Dr. PreetNiti - प्रीतनीति

Dr. PreetNiti - प्रीतनीति Holistic Wellness Coach & Educator
🌿 Ayurveda • 🔯 Jyotish • 🩺 Health
📜 History • 👶 Child Care • ❤️ Family
ज्ञान • परंपरा • संतुलित जीवन

नमस्कार दोस्तों! मेरे पेज पर आपका स्वागत है। एक शिक्षात्मक पेज है जो जनरल नॉलेज और मोटिवेशनल वीडियो पर ध्यान केंद्रित करता है। यहां आपको विभिन्न विषयों पर उपयोगी जानकारी, टिप्स, ट्रिक्स, और अन्य शिक्षात्मक सामग्री मिलेगी जो आपको समझने में मदद करेगी और आपकी मोटिवेशन को बढ़ावा देगी। हम यहाँ पर हिंदी में सामान्य ज्ञान, रोचक तथ्य, इतिहास, विज्ञान, भूगोल, साहित्य, कला, और अन्य रुचिकर विषयों पर वीडियो बनाते हैं। जिन वीडियो को देख कर आप प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर सकते हैं ।आप हमारे साथ जुड़कर नए ज्ञान की खोज कर सकते हैं और हमारे साथ ज्ञान बांट सकते हैं। तो जल्दी से फॉलो करें और नए ज्ञान का आनंद लें!”

अगर आपको लगता है कि पृथ्वी पर स्वर्ग एक मिथक है, तो आपने कभी भी हमारे मंदिरों का दौरा नहीं किया है..(श्री रंगनाथ स्वामी ...
17/09/2026

अगर आपको लगता है कि पृथ्वी पर स्वर्ग एक मिथक है, तो आपने कभी भी हमारे मंदिरों का दौरा नहीं किया है..

(श्री रंगनाथ स्वामी मंदिर, तमिलनाडु)

क्या आप भारत के दूसरे स्वर्ण मंदिर के बारे में जानते हैं ?तमिलनाडु के वेल्लोर नगर के मलाईकोड़ी पहाड़ों पर स्थित महालक्ष्...
17/09/2026

क्या आप भारत के दूसरे स्वर्ण मंदिर के बारे में जानते हैं ?

तमिलनाडु के वेल्लोर नगर के मलाईकोड़ी पहाड़ों पर स्थित महालक्ष्मी मंदिर 15 हजार किलो शुद्ध सोने से बना है। जबकि अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में सिर्फ 750 किलो की सोने की छतरी लगी हुई है, यह विश्व का इकलौता मंदिर है जिसमें इतनी भारी मात्रा में सोने का इस्तेमाल किया गया है, 100 एकड़ से ज़्यादा क्षेत्र में फैले इस महालक्ष्मी मंदिर में हर कलाकृति हाथों से बनाई गई है।

माँ सरस्वती का उद्गम स्थान , और भीम शीला , माँ सरस्वती के दर्शन सिर्फ यही पर होते है , उसके बाद माँ अदृश्य रूप मे बहती ह...
16/09/2026

माँ सरस्वती का उद्गम स्थान , और भीम शीला , माँ सरस्वती के दर्शन सिर्फ यही पर होते है , उसके बाद माँ अदृश्य रूप मे बहती है

पांच भाई पांडव इसी रास्ते से स्वर्ग गये थे जल का बहाव इतना तेज होता है कि द्रोपती भयभीत हो गयी और पुल ना पार कर पाने की बात कही तब भीम ने बड़ी शीला उठा कर नदी के ऊपर रख दी जिसे अब भीम शीला के नाम से जाना जाता है . . .

मिट्टी के नीचे छिपी है हजारों साल पुरानी कहानी… वैप्पारू की खुदाई ने फिर जगाई इतिहास की यादकभी-कभी इतिहास किसी किताब के ...
16/09/2026

मिट्टी के नीचे छिपी है हजारों साल पुरानी कहानी… वैप्पारू की खुदाई ने फिर जगाई इतिहास की याद

कभी-कभी इतिहास किसी किताब के पन्नों में नहीं मिलता… वह मिट्टी के नीचे दबा होता है। एक पुरानी ईंट, किसी संरचना का अवशेष या जल निकासी की व्यवस्था अचानक हमें उस दुनिया के सामने खड़ा कर देती है, जो सदियों पहले यहां सांस लेती थी।

तमिलनाडु के तेनकासी जिले में वैप्पारू नदी के किनारे स्थित करिवलमवंदनल्लूर में चल रही पुरातात्विक खुदाई ऐसी ही एक कहानी को सामने ला रही है। यहां मिट्टी की परतों से ईंटों की संरचनाएं, जल प्रबंधन से जुड़े प्रमाण और अन्य पुरावशेष मिले हैं। ये अवशेष इस क्षेत्र में प्राचीन मानव बसावट और उसके व्यवस्थित विकास को समझने के लिए महत्वपूर्ण संकेत देते हैं।

