New Public Montessori School

New Public Montessori School PRIMARY SCHOOL

लता जी का शरीर पूरा हो गया। कल सरस्वती पूजा थी, आज माँ विदा हो रही हैं। लगता है जैसे माँ सरस्वती इस बार अपनी सबसे प्रिय ...
06/02/2022

लता जी का शरीर पूरा हो गया। कल सरस्वती पूजा थी, आज माँ विदा हो रही हैं। लगता है जैसे माँ सरस्वती इस बार अपनी सबसे प्रिय पुत्री को ले जाने ही स्वयं आयी थीं।
मृत्यु सदैव शोक का विषय नहीं होती। मृत्यु जीवन की पूर्णता है। लता जी का जीवन जितना सुन्दर रहा है, उनकी मृत्यु भी उतनी ही सुन्दर हुई है।
93 वर्ष का इतना सुन्दर और धार्मिक जीवन विरलों को ही प्राप्त होता है। लगभग पाँच पीढ़ियों ने उन्हें मंत्रमुग्ध हो कर सुना है, और हृदय से सम्मान दिया है।
उनके पिता ने जब अपने अंतिम समय में घर की बागडोर उनके हाथों में थमाई थी, तब उस तेरह वर्ष की नन्ही जान के कंधे पर छोटे छोटे चार बहन-भाइयों के पालन की जिम्मेवारी थी। लता जी ने अपना समस्त जीवन उन चारों को ही समर्पित कर दिया। और आज जब वे गयी हैं तो उनका परिवार भारत के सबसे सम्मानित प्रतिष्ठित परिवारों में से एक है। किसी भी व्यक्ति का जीवन इससे अधिक सफल क्या होगा?
भारत पिछले अस्सी वर्षों से लता जी के गीतों के साथ जी रहा है। हर्ष में, विषाद में,ईश्वर भक्ति में, राष्ट्र भक्ति में, प्रेम में, परिहास में... हर भाव में लता जी का स्वर हमारा स्वर बना है।
लता जी गाना गाते समय चप्पल नहीं पहनती थीं। गाना उनके लिए ईश्वर की पूजा करने जैसा ही था। कोई उनके घर जाता तो उसे अपने माता-पिता की तस्वीर और घर में बना अपने आराध्य का मन्दिर दिखातीं थीं। बस इन्ही तीन चीजों को विश्व को दिखाने लायक समझा था उन्होंने। सोच कर देखिये, कैसा दार्शनिक भाव है यह... इन तीन के अतिरिक्त सचमुच और कुछ महत्वपूर्ण नहीं होता संसार में। सब आते-जाते रहने वाली चीजें हैं।
कितना अद्भुत संयोग है कि अपने लगभग सत्तर वर्ष के गायन कैरियर में लगभग 36भाषाओं में हर रस/भाव के 50 हजार से भीअधिक गीत गाने वाली लता जी ने अपना पहले और अंतिम हिन्दी फिल्मी गीत के रूप में भगवान भजन ही गाया है। 'ज्योति कलश छलके' से 'दाता सुन ले' तक कि यात्रा का सौंदर्य यही है कि लताजी न कभी अपने कर्तव्य से डिगीं न अपने धर्म से! इस महान यात्रा के पूर्ण होने पर हमारा रोम रोम आपको प्रणाम करता है लता जी।

27/06/2021
'नासै रोग हरै सब पीरा।जपत निरंतर हनुमत बीरा।हनुमान जयंती के पावन पर्व पर समस्त विद्यार्थियों अभिभावकों व अध्यापिकाओ को न...
27/04/2021

'नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा।

हनुमान जयंती के पावन पर्व पर समस्त विद्यार्थियों अभिभावकों व अध्यापिकाओ को न्यू पब्लिक मौन्टेसरी स्कूल की तरफ से हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
इस मुश्किल घड़ी में सबके उत्तम स्वास्थ्य व ख़ुशहाली की प्रार्थना करते है । 🙏🙏

जय सिया राम 🙏श्रीराम नवमी के पावन पर्व के अवसर पर आप सभी को  न्यू पब्लिक मौन्टेसरी स्कूल की तरफ से हार्दिक शुभकामनाएँ। म...
21/04/2021

