सांगोपांगवेद विद्यापीठ "आर्ष गुरुकुल" टटेसर-जौन्ती , दिल्ली 110081

सांगोपांगवेद विद्यापीठ  "आर्ष गुरुकुल"    टटेसर-जौन्ती ,  दिल्ली 110081

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राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में ४ वेदों के सस्वर अध्ययन की प्रणाली का एक मात्र केंद्र।

20/03/2025

आपके राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में चारों वेदों के सस्वर शिक्षण का एकमात्र संस्थान सांगोपांगवेद विद्यापीठ आर्ष गुरुकुल टटेसर रविवार 6 अप्रैल को नवीन छात्रों के लिए (कक्षा 6 में) प्रवेश परीक्षा का आयोजन कर रहा है अतः इच्छुक अभिभावक निम्न लिंक से रजिस्ट्रेशन पंजीकरण कर लेवें।
धन्यवाद साहित॥

https://docs.google.com/forms/d/1zN0HHcoUOjZJgJZHXrTem30O9yaRKcDCcZ5ls_XfBwY/viewform?pli=1&chromeless=1&edit_requested=true

Photos from सांगोपांगवेद विद्यापीठ  "आर्ष गुरुकुल"    टटेसर-जौन्ती ,  दिल्ली 110081's post 19/08/2024

आपके प्रिय सांगोपांगवेद विद्यापीठ आर्ष गुरुकुल टटेसर-जौन्ती, दिल्ली में श्रावणी उपाकर्म महोत्सव बड़े ही उत्साह पूर्वक सभी छात्रों, अध्यापकों एवं गुरुकुल निवासियों द्वारा मनाया गया । इस अवसर पर स्वाध्याय पर विशेष चर्चा की गई।

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हे शिष्य!तू आज से ब्रह्मचारी है ।।१।।
नित्य सन्ध्योपासन भोजन
के पूर्व शुद्ध जल का आचमन किया कर ।।२।।
दुष्ट कर्मों कोछोड़ धर्म किया कर ।। ३ ।।
दिन में शयन कभी मत कर ।।४।।
आचार्य के आधीन रहके नित्य साङ्गोपाङ्ग वेद पढ़ने में पुरुषार्थ किया कर ।।५।।
एक-एक सङ्गोपाङ्ग वेद के लिये बारह-बारह वर्ष पर्यन्त ब्रह्मचर्य अर्थात्48 वर्ष तक वा जब तक सांगोपाङ्ग चारों ओर वेद संपूर्ण होवेन, तब तक
अखण्डित ब्रह्मचर्य कर ।। ६ ।।
आचार्य के आधीन धर्माचरण में रहा कर ।
परन्तु यदि आचार्य अधर्मचरण वा अधर्म करने का उपदेश करे,उस को तू कभी मत मान, और उस का आचरण मत कर ।।७।।
क्रोध और मिथ्याभाषण करना छोड़ दे ।।८।।
आठ * प्रकार के मैथुन को छोड़ देना ।।९।।
भूमि में शयन करना, पलङ्ग आदि पर कभी न सोना ।।१०।।
कौशीलव अर्थात् गाना, बजाना तथा नृत्य आदि निन्दित कर्म, गन्ध और अञ्जन का सेवन मत कर ।।११।।
अति स्नान, अति भोजन, अधिक निद्रा, अधिक जागरण, निन्दा, लोभ, मोह, भय, शोक का ग्रहण कभी मत कर ।।१२।।
रात्रि के चौथे पहर में जाग, आवश्यक शौचादि, दन्तधावन, स्नान, सन्ध्योपासन, ईश्वर की स्तुति प्रार्थना और उपासना, योगाभ्यास का आचरण नित्य किया कर ।।१३।।
क्षौर मत करा ।।१४।।
मांस, रूखा शुष्क अन्न मत खावे और मद्यादि मत पीवे ।।१५।।
बैल, घोड़ा, हाथी, ऊंट आदि की सवारी मत कर ।। १६ ।।
ग्राम में निवास,जूता और छत्र का धारण मत कर ।।१७।।
लघुशङ्का के विना उपस्थ इन्द्रिय के स्पर्श से वीर्यस्खलन कभी न करके, वीर्य को शरीर में रखके निरन्तर ऊर्ध्वरेता अर्थात् नीचे वीर्य को मत गिरने दे, इस प्रकार यत्न से वर्ता कर ।।१८।।
तैलादि से अङ्गमर्दन, उबटना, अतिखट्टा इमली आदि, अतितीखा लालमिर्ची आदि, कसेला हरड़ें आदि, क्षार अधिक लवण आदि और रेचक जमालगोटा आदि द्रव्यों का सेवन मत कर ।।१९।। नित्य युक्ति से आहार-विहार करके विद्या ग्रहण में यत्नशील हो ।।२०।।
सुशील, थोड़ा बोलनेवाला, सभा में बैठनेयोग्य गुण ग्रहण कर ।।२१।।
मेखला और दण्ड का धारण, भिक्षाचरण, अग्निहोत्र, स्नान, सन्ध्योपासन, आचार्य का प्रियाचरण, प्रातः सायं आचार्य को नमस्कार करना ये तेरे नित्य करने के कर्म, और जो निषेध किये वे नित्य न करने के हैं ।॥ २२।।

