय के लोगों को यह जानकारी कैसे मिली होगी। मंदिर की अन्य दीवारों पर, हर महीने अजन्मे बच्चे की स्थिति की एक मूर्ति उकेरी गयी है। फ्रटिलाइजेशन प्रोसेस
से लेकर भ्रूण के 1 महीने से लेकर 9 महीने तक की आकृति है । मतलब इलेक्ट्रॉ माइक्रोस्कोप से लेकर एक्स-रे तक से देखे जाने वाली आकृति।
फिर भी हमें साँप पकड़ने वाला देश और अनपढ़ देश कहा गया कुछ विशेष इतिहासकारों द्वारा, । हमारे देश ने दुनिया को विज्ञान दिया, उसे दृष्टि दी, जीने की कला दी, साहित्य दिया, संस्कृति दी, विज्ञान दिया, विमान का विज्ञान दिया, चिकित्सा विज्ञान दिया, अर्थशास्त्र दिया। हमारा देश लाखों वर्षों से वैज्ञानिक अनुसंधान कर रहा है, हमारे ऋषियों ने विज्ञान की नींव रखी है। हमारे ऋषियों ने अपनी हड्डियों को पिघलाने के बाद, विज्ञान और दर्शन को दुनिया के लिए दृश्यमान बना दिया है। पूरी दुनिया कभी भी उन ऋषियों के ऋण से मुक्त नहीं होगी, हमारे देश ने दुनिया को बहुत कुछ दिया है।