सबसे दिलचस्प बात यह है कि यहां केवल रहने के प्रमाण नहीं दिखाई देते, बल्कि पानी को व्यवस्थित तरीके से संभालने की समझ के संकेत भी मिलते हैं। आज जब जल संरक्षण हमारे सामने बड़ी चुनौती है, तब हजारों वर्ष पुराने जल प्रबंधन के प्रमाण हमें यह सोचने पर मजबूर करते हैं कि उस समय के समाज प्रकृति और पानी के साथ किस तरह तालमेल बनाकर रहते थे।

तमिलनाडु के दूसरे पुरास्थल भी इस लंबी सांस्कृतिक यात्रा के अलग-अलग अध्याय खोल चुके हैं। मंगुडी, शिवगलाई और आदिचनल्लूर जैसे स्थलों से मिले पुरावशेष दक्षिण भारत में प्राचीन मानव जीवन, तकनीक और सामाजिक विकास को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

शिवगलाई से 3345 ईसा पूर्व के लौह उपकरणों का उल्लेख भी मिलता है, जिन्हें अत्यंत प्राचीन लौह-प्रयोग के प्रमाणों में गिना जाता है। ऐसे प्रमाण हमें यह समझने का अवसर देते हैं कि दक्षिण भारत में तकनीकी ज्ञान किस प्रकार विकसित हुआ होगा।

प्रीतनीति की नजर में वैप्पारू की यह खुदाई सिर्फ कुछ पुरानी ईंटें खोजने की कहानी नहीं है। यह उस प्रश्न की तलाश है—हमारे पूर्वज कैसे रहते थे, पानी का प्रबंधन कैसे करते थे, बस्तियां कैसे बसाते थे और अपने आसपास की प्रकृति को कैसे समझते थे?

मिट्टी की हर परत अतीत का एक बंद दरवाजा है।
और पुरातत्व उस दरवाजे की चाबी खोजने का प्रयास है।

शायद इतिहास हमें भूल गया नहीं है…
हमने ही उसकी आवाज सुनना बंद कर दिया है।

Dr. PreetNiti

OMG ! आखिर वो कौन लोग थे जिनके शब्दकोश में असम्भव शब्द नहीं था    कश्मीर के बांदीपुरा के जंगलों में, दानेश्वर महादेव की ...
16/09/2026

OMG ! आखिर वो कौन लोग थे जिनके शब्दकोश में असम्भव शब्द नहीं था

कश्मीर के बांदीपुरा के जंगलों में, दानेश्वर महादेव की प्राचीन गुफा स्थित है, तीर्थयात्रियों को इस शिवलिंग तक पहुंचने के लिए गुफा में लगभग 60 मीटर तक रेंगना पड़ता है।

ऊँ नमः शिवाय 🙏

अगर भारत को स्थापत्य कला का ज्ञान मुगलों ने दिया तो मुगलों के देश उज्बेकिस्तान में ऐसी नक्काशियाँ क्यों नहीं मिलती ?1093...
15/09/2026

अगर भारत को स्थापत्य कला का ज्ञान मुगलों ने दिया तो मुगलों के देश उज्बेकिस्तान में ऐसी नक्काशियाँ क्यों नहीं मिलती ?
1093 ईसवी में बने इस मंदिर का निर्माण राजा महिपाल ने करवाया था । कभी 32 मीटर ऊंची भगवान विष्णु की प्रतिमा वाले इस मंदिर का नाम सहस्त्रबाहु मंदिर था लेकिन लोगों द्वारा उच्चारण न कर पाने से अब यह सास-बहू मंदिर के नाम से जाना जाता है ।

(सहस्त्रबाहु मंदिर, मध्यप्रदेश)

Pic 1 - पवित्र कल्पवृक्ष दिलवाड़ा जैन मंदिरPic2 -  पवित्र कल्पवृक्ष जामी मस्जिद (चम्पानेर)चम्पानेर के जामी मस्जिद के अंदर...
15/09/2026

Pic 1 - पवित्र कल्पवृक्ष दिलवाड़ा जैन मंदिर
Pic2 - पवित्र कल्पवृक्ष जामी मस्जिद (चम्पानेर)

चम्पानेर के जामी मस्जिद के अंदर स्थापित यह कल्पवृक्ष हिन्दू, जैन और बौद्ध धर्म के लोगों के लिए आस्था का एक पवित्र प्रतीक है, महमूद बेगड़ा ने कई हिन्दू किलों को जीतने के बाद इस मस्जिद का निर्माण करवाया था, मस्जिद में ज्यादातर नक्काशियाँ और ढांचे इसके प्राचीन हिन्दू मंदिर होने की ओर इशारा करते हैं हालांकि इतिहासकार इसे नफरतों से परे हिन्दू-मुस्लिम एकता की मिशाल के तौर पर बने मस्जिद का दर्जा देते हैं ।

बाकी आप खुद समझदार हैं

हे सनातनियों ! इस किले ने कई युद्ध देखे हैं, यह किला उन वजहों में से एक है जिनकी वजह से आज भी सनातन धर्म का ध्वज आकाश मे...
14/09/2026

हे सनातनियों ! इस किले ने कई युद्ध देखे हैं, यह किला उन वजहों में से एक है जिनकी वजह से आज भी सनातन धर्म का ध्वज आकाश में ऊंचा लहरा रहा है

यह लोहागढ़ किला है..