जय सिया राम 🙏

श्रीराम नवमी के पावन पर्व के अवसर पर आप सभी को न्यू पब्लिक मौन्टेसरी स्कूल की तरफ से हार्दिक शुभकामनाएँ। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम हमारे लिए धैर्य, संयम, शौर्य एवं मर्यादाओं के पालन के प्रतीक हैं। रामनवमी का पर्व सभी देशवासियों के लिए मंगलकारी हो, यही प्रभु से कामना है।

जय सिया राम 🙏

आर्य समाज के भामाशाह दानवीर पद्म भूषण से सम्मानित महाशय धर्मपाल जी का आज दुखद निधन हो गया। ईश्वर उनकी आत्मा को शान्ति प्...
03/12/2020

आर्य समाज के भामाशाह दानवीर पद्म भूषण से सम्मानित महाशय धर्मपाल जी का आज दुखद निधन हो गया। ईश्वर उनकी आत्मा को शान्ति प्रदान करे और पूरे आर्य जगत को इस दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करे। न्यू पब्लिक मोन्टेसरी स्कूल की तरफ से कोटि कोटि नमन भावपूर्ण श्रद्धांजलि 🙏

न्यू पब्लिक मोन्टेसरी स्कूल की तरफ से आप सभी को आस्था व सूर्य उपासना के महापर्व छठ पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं !
20/11/2020

न्यू पब्लिक मोन्टेसरी स्कूल की तरफ से आप सभी को आस्था व सूर्य उपासना के महापर्व छठ पूजा की हार्दिक शुभकामनाएं !

  Wishes To All Of You A Very Happy  May God Fulfill All Your Wishes In Wealth, Health & Happiness In Your Life
14/11/2020

Wishes To All Of You A Very Happy
May God Fulfill All Your Wishes In Wealth, Health & Happiness In Your Life

500 साल व 7  पीढियों के संघर्ष के बाद अयोध्या श्री राम नगरी में बन रहे भव्य श्री राम मन्दिर के भूमि पूजन पर आप सभी को न्...
04/08/2020

500 साल व 7 पीढियों के संघर्ष के बाद अयोध्या श्री राम नगरी में बन रहे भव्य श्री राम मन्दिर के भूमि पूजन पर आप सभी को न्यू पब्लिक मोन्टेसरी स्कूल की तरफ से हार्दिक बधाई 🙏🙏🙏

•*• भारत का रेडियो एक्टिविटी मैप उठा लें, हैरान हो जायेंगे ! भारत सरकार के न्युक्लियर रिएक्टर के अलावा सभी ज्योतिर्लिंगो...
21/07/2020