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मनुष्य (यत्र) जिसमें (ब्रह्म च) शब्दब्रह्म वेद और परब्रह्म को प्राप्त होता है, (वाग्विषयः) और वे जो वाणी का विषय है, अर्थात (वर्णज्ञानम्) वर्णों का यथार्थ विज्ञान है, अन्य जान सार, (तदर्थम्) इस इष्ट बुद्धि अर्थात वर्णों का यथार्थ अभीष्ट ज्ञान एवं स्वल्प, प्रयास से मह्लाभ कोप्राप्त होने के लिये अक्षरों का अभ्यास उच्चारण की रीति प्रसिद्ध की जाती है। सो यह अक्षरों का अच्छे प्रकार कथन 'वाक्समाम्नाय' है। अर्थात् अपने शब्दरूपी पुष्पफलों से युक्त, चन्द्र और ताराओं के समान सुशोभित आकाश में स्थित (राशिः) शब्दों का समुदाय ब्रह्मराशि जानने योग्य है। और इसके यथार्थज्ञान में सम्पूर्ण वेदों का फल प्राप्त होता है। इसमें वर्णों के ठीक-ठीक उच्चारण से सुनने में प्रीति और भ्रम की निवृत्ति होती है। इसलिये यह वर्णोच्चारण-विद्या अवश्य जाननी चाहिये।

Photos from सांगोपांगवेद विद्यापीठ  "आर्ष गुरुकुल"    टटेसर-जौन्ती ,  दिल्ली 110081's post 24/06/2024

ऋतं तप: सत्यं तप:श्रुतं तप:श्रुतं तप:शान्तं तपो दमसतपश्शमस्तपो दानों तपो यज्ञस्तपो ब्रह्म भूर्भुवः सुवर्ब्रह्मैतदुपास्वैतत्तप:।।

हे शिष्य!तू यथार्थ का ग्रहण करना, सत्य को मानना,सत्य बोलना,वेदादिक सत्यशास्त्रों को सुनना, अपने मन को अधर्माचरण में न जाने देना,श्रोत्रादि इन्द्रियों को दुष्टाचार से रोकना श्रेष्ठाचार में लगाना, क्रोधादि में बुद्धिपूर्वक विचार करना , विद्या आदि शुभ गुणों का दान करना, अग्निहोत्रादि और विद्वानों का सड़्ग कर।
जितने भूमि, अन्तरिक्ष और सूर्यादि लोकों में पदार्थ हैं, उन का यथाशक्ति ज्ञान कर। और योगाभ्यास, प्राणायाम,एक ब्रह्म परमात्मा की उपासना कर।ये सब कर्म करना ही तप है।।

Photos from सांगोपांगवेद विद्यापीठ  "आर्ष गुरुकुल"    टटेसर-जौन्ती ,  दिल्ली 110081's post 24/06/2024

ब्रह्मचा॒रीष्णंश्च॑रति॒ रोद॑सी उ॒भे तस्मि॑न्दे॒वाः संम॑नसो भवन्ति।

Photos from सांगोपांगवेद विद्यापीठ  "आर्ष गुरुकुल"    टटेसर-जौन्ती ,  दिल्ली 110081's post 24/06/2024

आचा॒र्य उप॒नय॑मानो ब्रह्मचा॒रिणं॑ कृणुते॒ गर्भ॑म॒न्तः।।

आर्ष गुरुकुल में नवीन छात्रों का यज्ञोंपवीत एवं वेदारम्भ संस्कार संपन्न।

02/04/2024

वेद एवं वैदिक संस्कृति से जुड़ने का अनुपम अवसर . . .
सभी सज्जनों को सूचित किया जाता है कि सांगोपांग वेद विद्यापीठ, आर्ष गुरुकुल में शैक्षिक सत्र 2024-25 हेतु प्रवेश आरम्भ हो रहा है। इच्छुक अभिभावक शीघ्र सम्पर्क करें - https://forms.gle/urDGKsaFL7cgDvt8A

सम्पर्क - 9313956265, 9716670807, 9013368149
अधिक जानकारी के लिए - http://arshgurukul.in/
सांगोपांगवेद विद्यापीठ "आर्ष गुरुकुल" टटेसर-जौन्ती , दिल्ली 110081

02/04/2024
14/04/2023

वेद एवं वैदिक संस्कृति से जुड़ने का अनुपम अवसर
सभी सज्जनों को सूचित किया जाता है कि सांगोपांग वेद विद्यापीठ, आर्ष गुरुकुल में शैक्षिक सत्र 2023-24 हेतु प्रवेश आरम्भ हो रहा है। इच्छुक अभिभावक शीघ्र सम्पर्क करें
प्रवेश पंजीकरण - https://forms.gle/urDGKsaFL7cgDvt8A
आज ही पंजीकरण करें.
प्रवेश हेतु पञ्जीकरण 3-4-23 से 15-4-23 तक
प्रवेश परीक्षा - रविवार 16-4-2023
समय - प्रातः 9 बजे से सायं 4 बजे तक
परीक्षा परिणाम - 20-4-2023
सम्पर्क - 9313956265, 9716670807, 9013368149
अधिक जानकारी के लिए - http://arshgurukul.in/

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