21/03/2021
उंच-नीच से परे ,मजाल आँख में भरे ।
मैं लड़ रहा हूँ रात से, मशाल हाथ में लिए ।
न सूर्य मेरे साथ है, तो क्या नयी ये बात है ।
वो शाम होता ढल गया, वो रात से था डर गया ।
मैं जुगनुओं का यार हूँ ,मैं शून्य पे सवार हूँ ।।