•*• भारत का रेडियो एक्टिविटी मैप उठा लें, हैरान हो जायेंगे ! भारत सरकार के न्युक्लियर रिएक्टर के अलावा सभी ज्योतिर्लिंगों के स्थानों पर सबसे ज्यादा रेडिएशन पाया जाता है।
•*• शिवलिंग और कुछ नहीं बल्कि न्युक्लियर रिएक्टर्स ही तो हैं, तभी तो उन पर जल चढ़ाया जाता है, ताकि वो शांत रहें।
•*• महादेव के सभी प्रिय पदार्थ जैसे कि बिल्व पत्र, आकमद, धतूरा, गुड़हल आदि सभी न्युक्लिअर एनर्जी सोखने वाले हैं।
•*•क्यूंकि शिवलिंग पर चढ़ा पानी भी रिएक्टिव हो जाता है इसीलिए तो जल निकासी नलिका को लांघा नहीं जाता।
•*• भाभा एटॉमिक रिएक्टर का डिज़ाइन भी शिवलिंग की तरह ही है।
•*• शिवलिंग पर चढ़ाया हुआ जल नदी के बहते हुए जल के साथ मिलकर औषधि का रूप ले लेता है।
•*• तभी तो हमारे पूर्वज हम लोगों से कहते थे कि महादेव शिवशंकर अगर नाराज हो जाएंगे तो प्रलय आ जाएगी।
•*• ध्यान दें कि हमारी परम्पराओं के पीछे कितना गहन विज्ञान छिपा हुआ है।
•*• जिस संस्कृति की कोख से हमने जन्म लिया है, वो तो चिर सनातन है। विज्ञान को परम्पराओं का जामा इसलिए पहनाया गया है ताकि वो प्रचलन बन जाए और हम भारतवासी सदा वैज्ञानिक जीवन जीते रहें।..
•*• आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि भारत में ऐसे महत्वपूर्ण शिव मंदिर हैं जो केदारनाथ से लेकर रामेश्वरम तक एक ही सीधी रेखा में बनाये गये हैं। आश्चर्य है कि हमारे पूर्वजों के पास ऐसा कैसा विज्ञान और तकनीक था जिसे हम आज तक समझ ही नहीं पाये? उत्तराखंड का केदारनाथ, तेलंगाना का कालेश्वरम, आंध्रप्रदेश का कालहस्ती, तमिलनाडु का एकंबरेश्वर, चिदंबरम और अंततः रामेश्वरम मंदिरों को 79°E 41’54” Longitude की भौगोलिक सीधी रेखा में बनाया गया है।
•*•यह सारे मंदिर प्रकृति के 5 तत्वों में लिंग की अभिव्यक्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिसे हम आम भाषा में पंचभूत कहते हैं। पंचभूत यानी पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और अंतरिक्ष। इन्हीं पांच तत्वों के आधार पर इन पांच शिवलिंगों को प्रतिष्टापित किया गया है। जल का प्रतिनिधित्व तिरुवनैकवल मंदिर में है, आग का प्रतिनिधित्व तिरुवन्नमलई में है, हवा का प्रतिनिधित्व कालाहस्ती में है, पृथ्वी का प्रतिनिधित्व कांचीपुरम् में है और अतं में अंतरिक्ष या आकाश का प्रतिनिधित्व चिदंबरम मंदिर में है! वास्तु-विज्ञान-वेद का अद्भुत समागम को दर्शाते हैं ये पांच मंदिर।
•*• भौगोलिक रूप से भी इन मंदिरों में विशेषता पायी जाती है। इन पांच मंदिरों को योग विज्ञान के अनुसार बनाया गया था, और एक दूसरे के साथ एक निश्चित भौगोलिक संरेखण में रखा गया है। इस के पीछे निश्चित ही कोई विज्ञान होगा जो मनुष्य के शरीर पर प्रभाव करता होगा।
•*•इन मंदिरों का करीब पाँच हज़ार वर्ष पूर्व निर्माण किया गया था जब उन स्थानों के अक्षांश और देशांतर को मापने के लिए कोई उपग्रह तकनीक उपलब्ध ही नहीं थी। तो फिर कैसे इतने सटीक रूप से पांच मंदिरों को प्रतिष्टापित किया गया था? उत्तर भगवान ही जानें।
•*• केदारनाथ और रामेश्वरम के बीच 2383 किमी की दूरी है। लेकिन ये सारे मंदिर लगभग एक ही समानांतर रेखा में पड़ते हैं।आखिर हज़ारों वर्ष पूर्व किस तकनीक का उपयोग कर इन मंदिरों को समानांतर रेखा में बनाया गया है, यह आज तक रहस्य ही है। श्रीकालहस्ती मंदिर में टिमटिमाते दीपक से पता चलता है कि वह वायु लिंग है।तिरुवनिक्का मंदिर के अंदरूनी पठार में जल वसंत से पता चलता है कि यह जल लिंग है। अन्नामलाई पहाड़ी पर विशाल दीपक से पता चलता है कि वह अग्नि लिंग है। कंचिपुरम् के रेत के स्वयंभू लिंग से पता चलता है कि वह पृथ्वी लिंग है और चिदंबरम की निराकार अवस्था से भगवान की निराकारता यानी आकाश तत्व का पता लगता है।
•*•अब यह आश्चर्य की बात नहीं तो और क्या है कि ब्रह्मांड के पांच तत्वों का प्रतिनिधित्व करने वाले पांच लिंगों को एक समान रेखा में सदियों पूर्व ही प्रतिष्टापित किया गया है। हमें हमारे पूर्वजों के ज्ञान और बुद्दिमत्ता पर गर्व होना चाहिए कि उनके पास ऐसी विज्ञान और तकनीकी थी जिसे आधुनिक विज्ञान भी नहीं भेद पाया है। माना जाता है कि केवल यह पांच मंदिर ही नहीं अपितु इसी रेखा में अनेक मंदिर होंगे जो केदारनाथ से रामेश्वरम तक सीधी रेखा में पड़ते हैं। इस रेखा को “शिव शक्ति अक्श रेखा” भी कहा जाता है। संभवतया यह सारे मंदिर कैलाश को ध्यान में रखते हुए बनाये गये हों जो 81.3119° E में पड़ता है!? उत्तर शिवजी ही जाने। ...
•*• कमाल की बात है "महाकाल" से शिव ज्योतिर्लिंगों के बीच कैसा सम्बन्ध है......??
•*• उज्जैन से शेष ज्योतिर्लिंगों की दूरी भी है रोचक-
उज्जैन से सोमनाथ- 777 किमी
उज्जैन से ओंकारेश्वर- 111 किमी
उज्जैन से भीमाशंकर- 666 किमी
उज्जैन से काशी विश्वनाथ- 999 किमी
उज्जैन से मल्लिकार्जुन- 999 किमी
उज्जैन से केदारनाथ- 888 किमी
उज्जैन से त्रयंबकेश्वर- 555 किमी
उज्जैन से बैजनाथ- 999 किमी
उज्जैन से रामेश्वरम्- 1999 किमी
उज्जैन से घृष्णेश्वर - 555 किमी
हिन्दू धर्म में कुछ भी बिना कारण के नहीं होता था ।
उज्जैन पृथ्वी का केंद्र माना जाता है, जो सनातन धर्म में हजारों सालों से मानते आ रहे हैं। इसलिए उज्जैन में सूर्य की गणना और ज्योतिष गणना के लिए मानव निर्मित यंत्र भी बनाये गये हैं करीब 2050 वर्ष पहले ।
•*•और जब करीब 100 साल पहले पृथ्वी पर काल्पनिक रेखा (कर्क) अंग्रेज वैज्ञानिक द्वारा बनायी गयी तो उनका मध्य भाग उज्जैन ही निकला। आज भी वैज्ञानिक उज्जैन ही आते हैं सूर्य और अन्तरिक्ष की जानकारी के लिये।
जय श्री महाँकाल राजा की।
-साभार प्रमोद शुक्ला