तुम हमारे मंदिरों को तोड़ सकते हो लेकिन उस प्रकृति का मुकाबला नहीं कर सकते जो दुनियाँ के हर कोने में अपने चमत्कारों से सन...
14/09/2026

तुम हमारे मंदिरों को तोड़ सकते हो लेकिन उस प्रकृति का मुकाबला नहीं कर सकते जो दुनियाँ के हर कोने में अपने चमत्कारों से सनातन को जिंदा रखती है

क्या आप जानते हैं कि अमरनाथ के शिवलिंग की तरह, एक और शिवलिंग है जहाँ दुनियाभर के श्रद्धालु हर साल दर्शन के लिए जाते हैं ? ऑस्ट्रिया के साल्ज़बर्ग के पास एक 40 किमी लंबी बर्फ की गुफा है, जिसमें प्राकृतिक शिवलिंग जैसी आकृति है और यह अमरनाथ के शिवलिंग से कई गुना बड़ा है। गुफा में लगभग एक किलोमीटर तक सीढ़ियाँ हैं ताकि आसानी से 'शिवलिंग' तक पहुँचा जा सके, और इस 'शिवलिंग' की ऊँचाई लगभग 75 फीट है। गुफा के अंदर जाने के लिए लोगों को खतरनाक रास्तों से गुजरना पड़ता है। यह दुनिया की सबसे लंबी बर्फ की गुफा है और वर्ष 1879 में खोजी गई थी। यहां आपको कई आकार मिलेंगे जो शिवलिंग की तरह दिखते हैं। बर्फ की गुफा मई से अक्टूबर तक खुली रहती है इसमें प्रवेश करने के बाद आप महसूस करेंगे कि आपने एक अलग और नई दुनिया में प्रवेश किया है।

✨ ऐना पहाड़ जलप्रपात: प्रकृति की गोद में गणेश रूपी चट्टाननेपाल के तनहुँ जिले में स्थित ऐना पहाड़ जलप्रपात एक ऐसा स्थल है...
13/09/2026

✨ ऐना पहाड़ जलप्रपात: प्रकृति की गोद में गणेश रूपी चट्टान

नेपाल के तनहुँ जिले में स्थित ऐना पहाड़ जलप्रपात एक ऐसा स्थल है जहाँ प्रकृति, आध्यात्मिकता और कला एक साथ मिलती हैं। यह जलप्रपात न केवल अपनी सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहाँ की एक विशेष चट्टान—जो हाथी के मुख जैसी दिखती है—श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बन चुकी है।
झरने की धारा पहाड़ों से टकराकर नीचे गिरती है, जिससे एक दर्पण जैसी चमक उत्पन्न होती है—इसी कारण इसे "ऐना" (दर्पण) कहा जाता है। हरियाली से घिरा यह स्थल मानसून के समय (जून से सितंबर) में अपने चरम सौंदर्य पर होता है।

🐘 हाथी की चट्टान: गणेश जी का प्रतीक
इस जलप्रपात के पास स्थित एक विशाल चट्टान हाथी के मुख जैसी प्रतीत होती है। हिंदू संस्कृति में हाथी विशेषकर गणेश जी का प्रतीक है—जो बुद्धि, समृद्धि और विघ्नहर्ता के रूप में पूजे जाते हैं। यह चट्टान मानो स्वयं प्रकृति द्वारा गढ़ी गई गणेश मूर्ति हो, जो श्रद्धालुओं को दिव्यता का अनुभव कराती है।

🧜‍♀️ मूर्तिकला
यह स्थल केवल प्राकृतिक नहीं, बल्कि कलात्मक भी है। यहाँ पर:
- जलपरी की मूर्ति
- देवदूत की आकृति
- माँ-बच्चे की भावनात्मक प्रतिमा
स्थापित की गई हैं, जो इस स्थान को एक आध्यात्मिक उद्यान जैसा रूप देती है

Address

Delhi
110002

Opening Hours

Monday 6am - 10pm
Tuesday 6am - 10pm
Wednesday 6am - 10pm
Thursday 6am - 10pm
Friday 6am - 10pm
Saturday 6am - 10pm
Sunday 6am - 10pm

Telephone

+919711624039

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Dr. PreetNiti - प्रीतनीति posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The School

Send a message to Dr. PreetNiti - प्रीतनीति:

Shortcuts

Share