इंसानियत के दामन पर इससे बड़ा दाग़ नहीं हो सकता... केरल में स्थानीय लोगों नें  "गर्भवती हथिनी" के भोजन में मिलाया विस्फो...
03/06/2020

इंसानियत के दामन पर इससे बड़ा दाग़ नहीं हो सकता... केरल में स्थानीय लोगों नें "गर्भवती हथिनी" के भोजन में मिलाया विस्फोटक। मासूम जानवर की मौत। एक बार फिर हुई मानवता शर्मसार..

जो प्रकृति से खेलता है एक दिन प्रकृति उससे खेलती है।

भारत के लोकप्रिय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी जी की माताजी श्रीमती हीराबेन जी को उनके 100 वें जन्मदिवस पर न...
24/05/2020

भारत के लोकप्रिय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी जी की माताजी श्रीमती हीराबेन जी को उनके 100 वें जन्मदिवस पर न्यू पब्लिक मौन्टेसरी स्कूल की तरफ से हार्दिक शुभकामनाएं । भगवान उन्हें स्वस्थ जीवन प्रदान करे 🙏



‪Congratulations & warm wishes to our MP and Health Minister of India RespectedDr. Harsh Vardhan ji for being taking cha...
20/05/2020

‪Congratulations & warm wishes to our MP and Health Minister of India Respected
Dr. Harsh Vardhan ji for being taking charge as Chairman of the (WHO) Executive Board.‬ 🇮🇳

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